नागरिकता संशोधन विधेयक को कैबिनेट की मंजूरी, क्यों हो रहा है बिल का विरोध ?

नागरिकता संशोधन विधेयक को कैबिनेट की मंजूरी, क्यों हो रहा है बिल का विरोध ?

नागरिकता संशोधन विधेयक को कैबिनेट की मंजूरी, क्यों हो रहा है बिल का विरोध ?

नई दिल्ली एसपीजी बिल के बाद अब संसद में नागरिकता संशोधन विधेयक को लेकर हंगामा देखने को मिल सकता है.राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (NRC) को लेकर अभी पूर्वोत्तर में बवाल थमा भी नहीं था कि केंद्र सरकार अब नागरिकता संशोधन बिल (CAB) लाने की तैयारी में है. मोदी कैबिनेट बुधवार को इस बिल को मंजूरी मिल गई है.जिसके बाद इसके संसद में पेश करने का रास्ता साफ हो जाएगा.इसे अगले सप्ताह सदन में पेश किए जाने की संभावना है बिल में बदलाव के साथ ही भारत में बसने वाले शरणार्थियों को मिलने वाली नागरिकता के कई नियम बदल जाएंगे, जिसका विपक्ष विरोध कर रहा है.पूर्वोत्तर राज्यों सहित कई दल इसका विरोध कर रहे हैं 

क्या है नागरिकता संशोधन बिल?

मोदी सरकार को संशोधन बिल ला रही है, वह नागरिकता अधिनियम 1955 में बदलाव करेगा. इसके तहत बांग्लादेश, पाकिस्तान, अफगानिस्तान समेत आस पास के देशों से भारत में आने वाले हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी धर्म वाले लोगों को नागरिकता दी जाएगी.

कैसे भारत की नागरिकता मिलना होगा आसान?

इस बिल के कानून में तब्दील होने के बाद अफगानिस्तान, श्रीलंका, बांग्लादेश, पाकिस्तान जैसे देशों से जो गैर-मुस्लिम शरणार्थी भारत आएंगे , उन्हें यहां की नागरिकता मिलना आसान हो जाएगा. इसके लिए उन्हें भारत में कम से कम 6 साल बिताने होंगे. पहले नागरिकता देने का पैमाना 11 साल से अधिक था.

 किस बात का बिल पर विरोध हो रहा है?

इस बिल को लेकर विपक्ष केंद्र सरकार को घेर रहा है, जिसमें मुख्य विरोध धर्म को लेकर है. नए संशोधन बिल में मुस्लिमों को छोड़कर अन्य धर्मों के लोगों को आसानी से नागरिकता देने पर फैसला किया जा रहा है. विपक्ष इसी बात को उठा रहा है और मोदी सरकार के इस फैसले को धर्म के आधार पर बांटने वाला बता रहा है.

बिल का विरोध एनडीए में ही हो रहा है ?

मोदी सरकार के लिए सबसे बड़ी मुश्किल ये है कि इस बिल का विरोध उसके घटक दल एनडीए में ही हो रहा है. पूर्वोत्तर में भारतीय जनता पार्टी की साथी असम गण परिषद ने इस बिल का खुले तौर पर विरोध किया है और कहा है कि इस बिल को लाने से पहले सहयोगियों से बात नहीं हुई है, जबकि बात करने का वादा किया गया था. असम गण परिषद असम सरकार में बीजेपी के साथ है.

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