किसानों पर भारी पड़ रही सहकारिता विभाग की लापरवाही, अभी तक किसी को भी नहीं मिला ऋण

Nirmal Tiwari Published Date 2019/07/22 02:07

जयपुर: प्रदेश के किसानों पर सहकारिता विभाग की लापरवाही भारी पड़ रही है. 11 जुलाई को सीएम अशोक गहलोत के हाथों फसली ऋण वितरण कार्यक्रम की शुरुआत के बाद भी सहकारिता विभाग अभी किसानों को ऋण नहीं दे पाया है. पैक्स, लैंप्सकर्मियों के असहयोग के चलते पिछले 11 दिनों में 81 हजार किसानों की साख सीमी ही तय हो पाई है. ऐसे में 30 लाख किसानों का ऋण देने की सरकार की मंशा पर पानी फिरता दिख रहा है और किसान सरकार से नाराज हो रहे हैं सो अलग.  

कलेक्टर्स को पत्र लिख कर मॉनिटरिंग करने का आग्रह: 
सरकार ने खरीफ के लिए दस लाख नए किसान सहित कुल 25 लाख किसानों को दस हजार करोड़ रुपए का ब्याज मुक्त फसली ऋण देने की घोषणा की थी लेकिन पहले दौर में ऋण के तौर पर किसानों को तीन हजार करोड़ ही दिए जा सकेंगे. अब इन तीन हजार करोड़ में से भी किसानों को फूटी कौड़ी नहीं मिली है. इन हालातों से नाराज रजिस्ट्रार नीरज के पवन ने सभी जिला कलेक्टर्स को पत्र लिख कर मॉनिटरिंग करने का आग्रह किया है. साथ ही कलेक्टर्स को लिखे पत्र में पैक्स, लैंप्स द्वारा जिन किसानों की साख सीमा तय की गई उनही बैंक से साख मंजूर करवाकर शीघ्र ऋण दिलाने में सहयोग को कहा है. यही नहीं केंद्रीय सहकारी बैंकों के प्रबंध निदेशकों को चेतावनी दी है कि ऋण प्रक्रिया में व्यवधान आया तो प्रबंध निदेशक जिम्मेदार होगा और उस पर कार्रवाई की जाएगी.

अभी तक किसी को भी नहीं मिला ऋण: 
दरअसल सीएम की घोषणा के बाद से अभी तक महज 6 लाख 22 हजार किसानों का ही ऋण के लिए ऑनलाइन पंजीयन हुआ है. विडंबना देखिए कि इनमें से महज 81 हजार का ही पैक्स, लैंप्स से साख सत्यापन हुआ है और केंद्रीय सहकारी बैंक के स्तर पर तो महज 62 हजार किसानों का, इनमें से भी किसी को ऋण नहीं दिया गया है. ऐसे में प्रदेश के 30 लाख किसानों को ऋण देने का दावा करने वाला सहकारिता विभाग सरकार की मंशा को ही पलीता लगा रहा है. आशंका इस बात की है कि मानसून ही विदा हों जाएगा लेकिन किसानों को फसल के लिए ब्याजमुक्त फसली ऋण नहीं मिल पाएगा. इससे प्रदेश में खरीफ का रकबा घटेगा और किसान एक बार फिर सूदखोरों के चंगुल में अपने गहने और जमीन गिरवी रखने को मजबूर होगा. सहकारिता विभाग के खोखले दावों का एक दूसरा पहलू भी है. दरअसल सहकारिता विभाग के पास अभी महज तीन हजार करोड़ रुपए बांटने का ही इंतजाम है. शेष 7 हजार करोड़ के लिए वो महज खयाली पुलाव तैयार कर रहा है.

नाबार्ड ने भी नहीं की सहकारी साख नीति जारी: 
सहकारिता विभाग का दावा है कि दूसरे दौर में किसानों को एनसीडीसी से 2200 करोड़ का ऋण लेकर ऋण दिया जाएगा. सूत्रों की माने तो अपैक्स बैंक ने केंद्रीय सहकारी बैंकों को तीन हजार करोड़ ही दिए हैं और बाकि राशि स्वयं के स्तर पर इंतजाम करने को कहा है. इधर नाबार्ड ने भी अभी सहकारी साख नीति जारी नहीं की है. अब अपैक्स बैंक उम्मीद कर रहा है कि तीन हजार करोड़ बंटते बंटते नाबार्ड की साख नीति आ जाएगी और उन्हें रीफाइनेंस के नाम पर चार हजार करोड़ रुपए मिल जाएंगे. लेकिन ये सब दिन में सपने देखने जैसा ही है. ऐसे में एक बात तो निश्चित है कि प्रदेश के किसानों को एक अधिकतम एक लाख रुपए की ऋण राशि के स्थान पर अधिकतम 50 हजार रुपए ही मिल पाएंगे. इसलिए यह कहना भी मुनासिब होगा कि कर्ज माफी वाले प्रदेश में किसानों को बुवाई और पैदावार के लिए अब सरकार की जगह अब सूदखोर महाजनों पर ज्यादा निर्भर रहना पड़ेगा. 

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