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बिल्डर के दिवालिया घोषित होने बाद भी नहीं डूबेगी खरीदारों की रकम

बिल्डर के दिवालिया घोषित होने बाद भी नहीं डूबेगी खरीदारों की रकम

नई दिल्ली: देशभर में कई रियल एस्टेट कंपनियां ऐसी हैं जिन्होंने लोगों को मकान देने का वादा तो किया, लेकिन बीच राह में हाथ खड़े कर दिए. ऐसी कंपनियां खुद को नुकसान में बताकर दिवालिया घोषित हो गईं ऐसी स्थिति में कंपनियों और उनके मालिकों की संपत्तियां जब्त की जाती हैं। पहले जब्त की गई संपत्ति का पूरा पैसा बैंकों को मिलता था, लेकिन अब घर खरीदने वाले लोगों को भी इसमें से हिस्सा दिया जाएगा. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने रियल एस्टेट कंपनी आम्रपाली के ग्राहकों को बड़ी राहत दी थी. कोर्ट ने आम्रपाली मामले में फैसला सुनाया है कि अब एनबीसीसी घर बनाकर देगी 
किस कानून में किया गया संशोधन :
कोर्ट ने इन्सॉल्वेंसी एंड बैंक्रप्सी कोड (आइबीसी) में संशोधन वाले कानून को सही ठहराते हुए घर खरीदारों को वित्तीय कर्जदाता का मिला दर्जा बरकरार रखा है इसका मतलब यह है कि अगर कोई रियल एस्टेट कंपनी खुद को दिवालिया घोषित करती या होती है, तो उसकी संपत्ति की नीलामी से हासिल रकम में घर खरीददारों को भी हिस्सा मिलेगा.
आइबीसी में संशोधन कायम रहने से मकान ग्राहकों को भी कंपनी के फाइनेंशियल क्रेडिटर्स यानी वित्तीय कर्जदाता के बराबर का दर्जा बरकरार रहेगा यानी घर खरीदने वालों की अहमियत बिल्डर को लोन देने वाले बैंकों के बराबर होगी.इस कानून के खिलाफ 180 से ज्यादा रियल एस्टेट कंपनियों ने कोर्ट में याचिका दायर की थी  सुप्रीम कोर्ट ने याचिका शुक्रवार को खारिज कर दी स्पष्ट किया है कि जहां कहीं भी रियल एस्टेट रेगुलेटरी एक्ट यानी रेरा और आइबीसी की किन्हीं धाराओं में आपसी विवाद की स्थिति पैदा होगी, वहां आइबीसी के नियम मान्य होंगे
इस संशोधन से किस तरह फायदा मिलेगा 
अब मकान खरीदारों को प्रोजेक्ट पूरा न होने की स्थिति में राहत मिलेगी। ऐसे मामलों में उन्हें दिए गए बैंकों के बराबर अधिकार बरकरार रखा गया है। कोर्ट के फैसले के बाद घर खरीदार भी किसी बिल्डर के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया की मांग कर सकते हैं। न्यायमूर्ति आरएफ नरीमन ने कहा कि इस संशोधन से मकान ग्राहकों को एक और प्लेटफॉर्म मिला है, जहां वे रियल एस्टेट कंपनियों के खिलाफ अपनी मुश्किलें रख सकते हैं। हालांकि बेंच ने कहा कि केवल वास्तविक खरीदार ही बिल्डर के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया की मांग कर सकता है

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कोरोना पिछले 100 साल का सबसे बड़ा स्वास्थ्य एवं आर्थिक संकट- RBI गवर्नर

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नई दिल्ली: भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के बैंकिंग एंड इकोनॉमिक्स कॉन्क्लेव में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि कोरोना वायरस पिछले 100 साल का सबसे बड़ा स्वास्थ्य एवं आर्थिक संकट है. कोरोना महामारी को देखते हुए ये कार्यक्रम इस बार वर्चुअल आयोजित हो रहा है. कॉन्क्लेव की थीम 'बिजनेस और अर्थव्यवस्था पर कोरोना का प्रभाव' रखी गई है. दो दिवसीय कॉन्क्लेव शुक्रवार को शुरू हुआ था और आज इसे आरबीआई गवर्नर ने संबोधित किया. 

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पिछले 100 सालों में सबसे खराब स्वास्थ्य और आर्थिक संकट:  
इस कार्यक्रम में शक्तिकांत दास ने कहा कि कोरोना वायरस पिछले 100 सालों में सबसे खराब स्वास्थ्य और आर्थिक संकट है. कोरोना की वजह से उत्पादन और नौकरियों पर नेगेटिव प्रभाव पड़ा है. इसने दुनिया भर में मौजूदा व्यवस्था, श्रम और कैपिटल के मूवमेंट को कम किया है. ऐसे में मौजूदा संकट में अर्थव्यवस्था को सहयोग देने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक ने कई कदम उठाए हैं. 

RBI के लिए विकास पहली प्राथमिकता:
उन्होंने कहा कि RBI के लिए विकास पहली प्राथमिकता है. वित्तीय स्थिरता भी उतनी ही महत्त्वपूर्ण है. RBI ने उभरते जोखिमों की पहचान करने के लिए अपने ऑफसाइट निगरानी तंत्र को मजबूत किया है. रिजर्व बेंक गवर्नर ने कहा कि ''कोरोना वायरस महामारी से एनपीए बढ़ेगा और पूंजी का क्षरण होगा.''

प्रदेश की राजनीति में बढ़ती हलचल ! 26 कांग्रेस विधायकों ने भाजपा पर लगाया सरकार को अस्थिर करने का आरोप 

भारतीय अर्थव्यवस्था के वापस सामान्य स्थिति की ओर लौटने के संकेत:
आगे शक्तिकांत दास ने कहा कि लॉकडाउन के प्रतिबंध हटने के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था के वापस सामान्य स्थिति की ओर लौटने के संकेत दिखने शुरू हो गये हैं. उन्होंने कहा कि संकट के समय में भारतीय कंपनियों और उद्योगों ने बेहतर काम किया. दबाव में फंसी संपत्ति से निपटने के लिये वैधानिक अधिकार संपन्न ढांचागत प्रणाली की जरूरत है.


 

SDRI ने 5 करोड़ की कर चोरी पकड़वाई, नागौर जिले में परिवहन व खान विभाग के साथ की कार्रवाई

SDRI ने 5 करोड़ की कर चोरी पकड़वाई, नागौर जिले में परिवहन व खान विभाग के साथ की कार्रवाई

जयपुर: राज्य राजस्व आसूचना निदेशालय यानी SDRI ने नागौर जिले में खान और परिवहन विभाग के साथ मिलकर संयुक्त कार्रवाई की है. एसडीआरआई ने दो जगहों पर खानों में रॉयल्टी चोरी और मोटर वाहन कर चोरी के रूप में 5 करोड़ टैक्स चोरी का खुलासा किया है. कार्रवाई नागौर जिले के डीडवाना में भोजास और निम्बीजोधा गावों में की गई है. 

जोधपुर हाईकोर्ट में कोरोना से हड़कंप, जज का निजी सचिव मिला पॉजिटिव 

शिकायत के बाद एसडीआरआई की टीमों ने औचक जांच और कार्रवाई की: 
नागौर जिले में निम्बीजोधा और भोजास गांवों के पास मेसेनरी स्टोन की खानों की जांच में करोड़ों रुपए की खान की रॉयल्टी और परिवहन कर की कर चोरी उजागर हुई है. एसडीआरआई को जानकारी मिली थी कि निम्बीजोधा में खान विभाग द्वारा आवंटित मेसेनरी स्टोन की खानों में अवैध खनन किया जा रहा है. शिकायत के बाद एसडीआरआई की टीमों ने औचक जांच और कार्रवाई की. जांच में दो खानों के मध्य गेप एरिया में खनन कार्य होता पाया गया. गेप एरिया में 30 मीटर चौड़ाई, 77 मीटर लम्बाई और 12 मीटर गहराई में खनन कार्य किया हुआ मिला. इससे निकाले गए मेसेनरी स्टोन की मात्रा 72072 मीट्रिक टन पाई गई. खनिज की पेनेल्टी सहित रॉयल्टी लगभग 2 करोड़ मानी गई है. जुर्माना राशि 2 लाख सहित यह राशि 2 करोड़ 2 लाख बनती है, जिसे खनन पट्टाधारी से वसूल किए जाने का नोटिस खान विभाग द्वारा दिया जा रहा है. इसके अलावा नागौर के ही तांतवास भोजास गांव में 6 खानों के सैम्पल लिए गए. 

लगभग 1 लाख मीट्रिक टन खनिज प्राप्त हुआ:
खान पर पड़े खनिज का भौतिक सत्यापन किया गया जो कि लगभग 1 लाख मीट्रिक टन प्राप्त हुआ. खनन पट्टाधारी कम्पनी नोखा मिनरल्स एवं कंस्ट्रक्शन के रिकार्ड की जांच करने पर पता चला कि खानों से पूरा खनिज NKC प्रोजेक्ट प्रा. लि. जोधपुर को भेजा जा रहा है. जिसका इस्तेमाल NHAI के सड़क निर्माण कार्य में किया जा रहा है. नियमानुसार सड़क निर्माण कार्य में खनिज का इस्तेमाल शॉर्ट टर्म परमिट जारी होने पर ही किया जा सकता है. खनन कम्पनी सभी जारी किए गए खनिज के परमिट उपलब्ध नहीं करवा सकी. इस पर नोखा मिनरल्स एवं कंस्ट्रक्शन पर लगभग 2 करोड़ 80 लाख रुपए की रॉयल्टी चोरी का अनुमान खान विभाग और एसडीआरआई की टीम ने किया है.

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राशि के वसूली के लिए नोटिस देने की कार्रवाई शुरू कर दी:
खान विभाग नागौर की टीम ने इस राशि के वसूली के लिए नोटिस देने की कार्रवाई शुरू कर दी है. मौके पर ही नागौर डीटीओ की टीम ने एक जेसीबी और 2 डम्परों के दस्तावेज जांचे, जिनका टैक्स जमा नहीं हुआ था. इस पर इनका चालान बनाया गया. यह प्रकरण इस लिहाज से भी महत्वपूर्ण है कि एक ही व्यक्ति के विरू़द्ध एसडीआरआई की खनन, परिवहन, पंजीयन एवं मुद्रांक एवं वाणिज्यिक कर शाखा की टीमों ने एक साथ मिलकर कार्रवाई की है और एसडीआरआई का गठन भी इन्हीं विभागों की कर चोरी पकड़ने के उद्देश्य से किया गया है. 

...काशीराम चौधरी, फर्स्ट इंडिया न्यूज, जयपुर

10 हजार में 1 करोड़ के सोने की तस्करी ! दुबई से लेकर भारत तक जुड़े हैं तस्करों के तार

10 हजार में 1 करोड़ के सोने की तस्करी ! दुबई से लेकर भारत तक जुड़े हैं तस्करों के तार

जयपुर: जयपुर एयरपोर्ट पर तस्करी कर लाए गए 32 किलो सोने के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है. जानकारी के मुताबिक 1 करोड़ रुपए के सोने की डिलीवरी करने वाले एक व्यक्ति को 10 से 15 हजार रुपए दिए जाते हैं. यह खुलासा कस्टम अधिकारियों द्वारा तस्करों से की गई पूछताछ में हुआ है. 

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सभी को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा: 
जयपुर एयरपोर्ट पर शुक्रवार देर रात सोने की तस्करी करते हुए पकड़े गए सभी 14 आरोपियों को आज आर्थिक मामलों की विशेष अदालत में पेश किया गया. जहां सभी को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया. कस्टम विभाग के अधिकारियों ने सभी तस्करों से प्राथमिक पूछताछ कर कोर्ट के समक्ष प्राथमिक सबूत भी पेश किए. सेंट्रल बोर्ड ऑफ इन डायरेक्ट टैक्सेज एंड कस्टम्स (सीबीआईसी) मामले की सीधी निगरानी कर रहा है.

पूछताछ में महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई: 
कस्टम विभाग के सूत्रों के मुताबिक सभी 14 आरोपियों से पूछताछ में महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं. जिन 14 लोगों को तस्करी के मामले में गिरफतार किया गया है, वे इरादतन तस्कर नहीं हैं. सभी 14 लोग राजस्थान के अलग-अलग जिलों के रहने वाले हैं. सभी खाड़ी देशों में कामकाज के सिलसिले के आते-जाते रहते हैं. सभी को भारत में सोना लाने के लिए 10 से 15 हजार रुपए और टिकट का भुगतान करने का लालच दिया गया था. जिसके बाद सभी अपने साथ सोना ले आए. प्रत्येक व्यक्ति अपने साथ करीब 1 करोड़ रुपए कीमत का सोना लेकर आया था. पूछताछ में उन्होंने उन लोगों की भी पहचान बताई है, जिन्होंने उन्हें सऊदी से जयपुर ले जाने के लिए सोना दिया था. इसके साथ ही उन्होंने उस व्यक्ति के बारे में भी जानकारी दी जो उनसे जयपुर में सोने की डिलीवरी लेने वाला था. हालांकि कस्टम विभाग अब यह जांच कर रहा है कि तस्करों द्वारा दी गई जानकारी सही है या गलत.

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नेटवर्क जयपुर सहित देश के कई अन्य शहरों के बड़े व्यापारियों से जुड़ा: 
पूछताछ में यह भी खुलासा हुआ है कि तस्करी का सोना भेजने वाले लोगों का नेटवर्क जयपुर सहित देश के कई अन्य शहरों के बड़े व्यापारियों से जुड़ा हुआ है. विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि तस्करों ने जयपुर के भी कुछ बड़े सराफा कारोबारियों का नाम लिया है. जिसकी जांच की जा रही है. जयपुर से ही अन्य शहरों के लिए सोना सप्लाई किया जाना था. अब प्रकरण में आगामी जांच सीबीआईसी कर रहा है और इस मामले में जल्द ही अन्य खुलासे होने की उम्मीद है. 

...काशीराम चौधरी, फर्स्ट इंडिया न्यूज, जयपुर

VIDEO: पेट्रोल और डीजल के नाम पर लूट! 300 प्रतिशत टैक्स वसूल रही सरकार, आमजन अभी तक खेल से अनजान

जयपुर: क्या आपको पता है जिस पेट्रोल के लिए आप प्रति लीटर 87 रुपए 55 पैसे चुका रहे हो उसकी वास्तविक कीमत महज 26 रुपए एक पैसे और डीजल की 28 रुपए 11 पैसे है. जी हां केंद्र और राज्य सरकार मिलकर पेट्रोल, डीज़ल पर 300 फीसदी तक ज्यादा टैक्स वसूल रही हैं. पेट्रोल, डीज़ल की आसमान छूती कीमतों से त्रस्त प्रदेश की जनता को आज हम बताने जा रहे हैं पेट्रोल, डीज़ल पर टैक्स को अनसुलझा खेल, जिससे आमजन अभी तक अनजान थे. फर्स्ट इंडिया न्यूज़ की खास रिपोर्ट:

पेट्रोल
पेट्रोल बेस प्राइज़                26.01 रुपए
सेंट्रल एक्साइज़                  32.98 रुपए
स्टेट वैट                            22.41 रुपए
रोड सैस                              1.50 रुपए
 लाइसेंस फीस प्रति लीटर           19 पैसे
डीलर कमीशन पर वैट          1.27 रुपए
डीलर कमीशन                    3.19 रुपए
कुल                              87.55 रुपए

डीज़ल
डीज़ल बेस प्राइज़                  28.11 रुपए
सेंट्रल एक्साइज़                     31.83 रुपए
स्टेट वैट                              16.78 रुपए
रोड सैस                                1.75 रुपए
लाइसेंस फीस प्रति लीटर             16 पैसे
डीलर कमीशन पर वैट                62 पैसे
डीलर कमीशन                       2.05 रुपए
कुल                                    81.30 रुपए

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट:
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट के बाद भी देश और प्रदेश में पेट्रोल, डीज़ल के भाव कम होने का नाम ही नहीं ले रहे. पेट्रोल, डीज़ल की कीमतों में वृद्धि से रोटी, कपड़ा और मकान सबकुछ महंगा हो चुका है. अब सवाल उठता है कि क्या पेट्रोल, डीज़ल की वास्तविक कीमत वही हैं. जो हम जेब से चुका रहे हैं या फिर इनमें भी केंद्र और राज्य सरकार मिलकर कमाई का जरिया तय कर चुकी हैं. जी हां पेट्रोल, डीज़ल की वास्तविक कीमत हमारे द्वारा चुकाई जा रही कीमतों से तीन सौ प्रतिशत तक कम हैं. फिर क्या कारण है कि हमारी जेब से वास्तविक कीमतों से तीन गुना तक ज्यादा वसूला जा रहा है.

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पेट्रोल की मूल कीमत:
इस सवाल का जवाब केंद्र और राज्य सरकारों के उन टैक्स में छुपा है जिसकी आम जनता को जानकारी नहीं. दरअसल अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की भारतीय पॉकेट की कीमत 38 डॉलर प्रति बैरल तक है. इस कीमत से देश में पेट्रोल की मूल कीमत 26 रुपए एक पैसे है. इस पर केंद्र सरकार हमसे केंद्रीय उत्पाद शुल्क के तौर पर प्रति लीटर 32 रुपए 98 पैसे वसूल रही है और राज्य सरकार 22 रुपए 41 पैसे. इसके अलावा रोड सैस, लाइसेंस फीस, डीलर कमीशन पर वैट और डीलर का कमीशन भी इसमें जोड़ दिया जाए तो पेट्रोल पर हम मूल कीमत के बाद 61 रुपए 54 पैसे प्रति लीटर ज्यादा दे रहे हैं.

राज्य सरकार ने बढ़ाया दो बार वैट: 
इसी तरह डीज़ल की बेस प्राइस 28 रुपए 11 पैसे प्रति लीटर है जिस पर हमसे केंद्र और राज्य सरकार मिलकर 53 रुपए 19 पैस तक टैक्स वसूल रहे हैं. कोरोना संकट के दौर में राज्य सरकार ने पेट्रोल और डीज़ल पर दो बार वैट बढ़ाया है. प्रदेश में अब पेट्रोल पर 38 फीसदी और डीज़ल पर 30 फीसदी वैट है. अब बात रकें पड़ौसी राज्यों में पेट्रोल डीज़ल की तो हालत और खराब दिखाई देती है. हरियाणा, पंजाब, गुजरात और यूपी के मुकाबले राजस्थान में पेअ्रोल, डीज़ल पर टैक्स 10 रुपए तक ज्यादा है. इससे हमारे ट्रांसपोर्टर ही नहीं दूसरे राज्यों के ट्रांसपोर्टर भी डीज़ल राजस्थान की अपेक्षा पड़ौसी राज्यों से ले रहे हैं. इससे प्रदेश में पेट्रोलियम की बिक्री 50 फीसदी से ज्यादा गिरी है. उम्मीद की जानी चाहिए कि राज्य सरकार भी पड़ौसी राज्यों की तुलना में जल्द ही पेट्रोल, डीज़ल के दामों में प्रदेश की जनता को राहत देगी ताकि कोरोना संकट के दौर में आमजन को राहत मिल सके. 

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VIDEO: पर्यटन पर 'कोरोना का ग्रहण', राजधानी में सामान्य दिनों में 1 दिन में आने वाले पर्यटक पूरे प्रदेश में 1 महीने में दिखाई दिए

जयपुर: कोरोना के हमले ने देश और प्रदेश में पर्यटन ढांचे को झकझोर कर रख दिया है. जितने पर्यटक राजधानी जयपुर में सामान्य दिनों में 1 दिन में आया करते थे उतने पर्यटक पूरे प्रदेश में 1 महीने में दिखाई दिए हैं. राज्य सरकार ने रिवाइवल प्लान भी बनाया है और कोविड-19 रिलीफ पैकेज भी जारी करने की तैयारी कर ली है लेकिन सैलानियों में आज भी कोरोना कब है कम नहीं हुआ है. 

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जयपुर के स्मारक देश और दुनिया में प्रसिद्धि हासिल कर चुके:  
राजस्थान को पर्यटन का प्रदेश माना जाता है राजधानी जयपुर के स्मारक देश और दुनिया में इतनी प्रसिद्धि हासिल कर चुके है की गूगल पर भी एक क्लिक करो तो एक-एक स्मारक के लाखों पेज खुल जाते हैं. प्रदेश में पर्यटन ढांचा इतना मजबूत हुआ करता था जिस पर स्वाइन फ्लू, जीका, एंथ्रेक्स, सार्स और न जाने कितने वायरस आक्रमण कर चुके हैं लेकिन राजस्थान के पर्यटन ढांचे को टस से मस भी नहीं कर पाए. लेकिन इस बार देश और प्रदेश के पर्यटन पर जिस कोरोना नाम के वायरस ने हमला किया है उसके आगे  प्रदेश का पर्यटन ढांचा दरकता दिखाई दे रहा है.

अनलॉक वन में 1 जून को प्रदेश के पर्यटन स्थलों को शुरू:
कोरोना संकट के चलते प्रदेश में 18 मार्च को सभी पर्यटन स्थल जिनमें मॉन्यूमेंट, म्यूजियम, नेशनल पार्क, बायोलॉजिकल पार्क, सफारी सभी को बंद कर दिया गया था. यही नहीं टूरिज्म इंडस्ट्री से जुड़े तमाम स्टेक होल्डर जिनमें होटल, रिसॉर्ट, रेस्टोरेंट्स, हाथी गांव जैसे तमाम पर्यटन से जुड़े स्थलों को भी बंद कर दिया गया था. इससे पर्यटन उद्योग को अरबों रुपए का नुकसान उठाना पड़ा. आखिर अनलॉक वन में 1 जून को प्रदेश के पर्यटन स्थलों को शुरू कर दिया गया. इसके बाद 8 जून से तमाम होटल, रेस्टोरेंट और पर्यटन से जुड़े अन्य स्थल भी सैलानियों के लिए खोल दिए गए. लेकिन 1 जून से 30 जून तक के पहले 1 महीने में पर्यटन स्थलों पर माहौल निराशाजनक ही रहा. राजधानी में के कुल 8 स्मारक और संग्रहालयों पर 1 महीने में महज 5269 पर्यटक पहुंचे. जबकि राजधानी के बाहर के प्रदेश के मॉन्यूमेंट और म्यूजियम जिनकी संख्या 24 है उन पर महज 3537 पर्यटक ही 1 महीने में पहुंचे. इसका सीधा मतलब है प्रदेश में जून के महीने में पर्यटकों की संख्या महज 8806 रही जो राजस्थान जैसे पर्यटन के प्रदेश के लिए कतई उत्साहजनक नहीं है. एक महीने में 8806 पर्यटकों का आंकड़ा इसलिए भी निराशाजनक है क्योंकि आमतौर पर ऑफ सीजन में इतने पर्यटक महज एक दिन में राजधानी में दिखाई देते रहे हैं. लेकिन कोरोना के हमले के आगे पर्यटन पूरी तरह पस्त हो गया है. 

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सर्वाधिक पर्यटक विश्व विरासत में शुमार आमेर में पहुंचे:
राजधानी में 1 महीने में सर्वाधिक पर्यटक विश्व विरासत में शुमार आमेर में पहुंचे. आमेर में पर्यटकों की संख्या 1 महीने में 1585 रहीं जबकि नाहरगढ़ यह आंकड़ा 1326 के स्तर पर रहा. राजधानी के बाहर सर्वाधिक पर्यटक 901 अलवर में पहुंचे जबकि चित्तौड़ 500 और अजमेर में पर्यटकों की संख्या 369 रही. प्रदेश में पर्यटन उद्योग से प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से 10 लाख से ज्यादा लोग जुड़े हुए हैं जिनमें छोटे-छोटे वेंडर, हॉकर से लेकर गाइड, महावत, लोक कलाकार और बड़े स्तर पर होटल, रिसोर्ट संचालक तक शामिल हैं. कोरोना संक्रमण का इन सभी पर बुरा असर हुआ है अब मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के निर्देश के बाद प्रदेश के पर्यटन और देवस्थान मंत्री विश्वेंद्र सिंह और विभाग के प्रमुख सचिव आलोक गुप्ता सहित तमाम अधिकारी इस प्रयास में जुटे हुए हैं कि प्रदेश में सुरक्षित और स्वास्थ्य पर माहौल तैयार कर पर्यटन को वापस मुख्यधारा में लाया जाए. सभी का प्रयास है कि सितंबर में शुरू होने वाले पर्यटन सत्र से पहले प्रदेश में इस तरह का माहौल तैयार किया जाए जिससे घरेलू पर्यटक ज्यादा से ज्यादा संख्या में राजस्थान आएं. 
 

बढ़ने के बजाय घट रहीं फ्लाइट्स! जयपुर एयरपोर्ट पर फ्लाइट्स के संचालन में कमी

बढ़ने के बजाय घट रहीं फ्लाइट्स! जयपुर एयरपोर्ट पर फ्लाइट्स के संचालन में कमी

जयपुर: जयपुर एयरपोर्ट पर फ्लाइट्स के संचालन में लगातार कमी दिख रही है. फ्लाइट्स का संचालन प्रारंभ हुए 40 दिन पूरे हो चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद यात्रियों की संख्या में बढ़ोतरी नहीं दिख रही है. यात्री नहीं बढ़ने के कारण एयरलाइंस भी फ्लाइट नहीं बढ़ा रही हैं. बड़ी संख्या में फ्लाइट्स को रद्द किया जा रहा है. दरअसल जयपुर एयरपोर्ट पर 25 मई से फ्लाइट शुरू हुई थी. चार एयरलाइंस ने जयपुर एयरपोर्ट से 20 फ्लाइट संचालित करने का शेड्यूल दिया था.

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उम्मीद थी कि जल्द ही बढ़ेंगी फ्लाइट्स:
पहले दिन मात्र 8 फ्लाइट के साथ शुरुआत हुई थी. शुरुआती सप्ताह में फ्लाइट्स की संख्या 15 तक जा पहुंची थी. इससे उम्मीद थी कि जल्द ही फ्लाइट्स बढ़ेंगी और हवाई यात्रा अपनी पुरानी गति में लौट आएगी. लेकिन 40 दिन बीतने पर भी पहले सप्ताह जैसी ही स्थिति दिख रही है. इसके विपरीत पिछले 7 दिन में यात्रियों की संख्या में कमी देखी जा रही है. आपको बता दें कि जयपुर एयरपोर्ट से इंडिगो और स्पाइसजेट ने 9-9 फ्लाइट शुरू करने का शेड्यूल दिया है. जबकि एयर एशिया और एयर इंडिया ने 3-3 फ्लाइट संचालित करने का शेड्यूल दिया हुआ है.

स्पाइसजेट एयरलाइन सबसे ज्यादा रद्द:
इन दिनों स्पाइसजेट एयरलाइन सबसे ज्यादा फ्लाइट रद्द कर रही है. स्पाइसजेट की 9 में से रोज मात्र 3 से 4 फ्लाइट ही चल रही हैं. यानी स्पाइसजेट औसतन 5 से 6 फ्लाइट रद्द कर रही है. एयर इंडिया रोजाना 1 या 2 फ्लाइट, एयर एशिया 1 फ्लाइट और इंडिगो भी 1 से 2 फ्लाइट रद्द कर रही है. इसके कारण इन फ्लाइट्स में टिकट बुकिंग करने वाले यात्रियों को भी परेशानी झेलनी पड़ रही है. आपको बता दें कि 22 जून को सर्वाधिक 17 फ्लाइट संचालित हुई थी. इससे पहले 19 जून को 16 फ्लाइट का संचालन हुआ था. जबकि लॉकडाउन से पहले जयपुर एयरपोर्ट से रोज औसतन 63 फ्लाइट संचालित हो रही थीं.

मानसून में जन्नत से कम नहीं है ये स्थान, लीजिए यात्रा का आनंद

पिछले 7 दिन का यह रहा फ्लाइट संचालन का ट्रेंड
-28 जून को 15 फ्लाइट संचालित, 7 फ्लाइट रद्द
-29 जून को 15 फ्लाइट संचालित, 9 फ्लाइट रद्द
-30 जून को 15 फ्लाइट संचालित, 9 फ्लाइट रद्द
-1 जुलाई को 14 फ्लाइट संचालित, 8 फ्लाइट रद्द
-2 जुलाई को 12 फ्लाइट संचालित, 12 फ्लाइट रद्द
-3 जुलाई को 10 फ्लाइट संचालित, 12 हुई रद्द
-4 जुलाई को आज 14 फ्लाइट संचालित, 10 हैं आज रद्द

...फर्स्ट इंडिया के लिए काशीराम चौधरी की रिपोर्ट

VIDEO: हाउसिंग बोर्ड ने धमाकेदार परफॉर्मेंस से अपना ही विश्व रिकॉर्ड तोड़ा, 12 दिन में ही 1213 आवासों की नीलामी

जयपुर: कोरोना काल जैसे बड़े संकट में भी हाउसिंग बोर्ड ने अपनी धमाकेदार परफॉर्मेंस से अपना ही विश्व रिकॉर्ड तोड़ दिया है. बोर्ड ने किश्तों में आवास योजना से नया कीर्तिमान बनाते हुए महज 12 दिन में ही 1213 आवासों की नीलामी की है. 

सहकारी बैंकों के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के परिवीक्षा वेतन में की वृद्धि

आवासों के ई ऑक्शन का अपना ही विश्व रिकॉर्ड तोड़ दिया: 
रियल एस्टेट मार्केट के किंग हाउसिंग बोर्ड ने अपनी धमाकेदार परफॉर्मेंस से कम अवधि में आवासों के ई ऑक्शन का अपना ही विश्व रिकॉर्ड तोड़ दिया है. बोर्ड ने सितंबर महीने में चलाई ई ऑक्शन योजना से महज 35 दिनों में 1010 मकानों की नीलामी कर विश्व रिकॉर्ड स्थापित किया था. वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स ने बोर्ड के इस रिकॉर्ड को मान्यता दी थी. 

यह योजना बोर्ड के इतिहास की सबसे सफल:
अब बोर्ड ने अपने ही उस विश्व रिकॉर्ड को तोड़ दिया है और यह कमाल हुआ है बोर्ड कमिश्नर पवन अरोड़ा की सटीक प्लानिंग के बाद लांच हुई किश्तों में आवास योजना से. लांच होने से पहले ही प्रदेश भर में चर्चित हो चुकी यह योजना बोर्ड के इतिहास की सबसे सफल और लोकप्रिय योजना मानी जा रही है. मकान की कीमत का 10 फीसदी दीजिए और गृह प्रवेश कीजिए के ध्येय वाक्य से लांच हुई इस योजना से बोर्ड ने सिर्फ 12 दिन में ही 1213 आवासों की नीलामी कर अपना ही बनाया हुआ विश्व रिकॉर्ड तोड़ दिया है. 1213 आवासों की नीलामी से हाउसिंग बोर्ड ने 12 दिन में ही 178 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त किया है. 

बोर्ड का यह प्रदर्शन किसी जादू से कम नहीं:
कोरोना काल मे जब हर तरह के बाजार की हालत खराब है तब बोर्ड का यह प्रदर्शन किसी जादू से कम नहीं है. इस योजना के अभी तक के 4 बुधवारों में बोर्ड को बहुत भारी रेस्पॉन्स मिला है. कमिश्नर पवन अरोड़ा की तरफ से ग्राहकों को सहूलियत देने के लिए प्रयासों से भी इस योजना में लोगों का रुझान बढ़ा है. कमिश्नर पवन अरोड़ा ने इस बड़ी कामयाबी का श्रेय टीम वर्क को देते हुए कहा है कि ग्राहक बोर्ड के लिए भगवान की तरह है. आने वाले दिनों में भी मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और UDH मंत्री शांति धारीवाल के हर किसी को आवास उपलब्ध कराने के मिशन को सफल बनाने के लिए बोर्ड ऐसे ही काम करता रहेगा. 

योजना के माध्यम से आवास लेने की लोगों में होड़: 
किश्तों में आवास योजना की बात करें तो ऐसा लगता है कि प्रदेशभर में इस योजना के माध्यम से आवास लेने की लोगों में होड़ लग गई है. आकर्षक लोकेशनों पर सभी मूलभूत सुविधाओं के साथ 50 फीसदी तक की छूट पर 13 वर्ष की आसान मासिक किश्तों में आवास मिलना किसी के लिए भी एक सपने से कम नहीं है. 

किश्तों में आवास योजना से अब तक ऐसे हुई नीलामियां: 
- पहले बुधवार को 381 सम्पत्तियां बिकीं, जिससे 58 करोड 22 लाख रूपये का राजस्व प्राप्त हुआ. 
- दूसरे बुधवार को 320 सम्पत्तियां बिकीं, जिससे 45 करोड़ रूपये का राजस्व प्राप्त हुआ.
- तीसरे बुधवार को 257 सम्पत्तियां बिकी, जिससे मंडल को 34 करोड़ रूपये का राजस्व मिला.
- इस बुधवार को 255 सम्पत्तियां बिकीं और मंडल ने 41 करोड़ रूपये का राजस्व प्राप्त किया. 

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हाउसिंग बोर्ड की किश्तों में आवास योजना में सिर्फ जयपुर या अन्य बड़े शहरों में ही नहीं बल्कि छोटे कस्बों में भी अच्छी संख्या में मकानों की नीलामी हो रही है. कोरोना काल मे भी आवासों की नीलामी से अपना ही विश्व रिकॉर्ड तोड़कर नया विश्व रिकॉर्ड स्थापित कर बोर्ड ने रियल एस्टेट जगत में अपनी बादशाहत लंबे समय तक कायम रखने के संकेत दे दिए हैं.

...फर्स्ट इंडिया के लिए शिवेंद्र परमार की रिपोर्ट

Boycott China: चीन को एक और झटका, देश के हाइवे प्रोजेक्ट्स में चीनी कंपनियां होंगी बैन

Boycott China: चीन को एक और झटका, देश के हाइवे प्रोजेक्ट्स में चीनी कंपनियां होंगी बैन

नई दिल्ली: भारत-चीन के बीच चल रहे सीमा विवाद के चलते भारत लगातार आर्थिक मोर्चे पर चीन को झटके दे रहा है. चीन की 59 एप्स पर प्रतिबंध लगाने के बाद आज केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी बड़ी जानकारी देते हुए बताया कि भारत सभी हाइवे प्रोजेक्ट्स में चीनी कंपनियों को बैन करने की तैयारी कर रहा है. चीनी कंपनियों को संयुक्त उद्यम पार्टनर (JV) के रूप में भी काम नहीं करने दिया जाएगा.

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जॉइंट वेंचर के रास्ते भी रोक दिया जाएगा: 
गडकरी ने कहा कि इतना ही नहीं अगर कोई चाइनीज कंपनी जॉइंट वेंचर के रास्ते भी राजमार्ग परियोजनाओं में एंट्री की कोशिश करेगी तो उसे भी रोक दिया जाएगा. इसके अलावा उन्होंने कहा कि सरकार यह भी सुनिश्चित करेगी कि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) के विभिन्न क्षेत्रों में चीनी निवेशकों से कोई रिश्ता न रखा जाए.

नियमों में ढील देने की नीति बनाई जाएगी:
उन्होंने कहा कि जल्द ही चीनी कंपनियों पर प्रतिबंध लगाने और भारतीय कंपनियों को राजमार्ग परियोजनाओं में भागीदारी के लिए उनकी पात्रता मानदंड का विस्तार करने के लिए नियमों में ढील देने की नीति बनाई जाएगी. गडकरी ने कहा कि वर्तमान में कुछ परियोजनाएँ जो बहुत पहले शुरू की गई थीं उनमें कुछ चीनी साझेदार शामिल थे उन पर यह लागू नहीं होगा, नया निर्णय वर्तमान और भविष्य की निविदाओं में लागू किया जाएगा. 

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चीन से हिंसक झड़प में देश के 20 वीर जवान शहीद हो गए थे:
गौरतलब है कि भारत-चीन नियंत्रण रेखा पर हुई हिंसक झड़प में हमारे देश के 20 वीर जवान शहीद हो गए थे, जिसके बाद से ही देश में चीन विरोधी माहौल चरम पर है. चीनी कंपनियों और चीनी माल के बहिष्कार तक की बात होने लगी है.


 

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