Ayodhya land dispute case: सुप्रीम कोर्ट सोमवार से एक घंटा अतिरिक्त सुनवाई करेगा

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/09/20 02:11

नई दिल्‍ली: Ayodhya land dispute case में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद मामले में सोमवार से रोजाना एक घंटा अतिरिक्त सुनवाई करने का निर्णय किया है.सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ आज 28वें दिन सुनवाई करेगी आज भी सुन्नी वक्फ बोर्ड की तरफ से वरिष्ठ वकील राजीव धवन जिरह जारी रखेंगे शीर्ष अदालत ने मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन को धमकाने के मामले में कल सुनवाई की थी सुनवाई के दौरान तमिलनाडु के प्रोफेसर शनमुगम ने अपनी गलती स्‍वीकार करते हुए माफी मांगी अदालत ने कहा कि 88 साल की उम्र में वह ऐसा क्यों कह रहे हैं। प्रोफेसर ने रामलला के खिलाफ पेश होने पर पत्र लिखकर शाप दिया था

एक घंटे का समय इसलिए बढ़ाया गया है ताकि अयोध्या मामले की सुनवाई 18 अक्टूबर तक पूरी की जा सकेबीते बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया कि अब मध्‍यस्‍थता की कोशिशों को लेकर सुनवाई नहीं रोकी जा सकती है.साथ ही अदालत ने पक्षकारों को मध्यस्थता से समझौता करने को लेकर भी छूट दी थी. शीर्ष अदालत ने कहा कि यह पहले की तरह ही गोपनीय रहेगी.

यह भी साफ कर दिया कि सुनवाई लगातार आगे भी जारी रहेगी.मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने गुरुवार को अपनी दलीलों के जरिए यह साबित करने की कोशिश की कि विवादित स्थल पर मस्जिद थी.उन्होंने निर्मोही अखाड़े के महंत रघुवर दास द्वारा 1885 में दाखिल वाद का हवाला देते हुए कहा था कि वह स्थल के बाहरी परिसर में राम चबूतरा मन्दिर का निर्माण कराने जा रहे थे. उन्‍होंने कहा कि फैजाबाद के उप न्यायाधीश ने याचिका को मंजूरी नहीं दी थी जिससे साफ होता है कि मुस्लिम भीतर नमाज पढ़ते थे और बाहरी परिसर में हिंदू पूजा कर रहे थे 

प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदसयीय संविधान पीठ ने इस विवाद के दोनों पक्षों के वकीलों से कहा कि उसने सामान्य प्रक्रिया के तहत शाम चार बजे की बजाये रोजाना पांच बजे उठने का निर्णय लिया है.बीते मंगलवार को सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष को सुप्रीम कोर्ट के खरे-खरे सवालों का सामना करना पड़ा था.कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष से खंबों पर मूर्तियों और कमल के चित्रों को लेकर कई सवाल पूछे.सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि क्या इस्लाम के मुताबिक मस्जिद में ऐसे चित्र हो सकते हैं. क्या किसी और मस्जिद में ऐसे चित्र होने के सबूत हैं. इसके अलावा कोर्ट ने राजीव धवन की ओर से 1991 की चार इतिहासकारों की रिपोर्ट को साक्ष्य में स्वीकारे जाने की दलील पर साफ कर दिया कि रिपोर्ट अदालत में साक्ष्य नहीं हो सकती वह महज राय है.

पीठ ने इस प्रकरण के हिन्दू और मुस्लिम पक्षकारों के वकीलों से कहा हम सोमवार (23 सितंबर) से एक घंटा अतिरिक्त बैठ सकते हैं शीर्ष अदालत ने इस प्रकरण की सुनवाई 18 अक्टूबर तक पूरी करने का निश्चय किया है ताकि उसे करीब चार सप्ताह का समय फैसला लिखने के लिये मिल जाये

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