मंदी से निबटने के लिए सरकार का प्लान, कॉरपोरेट टैक्स में मिल सकती है राहत

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/08/21 10:50

नई दिल्‍ली: जुलाई में वित्‍त मंत्री निर्मला सीतारमण ने देश का ''बही खाता'' पेश किया था. इसमें कॉरपोरेट सेक्‍टर को बड़ी राहत मिली थी नए प्रस्‍ताव के तहत 400 करोड़ रुपये तक का सालाना कारोबार करने वाली कंपनियां  25 फीसदी कॉरपोरेट टैक्‍स स्‍लैब में थी. एक सरकारी सूत्र ने बताया कि अब तक सरकार 400 करोड़ सालाना से ज्यादा टर्नओवर वाली कंपनियों को कॉरपोरेट टैक्स में छूट देने पर विचार कर रही थी, लेकिन अब यह सभी के लिए लागू हो सकती है.

देश में आर्थिक संकट की स्थिति को संभालने के लिए मोदी सरकार कॉर्पोरेट सेक्टर को बड़ी राहत देने पर विचार कर रही है. सूत्रों के मुताबिक एक सरकारी पैनल ने मोदी सरकार से देश में कामकाज कर रही सभी कंपनियों के लिए कॉर्पोरेट टैक्स की दर 30 से घटाकर 25% तक करने की सिफारिश की है. 

एक सरकारी सूत्र ने बताया कि अब तक सरकार 400 करोड़ सालाना से ज्यादा टर्नओवर वाली कंपनियों को कॉरपोरेट टैक्स में छूट देने पर विचार कर रही थी, लेकिन अब यह सभी के लिए लागू हो सकती है. बजट के दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 400 करोड़ रुपये से ज्यादा टर्नओवर वाली कंपनियों को कॉर्पोरेट टैक्स में राहत देने की बात कही थी. हालांकि भारत अब भी उन देशों में शामिल है, जहां कॉर्पोरेट टैक्स की दर दुनिया में सबसे ज्यादा है.

देश में टैक्स मामलों की सबसे बड़ी संस्था केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) के सदस्य अखिलेश रंजन की अध्यक्षता वाले पैनल ने हाल में ही वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को इस संबंध में रिपोर्ट सौंपी है. हालांकि इस रिपोर्ट को अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है और इस संबंध में पूछे जाने पर वित्त मंत्रालय के प्रवक्ता ने कोई भी जानकारी देने से इनकार कर दिया. वित्त मंत्रालय के एक सूत्र ने कहा कि रिपोर्ट में इनकम टैक्स कानून को ओवरहॉल करने की बात कही गयी है. नाम नहीं जाहिर करने की शर्त पर उस व्यक्ति ने कहा, "रिपोर्ट में सलाह दी गयी है कि सरकार को आमदनी पर सरचार्ज जैसे कदम नहीं उठाने चाहिए. इसके साथ ही देश में कॉरपोरेट टैक्स की दरें हर कंपनी के लिए एक जैसा कर दिया जाना चाहिए." भारत में इस समय घरेलू कंपनियों को 30% और विदेशी कंपनियों को 40 फीसदी कॉरपोरेट टैक्स देना पड़ता है. इसके साथ ही टैक्स के कुल भुगतान पर चार फीसदी हेल्थ और एजुकेशन सेस भी चुकाना पड़ता है.
अगर किसी कंपनी का करयोग्य सालाना मुनाफा 10 करोड़ रुपये से अधिक होता है तो भारत में कामकाज के लिए घरेलू कंपनियों को 12% और विदेशी कंपनियों को पांच फीसदी सरचार्ज अलग से देना पड़ता है.
 

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