भारत को मिला पहला राफेल लड़ाकू विमान, अक्टूबर में आएगा भारत

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/09/21 10:49

नई दिल्ली :भारतीय वायुसेना को फ्रांस में पहला राफेल लड़ाकू विमान मिल गया है. गुरुवार को फ्रांस में भारतीय वायुसेना ने राफेल बनाने वाली कंपनी दसॉ एविएशन से पहला राफेल जेट रिसीव किया आपको बता दें कि राफेल डील में हुए कथित घोटाले को लेकर इसपर भारत में जमकर राजनीति हुई थी.फ्रांस में दसॉल्ट एविएशन की उत्पादन इकाई में बृहस्पतिवार को एयर मार्शल वीआर चौधरी के नेतृत्व वाली टीम ने आरबी01 टेल नंबर वाला राफेल प्राप्त किया. चौधरी ने खुद करीब एक घंटे इस विमान को उड़ाया. 
 एयरफोर्स ने पहला राफेल जेट रिसीव कर लिया है.भारत और फ्रांस के बीच 60 हजार करोड़ रुपये के राफेल सौदे के तहत पहले विमान को भारत की रजामंदी के आधार पर सौंपा जाना था. यह विमान अभी करीब सात महीने तक फ्रांस में रहेगा इस दौरान इसका ट्रायल होगा. इसके बाद भारत लाया जाएगा.

विमान की पर टेल आरबी01 नाम अगले वायु सेनाध्यक्ष एयर चीफ मार्शल आरकेएस भदौरिया के नाम पर है. भदौरिया ने देश के सबसे बड़े सौदे को अंतिम रूप दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी.  रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की प्रस्तावित फ्रांस यात्रा के दौरान 8 अक्तूबर को यह विमान वायुसेना के बेड़े से जुड़ जाएगा हालांकि इसे अगले साल मई में भारत लाया जाएगा.मीटिओर मिसाइल से लैस राफेल की मारक क्षमता पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों से कहीं अधिक है.इस विमान को भारत की जरूरत के मुताबिक विशेष हथियारों से लैस किया गया है. सूत्रों के मुताबिक मीटिओर मिसाइल से लैस इस विमान की जद में पूरा पाकिस्तान होगा. इसकी मारक क्षमता पाकिस्तानी लड़ाकू विमान से कहीं अधिक है. 2016 में हल्के लड़ाकू विमान तेजस के बाद वायुसेना के बेड़े में शामिल होने वाला यह पहला लड़ाकू विमान होगा.
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह 8 अक्टूबर को राफेल को औपचारिक तौर पर रिसीव करेंगे। वायुसेना का इरादा पहले 18 राफेल विमानों से अंबाला में अपनी 17 'गोल्डन एरोज' स्क्वाडन को पुनर्जीवित करने का इरादा है.ये विमान पश्चिम सीमा पर पाकिस्तानी खतरे से निपटेंगे। इसके बाद आने वाले अगले 18 जेट्स को 101 'फॉल्कन' स्क्वाडन में पश्चिम बंगाल स्थित हरिमासा बेस पर तैनात किया जाएगा। ये विमान चीनी सीमा पर भारतीय वायुसेना को मजबूती प्रदान करेंगे

24 पायलटों को दिया जाएगा प्रशिक्षण 
राफेल विमानों के परीक्षण और ट्रेनिंग के लिए लिए भारतीय पायलट इन्हें फ्रांस में कम-से-कम 1,500 घंटे उड़ाएंगे.भारतीय वायुसेना के 24 पायलटों को मई 2020 तक तीन अलग अलग बैच में भारत का राफेल लड़ाकू विमान उड़ाने का प्रशिक्षण दिया जाएगा. हालांकि कुछ पायलटों को फ्रांस की वायुसेना के विमानों में प्रशिक्षण पहले भी दिया गया है

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