अयोध्या केस: राम लला के वकील की दलील पर जज ने कहा आपका नजरिया दुनिया का नहीं, सबूत दिखाएं

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/08/16 03:58

नई दिल्ली :रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में रोजाना सुनवाई आज भी जारी है. 16 अगस्त को इस मसले पर रोजाना सुनवाई शुरू होनी थी, जिसके तहत हफ्ते में पांच दिन ये मामला सुना जा रहा है. सुप्रीम कोर्ट में सातवें दिन राम मंदिर-बाबरी मस्जिद टाइटिल सूट विवाद की सुनवाई शुरू हुई. राम लला विराजमान की तरफ से पेश वरिष्ठ वकील सीएस वैद्यनाथन ने विवादित 2.77 एकड़ भूमि पर अपना दावा किया. उन्होंने कहा कि क्योंकि मुस्लिम यहां नमाज पढ़ा करते थे इसका मतलब यह नहीं है कि यह जमीन उनकी है. मुस्लिम नमाज सड़कों पर भी पढ़ते हैं लेकिन इससे सड़क पर उनका हक नहीं हो जाता. राम लला विराजमान के वकील ने दलील दी कि विवादित स्थल पर कभी मस्जिद नहीं थी. इस स्थल का इस्तेमाल मस्जिद के रूप में किया गया होगा लेकिन शरिया कानून के मुताबिक यह मस्जिद नहीं थी. बता दें कि सुनवाई के दौरान वैद्यनाथन ने कहा कि ऐसी तस्वीरें हैं जो इस बात की पुष्टि करती हैं कि इस स्थल पर मस्जिद नहीं बल्कि मंदिर मौजूद था. मस्जिद की प्रतिमाएं एवं उसकी बनावट मंदिर होने का प्रमाण देती हैं.वैद्यनाथन ने अपनी दलील में कहा कि आम तौर पर किसी भी मस्जिद के खंभों में देवी-देविताओं के तस्वीरें नहीं पाई जाती हैं उन्होंने कहा कि नमाज अदा करने के लिए यहां तक कि सड़क का भी इस्तेमाल किया जा सकता है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि सड़क को मस्जिद मान लिया जाए. विवादित ढांचे को कभी भी सही अर्थों में मस्जिद नहीं माना गया. मस्जिद की तस्वीरें इस्लामी मान्यताओं एवं प्रथाओं के विपरीत हैं.
कोर्ट ने इस केस की सुनवाई रोजाना करने का फैसला क्यों किया
सुप्रीम कोर्ट गत छह अगस्त से अयोध्या टाइटिल सूट की रोजाना सुनवाई कर रहा है. इस मामले की सुनवाई प्रधान न्यायधीश की अगुवाई वाली संवैधानिक पीठ के समक्ष हो रही है. इस पीठ में सीजेआई के अलावा जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस अब्दुल नजीर शामिल हैं. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने इस विवाद का हल मध्यस्थता के जरिए करने के लिए एक पैनल का गठन किया था लेकिन यह मध्यस्थता पैनल हिंदू और मुस्लिम पक्षकारों के बीच सुलह नहीं करा सका जिसके बाद कोर्ट ने इस केस की सुनवाई रोजाना करने का फैसला किया

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