संयुक्त राष्ट्र में जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर पाकिस्तान और चीन के मंसूबे नाकाम

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/08/17 10:35

नई दिल्ली: नई दिल्ली की कूटनीति के सामने पाकिस्तान चारो खाने चित हो गया.यह भारत की कूटनीति का ही नतीजा था कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) ने राज्य में सामान्य स्थिति बहाली के नई दिल्ली के प्रयासों को सराहा भी.UNSC के सदस्यों ने पाकिस्तान की औपचारिक बैठक और इस मुद्दे पर अनौपचारिक बयान की मांग को भी सिरे से खारिज कर दिया
वहीं रूस ने एक बार फिर भारत से दोस्ती निभाते हुए कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय नहीं बल्कि दोनों देशों के बीच का मामला है. दरअसल पाकिस्तान को समर्थन देना अब चीन की मजबूरी बन गया है. चीन के राजदूत ने कहा, यह जाहिर है कि भारत ने जो संवैधानिक संशोधन किया है और इससे स्थिति बदल गई है. चीन ने इस पर चिंता जाहिर की और कहा कि किसी भी एकतरफा फैसले से बचना चाहिए और ऐसा करना वैध नहीं है.

चीन के पाकिस्तान से दोस्ताना रवैये का कारण

चीन का यह बयान साफ तौर पर दिखाता है कि उसने भारत के प्रति कोई आक्रामक रुख नहीं अपनाया है. उसने वही किया जो पाकिस्तान को खुश करने के लिए वह कर सकता था. पाकिस्तान में चीन ने भारी निवेश किया है. दोनों देशों के बीच 46 बिलियन डॉलर की बड़ी लागत से चाइना पाकिस्तान इकनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) बन रहा है.
इसका मकसद पाकिस्तान से उत्तर पश्चिमी क्षेत्र शिंजियांग तक ग्वादर बंदरगाह, रेलवे और हाईवे के जरिए तेल और गैस की सप्लाई करना है. यह गलियारा पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर, गिलगित-बाल्टिस्तान और बलूचिस्तान होते हुए जाएगा. ग्वादर बंदरगाह को इस तरह बनाया जा रहा है ताकि 19 मिलियन टन कच्चा तेल सीधा चीन भेजा जा सके.

हांगकांग का मुद्दा 
लेकिन चीन इस मुद्दे पर भारत को सीधे तौर पर कुछ कह भी नहीं सकता. क्योंकि हांगकांग मसला भी उसके लिए कश्मीर से कम नहीं है. दरअसल हांगकांग ब्रिटेन का एक उपनिवेश था और 1997 में ब्रिटेन ने  हांगकांग को स्वायत्ता की शर्त के साथ चीन को सौंपा था. इस दौरान हांगकांग से अपनी राजनीतिक, स्वतंत्रता, सामाजिक और कानूनी व्यवस्था को कायम रखने का वादा किया गया था.

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