गहलोत ने एक बार फिर स्पष्ट करते हुए कहा - मैं थासू दूर नहीं

FirstIndia Correspondent Published Date 2018/11/06 03:23

जोधपुर(राजीव गौड़)। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत आज तीन दिवसीय दौरे पर जोधपुर पहुंचे। एयरपोर्ट पर जिस स्नेह और अपनेपन से जोधपुर की जनता उमडी है उससे गहलोत इतने अधिक खुश नजर आए कि तुरंत मीडिया से बातचीत करते हुए इस बात का उल्लेख भी किया कि जनता का प्रेम और स्नेह है जिसकी वजह से मैं हूं। उन्होने एक बार फिर स्पष्ट किया कि मैं थासू दूर नही,यही बात गहलोत ने उस दिन भी कही थी जिस दिन राहुल गांधी ने उन्हे कांग्रेस का राष्ट्रीय महासचिव नियुक्त किया था,मैं थासू दूर नही के कई संकेत राजनीति तौर पर देखे जा रहे है क्योकि मैं थासू दूर नही का मतलब यही होता है कि यही होता है कि जनता से कभी दूर नही होना। 

दूसरे अर्थो में यह भी माना जा रहा है कि गहलोत खुद चुनाव लड़ना चाह रहे है। लेकिन आलाकमान फिलहाल गहलोत को चुनाव लड़ाना नही चाहता,इसलिए गहलोत ने एयरपोर्ट पर इस बात का इशारा भी किया कि मैं किसी भी पद पर रहूं मगर जनता से दूर नही रहूंगा और पार्टी जिसे भी टिकट देती है उसे जीताना मैरी प्राथमिकता है और हमेशा रहेगी। यह प्राथमिकता सभी कांग्रेसियों की होनी चाहिए। क्या कुछ कहा गहलोत ने एयरपोर्ट पर उसे लेकर बातचीत करने के लिए जोधपुर से सीधे जुड चुके है हमारे संवाददाता राजीव गौड।

सवाल 1 - मैं थासू दूर नही हूं कहने का क्या तात्पर्य हुआ?
जवाब 1 - देखिएं यही बात गहलोत ने उस दिन भी कही थी जब गहलोत को अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी का महासचिव बनाया गया था। उस दिन भी प्रेस वार्ता में गहलोत ने यह बात इसलिए कही थी कि वह राजस्थान से दूर जाना नही चाहते थे। लेकिन पार्टी का आदेश था इसलिए उन्हे उसकी पालना करनी पडी। एक बार फिर आज जब गहलोत ने प्रत्याशी चयन से पूर्व जब यह बात कही है तो इसके कई मायने भी नजर आ रहे है। शायद अशोक गहलोत चुनाव लड़ना चाह रहे हो और पार्टी आलाकमान लड़ाना नही चाह रही हो।

सवाल 2 - मगर मैं थासू दूर नही तो नारा महाराजा हनवंत सिंह जी का दिया हुआ है?
जवाब 2 - जी बिल्कुल ठीक यह नारा तत्कालीन महाराजा हनवंत सिंह जी का ही दिया हुआ है वे जनता में काफी लोकप्रिय थे और जनता उन्हे बेहद प्यार करती थी,जब उन्होने यह नारा दिया था कि मैं थासू दूर नही और उसी राह पर अशोक गहलोत का बार-बार यह दोहराना कि मैं थासू दूर नही के कई मायने नजर आते है।

सवाल 3 - एयरपोर्ट और कायलाना में आए दावेदारों की भीड को लेकर गहलोत का क्या रूख है?
जवाब 3 - देखिए एयरपोर्ट पर निश्चित रूप से टिकट के दावेदार अपने समर्थकों के साथ पहुंचे थे और कांग्रेस के वरिष्ठजन भी स्वागत के लिए पहुंचे थे और इसी तरह कायलाना में भी अपनी बात अपना दावा पेश करने के लिए समर्थक पहुंचे है। इसलिए गहलोत शुरू से ही लोकतंत्र में उपयोगी मानते है। वह हमेशा कहते है कि हर व्यक्ति को अपनी बात कहने का अधिकार है। पार्टी कार्यकर्ता होते है उन्हे अपनी दावेदारी पेश करने का भी अधिकार है। मगर पार्टी आलाकमान सारे पहलू देखकर टिकट निर्धारित करती है और फिर जिसका टिकट फाइनल हो जाए उसको जिताने की भी जिम्मेदारी सभी की हो जाती है।

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