कोरोना की तीसरी लहर का बच्चों पर प्रभाव को लेकर बोले एक्सपर्ट- महामारी के विज्ञान में सबूत नहीं; लेकिन तैयार रहें 

कोरोना की तीसरी लहर का बच्चों पर प्रभाव को लेकर बोले एक्सपर्ट- महामारी के विज्ञान में सबूत नहीं; लेकिन तैयार रहें 

कोरोना की तीसरी लहर का बच्चों पर प्रभाव को लेकर बोले एक्सपर्ट- महामारी के विज्ञान में सबूत नहीं; लेकिन तैयार रहें 

नागपुर: देश में अभी कोरोना की दूसरी लहर (Second Wave) ने कहर बरपा रखा है. इसी बीच इसकी तीसरी लहर के बारे में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने चेताया है. चेतवानी में बताया गया है कि कोरोना की तीसरी लहर (Third Wave) में बच्चें ज्यादा प्रभावित होंगे. ऐसे में यह अनुमान लगाया गया है कि कोविड-19 की तीसरी लहर बच्चों को ज्यादा प्रभावित करेगी, सरकारी स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी गई हैं. डॉक्टरों ने कहा कि प्रशासनिक स्तर (Administrative Level) पर तैयारी एक अच्छा विचार है लेकिन तीसरी लहर से घबराने या चिंतित होने की जरूरत नहीं है. इसका कोई प्रमाण नहीं है कि तीसरी लहर का बच्चों पर ज्यादा प्रभाव पड़ेगा.

महामारी के वैज्ञानिक दस्तावेज नहीं:
बाल रोग वैक्सीन के विशेषज्ञ डॉ. संजय मराठे (Pediatric vaccine specialist Dr. Sanjay Marathe) ने कहा कि इसका कोई दस्तावेज या महामारी विज्ञान के सबूत नहीं हैं कि संभावित तीसरी लहर में बच्चे बड़ी संख्या में प्रभावित होंगे. सब कुछ आंकड़ों पर आधारित है. डॉ. संजय मराठे ने कहा कि सरकार ने अनुमान के आधार पर तैयारी शुरू कर दी है जो अच्छी बात है। हमें भविष्य में बच्चों के लिए अस्पताल और ज्यादा बेडों और ICU की जरूरत है लेकिन, इससे माता-पिता को घबराने की जरूरत नहीं है.

भारत पर लागू नहीं होता USA का पैरामीटर:
अन्य देशों में अनुभव के बारे में पूछे जाने पर, डॉ मराठे ने कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) में उनकी दूसरी लहर में संक्रमित बच्चों की संख्या में वृद्धि हुई है. लेकिन, हम भारत में USA पैरामीटर (Parameter) लागू नहीं कर सकते. हमारी परिस्थितियां अलग हैं. इसके अलावा, अडल्टस के लिए एक टीका अब उपलब्ध है. इसलिए, आबादी का काफी प्रतिशत सुरक्षित है.

यह है गणितीय अनुमान: 
वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ संजय देशमुख (Senior Pediatrician Dr. Sanjay Deshmukh) ने भविष्यवाणी के पीछे का गणित समझाया. उन्होंने कहा कि पहली लहर में, कुल रोगियों में से 2 फीसदी से कम बच्चे थे. दूसरे में, यह प्रतिशत बढ़कर 11 फीसदी हो गया. इस प्रवृत्ति के बाद, संभावित तीसरी लहर में लगभग 28-30 फीसदी मरीज बच्चे होंगे. उन्होंने कहा कि गणितीय अनुमान जरूरी नहीं कि जमीनी स्तर पर काम करें.

10 साल तक के बच्चों में होती है नैचुरल इम्युनिटी:
डॉ. संजय ने कहा कि कई क्लीनिकल फैक्टर्स (Clinical Factories) हैं कि बच्चों में प्राकृतिक प्रतिरक्षा (Natural Immunity) होती है. भारतीय टीकाकरण (Indian Vaccination) कार्यक्रम और उसी आधार पर उनका वैक्सीनेशन होता है. लेकिन, चूंकि बच्चों के इलाज के लिए विशेष प्रोटोकॉल (Special Protocol) की आवश्यकता होती है, इसलिए हमने इसके लिए अपने स्वास्थ्य कर्मियों को प्रशिक्षण देना शुरू कर दिया है. तैयारियों में कुछ भी गलत नहीं है.

बच्चों का टीकारण ही अंतिम समाधान:
बाल रोग विशेषज्ञ और महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल (MMC) के उपाध्यक्ष डॉ विंकी रघवानी (Vinky Rghwani) ने कहा कि मीडिया रिपोर्टों ने इस खबर को खूब शेयर किया है और प्रशासन ने इस पर सक्रिय रूप से काम करना शुरू कर दिया है. उन्होंने कहा कि मैं सराहना करता हूं कि जिला प्रशासन ने इसे गंभीरता से लिया है और तैयारी शुरू कर दी है. लेकिन, सभी अनुमान पूर्वव्यापी अध्ययनों पर आधारित हैं. अंतिम समाधान बच्चों के लिए टीके लाना है और हम इसकी ओर बढ़ रहे हैं. तब तक, ध्यान रखें लेकिन चिंतित होने से बचें. उन्होंने कहा कि चीजों को इस तरह बनाया जा रहा है कि जैसे तीसरी लहर में सिर्फ बच्चे ही संक्रमित होंगे, जो गलत है.

बच्चों में कम होते हैं वायरल रिसेप्टर्स:
संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉ. नितिन शिंदे ने बताया कि 0 से 10 साल की उम्र के बच्चे प्राकृतिक रूप (Natural Form) से सुरक्षित होते हैं. उन्होंने कहा कि 10 साल से कम उम्र के बच्चों में वायरल रिसेप्टर्स (Viral Receptors) बहुत कम होते हैं. संक्रमित होने पर भी उनका वायरल लोड (Viral Load) शून्य होता है और वे तेजी से ठीक हो जाते हैं. उनके लिए गंभीर होना दुर्लभ है. इसके बाद 11 से 18 साल की उम्र के किशोर आते हैं, और हम अपनी क्षमता की दुरुस्त करके उसे मैनेज कर सकते हैं.

घबरायें नहीं किंतु सचेत रहें:
शिंदे ने कहा कि लोग तीसरी लहर से घबरायें नहीं किंतु सचेत भी रहें. उन्होनें बताया कि इस संभावित उछाल से पूरी तरह से बचने का अंतिम उपाय है 12 से 18 वर्ष के बच्चों का युद्ध स्तर पर वैक्सीनेशन होना. एपिडेमियोलॉजिस्ट डॉ. आनंद थट्टे (Epidemiologist Dr. Anand Thatte) ने कहा कि प्रशासन ने डॉक्टरों को ट्रेनिंग देने और पीडियाट्रिक बेड बढ़ाने का अच्छा कदम उठाया है. उन्होंने कहा कि वर्तमान दूसरी लहर अब घट रही है और एक महीने में नीचे आ जाएगी. उसके बाद भी हमें सतर्कता बरतनी चाहिए. नहीं तो वायरस एक बार फिर आबादी पर हमला कर देगा. यदि तब तक टीकाकरण में तेजी आती है, तो केवल 18 से कम उम्र के बच्चे ही अतिसंवेदनशील होगें.

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