जयपुर Rajasthan: सीएम गहलोत का नागौर दौरा और सियासत ! जानिए क्या कहता है इतिहास

Rajasthan: सीएम गहलोत का नागौर दौरा और सियासत ! जानिए क्या कहता है इतिहास

जयपुर: नागौर का दौरा मतलब कांग्रेस की मजबूती. राजस्थान का नागौर किसान या जाट राजनीति का केंद्र कहा जाता है. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने नागौर का दौरा कर यहां की सियासी नब्ज को टटोला. सीएम गहलोत के दौरे का असर नागौर की 10 विधानसभा सीटों पर पड़ा है. कांग्रेस का नेतृत्व जानता है कि नागौर में मुकाबला केवल बीजेपी से नहीं बल्कि आरएलपी से भी है. नागौर की धरती से निकला संदेश बीकाना, शेखावाटी, ढूंढाड और मेरवाड़ा को प्रभावित करता है. पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की परफॉर्मेंस यहां अच्छी रही थी. हालांकि सीएम गहलोत के दौरे में सचिन पायलट कैंप के दो विधायकों का नहीं रहना गुटबाजी को भी प्रदर्शित करता है. 

कांग्रेस जब भी संक्रमण काल से गुजरी तब नागौर की धरती ने कांग्रेस को सहारा देने का काम किया आज भी पूरे देश में कांग्रेस ऐसे ही दौर से गुजर रही है. आज देश के मानचित्र पर केवल 2 राज्यों में कांग्रेस की अपने दम पर सरकार है, झारखंड और महाराष्ट्र में गठबंधन सरकार कांग्रेस शामिल है. सालों तक देश की सत्ता पर काबिज रही कांग्रेस के सामने आज राष्ट्रीय दल के तौर पर अस्तित्व बचाने की चुनौती है तब सालों पहले कांग्रेस के साथ ऐसा ही घटित हुआ था तब राजस्थान का नागौर मजबूती के साथ कांग्रेस के साथ खड़ा रहा. 

इंदिरा युग में जब आपातकाल ने देश को हिला दिया था. जेपी मूवमेंट की शुरुआत हो चुकी थी. बाबू जगजीवन राम और हेमवती नंदन बहुगुणा छोड़ चुके थे इंदिरा गांधी का साथ.1977 में आम चुनाव देश में हुये और कांग्रेस सत्ता से बाहर हो गई. पूरे उत्तर भारत में कांग्रेस को दो ही सीटें मिली. सबसे आश्चर्यजनक जीत रही राजस्थान की नागौर सीट से. यहां नाथूराम मिर्धा ने कांग्रेस की लाज बचाई. जबकि इन चुनावों में खुद इंदिरा गांधी चुनाव हार गई थी वो भी राजनारायण से. मिर्धा के अलावा मध्य प्रदेश की छिंदवाड़ा सीट से गार्गी शंकर मिश्र ही ऐसे थे जिन्होंने संपूर्ण उत्तर भारत में 240 सीटों पर कांग्रेस की साख बचाने का काम किया. नागौर को देश में जाना जाता था लेकिन नाथूराम मिर्धा की इस जीत ने नागौर को भारत के सियासी मानचित्र पर स्थान दिला दिया था. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत नागौर की धरा का महत्व बखूबी जानते हैं, कांग्रेस की मजबूती के लिए उनका हालिया नागौर दौरा अहम रहा. बीते विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को नागौर जिले में 10 विधानसभा में से 6 पर जीत मिली थी.

कांग्रेस के जनप्रतिनिधि:-
- नावां से महेंद्र चौधरी
 महेंद्र चौधरी अभी विधानसभा में उप मुख्य सचेतक है
- जायल से मंजू मेघवाल 
- परबतसर से रामनिवास गावड़िया
- लाडनू से मुकेश भाकर
- डीडवाना से चेतन डूडी 
- डेगाना से विजयपाल मिर्धा

कांग्रेस क नागौर के जनप्रतिनिधियों में मुकेश भाकर और रामनिवास गावड़िया को सचिन पायलट कैंप में माना जाता है यह दोनों विधायक कांग्रेस की अंदरूनी गुटबाजी के वक्त मानेसर बाड़े बंदी में शुमार रहे थे, उल्लेखनीय है कि दोनों मुख्यमंत्री के हालिया दौरे में भी नहीं दिखे उधर नागौर में मुख्यमंत्री गहलोत के सबसे करीबी नेताओं में महेंद्र चौधरी की गिनती होती है चेतन डूडी और विजयपाल मिर्धा मजबूत राजनीतिक परिवारों से ताल्लुक रखते, चेतन के पिता स्वर्गीय रूपाराम डूडी कांग्रेस के कद्दावर नेता और विधायक रहे थे, विजयपाल मिर्धा का ताल्लुक प्रख्यात मिर्धा परिवार से है विजयपाल के पिता रिछपाल मिर्धा कद्दावर नेता और विधायक रह चुके. मंजू मेघवाल पिछली गहलोत सरकार में मंत्री रह चुकी. सीएम गहलोत और पीसीसी डोटासरा ने अपने दौरे में नागौर की सियासी जमीन को टटोला. 

---कांग्रेस के थिंक टैंक का नागौर पर फोकस---
- नागौर को फतह करने के लिए भारतीय जनता पार्टी ने गंभीरता दिखाना शुरू कर दिया है. 
- बीजेपी और आरएलडी के बीच नजदीकियां साफ तौर पर नजर आ रही. 
- अभी बीजेपी के पास दो और RLP के पास भी 2 सीट है. 
- बीजेपी और RLP ने मिलकर नागौर का लोकसभा का चुनाव जीता था. 
- कांग्रेस ने अभी से सामाजिक ताने बाने को दुरुस्त करने का काम शुरू कर दिया.
- नए समीकरणों के तहत मूल ओबीसी वोट बैंक पर भी कांग्रेस का विशेष फोकस रहेगा.
- परंपरागत मुस्लिम वोटों को साधने के लिए विशेष रणनीति पर काम हो रहा है.
- भविष्य में नागौर को अधिक राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने की तैयारी है.
- यह पहली बार है कि कांग्रेस के राज में नागौर से कोई मंत्री नहीं है.
- नागौर की कमजोर कड़ियों को ठीक करने के काम में कांग्रेस जुट गई है. 
- नई रणनीति कांग्रेस के पुराने और समर्पित नेताओं को मजबूती दी जाएगी.
- नागौर जिले की जनता को बताया जाएगा कि कांग्रेस सरकार ने उनके लिए क्या किया है.

---नागौर के जातीय समीकरण--- 
- नागौर में जाट राजनीति का बोलबाला है 
- 10 में से 8 सीटों पर जाट वर्ग के विधायक है
- दलित, मुस्लिम और राजपूत वर्ग की आबादी यहां बहुतायत में है
- कुमावत, माली और ब्राह्मण यहां सियासत को प्रभावित करते है

नागौर की धरती कई मायनों में खास है. यह गांव और किसान की धरती है तो वहीं जमीनी राजनीति की भी. पंचायतीराज सिस्टम की स्थापना के लिये नागौर को माइलस्टोन माना जाता है. सालों पहले 2 अक्टूबर 1959 को तत्कालीन प्रधानमंत्री पं जवाहर लाल नेहरु ने नागौर की धरती से ही पंचायतीराज व्यवस्था का आगाज किया था.

नाथू राम मिर्धा और रामनिवास मिर्धा की सियासी धरती कई मायनों में कांग्रेस के लिए खास है. बहरहाल कांग्रेस के सामने अपने कुनबे को दुरुस्त करने से पहले चुनौती है नागौर की कांग्रेस में पनपी गुटबाजी को दूर करना. 

और पढ़ें