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जैसलमेर शहर में एक घंटे तक टिड्डियों ने किया आक्रमण, बना अफरा-तफरी का माहौल

जैसलमेर शहर में एक घंटे तक टिड्डियों ने किया आक्रमण, बना अफरा-तफरी का माहौल

जैसलमेर: पाकिस्तान की सीमा से टिड्डियों ने एक बार फिर जोरदार हमला किया हैं. सोमवार सांय जैसलमेर शहर में करीब 1 घंटे से भी ज्यादा समय तक पूरे शहर में टिड्डियां को आक्रमण चलता रहा. लगातार चल रहे इन टिड्डियों के झुण्ड के कारण पूरे शहर में एक बारगी अफरातफरी का माहौल व्याप्त हो गया. लोग इन टिड्डियों को देखने के लिए बाहर निकल आए. सोनार किला, बस स्टैण्ड, पटवा हवेली व अन्य स्थानों पर टिड्डियों के झुण्ड मंडराते नजर आए. टिड्डियों को उड़ाने के लिये 3-4 गन शॉट की आवाजें सुनाई दी हैं लेकिन इसके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं मिल पाई है.  

नए हमले के बारे में टिड्डी विभाग को सूचित किया:
जिला प्रशासन ने टिड्डियों के इस नए हमले के बारे में टिड्डी विभाग को सूचित किया हैं जिन्होंने आगामी 1-2 दिनों में इन्हें नष्ट करने का आश्वासन दिया है. उधर बाड़मेर में भी कई स्थानों पर रविवार व सोमवार को ताजा टिड्डी हमले हुए हैं. इन ताजा टिड्डी हमलों से किसानों की चिन्ता को बढ़ा दिया है. 

1 घंटे से भी ज्यादा समय तक जैसलमेर शहर में मंडराता रहा टिड्डियों का झुण्ड:
असल में सोमवार सांय करीब 4:45 पर अचानक टिड्डियों के झुण्ड आना शुरू हुए. अरबों की संख्या में टिड्डियों के यह झुण्ड करीब 1 घंटे से भी ज्यादा समय तक जैसलमेर शहर में मंडराता रहा. कई कि.मी. लंबे यह टिड्डी झुण्ड खत्म होने का नाम नहीं ले रहा था. पूरे शहर में चारों तरफ टिड्डियां ही टिड्डियां नजर आने लगी. लोग सड़कों पर उतर आए तथा इन टिड्डियों का वीडियो बनाने लगे. लोगों में एक बार भय का माहौल भी बन गया क्योंकि टिड्डियां लगातार नीची आ रही थी जिससे लोगों की आम दिनचर्या प्रभावित होने का खतरा बन गया था. करीब 6 बजे तक टिड्डियां लगातार चल रही थी. इस संबंध में यह भी संभावना व्यक्त की जा रही हैं कि रविवार से मौसम में बदलाव हुवा हैं तथा जैसलमेर के कई इलाकों में बादल छाए हुए हैं व कहीं बरसात भी हुई हैं. हवा के बदले हुए डायरेक्शन में यह टिड्डियां सीमा पार से जैसलमेर तक पहुंची हैं.

उड़ान सेवाओं में बाधा नहीं होने की जानकारी मिली: 
वहीं दूसरी तरफ भारतीय वायुसेना द्वारा भी इन टिड्डियों के कारण किसी प्रकार के ऑपरेशन में बाधा न हो इसके लिए टिड्डियों को उड़ाने के लिए पूरे प्रबंध किये थे. फिलहाल किसी प्रकार की उड़ान सेवाओं में बाधा नहीं होने की जानकारी मिली है. 

टिड्डी विभाग द्वारा इन्हें नष्ट करने की कार्यवाही लगातार की जा रही: 
जिला कलेक्टर नमित मेहता ने इस संबंध में बताया कि पाकिस्तान सीमा पार से ताजा टिड्डियों का हमला दो दिन पूर्व फतेहगढ़ क्षेत्र में हुआ था. टिड्डी विभाग द्वारा इन्हें नष्ट करने की कार्यवाही लगातार की जा रही हैं. संभावना व्यक्त की जा रही हैं कि उनमें से बची हुई टिड्डियां जैसलमेर शहर तक पहुंची हैं. इस संबंध में उन्होंने टिड्डी नियंत्रण विभाग के अधिकारियों से बात की हैं उन्होंने आश्वस्त किया हैं कि आगामी 1-2 दिनों में इन टिड्डियों को नष्ट किया जाएगा. वहीं दूसरी तरफ बाड़मेर के गुड़ामलानी, धोरामन्ना, भिंयाड़, उंडू आदि कई इलाकों में जबरदस्त टिड्डियां आई हैं. उन्हें किसान जिला प्रशासन के सहयोग से नष्ट करने की कार्यवाही कर रहे हैं. 

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VIDEO: प्रदेश के किसानों के लिए राहतभरी खबर, समर्थन मूल्य पर मूंग,उड़द,सोयाबीन एवं मूंगफली की खरीद

जयपुर: प्रदेश के किसानों के लिए राहत भरी खबर है. प्रदेश में समर्थन मूल्य पर मूंग, उड़द, सोयाबीन एवं मूंगफली की खरीद के लिये ऑनलाइन पंजीकरण 20 अक्टूबर से शुरू किया जा रहा है. 850 से अधिक खरीद केन्द्रों पर मूंग, उड़द एवं सोयाबीन की 1 नवम्बर से तथा 18 नवम्बर से मूंगफली खरीद की जाएगी. प्रदेश में मूंग के लिए 365, उड़द के लिए 161, मूंगफली के 266 एवं सोयबीन के लिए 79 खरीद केन्द्र चिह्नित किए गए हैं. पूर्व वर्ष की तुलना में इस वर्ष 500 से अधिक खरीद केन्द्र खोले गये है.

सहकारिता मंत्री उदयलाल आंजना ने दी जानकारी:
सहकारिता मंत्री उदयलाल आंजना ने बताया कि किसानों को किसी प्रकार की असुविधा नहीं हो इसके लिए ऑनलाइन पंजीकरण की व्यवस्था ई-मित्र एवं खरीद केन्द्रों पर सुबह 9 बजे से शाम 7 बजे तक की गई है. केन्द्र सरकार को मूंग की 3.57 लाख मीट्रिक टन, उडद 71.55 हजार, सोयाबीन 2.92 लाख तथा मूंगफली 3.74 लाख मीट्रिक टन की खरीद  के लक्ष्य की स्वीकृति भारत सरकार ने दी है. पंजीकरण के अभाव में किसानों से समर्थन मूल्य पर खरीद संभव नहीं होगी. आंजना ने बताया कि वर्ष 2020-21 के लिए मूंग के लिए 7196 रुपए एवं उड़द के लिए 6000 रुपए, मूंगफली के लिए 5275 रुपए एवं सोयाबीन के लिए 3880 रुपए प्रति क्विंटल प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य घोषित किया है. किसानों को अपनी उपज बेचने में किसी प्रकार की परेशानी न हो इसके लिए खरीद केन्द्रों पर आवश्यकतानुसार तौल-कांटें लगाये जायेंगे एवं पर्याप्त मात्रा में बारदाना उपलब्ध कराया जाएगा. प्रमुख सचिव कुंजीलाल मीणा ने बताया कि किसान को  जनआधार कार्ड नम्बर, खसरा गिरदावरी की प्रति एवं बैंक पासबुक की प्रति पंजीयन फार्म के साथ अपलोड़ करनी होगी. जिस किसान द्वारा बिना गिरदावरी के अपना पंजीयन करवाया जाएगा, उसका पंजीयन समर्थन मूल्य पर खरीद के लिये मान्य नहीं होगा. यदि ई-मित्र द्वारा गलत पंजीयन किये जाते या तहसील के बाहर पंजीकरण किये जाते है तो ऐसे ई-मित्रों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्यवाही की जाएगी.

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20 अक्टूबर से शुरू होगा हेल्प लाइन नम्बर: 
रजिस्ट्रार मुक्तानन्द अग्रवाल ने बताया कि किसान एक जनआधार कार्ड में अंकित नाम में से जिसके नाम गिरदावरी होगी उसके नाम से एक पंजीयन करवा सकेगा. किसान इस बात का विशेष ध्यान रखे कि जिस तहसील में कृषि भूमि में उसी तहसील के कार्यक्षेत्र वाले खरीद केन्द्र पर उपज बेचान हेतु पंजीकरण करावें. दूसरी तहसील में यदि पंजीकरण कराया जाता है तो पंजीकरण मान्य नही होगा. राजफैड की प्रबंध निदेशक सुषमा अरोडा ने बताया कि किसान पंजीयन कराते समय यह सुनिश्चित कर ले कि पंजीकृत मोबाईल नम्बर, से जनआधार कार्ड से लिंक हो जिससे समय पर तुलाई दिनांक की सूचना मिल सके. किसान प्रचलित बैंक खाता संख्या सही दे ताकि ऑनलाइन भुगतान के समय किसी प्रकार की परेशानी किसान को नहीं हो. उन्होंने बताया कि किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए हेल्प लाइन नम्बर 1800-180-6001 भी 20 अक्टूबर से प्रारंभ हो जाएगा. 

मुश्किल समय में कांग्रेस किसानों के साथ, कल होगा किसान सम्मेलन- डोटासरा

मुश्किल समय में कांग्रेस किसानों के साथ, कल होगा किसान सम्मेलन- डोटासरा

जयपुर: बिरला सभागार सज कर तैयार है, कल सुबह यहां कांग्रेस पार्टी किसान सम्मेलन का आयोजन करेगी. सोशल डिस्टेंशिंग के साथ ये कार्यक्रम किया जाएगा. इसी सिलसिले में प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा ने पी सी सी में प्रेस वार्ता की और केंद्र के कृषि कानूनों को किसान विरोधी बताया.

किसानों को कमजोर करने का काम किया: 
एक बार फिर प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने जमकर हमला बोला है. डोटासरा ने कहा कि केंद्र सरकार ने तीन कृषि कानूनों के जरिए किसानों को कमजोर करने का काम किया है, किसान मुश्किल में हैं और इस मुश्किल समय में कांग्रेस हमेशा किसानों के साथ खड़ी रहेगी.

इन कानूनों से मंडी व्यवस्था खत्म करने का काम किया गया:  
पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा ने आज प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने गुजरात के सीएम रहते लाभकारी मूल्य और एमएसपी की पैरवी की थी आज मोदी जी अपनी ही बात से मुकर रहे हैं. उन्होंने कहा कि कृषि कानूनों के जरिए किसान की जमीन पर कब्जे का षड्यंत्र, नए-नए बिचौलिए पैदा करने का षड्यंत्र के साथ साथ इन कानूनों से मंडी व्यवस्था खत्म करने का काम किया गया है.

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प्रदेश स्तरीय किसान सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा:
पीसीसी चीफ डोटासरा ने मीडिया से कहा कि इन तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ कांग्रेस का 2 अक्टूबर से शुरू हुआ हस्ताक्षर अभियान 30 अक्टूबर तक चलेगा तो वहीं तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ रविवार को बिरला सभागार में प्रदेश स्तरीय किसान सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है.

किसान संगठनों के प्रतिनिधी को भी इसमें शिरकत करेंगे:
सुबह 10:30 बजे से आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, मंत्रिमंडल के सदस्य, विधायक, पूर्व विधायक, पूर्व मंत्री और पार्टी के पदाधिकारी शामिल होंगे. इसके अलावा किसान संगठनों के प्रतिनिधियों को भी इसमें शिरकत करेंगे. सम्मेलन में सोशल डिस्टेंसिंग की पालना करने, मास्क सेनेटाइजर की व्यवस्था की गई है.

कृषि कानूनों की खामियों को उजागर करने का काम करेंगे:
किसान सम्मेलन में वक्ता कृषि कानूनों की खामियों को उजागर करने का काम करेंगे साथ ही उसमें प्रस्ताव भी पारित किया जाएगा. इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, मंत्रिमंडल के सदस्य, विधायक, पूर्व विधायक, पूर्व मंत्री और पार्टी के पदाधिकारी शामिल होंगे. इसके अलावा किसान संगठनों के प्रतिनिधियों को भी इसमें शिरकत करेंगे. सम्मेलन में सोशल डिस्टेंसिंग की पालना करने, मास्क सेनेटाइजर की व्यवस्था की गई है. 

...फर्स्ट इंडिया के लिये योगेश शर्मा की रिपोर्ट
 

कृषि कानून के विरोध में धरने पर बैठे पंजाब के CM, राहुल गांधी ने बताया किसानों की मौत का फरमान

कृषि कानून के विरोध में धरने पर बैठे पंजाब के CM, राहुल गांधी ने बताया किसानों की मौत का फरमान

नई दिल्ली: कृषि कानून के विरोध में पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टम अमरिंदर सिंह शहीद-ए-आजम भगत सिंह की जयंती पर उनके जन्मस्थान खटकर कलां गांव में धरना  दे रहे हैं. उनके साथ मंत्री, विधायक और कार्यकर्ता धरने पर बैठ गए हैं. धरना शुरू करने से पहले सीएम कैप्टम अमरिंदर सिंह ने भगत सिंह की प्रतिमा को श्रद्धांजलि दी.

विधेयकों को राष्ट्रपति की मंजूरी को 'दुर्भाग्यपूर्ण और निराशाजनक': 
इस दौरान उन्होंने कृषि विधेयकों को राष्ट्रपति की मंजूरी को 'दुर्भाग्यपूर्ण और निराशाजनक' बताया है. अमरिंदर सिंह ने कहा कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों को संसद में अपनी चिंताएं जाहिर करने का मौका नहीं दिया गया. ऐसे में राष्ट्रपति की मंजूरी उन किसानों के लिए झटका है जो केंद्र के इन कानूनों के खिलाफ सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं. इन कानूनों के लागू होने से पंजाब का कृषि क्षेत्र बर्बाद हो जाएगा. 

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राहुल गांधी ने बताया किसानों की मौत का फरमान: 
वहीं कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने कृषि कानून को किसानों के मौत का फरमान बताया है. उन्होंने ट्वीट कर कहा कि नया कृषि कानून किसानों के लिए मौत का फरमान है. उनकी आवाज को संसद और संसद के बाहर दबाया जा रहा है. ये सबूत है कि देश में लोकतंत्र मर चुका है. 

कांग्रेस सांसद ने दी सुप्रीम कोर्ट में चुनौती: 
इससे पहले केरल से कांग्रेस सांसद टीएन प्रतापन ने कृषि अधिनियम को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. संसद द्वारा किसानों से जुड़े बिल को वापस लेने के लिए रिट याचिका दायर की गई है. सुप्रीम कोर्ट के समक्ष टीएन प्रतापन के वकील आशीष जॉर्ज, एडवोकेट जेम्स पी थॉमस और एडवोकेट सीआर रेखेश शर्मा पेश होंगे.

ट्रैक्टर में आग मामले में 5 लोगों को हिरासत में लिया:  
वहीं दूसरी ओर दिल्ली पुलिस ने इंडिया गेट के पास ट्रैक्टर में आग मामले में 5 लोगों को हिरासत में लिया है. इनकी पहचान मनजोत सिंह, रमन सिंह, राहुल, साहिब और सुमित के तौर पर हुई है. ये सभी पंजाब के हैं. उनसे पूछताछ की जा रही है एक गाड़ी भी बरामद हुई है.

कांग्रेस सांसद ने सुप्रीम कोर्ट में कृषि अधिनियम को दी चुनौती, कानून वापस लेने की मांग

कांग्रेस सांसद ने सुप्रीम कोर्ट में कृषि अधिनियम को दी चुनौती, कानून वापस लेने की मांग

नई दिल्ली: कृषि बिल के खिलाफ सड़क पर जारी प्रदर्शन का मसला अब सुप्रीम कोर्ट में पहुंच गया है. केरल से कांग्रेस सांसद टीएन प्रतापन ने कृषि अधिनियम को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. संसद द्वारा किसानों से जुड़े बिल को वापस लेने के लिए रिट याचिका दायर की गई है. सुप्रीम कोर्ट के समक्ष टीएन प्रतापन के वकील आशीष जॉर्ज, एडवोकेट जेम्स पी थॉमस और एडवोकेट सीआर रेखेश शर्मा पेश होंगे.

ट्रैक्टर में आग मामले में 5 लोगों को हिरासत में लिया:  
वहीं दूसरी ओर दिल्ली पुलिस ने इंडिया गेट के पास ट्रैक्टर में आग मामले में 5 लोगों को हिरासत में लिया है. इनकी पहचान मनजोत सिंह, रमन सिंह, राहुल, साहिब और सुमित के तौर पर हुई है. ये सभी पंजाब के हैं. उनसे पूछताछ की जा रही है एक गाड़ी भी बरामद हुई है.

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कर्नाटक में जदएस के कार्यकर्ताओं ने शिवमोगा में एक बाइक रैली निकाली:
कर्नाटक में भी आज कृषि बिल का विरोध देखने को मिल रहा है. कर्नाटक में जनता दल सेक्युलर (जदएस) के कार्यकर्ताओं ने शिवमोगा में एक बाइक रैली निकाली, उन्हें पुलिस ने लक्ष्मी थिएटर सर्कल पर रोक दिया. कृषि कानून, भूमि सुधार अध्यादेश, कृषि उपज मंडी समिति में संशोधन और श्रम कानूनों के खिलाफ किसान संगठनों ने आज राज्यव्यापी बंद का आह्वान किया है. 

कृषि कानून के खिलाफ देशभर में विरोध प्रदर्शन जारी:
बता दें कि कृषि कानून के खिलाफ देशभर में विरोध प्रदर्शन जारी है. दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और पश्चिमी उत्तर प्रदेश जैसे क्षेत्रों में इसका व्यापक असर देखने को मिल रहा है. 

कृषि बिल पर बवाल जारी, दिल्ली में संसद भवन के पास किसानों ने लगाई ट्रैक्टर में आग

कृषि बिल पर बवाल जारी, दिल्ली में संसद भवन के पास किसानों ने लगाई ट्रैक्टर में आग

नई दिल्ली: राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने तीन कृषि बिलों पर हस्ताक्षर कर दिए हैं, यानी अब ये कानून बन चुके हैं. ऐसे में आज भी देश के कई हिस्सों में बिल के खिलाफ प्रदर्शन हो रहा है. इसके साथ ही प्रदर्शन की आग देश की राजधानी दिल्ली तक भी पहुंच गई है. आज सुबह दिल्ली में किसानों ने राजपथ के पास एक ट्रैक्टर में आग लगा दी. ये लोग ट्रैक्टर को इंडिया गेट के पास लाकर प्रदर्शन कर रहे थे. मौके पर दिल्ली पुलिस और फायर ब्रिगेड ने पहुंच कर आग पर काबू पाया.  

वीआईपी इलाकों में धारा 144 लागू: 
हालांकि दिल्ली में इंडिया गेट और आस पास के वीआईपी इलाकों में धारा 144 लागू है और कोरोना वायरस के मद्देनजर लोगों को इकट्ठा होने की इजाजत नहीं है.प्रदर्शनकारियों को इक्कठा होने नहीं दिया गया. दूसरी ओर पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह आज धरने पर भी बैठेंगे. 

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पंजाब में किसानों और सियासी दलों का विरोध और तेज: 
इसके साथ ही पंजाब में किसानों और सियासी दलों का विरोध और तेज हो रहा है. किसान संगठनों ने पंजाब में रेल रोको प्रदर्शन 29 सितंबर तक बढ़ा दिया है. बिल के खिलाफ अकाली दल जगह-जगह रैली कर रहा है.

कर्नाटक में भी आज किसानों ने फिर राज्य बंद बुलाया:
वहीं कर्नाटक में भी आज किसानों ने फिर राज्य बंद बुलाया है. कृषि बिल के विरोध में राज्य के किसानों ने ये बंद बुलाया है, इस दौरान सोमवार सुबह शिवमोगा में ट्रैफिक सामान्य दिखा.

Bharat Bandh: कृषि बिलों के विरोध में आज किसानों का भारत बंद, पंजाब और हरियाणा में ज्यादा असर

Bharat Bandh: कृषि बिलों के विरोध में आज किसानों का भारत बंद, पंजाब और हरियाणा में ज्यादा असर

नई दिल्ली: किसानों को लेकर हाल ही में संसद से पास तीन कृषि विधेयकों के विरोध में आज किसान संगठनों ने देशव्यापी आंदोलन का आह्वान किया है. इसमें 31 संगठन शामिल हो रहे हैं. किसान संगठनों को कांग्रेस, RJD, समाजवादी पार्टी, अकाली दल, AAP, TMC समेत कई पार्टियों का साथ भी मिला है. हालांकि आंदोलन का ज्यादा असर पंजाब और हरियाणा में दिख रहा है. इससे पहले पंजाब में तीन दिवसीय रेल रोको अभियान की गुरुवार से शुरुआत हो गई है. किसान रेलवे ट्रैक पर डटे हुए हैं और बिल को वापस लेने की मांग कर रहे हैं.

शनिवार तक 20 विशेष ट्रेनें आंशिक रूप से रद्द:
रेल रोको आंदोलन को देखते हुए रेलवे ने शनिवार तक 20 विशेष ट्रेनें आंशिक रूप से रद्द और पांच को गंतव्य से पहले रोक दिया है. वहीं, हरियाणा में किसानों-आढ़तियों ने राजमार्ग जाम करने की भी चेतावनी दी है. उधर, यूपी में भी सपा ने किसान कर्फ्यू और जाम का आह्वान किया है. 

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बिहार के हाजीपुर में भी खास असर:
कृषि बिल के विरोध में बुलाए गए भारत बंद का सबसे खास असर बिहार के हाजीपुर में देखने को मिल रहा है. गांधी सेतु के निकट NH 19 पर जाम लगाया गया है. सुबह से ही पप्पू यादव की पार्टी जन अधिकार पार्टी के समर्थक सड़क पर डटे हैं. बंद समर्थकों ने NH 19 को बंद करा दिया है. सड़कों पर टायर जला कर नारेबाजी की जा रही है. 

दिल्ली-चंडीगढ़ बस सेवा को बंद कर दिया गया: 
वहीं भारत बंद के चलते दिल्ली-चंडीगढ़ बस सेवा को बंद कर दिया गया है. किसानों के विरोध के चलते ट्रेन के पहिये भी थमे हैं. पंजाब सरकार ने यह हिदायत भी दी है कि पंजाब बंद के दौरान किसानों के प्रति नरम रवैया अपनाया जाए और उन पर कोई सख्त जबरदस्ती न की जाए.

इन विधेयकों का हो रहा विरोध: 
केंद्र सरकार ने हाल ही में कृषि सुधारों से जुड़े तीन बिल संसद से पास कराए हैं. ये हैं कृषि उपज व्यापार एवं वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) बिल-2020, कृषक (सशक्तीकरण एवं संरक्षण) कीमत आश्वासन समझौता बिल-2020 और कृषि सेवा विधेयक-2020। किसानों को आशंका है कि संसद से पारित बिल के जरिये न्यूनतम समर्थन मूल्य खत्म करने का रास्ता खुल जाएगा और उन्हें बड़े कॉरपोरेट की दया पर रहना पड़ेगा. 


 

किसान बिल के विरोध में लंबे वक्त के बाद सियासी कार्यक्रम में दिखे नवजोत सिंह सिद्धू, सड़कों पर उतरकर किया प्रदर्शन

किसान बिल के विरोध में लंबे वक्त के बाद सियासी कार्यक्रम में दिखे नवजोत सिंह सिद्धू, सड़कों पर उतरकर किया प्रदर्शन

अमृतसर: केंद्र सरकार के द्वारा पारित किए गए कृषि बिलों के खिलाफ नेता नवजोत सिंह सिद्धू ने अमृतसर में सड़क पर उतरकर प्रदर्शन किया. इस दौरान उनके साथ सैकड़ों की भीड़ में समर्थक भी दिखाई दिए. इस दौरान पूर्व क्रिकेटर और कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि किसान बिल से जमाखोरी को बढ़ावा मिलेगा. क्या सरकार रोटी को आवश्यक वस्तु नहीं मानती है? 

सिद्धू करीब एक साल बाद मैदान में उतरे:  
इस दौरान सिद्धू ट्रैक्टर पर सवार दिखे. साथ ही किसानों के हाथ में तख्तियां थीं और कुछ ने काले झंडे भी लिए हुए थे. सिद्धू करीब एक साल बाद मैदान में उतरे हैं. नवजोत सिंह सिद्धू पिछले काफी लंबे वक्त के बाद किसी बड़े सार्वजनिक कार्यक्रम में दिखे हैं. उनका पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर के साथ रिश्ता सही नहीं रहा है, ऐसे में यही वजह है कि पंजाब की पॉलिटिक्स में कम एक्टिव हैं.  हालांकि, कोरोना संकट के दौरान भी वो लगातार सोशल मीडिया पर अपने वीडियो डाल मुद्दों पर बात रखते रहे. 

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पंजाब में किसान बिल का मुद्दा बेहद गरमाया हुआ:
बता दें कि पंजाब में किसान बिल का मुद्दा बेहद गरमाया हुआ है. इससे पहले शिरोमणी अकाली दल की नेता हरसिमरत कौर बादल ने मोदी कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया था. उन्होंने कहा कि सरकार किसानों को विश्वास में लेने में कामयाब नहीं हुई. हालांकि, केंद्र सरकार की ओर से लगातार इस बिल को लेकर विपक्ष पर झूठ फैलाने का आरोप लगाया जा रहा है. और किसानों को विपक्ष की बातों में ना आने की सलाह दी जा रही है. 


 

सदन की कार्यवाही से विपक्ष के बहिष्कार के बीच कृषि से जुड़ा तीसरा बिल भी राज्यसभा से पास

सदन की कार्यवाही से विपक्ष के बहिष्कार के बीच कृषि से जुड़ा तीसरा बिल भी राज्यसभा से पास

नई दिल्ली: विपक्ष के बहिष्कार के बीच कृषि से जुड़ा तीसरा बिल आवश्यक वस्तु विधेयक, 2020 भी राज्यसभा से पास हो गया है. कृषि से जुड़े दो बिल पहले ही राज्यसभा से पास हो चुके हैं. लोकसभा ने 15 सितंबर को आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक 2020 को मंजूरी दे दी थी.

इस बिल में खाद्य पदार्थों को नियंत्रण मुक्त करने का प्रावधान:
इस बिल में खाद्य पदार्थों जैसे अनाज, दालें और प्याज को नियंत्रण मुक्त करने का प्रावधान है. बिल पास होने के बाद अब अनाज, दलहन, खाद्य तेल, आलू-प्याज आवश्यक वस्तु नहीं होंगे. उत्पादन, स्टोरेज, डिस्ट्रीब्यूशन पर सरकारी नियंत्रण खत्म होगा. फूड सप्लाई चेन के आधुनिकीकरण में मदद मिलेगी. उपभोक्ताओं के लिए भी कीमतों में स्थिरता बनी रहेगी. सब्जियों की कीमतें दोगुनी होने पर स्टॉक लिमिट लागू होगी.

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सरकार बता रही कृषि क्षेत्र की दिशा में महत्वपूर्ण कदम: 
इससे पहले 20 सितंबर को कृषि से जुड़े दो महत्वपूर्ण विधेयकों को राज्यसभा ने विपक्षी सदस्यों के भारी हंगामे के बीच ध्वनिमत से अपनी मंजूरी दे दी थी. सरकार द्वारा इन दोनों विधेयकों को देश में कृषि क्षेत्र से जुड़े अबतक के सबसे बड़े सुधार की दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम बताया जा रहा है.

राज्यसभा की कार्यवाही का बहिष्कार करने का फैसला:  
वहीं इससे पहले मौजूदा मानसून सत्र में कांग्रेस और विपक्षी दलों द्वारा राज्यसभा की कार्यवाही का बहिष्कार करने का फैसला किए जाने के बाद सभी आठ निलंबित सांसदों ने अपना धरना प्रदर्शन खत्म कर दिया है. विपक्षी दलों के राज्यसभा सांसदों ने राज्यसभा का वॉकआउट किया है. इसमें कांग्रेस के अलावा समाजवादी पार्टी (सपा), राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी), डीएमके, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी), आम आदमी पार्टी (आप), वामदल, आरजेडी, टीआरएस और बीएसपी ने भी कार्यवाही का बहिष्कार किया है.