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कोरोना बदल सकता जयपुर एयरपोर्ट की 'कैटेगरी'

कोरोना बदल सकता जयपुर एयरपोर्ट की 'कैटेगरी'

जयपुर: कोराना वायरस महामारी के चलते पूरे विश्वभर में हवाई यात्रीभार में गिरावट आई है. देश में 25 मार्च से फ्लाइट्स का संचालन पूर्णतया बंद हो चुका है. इसका असर जयपुर एयरपोर्ट की इंटरनेशनल कैटेगरी पर पड़ सकता है. दरअसल जयपुर एयरपोर्ट पिछले साल ही 5 से 15 मिलियन यात्रीभार वाले एयरपोर्ट्स की श्रेणी में शामिल हुआ था. यह कैटेगराइजेशन एयरपोर्ट काउंसिल इंटरनेशनल द्वारा किया जाता है, जो विश्वभर के एयरपोर्ट्स पर सर्विस क्वालिटी का सर्वेक्षण करती है. वित्त वर्ष 2018-19 में जयपुर एयरपोर्ट से 54.71 लाख यात्रियों ने यात्रा की थी, जबकि इस वित्त वर्ष 2019-20 में यात्रीभार 52 लाख रहने की उम्मीद थी. यात्रीभार में यह गिरावट जेट एयरवेज के बंद होने सहित आर्थिक मंदी के चलते थी. 

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यात्रीभार 50 लाख से कम रह सकता है:
फरवरी तक जयपुर एयरपोर्ट से 47 लाख यात्रियों ने यात्रा की थी. ऐसे में जयपुर एयरपोर्ट प्रशासन उम्मीद कर रहा था कि मार्च माह पूरा होने तक यात्रीभार 52 लाख तक पहुंच जाएगा. इस तरह जयपुर एयरपोर्ट 50 लाख से 150 लाख यानी 5 से 15 मिलियन वाले एयरपोर्ट्स की श्रेणी में ही बरकरार रहेगा. लेकिन गिरे हुए यात्रीभार ने चिंता बढ़ा दी है. मार्च माह के पहले सप्ताह से ही यात्रीभार में गिरावट आई थी और मार्च मध्य तक यात्रीभार 50 फीसदी से कम रह गया था. ऐसे में यह माना जा रहा है कि यात्रीभार 50 लाख से कम रह सकता है. ऐसा हुआ तो जयपुर एयरपोर्ट 20 से 50 लाख यानी 2 से 5 मिलियन यात्रीभार की कैटेगरी में डाउनग्रेड हो सकता है.

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...फर्स्ट इंडिया के लिए काशीराम चौधरी की रिपोर्ट

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नई दिल्ली: केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राजीव गांधी फाउंडेशन सहित नेहरू-गांधी परिवार से संबंधित तीन ट्रस्ट की जांच के लिए एक कमेटी बनाई है. यह कमेटी इन फाउंडेशन की फंडिंग और इनके द्वारा किए गए उल्लंघनों की जांच करेगी. वहीं कांग्रेस ने इसे डराने वाली कार्रवाई बताया है. 

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मोदी को लगता है कि सारी दुनिया उनके जैसी: 
कांग्रेस सांसद और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने इसको लेकर ट्वीट करते हुए कहा कि मिस्टर मोदी को लगता है कि सारी दुनिया उनके जैसी है. वो सोचते हैं कि हर किसी की कोई कीमत होती है या हर किसी को डराया जा सकता है. वो ये कभी नहीं समझेंगे कि जो सच्चाई के लिए लड़ते हैं उनकी कोई कीमत नहीं होती है और उन्हों डराया नहीं जा सकता है. 

गहलोत ने राजनीतिक प्रतिशोध का मामला बताया: 
वहीं राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने ट्वीट करते हुए इसे राजनीतिक प्रतिशोध का मामला बताया है. उन्होंने कहा कि एनडीए सरकार पीएम केयर फंड में पारदर्शिता की आवश्यकता का मुद्दा पचा नहीं पाई. तीनों ट्रस्टों के खिलाफ कार्रवाई इसका प्रत्यक्ष परिणाम है. इसके साथ ही सीएम गहलोत ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि विपक्ष को चुप कराने और विपक्षी नेताओं को राष्ट्रीय हित के मुद्दों को उठाने से रोकने के लिए यह रणनीति बनाई गई है. 

अभिमानी रवैये के कारण सरकार ने आर्थिक संकट पर ध्यान नहीं दिया: 
मुख्यमंत्री गहलोत ने कहा कि राहुल गांधी ने NDA की गलत नीतियों के कारण गहरे आर्थिक संकट के बारे में चेतावनी दी थी और अब हम दुर्भाग्य से वहीं देख रहे हैं. सोनिया गांधी, डॉ मनमोहन सिंह और राहुल जी ने पिछले महीनों में आम लोगों, MSMEs, उद्यमों और बैंकों के सामने आने वाली कठिनाइयों को उठाया. कांग्रेस ने अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए कई सुझावों की पेशकश की लेकिन सरकार ने उनके अभिमानी रवैये के कारण कोई ध्यान नहीं दिया. 

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एक अंतर-मंत्रालय कमेटी का गठन किया: 
वहीं इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्रालय के प्रवक्ता ने ट्वीट कर जानकारी देते हुए बताया कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एक अंतर-मंत्रालय कमेटी का गठन किया है, जो कि राजीव गांधी फाउंडेशन, राजीव गांधी चैरिटेबल ट्रस्ट और इंदिरा गांधी मेमोरियल ट्रस्ट की जांच करेगी. इस जांच में इनकम टैक्स एक्ट, PMLA एक्ट और FCRA एक्ट के नियमों के उल्लंघन के बारे में जांच की जाएगी. 

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यह है पूरा विवाद: 
भारत और चीन के बीच जारी विवाद के चलते कांग्रेस पार्टी लगातार केंद्र सरकार पर हमला बोल रही है तो बीजेपी ने इसके उलट कांग्रेस को ही घेर लिया. बीजेपी के अध्यक्ष जेपी नड्डा की ओर से आरोल लगाया गया कि राजीव गांधी फाउंडेशन को चीन से फंडिंग मलिती थी. इसके साथ ही देश के लिए प्रधानमंत्रा राहत कोष बनाया गया था, उससे भी यूपीए सरकार ने पैसा राजीव गांधी फाउंडेशन को दिया था. बीजेपी का आरोप है कि 2005-08 तक PMNRF की ओर से राजीव गांधी फाउंडेशन को यह राशि मिली थी. 

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जयपुर: मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पीएम मोदी को पत्र लिखकर राज्य की महत्वाकांक्षी पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना (ERCP) को राष्ट्रीय परियोजना घोषित करने की मांग की है. लगभग 37 हजार 247 करोड़ रूपये की लागत वाले इस प्रोजेक्ट से राज्य के 13 जिलों में पेयजल तथा 2.8 लाख हैक्टयर क्षेत्र में सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता सुनिश्चित होगी. 

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योजना को जल्द से जल्द ही राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया जाए: 
सीएम गहलोत ने पत्र में लिखा कि ERCP की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) नवम्बर 2017 में आवश्यक अनुमोदन के लिए केन्द्रीय जल आयोग को भेजी जा चुकी है. उन्होंने आग्रह किया कि इस योजना को जल्द से जल्द ही राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया जाए. 

राजस्थान की किसी भी बहुउद्देशीय सिंचाई परियोजना को यह दर्जा प्राप्त नहीं: 
सीएम गहलोत ने कहा है कि केन्द्र सरकार ने पूर्व में 16 विभिन्न बहुउद्देशीय सिंचाई परियोजनाओं को राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा दिया है, लेकिन राजस्थान की किसी भी बहुउद्देशीय सिंचाई परियोजना को यह दर्जा प्राप्त नहीं हुआ है. प्रदेश के कई जिलों में पेयजल की गंभीर समस्या के चलते इस प्रोजेक्ट को राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा देना और इसकी जल्द क्रियान्विति सुनिश्चित करना आवश्यक है.  

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पर्याप्त पानी की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी:
उल्लेखनीय है कि ERCP परियोजना से झालावाड़, बारां, कोटा, बूंदी, सवाई माधोपुर, अजमेर, टोंक, जयपुर, दौसा, करौली, अलवर, भरतपुर एवं धौलपुर जिलों को वर्ष 2051 तक पीने तथा सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी. ERCP की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट के अनुसार, परियोजना से मानसून के दौरान कुन्नू, कुल, पार्वती, कालीसिंध एवं मेज नदियों के सब बेसिन के अधिशेष जल को बनास, मोरेल, बाणगंगा, गंभीर एवं पार्बती नदियों के सब बेसिन में पहुंचाया जाना है. 


 

दूध व डेयरी प्रोडक्ट्स की शुद्धता के लिए 14 जुलाई तक अभियान- डॉ. रघु शर्मा

दूध व डेयरी प्रोडक्ट्स की शुद्धता के लिए 14 जुलाई तक अभियान- डॉ. रघु शर्मा

जयपुर: चिकित्सा मंत्री डॉ. रघु शर्मा ने बताया कि प्रदेशवासियों को मिलने वाले दूध व दूध से बने पदार्थों की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए प्रदेश भर में शुद्ध के लिए युद्ध के तहत 8 से 14 जुलाई तक अभियान चलाया जा रहा है. अभियान के दौरान व्यापक स्तर पर डेयरी प्रोडक्ट्स के नमूने लेकर जांच की जाएगी. 

RBSE 12th Result 2020: राजस्थान बोर्ड ने जारी किया 12वीं साइंस का परिणाम, 91.96 प्रतिशत रहा परिणाम

डॉ. शर्मा ने बताया कि अभियान के अंतर्गत दूध व दूध से बने उत्पाद जैसे पनीर, बटर, घी, मावा व मिठाइयां आदि के नमूने लिए जाएंगे. उन्होंने कहा कि सभी खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को पर्याप्त मात्रा में सभी आवश्यक उपकरण व सुविधाएं उपलब्ध करवाई जा रही हैं. 

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उन्होंने कहा कि अभियान के अंतर्गत खाद्य सुरक्षा अधिकारी नमूनों से जुड़ी सूचना एफएसएआई के एप पर भी देंगे. मंत्री ने बताया कि संभागीय स्तर पर उपलब्ध फूड टेस्टिंग लेबोरेट्री का भी इस अभियान में समुचित उपयोग किया जाएगा. लिए गए नमूनों में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई भी की जाएगी. सभी खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को अभियान के प्रतिदिन की रिपोर्ट मुख्यालय भेजने के निर्देश दिए गए हैं. 

RBSE 12th Result 2020: राजस्थान बोर्ड ने जारी किया 12वीं साइंस का परिणाम, 91.96 प्रतिशत छात्र हुए पास

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जयपुर: राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (Rajasthan Board Result 2020) का पहला नतीजा जारी हो गया है. यह रिजल्ट 12वी विज्ञान वर्ग का है. शिक्षा राज्यमंत्री गोविंद सिंह डोटासरा ने बोर्ड दफ्तर में रिजल्ट जारी किया है. इस बार 2,18,232 अभ्यर्थी उत्तीर्ण रहे. इसमें 1,47,171 छात्र और 71,061 छात्राएं उत्तीर्ण हुई है. ऐसे में इस बार परीक्षा परिणाम 91.96 प्रतिशत रहा. बोर्ड की 12वीं विज्ञान में 2 लाख 39 हजार 800 परीक्षार्थी रजिस्टर्ड हुए थे. उनमें से 2,37,305 छात्रों ने परीक्षा दी थी. छात्रों परीक्षा का परिणाम बोर्ड की वेबसाइट http://www.rajeduboard.rajasthan.gov.in/ पर देखा जा सकता है. 

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18-19 जून को हुई परीक्षा पूरी:
12वीं विज्ञान वर्ग की परीक्षाएं 5 मार्च 2020 से शुरू हुई थी, लेकिन बीच में कोरोना संक्रमण के चलते परीक्षाएं स्थगित कर दी गई थीं. इसके बाद बोर्ड ने 12वीं विज्ञान वर्ग की शेष परीक्षाओं का आयोजन 18 और 19 जून को किया. करीब एक पखवाड़े में बोर्ड यह परिणाम घोषित करने जा रहा है. 

बोर्ड पहले केवल 12वीं साइंस का रिजल्ट जारी किया: 
पिछले 3-4 बरसों से राजस्थान बोर्ड की परंपरा रही है कि 12वीं साइंस और कॉमर्स का परिणाम एक साथ आता रहा है. लेकिन इस बार दोनों को अलग-अलग कर दिया गया है. इस बार बोर्ड पहले केवल 12वीं साइंस का रिजल्ट जारी किया है. इसके बाद 12वीं कॉमर्स का परिणाम घोषित होगा. फिर 12वीं कला संकाय का परिणाम आयेगा. सबसे अंत में 10वीं का परिणाम जारी होगा. जुलाई के अंत तक सभी परिणाम जारी होने की संभावना है.

VIDEO: अजमेर में कांग्रेस के कार्यकर्ताओं में सत्ता का रुतबा!...दादागिरी के साथ पहुंचे जिला शिक्षा अधिकारी के कार्यालय 

पिछले साल 92.88 फीसदी रहा था परिणाम: 
साल 2019 की 12वीं विज्ञान की परीक्षा में कुल 2 लाख 60 हजार 582 विद्यार्थी पंजीकृत थे. इनमें से 78 हजार 542 छात्राएं थी तो 1 लाख 82 हजार 40 छात्र थे. परिणाम प्रतिशत की बात करें तो कुल परिणाम 92.88 फीसदी था, जबकि छात्राओं का पास प्रतिशत इससे कहीं ज्यादा 95.86 था, वहीं छात्रों का 91.59 फीसदी था. 

मुख्यमंत्री गहलोत की राज्यपाल से मुलाकात ने बढ़ाई राजनीति की धड़कनें, मंत्रिमंडल फेरबदल की सुगबुगाहट तेज !

मुख्यमंत्री गहलोत की राज्यपाल से मुलाकात ने बढ़ाई राजनीति की धड़कनें, मंत्रिमंडल फेरबदल की सुगबुगाहट तेज !

जयपुर: राजस्थान में अशोक गहलोत सरकार में मंत्रिमंडल विस्तार या फेरबदल को लेकर एक बार चर्चाएं तेज हो गई हैं. इसकी वजह आज मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की राज्यपाल कलराज मिश्र से मुलाकात मानी जा रही है. हालांकि इस मुलाकात को शिष्टाचार भेंट बताया जा रहा है. लेकिन राजनीतिक जानकार इस मुलाकात को मंत्रिमंडल फेरबदल से जोड़कर देख रहे हैं. सीएम गहलोत के राजभवन पहुंचते ही चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है. विधायक एक-दूसरे को फोन करने लगे हैं. इसके साथ ही सीएम की राजभवन यात्रा के कारण पूछे जा रहे हैं. लेकिन फिलहाल सीएम गहलोत व राज्यपाल कलराज मिश्र को ही इस बारे में जानकारी है. 

VIDEO: अजमेर में कांग्रेस के कार्यकर्ताओं में सत्ता का रुतबा!...दादागिरी के साथ पहुंचे जिला शिक्षा अधिकारी के कार्यालय 

राजभवन आने से पहले 4 मंत्री मिले मुख्यमंत्री से: 
मुख्यमंत्री गहलोत के राजभवन आने से पहले 4 मंत्री मुख्यमंत्री से मिले थे. आंजना, जाटव, जूली व प्रताप सिंह ने सीएम से मुलाकात की. उसके बाद सीएम की राज्यपाल से मुलाकात होने पर चर्चाओं को बल मिल गया है. ऐसे में संभवतया जल्द ही मंत्रिमंडल में फेरबदल हो सकता है. मुख्यमंत्री व राज्यपाल की मुलाकात के बाद संभावित मंत्रिमंडल फेरबदल को लेकर कई मंत्रियों व विधायकों की धड़कनें बढ़ गई है. हालांकि फिलहाल इसे शिष्टाचार मुलाकात बताया जा रहा है. लेकिन शाम तक ही मुलाकात की स्थिति साफ हो पाएगी. वहीं राजनीतिक नियुक्तियों व कुलपति नियुक्ति को लेकर चर्चा होने की भी संभावना जताई जा रही है. 

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किसी भी समय मंत्रिमंडल में विस्तार और फेरबदल संभव:
यह बिल्कुल साफ है कि प्रदेश में अब किसी भी वक्त कार्यकर्ताओं को राजनीतिक नियुक्तियों के तोहफे के साथ मंत्रिमंडल में विस्तार और फेरबदल हो सकता है. उसके मद्देनजर यह देखना दिलचस्प होगा कि सीएम गहलोत की राज्यपाल से मुलाकात के क्या मायने सामने आते हैं? लेकिन इसके लिए फिलहाल आधिकारिक बयान सामने आने तक इंतजार करना होगा. 


 

VIDEO: अजमेर में कांग्रेस के कार्यकर्ताओं में सत्ता का रुतबा!...दादागिरी के साथ पहुंचे जिला शिक्षा अधिकारी के कार्यालय

अजमेर: शहर कांग्रेस ओर यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं द्वारा आज जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के बाहर दादागिरी दिखाते हुए हंगामा खड़ा कर दिया. अजमेर दक्षिण के कांग्रेस नेता हेमंत भाटी के नेतृत्व में कार्यकर्ता जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय पहुंचे और अपना मांग पत्र देने की मांग रखी जिस पर पुलिस ने कुछ ही कार्यकर्ताओं को कार्यालय पर जाने की अनुमति दी, लेकिन कांग्रेसी कार्यकर्ता अपनी सत्ता का रुतबा दिखाते हुए शिक्षा अधिकारी के कक्ष में जाकर वहां पर खड़े होकर के नारेबाजी करने लगे. 

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मेरी रिकॉर्डिंग कर लो मैं डरता नहीं:  
वहीं उसी समय शिक्षा अधिकारी कार्यालय पर एलडीसी भर्ती की काउंसलिंग भी चल रही थी लेकिन सत्ता के घमंड में चूर कांग्रेसी कार्यकर्ताओं को वह बच्चे नहीं दिखाई दिए और उनकी नारेबाजी लगातार जारी रही. हद तो तब पार हो गई जब यूथ कांग्रेस शहर अध्यक्ष यासीन चिश्ती ने जिला शिक्षा अधिकारी देवी सिंह कच्छावा को खुले में धमकी दे डाली और कुछ अपशब्द तक कह डाले. उन्होंने यह भी कहा कि मेरी रिकॉर्डिंग कर लो मैं डरता नहीं उन्होंने सत्ता का रोब झाड़ते हुए कहा कि कांग्रेस की सरकार है और हमारे ही आदमियों को नियुक्ति दी जाएगी. 

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पुलिस ने सभी कार्यकर्ताओं को कक्ष से बाहर निकाला:
मामला बढ़ता देख मौके पर पुलिस पहुंची और पुलिस ने सभी कार्यकर्ताओं को कक्ष से बाहर निकाला. साथ ही शिक्षा अधिकारी से जब बात की तो उन्होंने कहा कि इस तरह से कार्यकर्ताओं का कक्षा में आ कर नारेबाजी करन गलत है और राजकार्य में बाधा का काम किया है. वहीं पुलिस भी मौके पर थी और उनके सामने ही यह सब कृत्य किए गए है. लेकिन एक यूथ कांग्रेस के पदाधिकारी को इस तरह से खुल्ले में एक अधिकारी को धमकी देना कितना शोभा देता है यह वह ही जान सकता है. देखना यह होगा को अब इस मामले पर आगे क्या कार्यवाही की जाती है. 

...अजमेर से फर्स्ट इंडिया के लिए शुभम जैन की रिपोर्ट

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उदयपुर: प्रदेश के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने आज उदयपुर के बाशिंदों को बड़ी सौगात दी. मुख्यमंत्री गहलोत नें आज जयपुर स्थित सीएम निवास से वीसी के माध्यम से  उदयपुर में दो भवनों का लोकार्पण किया. दी उदयपुर सेंट्रल को ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड के नवनिर्मित प्रधान कार्यालय और शाखा भवन का मुख्यमंत्री नें वीसी के माध्यम से ई लोकार्पण किया. इसके अलावा मुख्यमंत्री गहलोत नें चित्तौड़गढ़ जिले के चंदेरिया में बने  सहकार भवन का भी लोकार्पण किया. 

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3 करोड़ 18 लाख रुपए की लागत से बने भवन: 
उदयपुर में बने 3 करोड़ 18 लाख रुपए की लागत से बनें इन भवनों के लोकार्पण कार्यक्रम के दौरान प्रदेश के सहकारिता मंत्री उदयलाल आंजना और सहकारिता राज्यमंत्री  टीकाराम जूली भी मौजूद रहे. शहर के प्रतापनगर इलाके में बनें दी उदयपुर सेंट्रल को ऑपरेटिव बैंक के प्रधान कार्यालय के लोकार्पण के दौरान संभागीय आयुक्त विकास भालें, पुलिस अधीक्षक कैलाश विश्नोंई, देहात कांग्रेस अध्यक्ष लालसिंह झाला सहित कांग्रेस के कई पदाधिकारी मौजूद रहे. 

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किसानों की आर्थिक प्रगति का राह मजबूत करने की बात कही: 
इस मौके पर मुख्यमंत्री गहलोत नें तमाम अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए सहकारिता के माध्यम सें किसानों की आर्थिक प्रगति का राह मजबूत करने की बात कही. इस मौके पर मीडिया से बात करते हुए केन्द्रीय सहकारी बैंक के प्रबंध निदेशक आलोक चौधरी नें साफ किया कि इन भवनों के मिलने से किसानों के सहकारिता से जुडे कार्यो में और तेजी आएगी. 

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जयपुर: राजस्थान में पंचायत चुनाव के चौथे चरण को लेकर सुप्रीम कोर्ट का अहम आदेश आया है. कोर्ट ने राजस्थान सरकार और चुनाव आयोग 15 अक्टूबर से पहले पंचायत चुनाव पूरा करने का आदेश दिया है. चौथे चरण में 26 जिलों में पंचायत चुनाव होंगे. चौथे चरण में 1954 ग्राम पंचायत व 126 पंचायत समितियां शामिल हैं. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने अप्रैल में चुनाव सम्पन्न कराने के आदेश दिए थे. लेकिन कोरोना के चलते यह संभव नहीं हो पाया. लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद प्रदेश में पंचायत चुनावों का रास्ता साफ हो गया है. हालांकि पूरा आदेश सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर डलने के बाद ही सामने आएगा. 

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इन जिलों में होंगे चौथे चरण के चुनाव:
पंचायतों के चौथे चरण के चुनाव जिन जिलों में होने हैं उनमें अजमेर, अलवर, बांसवाड़ा, बारां, बाड़मेर, भरतपुर, बीकानेर, चूरू, दौसा, धौलपुर है. इसके अलावा हनुमानगढ़, जयपुर, जैसलमेर, जालोर, जोधपुर, झुंझुनू, करौली, नागौर, पाली, प्रतापगढ़, सवाई माधोपुर, सीकर, सिरोही, उदयपुर और श्रीगंगानगर जिलों की पंचायती राज संस्थाओं में चुनाव होने हैं. 

तीन चरणों के चुनाव जनवरी माह में संपन्न हुए: 
इससे पहले प्रदेश में ग्राम पंचायतों के तीन चरणों के चुनाव जनवरी माह में संपन्न हुए थे. इसके बाद चौथे चरण के चुनाव अप्रैल में होने थे लेकिन कोरोना संकट के चलते इसे स्थगित कर दिया गया. लेकिन अब हालात धीरे-धीरे सामान्य होने के बाद चौथे चरण के चुनाव करवाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार और चुनाव आयोग को निर्देश जारी किया है. 

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प्रशासकों को कर रखा नियुक्त:
गौरतलब है कि ग्राम पंचायतों, पंचायत समितियों और जिला परिषदों का कार्यकाल पंचायत समितियों का कार्यकाल जनवरी माह में समाप्त हो गया था, जिसके बाद सरकार ने यहां प्रशासकों को तैनात कर रखा है. 

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