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पहला नवरात्र आज, ऐसे करें मां शैलपुत्री को प्रसन्न-होगी हर मनोकामना पूरी
पहला नवरात्र आज, ऐसे करें मां शैलपुत्री को प्रसन्न-होगी हर मनोकामना पूरी

चैत्र नवरात्रि इस बार 6 अप्रैल से शुरु हो रही है। इस दौरान मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है। दुर्गा के पहले स्वरूप को 'शैलपुत्री' के नाम से जाना जाता हैं। पर्वतराज हिमालय के घर पुत्री रूप में उत्पन्न होने के कारण इनका नाम 'शैलपुत्री' पड़ा। नवरात्र-पूजन में पहले दिन इनकी पूजा और उपासना की जाती है। मां का स्वरूप बेहद ही शुभ फलदायी है। एक हाथ में त्रिशूल और दूसरे हाथ में कमल धारण किए ये देवी वृषभ पर विराजमान हैं जो संपूर्ण हिमालय पर राज करती हैं

ऐसे करें कलश स्थापना
1. नवरात्रि के पहले दिन नहाकर मंदिर की सफाई करें या फिर जमीन पर माता की चौकी लगाएं. 
2. सबसे पहले भगवान गणेश जी का नाम लें।
3. मां दुर्गा के नाम की अखंड ज्योत जलाएं और मिट्टी के पात्र में मिट्टी डालें. उसमें जौ के बीच डालें।
4. कलश या लोटे पर मौली बांधें और उस पर स्वास्तिक बनाएं। 
5. लोटे (कलश) पर कुछ बूंद गंगाजल डालकर उसमें दूब, साबुत सुपारी, अक्षत और सवा रुपया डालें।
6. अब लोटे (कलश) के ऊपर आम या अशोक 5 पत्ते लगाएं और नारियल को लाल चुनरी में लपेटकर रखें। 
7. अब इस कलश को जौ वाले मिट्टी के पात्र के बीचोबीच रख दें।
8. अब माता के सामने व्रत का संकल्प लें।

मां दुर्गा के स्वरूप शैलपुत्री की पूजा विधि

मां शैलपुत्री की तस्वीर रखें और उसके नीचें लकड़ी की चौकी पर लाल वस्त्र बिछायें। इसके ऊपर केसर से शं लिखें और उसके ऊपर मनोकामना पूर्ति गुटिका रखें। इसके बाद हाथ में लाल पुष्प लेकर शैलपुत्री देवी का ध्यान करें। 
ऊँ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डाय विच्चे ओम् शैलपुत्री देव्यै नम:।
मंत्र के साथ ही हाथ के पुष्प मनोकामना गुटिका एवं मां के तस्वीर के ऊपर छोड दें। इसके बाद भोग प्रसाद अर्पित करें तथा मां शैलपुत्री के मंत्र का जाप करें। यह जप कम से कम 108 होना चाहिए।

 

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