शरद पूर्णिमा का महत्व, शुभ मुहूर्त और पूजा की विधि

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/10/12 15:10

जयपुर :शरद पूर्णिमा का व्रत करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. शरद पूर्णिमा को कोजागरी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है.शरद पूर्णिमा रविवार 13 अक्टूबर को है.इस दिन चंद्रमा की सोलह कलाओं की शीतलता देखने लायक होती है.यह पूर्णिमा सभी बारह पूर्णिमाओं में सर्वश्रेष्ठ मानी गयी गई है.कहा जाता है इस दिन है चंद्रमा धरती पर अमृत की वर्षा करता है.

शरद पूर्णिमा के दिन चंद्रमा, माता लक्ष्‍मी और भगवा विष्‍णु की पूजा का विधान है. कहते हैं ये दिन इतना शुभ और सकारात्मक होता है कि छोटे से उपाय से बड़ी-बड़ी विपत्तियां टल जाती हैं. पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक इसी दिन मां लक्ष्मी का जन्म हुआ था. इसलिए धन प्राप्ति के लिए भी ये तिथि सबसे उत्तम मानी जाती है.

क्या है शरद पूर्णिमा का पौराणिक महत्व

इसी दिन भगवान कृष्ण महारास रचाना आरम्भ करते हैं. देवीभागवत महापुराण में कहा गया है कि, गोपिकाओं के अनुराग को देखते हुए भगवान कृष्ण ने चन्द्र से महारास का संकेत दिया, चन्द्र ने भगवान कृष्ण का संकेत समझते ही अपनी शीतल रश्मियों से प्रकृति को आच्छादित कर दिया.उन्ही किरणों ने भगवान कृष्ण के चहरे पर सुंदर रोली कि तरह लालिमा भर दी. फिर उनके अनन्य जन्मों के प्यासे बड़े बड़े योगी, मुनि,महर्षि और अन्य भक्त गोपिकाओं के रूप में कृष्ण लीला रूपी  महारास ने समाहित हो गए, कृष्ण कि वंशी कि धुन सुनकर अपने अपने कर्मो में लीन सभी गोपियां अपना घर-बार छोड़कर  भागती हुईं  वहां आ.पहुचीं. कृष्ण और गोपिकाओं का अद्भुत प्रेम देख कर चन्द्र ने अपनी सोममय किरणों से अमृत वर्षा आरम्भ कर दी जिसमे भीगकर यही गोपिकाएं अमरता को प्राप्त हुईं और भगवान कृष्ण के अमर प्रेम का भागीदार बनीं.

शरद पूर्णिमा का शुभ मुहूर्त

पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 
13 अक्‍टूबर 2019 की रात 12 बजकर 36 मिनट से

पूर्णिमा तिथि समाप्‍त: 
14 अक्‍टूबर की रात 02 बजकर 38 मिनट तक

चंद्रोदय का समय: 
13 अक्‍टूबर 2019 की शाम 05 बजकर 26 मिनट

शरद पूर्णिमा व्रत विधि

पूर्णिमा के दिन सुबह में इष्ट देव का पूजन करना चाहिए

इन्द्र और महालक्ष्मी जी का पूजन करके घी के दीपक जलाकर उसकी गन्ध पुष्प आदि से पूजा करनी चाहिए

ब्राह्माणों को खीर का भोजन कराना चाहिए और उन्हें दान दक्षिणा प्रदान करनी चाहिए

लक्ष्मी प्राप्ति के लिए इस व्रत को विशेष रुप से किया जाता है. इस दिन जागरण करने वालों की धन-संपत्ति में वृद्धि होती है

रात को चन्द्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही भोजन करना चाहिए

मंदिर में खीर आदि दान करने का विधि-विधान है. ऐसा माना जाता है कि इस दिन चांद की चांदनी से अमृत बरसता है

रात 12 बजे के बाद अपने परिजनों में खीर का प्रसाद बांटें.

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