बड़े कुल की रस्म के साथ ही ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती के 807 वें उर्स का हुआ समापन

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/03/17 08:24

अजमेर। हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती के 807 वें उर्स का आज समापन बड़े कुल की रस्म के साथ हो गया है। आज चांद की 9 तारीख है, हर साल आज ही के दिन एक दिन के सुल्तान निज़ाम सक्का का उर्स मनाया जाता है। निज़ाम सक्का का मज़ार गरीब नवाज की दरगाह में अहाता-ए-नूर के पास मौजूद है। 

बताया जाता है कि निज़ाम सक्का ने बादशाह हुमायूं की जंग के दौरान जान बचाई थी। जिस पर बादशाह हुमायूं ने निज़ाम सक्का से कहा था कि जो चाहो मांग लो। निज़ाम सक्का ने उस वक्त तो कुछ नहीं मांगा, लेकिन किसी मुनासिब वक्त में निज़ाम सक्का ने बादशाह हुमायूं से एक दिन की बादशाहत मांगी। जिस पर हुमायूं राज़ी हो गए और निज़ाम सक्का को एक दिन का सुल्तान बना दिया। निज़ाम सक्का ने बादशाह बनने के बाद जो उन्होंने अपनी पानी की मशक को काट कर गोल गोल सिक्के बना रखे थे, उन पर सोने की मोहर लगवाई और वो सिक्के चलने लगे। तभी से निज़ाम सक्का को एक दिन का सुल्तान कहा जाने लगा।

भिश्ती जमात के लोगों ने आज धूम धाम से चादर का जुलूस निकाला और साथ ही क़व्वाली के नज़राने पेश करते हुए दरगाह में मौजूद निज़ाम सक्का की मज़ार पर चादर और अकीदत के फूल पेश किए। इसी चादर के बाद इंडियन शेख अब्बासी अल्पसंख्यक महासभा ने भी निज़ाम सक्का की मज़ार पर चादर पेश की और मुल्क में अमन चैन, तरक्की, खुशहाली की दुआ मांगी।

First India News से जुड़े अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करे!
हर पल अपडेट रहने के लिए अभी डाउनलोड करें First India News Mobile Application
लेटेस्ट वीडियो के लिए हमारे YOUTUBE चैनल को विजिट करें

और पढ़ें

Most Related Stories

Stories You May be Interested in