Live News »

Diwali 2019 : दिवाली का शुभ मुहूर्त, मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने के उपाय

Diwali 2019  : दिवाली का  शुभ मुहूर्त,  मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने के उपाय

जयपुर कार्तिक महीने की अमावस्या के दिन दीपावली यानी दिवाली का त्योहार मनाया जाता है. इस बार दिवाली 27 अक्तूबर २०१९ को मनाई जाएगी. मान्यता है कि भगवान राम चौदह साल के वनवास के बाद अयोध्या लौटे थे. अपने प्रभु राम, माता सीता और प्रभु लक्ष्मण के अयोध्या वापसी की खुशी में लोगों ने चारों तरफ दीप जलाकर उनका स्वागत किया था. मान्याताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान कृष्ण ने भी नरकासुर नामक राक्षस का वध किया था.पांच दिवसीय महापर्व का मुख्य त्योहार दीपावली इस बार 27 अक्तूबर 2019, रविवार के दिन मनाया जाएगा.

दिवाली हिंदू धर्म का सबसे बड़ा त्योहार है मान्यता इस दिन यानी कार्तिक माह की कृष्ण अमावस्या पर भगवान राम 14 वर्ष के वनवास बाद रावण का वध करने के बाद अयोध्या लौटे थे. इसकी खुशी दीपावली का त्योहार मनाया जाता है.इसके अलावा दीपावली के दिन लक्ष्मी पूजन का विधान है. इस दिन मां लक्ष्मी की पूजा से घर पर सुख-समृद्धि आती है .

दिवाली से पहले लक्ष्मी पूजन के कुछ उपाय जिसे करने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं

दीपावली के दिन एक बिना कटा या फटा पीपल का पत्ता तोड़कर घर में लेआएं और इस पत्ते पर 'ओम महालक्ष्म्यै नमः' लिखकर पूजा स्थल पर रख दें
दिवाली की रात लक्ष्मी पूजन से पहले लौंग और इलायची का मिश्रण बना लें। फिर इसको सभी देवी-देवताओं को तिलक लगाएं। इस प्रयोग से आपको लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होगी.

 दीपावली पर किन्नरों को मिठाइयां और पैसे देकर बदले में किन्नर से एक रूपये का सिक्का मांग कर अपनी तिजोरी में रख लें, गरीबी दूर करने के लिए यह उपाय बड़ा ही कारगर माना जाता है.

इस साल रविवार के दिन दीपावली है इसलिए हो सके तो सफेद रंग की वस्तुओं का दान करें.

बरगद के पत्ते पर हल्दी से स्वास्तिक बनाकर तिजोरी में रखें इससे आपकी तिजोरी में धन बढ़ता जाएगा.

दीपावली की रात अपने घर में श्रीयंत्र स्थापित करें और रात को कनकधारा स्त्रोत का पाठ करें. धन वृद्धि में यह उपाय बड़ा शुभ और सफल माना जाता है

लक्ष्मी पूजन शुभ मुहूर्त 

लक्ष्मी पूजन का समय शाम 06 बजकर 40 मिनट से शुरू होकर रात 08 बजकर 13 मिनट तक रहेगा

प्रदोष काल मुहूर्त

प्रदोष काल की शुरूआत शाम 05 बजकर 36 मिनट से शुरू होकर रात 08 बजकर 13 मिनट तक रहेगा।

वृषभ काल मुहूर्त 

वृषभ काल की शुरूआत शाम 06 बजकर 40 मिनट से शुरू होकर रात 08 बजकर 35 मिनट तक रहेगा

अमावस्या तिथि 

 27 अक्टूबर को दोपहर 12 बजकर 23 मिनट से शुरू होकर 28 अक्टूबर को सुबह 09 बजकर 08 मिनट पर समाप्त हो जाएगा

दिवाली पूजा की आवश्यक साम्रगी

दिवाली पूजा के लिए रोली, चावल, पान-सुपारी, लौंग, इलायची, धूप, कपूर, घी या तेल से भरे हुए दीपक, कलावा, नारियल, गंगाजल, फल, फूल, मिठाई, दूर्वा, चंदन, घी, मेवे, खील, बताशे, चौकी, कलश, फूलों की माला, शंख, लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति, थाली, चांदी का सिक्का, 11 दिए आदि वस्तुएं पूजा के लिए एकत्र कर लेना चाहिए.

दिवाली के दिन कैसे करें पूजा

स्कंद पुराण के अनुसार कार्तिक अमावस्या के दिन सुबह स्नान आदि से निवृत्त होकर सभी देवी देवताओं की पूजा करनी चाहिए.

शाम के समय पूजा घर में लक्ष्मी और गणेश जी की नई मूर्तियों को एक चौकी पर स्वस्तिक बनाकर स्थापित करना चाहिए.

मूर्तियों के सामने एक जल से भरा हुआ कलश रखना चाहिए. इसके बाद मूर्तियों के सामने बैठकर हाथ में जल लेकर शुद्धि मंत्र का उच्चारण करते हुए उसे मूर्ति पर, परिवार के सदस्यों पर और घर में छिड़कना चाहिए.

अब फल, फूल, मिठाई, दूर्वा, चंदन, घी, मेवे, खील, बताशे, चौकी, कलश, फूलों की माला आदि सामग्रियों का प्रयोग करते हुए पूरे विधि-विधान से लक्ष्मी और गणेश जी की पूजा करनी चाहिए.

इनके साथ-साथ देवी सरस्वती, भगवान विष्णु, मां काली और कुबेर की भी विधिपूर्वक पूजा करनी चाहिए. पूजा करते समय 11 छोटे दीप और एक बड़ा दीप जलाना चाहिए.

और पढ़ें

Most Related Stories

कोरोना वायरस के चलते अष्टमी पर पसरा मंदिरों में सन्नाटा, वीरानी आई नजर

कोरोना वायरस के चलते अष्टमी पर पसरा मंदिरों में सन्नाटा, वीरानी आई नजर

भरतपुर: कोरोनावायरस के खौफ से जहां पूरा विश्व भयभीत है तो वहीं भगवान के मंदिरों में भी सन्नाटा पसरा हुआ है. नवरात्रा के तहत आज अष्टमी पर्व है और दुर्गा मंदिरों में जहां आज के दिन भक्तों का जनसैलाब उमड़ पड़ता था वहां आज वीरानी नजर आई. 

VIDEO- Rajasthan Corona Update: पिछले 12 घंटे में राजस्थान में नहीं आया कोई नया पॉजिटिव केस, भीलवाड़ा से राहत की खबर

राजराजेश्वरी देवी मंदिर में पसरा सन्नाटा:     
फर्स्ट इंडिया न्यूज़ की टीम ने भरतपुर के प्राचीन श्री राजराजेश्वरी देवी मंदिर का जायजा लिया तो देखा कि जिस मंदिर में आज मेले जैसा नजारा होना चाहिए था वहां सन्नाटा पसरा हुआ था. माता रानी के दर्शन करने के लिए इक्का-दुक्का भक्त ही मंदिर आ रहे थे और दरवाजे से ही माता रानी को दंडवत कर वापस लौट रहे थे. 

VIDEO- WHO ने की कोरोना वायरस की हवा में मौजूदगी की पुष्टि, अपने पहले के बयान को बदला 

माता रानी जल्दी ही पूरे विश्व को वायरस से मुक्त करेगी:
फर्स्ट इंडिया न्यूज़ के जरिए आप भी श्री राजराजेश्वरी देवी के दर्शन कर सकते हैं. मंदिर के महंत अजय शर्मा ने फर्स्ट इंडिया न्यूज़ को बताया की कोरोना वायरस के खौफ ने जिंदगी की रफ्तार को रोक दिया है लेकिन उन्हें पूरी उम्मीद है की माता रानी जल्दी ही पूरे विश्व व भारत को इस वायरस से मुक्त करेंगी. महंत अजय शर्मा ने आमजन से अपील की है कि इस गंभीर महामारी से सतर्क व सावधान रहने की आवश्यकता है और इससे बचने के लिए सभी अपने घरों में ही रहे. 

CORONA: दुर्गाष्टमी पर घर-घर होगी मां महागौरी की पूजा, देवी मंदिरों में बिना श्रद्धालुओं के पुजारी ही करेंगे पूजा

CORONA: दुर्गाष्टमी पर घर-घर होगी मां महागौरी की पूजा, देवी मंदिरों में बिना श्रद्धालुओं के पुजारी ही करेंगे पूजा

नई दिल्ली: आज चैत्र नवरात्रि के आठवां दिन है, यह दिन दुर्गाष्टमी के नाम से जाना जाता है. इस दिन मां दुर्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी की पूजा आराधना होती है. आज के दिन माता महागौरी की आराधना करने से व्यक्ति को सौभाग्य की प्राप्ति होती है, साथ ही सुख-समृद्धि में कोई कमी नहीं होती है. वहीं दो अप्रैल को श्रीराम नवमी मनाई जाएगी. अष्टमी, नवमी पर लोग कुल देवी की पूजा करेंगे. कोरोना से बचाव के लिए देशभर में लागू लॉकडाउन के चलते घर से बाहर जाने पर पाबंदी है. 

Corona Update: पूरे देश में कोरोना का प्रकोप, 1,590 हुई पॉजिटिव मरीजों की संख्या, 47 लोगों की मौत

सादगी से होगी पूजा:
इसलिए मंदिरों में बिना श्रद्धालुओं के पुजारी ही माता की पूजा करेंगे.इस बार कोरोना वायरस संक्रमण से बचाव के चलते लॉकडाउन की स्थिति है. ऐसे में देवी मंदिरों में पूजा-अर्चना का कार्य सादगी पूर्ण ढंग से किया जा रहा है. ना भक्त होंगे, बस पुजारी ही माता की पूजा आराधना करेंगे. 

कोरोना संकट: 20 महिलाओं के साथ थाईलैंड के राजा का जर्मनी पलायन, आइसोलेशन के लिए चुना शाही होटल 

मंदिरों में पूजा अर्चना:
मंदिरों में एक या दो दीप जलाकर पूजा-अर्चना की जा रही है. ऐसे में अष्टमी तिथि पर भी सादगीपूर्ण ढंग से पूजा हो रही है. ऐसे में अष्टमी तिथि पर कन्या भोज के लिए कोई आवश्यक नहीं कि नौ कन्याओं को ही भोज कराया जाए. इसकी जगह नौ कन्याओं के नाम से भी जरूरतमंदों को भोजन कराकर अष्टमी तिथि पर कन्या भोज की रीति निभाई जा सकती है.

बाबा रामदेव का 668 वां जन्मोत्सव, लॉकडाउन की वजह से नहीं होगा कोई कार्यक्रम 

बाबा रामदेव का 668 वां जन्मोत्सव, लॉकडाउन की वजह से नहीं होगा कोई कार्यक्रम 

रामदेवरा: जन-जन के आराध्य लोक देवता बाबा रामदेव का 668 वां जन्मोत्सव रविवार को है. तंवर समाज की भाट बही के मुताबिक बाबा रामदेव का जन्म चैत्र शुक्ला पंचमी को हुआ हैं. इस मौके हर रोज कि तरह रविवार को सिर्फ बाबा रामदेव समाधि का अभिषेक कर पूजा अर्चना के साथ आरती की गई. कोरोना और लॉक डाउन के चलते कोई आयोजन नहीं हैं. बाबा रामदेव समाधि के दर्शन श्रद्धालुओं के लिए गत 22 मार्च 2020 से कोरोना वायरस के चलते बन्द हैं. 

Rajasthan Corona Update: राजस्थान में कोरोना पॉजिटिव का आंकड़ा पहुंचा 55, भीलवाड़ा में एक नए पॉजिटिव केस की पुष्टि

667वां जन्मोत्सव हर्षोल्लास के साथ मनाया गया:
गत वर्ष पहली बार 10 अप्रैल 2019 शुक्ल पंचमी को बाबा रामदेव का 667वां जन्मोत्सव  हर्षोल्लास के साथ मनाया गया था. बाबा रामदेव जन्मोत्सव समिति का गठन किया गया था. उल्लेखनीय है कि जन-जन के आराध्य लोक देवता बाबा रामदेव का जन्म दिवस तंवर समाज की अधिकृत भाट बही वंशावली के मुताबिक चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी को होना उल्लेखनीय है. ऐसे में गत वर्ष पहली बार चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी 10 अप्रैल 2019 को बाबा रामदेव का जन्म उत्सव समारोह धूमधाम के साथ मनाया गया. 

दुष्कर्म पीड़िता ने हाईकोर्ट से लगायी गर्भपात की गुहार, हाईकोर्ट ने मेडीकल बोर्ड से पीड़िता की जांच कर रिपोर्ट की तलब

नवरात्रि पंचमी आज, स्कंदमाता की पूजा से मिलेंगे ये लाभ

नवरात्रि पंचमी आज, स्कंदमाता की पूजा से मिलेंगे ये लाभ

जयपुर: नवदुर्गा के पांचवें स्वरूप को स्कंदमाता के नाम से जाना जाता है. स्कन्दमाता की उपासना से बालरूप स्कन्द भगवान् की उपासना स्वयमेव हो जाती है. कार्तिकेय (स्कन्द) की माता होने के कारण इनको स्कंदमाता कहा जाता है. कमल के आसन पर विराजमान होने के कारण से इन्हें पद्मासना देवी भी कहा जाता है.

Coronavirus Updates: देश में संक्रमितों की संख्या 1000 के पार, शनिवार को 30 फीसदी की बढ़ोतरी 

स्कन्दमाता पूजा मंत्र-
सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया।
शुभदास्तु सदा देवी स्कंदमाता सशस्विनी।।

स्कंदमाता की पूजा से मिलेंगे ये लाभ:
- स्कंदमाता की पूजा से संतान प्राप्ति में आसानी हो जाती है.
- इसके साथ ही अगर संतान की तरफ से कोई कष्ट हो तो वह भी समाप्त हो जाता है.
- पीले वस्त्र धारण कर पूजा करने से परिणाम अति शुभ मिलता है.
- संकदमाता की पूजा करने से शत्रु पराजित नहीं कर सकता.
- स्कंदमाता की कृपा से व्यक्ति जीवन मरण के चक्र से मुक्त होता है.
- साधना में लीन साधक सिद्धि प्राप्ति के लिए भी मां स्कंदमाता की उपासना करते हैं.

VIDEO: कोरोना के खिलाफ जंग में रक्त की आपूर्ति, अशोक गहलोत की प्रेरणा से मोबाइल रक्तदान शिविर शुरु 

 

नवारात्रि 2020: आज हो रही मां कुष्मांडा की पूजा, मिलता है स्वास्थ्य वरदान

नवारात्रि 2020: आज हो रही मां कुष्मांडा की पूजा, मिलता है स्वास्थ्य वरदान

जयपुर: नवरात्रि के चौथे दिन आज मां कुष्मांडा की पूजा की जाती है. अपनी हल्की हंसी से ब्रह्मांड को उत्पन्न करने के कारण इनका नाम कुष्मांडा हुआ है. मां कुष्मांडा अष्टभुजा देवी के नाम से भी विख्यात है. इनका निवास सूर्यलोक में है. इन्हीं के तेज और प्रकाश से दसों दिशाएं प्रकाशित हो रही हैं. 

VIDEO:  सीएम अशोक गहलोत ने लिखा कई राज्यों के CM को पत्र, राजस्थानियों की संभाल करने की मांग 

मां कूष्मांडा पूजा मंत्र- 
करोतु सा नः शुभहेतुरीश्वरी
शुभानि भद्राण्यभिहन्दु चापदः

मां कुष्मांडा की पूजा का महत्व: 
- देवी कुष्मांडा की पूजा अर्चना करके नाक कान गले से संबंधित बीमारियां दूर होती है.
- देवी कुष्मांडा की विशेष पूजा से वाणी प्रभावित होती है और आपकी वाणी द्वारा कार्य सिद्ध होता है.
- माता कूष्मांडा भक्तों को रोग, शोक और विनाश से मुक्त कर आयु, यश, बल और बुद्धि प्रदान करती हैं.

Coronavirus Updates: पूरी दुनिया में कोरोना का कहर, विश्वभर में संक्रमितों की संख्या पहुंची 6 लाख 

गणगौर पूजन में भी दिख रहा है कोरोना वायरस का असर, मास्क लगाकर गणगौर पूजन कर रहीं महिलाएं

गणगौर पूजन में भी दिख रहा है कोरोना वायरस का असर, मास्क लगाकर गणगौर पूजन कर रहीं महिलाएं

बिसाऊ(झुंझुनूं): कोरोना के चलते दुनिया में दशहत है. लोग घरो में दुबके हुए है लेकिन शेखावाटी की युवतियां अपनी सैप्टी के साथ ईसर गणगौर की पूजा कर रही है. हाल ही राज्य सरकार द्धारा 144 की धारा लगने के बावजूद महलिाओं और लड़कियों के साथ सखी सहलियों का गुट कम हो गया है. लेकिन इतिहान के तौर पर अब युवतियां एवं बालिकायें मास्क और रुमाल लगाकर अपनेे सुहाग के लिए गणगौर की पूजा कर रही है. झुंझुनूं जिले के बिसाऊ कस्बे में भी एक वाकया ऐसा ही देखने को मिला यहां अनु सैनी और पूजा जागिंड़ की शादी कुछ ही महिनों पहले हुई थी उनकी पहली गणगौर की पूजा है और कोरोना संक्रमण के चलते है उनको डर भी है और एक उदासी भी प्रसाशन द्धारा गणगौर का मैला रदद का दिया गया है.

हालांकी उनको खुशी की बात इस बात की है वो मास्क लगाकर घर में गणगौर पूजा कर रही है. पुजा, अनु के साथ रेखा,सपना, रिषी के साथ साथ महिलाओं ने भी गणगौर के लोक गीत गायें. कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए शुरू की गई जंग में महिलाएं भी पीछे नहीं है. गणगौर पूजन के दौरान सतर्कता बरत रही हैं. महिलाएं हाथ धोकर मुंह पर मास्क लगाकर गणगौर पूजन के कार्यक्रम में शामिल हो रही हैं.

राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति की कोरोना समीक्षा वीसी, राज्यपाल कलराज मिश्र ने  बताया-राजस्थान में घर-घर कराया गया है सर्वे 

त्योहार उत्साह और उमंग की अभिव्यक्ति:
तीज और त्योहार हमारे जीवन के उत्साह और उमंग की अभिव्यक्ति है. इससे हमारा सामाजिक जीवन तो झलकता ही है, संस्कारों के एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को हस्तांरित करने का अवसर भी. सदियों से चली आ रही इस सांस्कृतिक विरासत को सहेजकर रखना हैं चुनौती भी है तो संभावना भी. आज के भौतिकवादी परिवेश में सामाजिक संबंधों को परिभाषित करते ये तीज और त्योंहार सूखे मन उपवन में हरितिमा का संचार करते हैं. सौभाग्य की देवी पार्वती को यूं तो सारे देश में स्त्रियां मंगल कामना के लिए विधि विधान से पूजा अर्चना करती है, लेकिन राजस्थान में गणगौर के रूप में गौरी पूजन की अनूठी परम्परा है.

होली के दूसरे दिन से मनाए जाने वाले इस त्योहार को लेकर नव विवाहित महिलाओं और कुंवारी युवतियों में उत्साह बना हुआ है. ये प्रतिदिन सुबह गणगौर माता के मंगल गीत गाते हुए पूजा अर्चना कर रही है. सोलह दिन तक चलने वाले इस त्योहार में नव विवाहित महिलाएं और गणगौर पूजने वाली युवतियां नए परिधानों में सजधज कर सौभाग्य कर सौभाग्य की देवी पार्वती के मंगल गीत गाती हुई प्रतिदिन हरी दूब से पूजा कर रही है. विवाह के प्रथम वर्ष में इस पूजन का विशेष महत्व होता है। सोलहवें दिन गणगौर की पूजा अर्चना कर इसे जलाशय में विसर्जित किया जाता है.

गणगौर पूजन की यह परम्परा:
गणगौर को विधि पूर्वक रोली, काजल और मेंहदी की 16-16 बिंदिया बनाकर पूजा जाता है. पूजन में हरी घास की कोपलें पुष्प,कनेर के पते आदि काम में लिए जाते हैं. 16 बार किए गए पूजन में हर बार हरी दूब उन्हें अर्पण की जाती है. गीत भी गाया जाता है. गौर और गणपति, ईसर पूजे पार्वती, पार्वती का आल्यागोल्या, गौर का सोना का टीका दे. राजस्थान में कहीं पर गणगौर 15 दिन पहले बनाई जाती है, तो कहीं पर आठ दिन पहले.गणगौर होली जलने के दूसरे दिन से ही होली की राख और गोबर से अथवा काली मिट्टी से गणगौर बनाई जाती है. कहीं-कहीं आठ पिंडी राख और आठ पिंडी गोबर को बनाकर डलियों में दूब पर रख कर दी जाती हैं.

आठवें दिन घर लाते हैं गणगौर - गणगौर पर्व को लेकर नव विवाहित महिलाओं में उत्साह रहता है. सोलह दिन तक चलने वाले गणगौर के आठवें दिन नव विवाहित महिलाएं छोटे-छोटे बच्चों को दुल्हा-दुल्हन का वेश धारण कर ढोल ढमाकों के साथ गणगौर को विधि विधान से अपने घर लेकर आती है. वर्तमान में शहरों में रेडीमेड गणगौर और ईसर भी मिलते हैं जिन्हें गणगौर के दिन वस्त्राभूषण धारण करवाए जाते हैं. सदियों से चली आ रही गणगौर पूजन की यह परम्परा दरअसल त्योंहार हमारे सामाजिक जीवन को मजबूत करता है.

आज नवरात्रि का तीसरा दिन, घर-घर हो रही है मां चंद्रघंटा की पूजा-अर्चना

मातृ शक्ति का अभिनव लोक पर्व:
गौरतलब है कि होलिका दहन की राख से बने पिंडों को शिव पार्वती के अंश के रूप में प्रतिष्ठापित करने के साथ ही शेखावाटी अंचल में करीब एक पखवाड़े तक चलने वाला गणगौर पूजन का कन्याओं और नवविवाहिताओं ने विधिविधान के साथ शुरू किया. अल सुबह होलिका दहन की राख के शिव शक्ति के प्रतीकात्मक अंश के रूप में बनाए पिंडों की गणगौर पूजा शुरू की. उन्होंने गीतों के माध्यम से गौरा, उनकी सहेलियों और ईशर का आहवान किया. गौरा को गीतों के माध्यम से आने का आमंत्रण देती कन्याओं के उनके स्वागत में बधावा गीत गाए. मातृ शक्ति के इस अभिनव लोक पर्व के शुभारम्भ पर गणगौर पूजने वाली कन्याओं ने प्रकृति की गीतों के माध्यम से आराधना की. प्रभातकालीन वेला में घरों से गूंजते गीतों को सुनकर प्रकृति झूमी-झूमी तो यहाँ का वातावरण सरस हो गया.

गौर पूजन के समय गाए जाने वाले गीतों की गूंज बाड़ी हाली बाड़ी खोल, बाड़ी की किंवाड़ी खोल, म्हैं आय ए फलसां रै बाहर, गौर ए गणगौर माता खोल किंवाड़ी, ऊंचो चंवरो चैंक्यूटो, जल यमुना रो नीर मंगाओ जी आदि गीतों की स्वरलहरियां बरबर की ध्यान आकर्षिक करने लगी हैं. अच्छे वर की कामना और पति की दीर्घआयु का पर्व महिलाओं ने बताया कि सुहागिनों के पूजा करने की परंपरा वर्षों से चल रही है. पहले अपने मायके में पूजा की और अब ससुराल में आकर भी उसी परंपरा को आगे बढ़ा रही हैं. उन्होंने बताया कि गणगौर व ईसर को शिव-पार्वती के रूप में पूजा जाता है वहीं अच्छे वर की कामना के लिए भी गणगौर की पूजा की जाती है तो वहीं पति की दीर्घआयु की कामना की जाती है.

...फर्स्ट इंडिया के लिए अशोक सोनी की रिपोर्ट

Chaitra Navratri 2020: आज नवरात्रि का तीसरा दिन, घर-घर हो रही है मां चंद्रघंटा की पूजा-अर्चना

Chaitra Navratri 2020: आज नवरात्रि का तीसरा दिन, घर-घर हो रही है मां चंद्रघंटा की पूजा-अर्चना

जयपुर: आज नवरात्रि का तीसरा दिन है. देशभर में लॉकडाउन के बीच लोग घरों में मां  चंद्रघंटा की पूजा-अर्चना कर रहे है. इनके सर पर घंटे के आकार का चन्द्रमा है. इसलिए इनको चंद्रघंटा कहा जाता है. इनके दसों हाथों में अस्त्र-शस्त्र हैं और इनकी मुद्रा युद्ध की मुद्रा है. मां चंद्रघंटा तंत्र साधना में मणिपुर चक्र को नियंत्रित करती हैं. मान्यताओं के मुताबिक शेर पर सवार मां चंद्रघंटा की पूजा करने से भक्तों के कष्ट हमेशा के लिए खत्म हो जाते हैं. इन्हें पूजने से मन को शक्ति और वीरता मिलती है. ज्योतिष में इनका संबंध मंगल नामक ग्रह से होता है.

Chaitra Navratri 2020: नवरात्रि का दूसरा दिन, घर-घर हो रही है माता ब्रह्मचारिणी की पूजा 

ऐसे कीजिए मां चंद्रघंटा की आराधना:
मां चंद्रघंटा की पूजा लाल वस्त्र धारण करके करना श्रेष्ठ होता है. मां को लाल पुष्प, रक्त चन्दन और लाल चुनरी समर्पित करना उत्तम होता है. इनकी पूजा से मणिपुर चक्र मजबूत होता है और भय का नाश होता है. अगर इस दिन की पूजा से कुछ अद्भुत सिद्धियों जैसी अनुभूति होती है, तो उस पर ध्यान न देकर आगे साधना करते रहनी चाहिए. आज की पूजा लाल रंग के वस्त्र धारण करके करें. मां को लाल फूल, ताम्बे का सिक्का या ताम्बे की वस्तु और हलवा या मेवे का भोग लगाएं.

गुजरात के अंबाजी मंदिर में हुई घट स्थापना, भक्तों के लिए शुरू हुए ऑनलाइन दर्शन

जीवन के सभी दुखों का होगा अंत:
हर देवी के हर स्वरूप की पूजा में एक अलग प्रकार का भोग चढ़ाया जाता है. कहते हैं भोग देवी मां के प्रति आपके समर्पण का भाव दर्शाता है. मां चंद्रघंटा को दूध या दूध से बनी मिठाई का भोग लगाना चाहिए. प्रसाद चढ़ाने के बाद इसे स्वयं भी ग्रहण करें और दूसरों में बांटें. देवी को ये भोग समर्पित करने से जीवन के सभी दुखों का अंत हो जाता है.

कोरोना महामारी की आपदा को लेकर ज्योतिषियों की भविष्यवाणी, मिल गई खात्मे की डेट

जयपुर: देशभर में कोरोना महामारी की आपदा को लेकर ज्योतिषियों का आकलन है कि मध्य अप्रैल महीने के बाद से इस आपदा से निजात मिलना शुरू होगा. हिंदू पूजा पद्धति और आध्यात्म के लिहाज से नवरात्र के इन दिनों में लगातार घर पर ही बैठ कर पूजा-अर्चना से सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी होता है.

VIDEO: जोधपुर में एक और कोरोना पॉजिटिव मरीज आया सामने, इंग्लैंड से लौटा था युवक 

ज्योतिष का भी अपने आप में एक बड़ा महत्व:
प्राचीन भारतीय ज्योतिष का भी अपने आप में एक बड़ा महत्व है विज्ञान के इस दौर में ज्योतिषीय गणनाओं को भी साफ नकारा नहीं जा सकता. कारण साफ है कि ज्योतिष को भी विज्ञान का ही रूप दिया गया है. दूसरी तरफ ज्योतिष भी वैज्ञानिक मान्यताओं में विश्वास करता है भले ही विज्ञान ज्योतिष में विश्वास करें या ना करें.

15 अप्रैल तक इसका प्रभाव रहेगा:
ज्योतिष के लिहाज से सूर्य के मीन राशि में प्रवेश करने की वजह से बीमारी या विपदा जैसे जैसे हालात पैदा होते हैं.15 मार्च को मीन राशि में प्रवेश हुआ था तो लगभग 1 महीने यानी 15 अप्रैल तक इसका प्रभाव रहेगा और धीरे-धीरे खत्म भी होता चला जाएगा. ज्योतिषियों की दलील है कि नवरात्र के समय में लोग घर से बाहर नहीं निकलते थे प्राचीन काल में घर में ही पूजा-अर्चना और साधना में जुटे रहते थे काफी हद तक धर्म और वैज्ञानिकता का सम्मिश्रण था.

किसानों का नुकसान होना भी यही एक कारण:
दूसरी तरफ दिसंबर महीने में सूर्य ग्रहण भी था तभी से ही इस तरीके के वातावरण होने के हालातों की शुरुआत हो गई थी. लगातार मौसम खराबी की वजह से किसानों का नुकसान होना भी यही एक कारण है. पूर्वी राजस्थान के भरतपुर के प्रसिद्ध ज्योतिष पंडित सुरेंद्र नाथ पंच का कहना है कि प्रधानमंत्री का साथ दें और ईश्वर या आराधना में भी जुटे रहे.

किसी विशेष किस्म की जनहानि नहीं होगी:
भीलवाड़ा के भविष्यवक्ता और प्राचीन ज्योतिष के लिहाज से अपनी गणना करने वाले पंडित गोपाल व्यास का कहना है कि कोरोना से किसी विशेष किस्म की जनहानि नहीं होगी सरकार का साथ अवश्य दें. ज्योतिषीय आकलन के लिए गोपाल व्यास ने दावा किया है कि 16 अप्रैल के बाद से हालात सामान्य होना शुरू हो जाएंगे जून तक छोटा-मोटा प्रभाव रहेगा इस दौरान दान पुण्य का विशेष ध्यान रखा जाए और साथ ही राज्य सरकार का भी सहयोग किया जाए.

कोरोना को लेकर जल्द टलेगा खतरा, काली माता अखाड़े के पांडुलिपि में उल्लेख 

ज्योतिषीय आकलन की भी प्रमाणिकता को नकारा नहीं जा सकता:
बरहाल कुल मिलाकर कहा जाए तो भारत देश की सभ्यता और संस्कृति एक ऐसी जीवन पद्धति से जुड़ी हुई रही है जिससे कि व्यक्ति अपने आपको स्वस्थ रख कर बीमारियों से दूर रह सकता है. ऐसे में ज्योतिषीय आकलन की भी प्रमाणिकता को नकारा नहीं जा सकता क्योंकि ज्योतिषी भी फिलहाल प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री की अपील का पालन करने की बात कह रहे हैं. और संभावना जता रहे हैं कि 15 अप्रैल के बाद स्थितियां ठीक होना शुरू होगी बशर्ते जरूरत है समाज के हर एक नागरिक को सरकार का सहयोग देने की.

...फर्स्ट डंडिया के लिए एश्वर्य प्रधान की रिपोर्ट

Open Covid-19