इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड संशोधन विधेयक लोकसभा में पारित , घर खरीददार भी माने जाएंगे लेनदार

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/08/01 04:49

नई दिल्ली: लोकसभा में गुरुवार को दिवाला और दिवालियापन संहिता (दूसरा संशोधन) विधेयक, 2018 पारित किया.इस विधेयक का उद्देश्य ऋण शोधन अक्षमता और दिवाला कानून-2016 में संशोधन करना है, ताकि किसी रियल एस्टेट परियोजना के आवंटियों को ऋणदाता घोषित किया जा सके. 2016 में घरेलू खरीदारों को वित्तीय लेनदारों के रूप में स्वीकारने के लिए लाए गए संशोधन को लोकसभा में पारित कर दिया गया. इस विधेयक के तहत IBC की 7 धाराओं में 8 सुधार किए जाने हैं. इससे पहले लोकसभा में नए बिल की पूर्व सूचना को लेकर विपक्ष के सदस्यों ने आपत्‍ति जताई.वहीं लोकसभा से पारित होने के बाद आज राज्‍यसभा में राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग विधेयक, 2019 को पेश किया गया है.

इस विधेयक को इस साल की शुरुआत में सरकार द्वारा लाए गए अध्यादेश की जगह लेने के लिए लाया गया है, जिसे गोयल ने 23 जुलाई को पेश किया था। लोकसभा में विधेयक पर चर्चा के दौरान गोयल ने अपने जवाब में कहा. हम चाहते थे कि लाभ (समिति की सिफारिशों के) को तुरंत समाधान प्रक्रिया में शामिल किया जाए मुझे लगता है कि सरकार का ध्यान समाधान पर होना चाहिए, तरलता पर नहीं। तरलता हमारा अंतिम विकल्प होना चाहिए। और प्रक्रिया में देरी से नौकरियों के नुकसान की संभावना अधिक है. उन्होंने अध्यादेश लाने की आवश्यकता को भी घर खरीदारों के हितों की रक्षा से जोड़ा, जो अब वित्तीय लेनदारों के रूप में माने जाएंगे। उन्होंने कहा, घर खरीदारों के हितों की रक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है.पहले की प्रक्रिया के दौरान समाधान की लागत बहुत अधिक थी, जिसे अब कम किया गया है.वसूली की लागत नौ फीसदी थी और इसमें सात से आठ साल लगते थे उसके बाद भी वसूली की प्रक्रिया अटक जाती थी आईबीसी के तहत, वसूली की लागत को एक फीसदी से भी कम कर दिया गया है और औसत वसूली 55 फीसदी रही है जबकि कुछ मामलों में 100 फीसदी तक वसूली की गई है

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