क्रेडिट रेटिंग एजेंसी मूडीज ने भारत की रेटिंग घटाकर की 'नेगेटिव',50 खरब इकोनॉमी बनाने की कवायद को लग सकता है झटका

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/11/08 12:11

नई दिल्ली क्रेडिट रेटिंग एजेंसी मूडीज ने भारत को झटका दिया है. मूडीज ने भारत की रेटिंग को स्थिर से नकारात्मक कर दिया है.आर्थ‍िक सुस्ती का सामना कर रहे भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक और नकारात्मक खबर आई है. रेटिंग एजेंसी मूडीज इनवेस्टर्स सर्विस ने भारत के बारे अपने आउटलुक यानी नजरिए को 'स्टेबल' (स्थि‍र) से घटाकर 'नेगेटिव' कर दिया है.

इसके लिए एजेंसी ने सुस्त आर्थिक वृद्धि का हवाला दिया है और भारत की रेटिंग के लिए अपना नजरिया बदल दिया है.मूडीज का कहना है कि पहले के मुकाबले भारतीय अर्थव्यवस्था में जोखिम बढ़ गया है, इसलिए उसने अपने आउटलुक में बदलाव किया है. मूडीज के आउटलुक से इस बात का अंदाजा मिलता है कि किसी देश की सरकार और वहां की नीतियां आर्थ‍िक कमजोरी से मुकाबले में कितनी प्रभावी हैं.मूडीज ने कहा है कि धीमी अर्थव्यवस्था को लेकर जोखिम और बढ़ रहा है

कारोबर में निवेश और ग्रोथ बढ़ाने के लिए और सुधारों और टैक्स बेस व्यापक करने की गुंजाइश काफी कम हो गई है.गौरतलब है कि इसके पहले अक्टूबर में ही मूडीज इनवेस्टर्स सर्विस ने 2019-20 में जीडीपी ग्रोथ के अनुमान को घटाकर 5.8 फीसदी कर दिया था. पहले मूडीज ने जीडीपी में 6.2 फीसदी की ग्रोथ होने का अनुमान जारी किया था.भारत सरकार ने कहा कि, देश की अर्थव्यवस्था की बुनियाद काफी मजबूत है और हाल ही में किए गए सुधारों की घोषणा निवेश को प्रोत्साहित करेगी. इस संदर्भ में वित्त मंत्रालय ने कहा कि भारत सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्थाओं में से एक है

इसके पहले भी कई रेटिंग एजेंसियां भारतीय अर्थव्यवस्था में बढ़त और यहां के नजरिए के बारे में अपने अनुमान को घटा चुकी हैं. अप्रैल से जून की तिमाही में भारत के जीडीपी में बढ़त महज 5 फीसदी रही है, जो 2013 के बाद सबसे कम है.कमजोर मांग और सरकारी खर्च घटने की वजह से अर्थव्यवस्था की रफ्तार बढ़ नहीं पा रही. एक साल पहले की समान अवधि में जीडीपी में ग्रोथ 8 फीसदी की हुई थी.
अक्टूबर महीने में रेटिंग एजेंसी फिच ने इस वित्त वर्ष यानी 2019-20 के लिए सकल घरेल उत्पाद (GDP) में बढ़त के अनुमान को घटाकर सिर्फ 5.5 फीसदी कर दिया. फिच ने कहा कि बैंकों के कर्ज वितरण में भारी कमी आने की वजह से ग्रोथ रेट छह साल के निचले स्तर पर पहुंच सकता है.

यह ग्रोथ अनुमान में बड़ी कमी है, क्योंकि इसके पहले जून में फिच ने वित्त वर्ष के लिए जीडीपी में 6.6 फीसदी की बढ़त होने का अनुमान जारी किया था.सितंबर महीने में  रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने दावा किया था कि भारत में आर्थिक सुस्‍ती अंदेशे से ज्‍यादा व्‍यापक और गहरा रहा है. तब क्रिसिल ने भी जीडीपी ग्रोथ के अनुमान को घटा दिया था. क्रिसिल के मुताबिक 2019-20 में देश की जीडीपी ग्रोथ 6.3 फीसदी रहने का अनुमान है.वहीँ आईएमएफ और अन्य संगठनों के अनुसार, भारत की विकास दर अपरिवर्तित है

बता दें कि मोदी सरकार ने अगले पांच साल में देश को 5 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी बनाने का लक्ष्य रखा है, लेकिन एक्सपर्ट्स का कहना है कि इसके लिए लगातार कई साल तक सालाना 9 फीसदी की ग्रोथ रेट होनी चाहिए.विकास दर को घटाने के अनुमान से केंद्र सरकार की देश को 50 खरब इकोनॉमी बनाने की कवायद को भी झटका लग सकता है

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