जेडीए की लापरवाही से रिंग रोड पर लग रहा ग्रहण

Nirmal Tiwari Published Date 2019/02/18 11:46

जयपुर। राजधानी में बन रहा रिंग रोड स्टेट ऑफ आर्ट की अनूठी मिसाल होगा। अगले महीने में रिंग रोड का काम पूरा हो जाएगा लेकिन जेडीए की लापरवाही इस प्रोजेक्ट को ग्रहण लगा रही है। क्लोवर लीफ के लिए जेडीए ने 200 करोड़ एडवांस लेकर भी 8 महीने बीत जाने पर भी जमीन नहीं दी है ऐसे में प्रोजेक्ट अपने उद्देश्य को पूरा करने में नाकाम हो सकता है। 

जेडीए की विफलता के बाद 47 किलोमीटर लंबे रिंग रोड का काम एनएचएआई को दिया गया। लंबी प्रक्रिया के बाद एनएचएआई ने रिंग रोड के लिए हरियाणा की गावर कंपनी को रिंग रोड का 810 करोड़ का ठेका भी दे दिया और गावर ने बीते साल 18 जनवरी से रिंग रोड पर पूरी शिद्दत से काम भी शुरू कर दिया था 6 लेन के रिंग रोड में जर्मनी की पेवर का इस्तेमाल किया गया है। 15 महीने में रिंग रोड का कार्य पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था लेकिन कंपनी इसे समय से पहले ही पूरा कर लेगी। रिंग रोड पर दो टोल प्लाजा होंगे, तीन क्लोवर लीफ बनने हैं। दरअसल प्रोजेक्ट के लिए महत्वपूर्ण है क्लोवर लीफ का बनना। आगरा रोड, टोंक रोड और अजमेर रोड पर क्लोवर लीफ बनने हैं। लेकिन जेडीए क्लोवर लीफ के लिए जमीन मुहैया नहीं करवा पाया है। ऐसे में क्लोवर लीफ न बनने से रिंग रोड और आगरा रोड का ट्रेफिक टकराएगा और लंबा जाम रहेगा। और दुर्घटनाआगें की आशंका बनी रहेगी। 

इस मामले में एनएचएआई कई बार जेडीए को पत्र लिख चुका है लेकिन जेडीए का रवैया टालमटोल वाला है। एनएचएआई के सीजीएम एमके जैन का कहना है कि पिछले साल क्लोवर लीफ की जमीन के पेटे जेडीए को 25 जून को 200  करोड़ रुपए दिए थे लेकिन जेडीए ने आज तक जमीन नहीं दी है। ऐसे में रिंग रोड का औचित्य ही समाप्त होता जा रहा है। उधर रिंग रोड का काम कर रही हरियाणा की कंपनी गावर ने 46 किलोमीटर लंबी स्ट्रैच तैयार कर दी है और सभी बडे और छोठे पुलों का काम भी पूरा कर लिया है। रिंग रोड पर एक-एक मेजर और माइनर ब्रिज बनाए गए हैं। दो- दो आरओबी और आरयूबी भी तैयार हैं। 31 कलवट भी तैयार की गई हैं। 

कानौता के पास रेलवे ओवर ब्रिज में देरी से मंजूरी के चलते इसका कुछ कार्य अगले 15 दिन में पूरा कर लिया जाएगा। सबसे बड़ा पुल ढूंढ नदी के ऊपर से निकल रहा है जो रेलवे पुल के ऊपर से होकर जा रहा है। इसका स्पान 102 मीटर लंबा है जो इंजीनियरिंग का एक बेहतरीन नमूना माना जा रहा है। रिंग रोड पर दो टोल प्लाजा होंगे और ये तीन नेशनल हाईवेज को जोडेगा। 280 एमएम मोटे रिंग रोड को तैयार करने के लिए जर्मनी से पेवर मंगाई गई और इस रोड को बेहतरीन गुणवत्ता के साथ तैयार किया गया। इस रोड पर 30-40 वर्ष तक रखरखाव की भी जयरत नहीं पडेगी। गोनेर के रलावता गांव के पास द्रव्यवती नदी और रिंग रोड का संगम हो रहा है। सभी पुलों व अन्य स्ट्रक्चरर्स को इस तरह बनाया जा रहा है कि वे स्टेट ऑफ आर्ट की झलक देंगे। यह बात अलग है कि जेडीए की लापरवाही से जयपुराइट्स व जयपुर आने वाले लोगों को रिंग रोड को जो फायदा मिलना चाहिए था वह अभी नहीं मिल पाएगा।

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