धारा 370 को लेकर बाबा साहेब ने दी थी चेतावनी, लेकिन क्यों

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/08/06 12:19

नई दिल्‍ली :बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर थे संविधान निर्माता और भारत के पहले कानून मंत्री. वो अनुच्‍छेद 370 के धुर विरोधी थे उन्‍होंने इसका मसौदा तैयार करने से इनकार कर दिया था अम्बेडकर के मना करने के बाद शेख अब्‍दुल्‍ला नेहरू के पास पहुंचे और प्रधानमंत्री के निर्देश पर गोपालस्‍वामी अयंगर ने मसौदा तैयार किया था. हालांकि, जब पटेल ने कांग्रेस कार्यकारिणी समिति की बैठक में मसौदे को पेश किया तो सभी ने इसे भारत की संप्रभुता के लिए खतरा बताया यहां तक कि भारत के पहले शिक्षा मंत्री मौलाना आजाद ने भी इसका विरोध किया था बता दें कि सोमवार 5 अगस्त 2019 की तारीख में स्वतंत्र भारत का नया इतिहास लिख दिया गया 17 अक्टूबर 1949 को संविधान में राष्ट्रपति के आदेश से जोड़े गये अनुच्छेद 370 को उसी तरीके से खत्म कर दिया गया.

पत्र में क्या जवाब दिया बाबा साहेब ने :
अब्‍दुल्‍ला को अनुच्‍छेद 370 पर लिखे पत्र में आंबेडकर ने कहा था कि आप चाहते हैं कि भारत जम्‍मू-कश्‍मीर की सीमा की रक्षा करे, यहां सड़कों का निर्माण करे, अनाज सप्‍लाई करे। साथ ही कश्‍मीर को भारत के समान अधिकार मिले, लेकिन आप चाहते हैं कि कश्‍मीर में भारत को सीमित शक्तियां मिलें. ऐसा प्रस्‍ताव भारत के साथ विश्‍वासघात होगा, जिसे कानून मंत्री होने के नाते मैं कतई स्‍वीकार नहीं करूंगा

पटेल को क्यों नहीं नहीं किया था सूचित :
नेहरू ने पटेल को सूचित किए बिना ही शेख अब्‍दुल्‍ला के साथ अनुच्‍छेद 370 के मसौदे को अंतिम रूप दिया. संविधान सभा की चर्चा में मसौदे को पारित करवाने की जिम्‍मेदारी गापालस्‍वामी अयंगर को मिली लेकिन प्रस्‍ताव को सभा में मौजूद सदस्‍यों द्वारा फाड़ दिया गया उस समय प्रधानमंत्री नेहरू अमेरिका में थे सरदार और अब्‍दुल्‍ला के रिश्‍ते ठीक नहीं थे। ऐसे में अयंगर ने मदद के लिए वल्‍लभभाई पटेल को रुख किया उन्‍होंने पटेल से कहा कि यह मामला नेहरू के अहम से जुड़ा है, नेहरू ने शेख को उनके अनुसार ही फैसले लेने को कहा है लिहाजा, वल्‍लभभाई पटेल ने मसौदे को स्‍वीकृति दे दी 

 

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