Mission 2020 : इसरो चंद्रयान-3 को लॉन्च करने की तैयारी में

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/09/14 01:09

नई दिल्ली: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) सितंबर 2019 में पहली बार में चांद के दक्षिणी ध्रुव पर लैंड करने में असफल रहा. अब जल्द ही इसरो चंद्रयान 3 को चंद्रमा की तरफ रवाना कर सकता है.भारत के ऐतिहासिक चंद्र मिशन Chandrayaan 2 के बारे में किसे नहीं पता होगा. मालूम हो कि 22 जुलाई 2019 को लॉन्च किए गए चंद्रयान-2 मिशन के तहत भारत को चांद की दक्षिणी सतह पर लैंडर विक्रम की सॉफ्ट लैंडिंग करानी थी. हालांकि, अंतिम क्षणों में लैंडर की रफ्तार नियंत्रित न हो पाने के कारण वह रास्ता भटक गया और चांद पर सॉफ्ट लैंडिंग की जगह उसकी हार्ड लैडिंग हुई. 

वह भी अपने निर्धारित स्थान से करीब 600 मीटर दूर. इसके बाद लैंडर से न तो संपर्क स्थापित किया जा सका और न ही उसने वहां कुछ काम किया. बहरहाल अब इसे लेकर दुखी होने की जरूरत नहीं है, बल्कि फिर से दोबारा महनत करने का सोचा है ISRO(भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन) ने.सूत्रों का कहना है कि इसरो अब जल्द चंद्रयान 3 को चंद्रमा की तरफ रवाना कर सकता है.सूत्रों का कहना है कि इसके लिए नवंबर 2020 तक की समयसीमा तय की गई है

 इसरो ने कई समितियां बनाई हैं.इसके लिए इसरो ने पैनल के साथ तीन सब समितियों की अक्तूबर से लेकर अब तक तीन उच्च स्तरीय बैठक हो चुकी है. इस नए मिशन में केवल लैंडर और रोवर शामिल होगा क्योंकि चंद्रयान-2 का ऑर्बिटर ठीक तरह से कार्य कर रहा है.मंगलवार को ओवरव्यू (समीक्षा) कमिटी की बैठक हुई. जिसमें विभिन्न सब समितियों की सिफारिशों पर चर्चा की गई. समितियों ने संचालन शक्ति, सेंसर, इंजिनियरिंग और नेविगेशन को लेकर अपने प्रस्ताव दिए हैं.

इसरो के एक वैज्ञानिक के अनुसार कार्य तेज गति से चल रहा है. इसरो ने अब तक 10 महत्वपूर्ण बिंदुओं का खाका खींच लिया है. जिसमें लैंडिंग साइट, नेविगेशन और लोकल नेविगेशन शामिल हैं.इसरो ने कई समितियों, जिनमें एक समग्र पैनल और तीन उप-समितियों का गठन किया है. वहीं, इसे लेकर अक्टूबर से कम से कम चार उच्च-स्तरीय बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं. बताया गया कि चंद्रयान 3 मिशन में केवल लैंडर और रोवर शामिल किया जाएगा, क्योंकि चंद्रयान-2 का ऑर्बिटर अब भी अच्छे से काम कर रहा है और चांद की कक्षा में परिक्रमा करते हुए उसकी हाई रिजोल्यूशन तस्वीरें अपने कैमरे में कैद कर इसरो को भेज रहा है.नए मिशन के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता 'लैंडर के पैर मजबूत करना' है. सूत्रों ने कहा कि इसरो एक नया लैंडर और एक रोवर का निर्माण करेगा। लैंडर पर पेलोड की संख्या पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है.

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