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एसआइटी के सामने पेश 84 दंगे का गवाह, MP सीएम कमलनाथ मुश्किल में

एसआइटी के सामने पेश 84 दंगे का गवाह, MP  सीएम कमलनाथ  मुश्किल में

नई दिल्ली: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के लिए संकट बढ़ गया है.1984 सिख विरोधी दंगों में कांग्रेस के कई नेताओं का नाम आता है, जिसमें सबसे बड़ा नाम मध्य प्रदेश के मौजूदा मुख्यमंत्री कमलनाथ (Chief Minister Kamal Nath) का है. खबर है कि मालमे में गवाह मुख्तयार सिंह अपना बयान दर्ज कराने के लिए सोमवार को विशेष जांच टीम (SIT) के सामने पेश हुए. पिछले दिनों शिरोमणि अकाली दल (SAD) नेता मनिंदर सिरसा ने इसका खुलासा किया था.  शिरोमणि अकाली दल (शिअद) नेता मनजिंदर सिंह सिरसा ने सोमवार को गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर गवाहों की सुरक्षा की मांग की.
मुलाकात के बाद शिअद नेता ने कहा कि मामले में गवाहों की सुरक्षा को खतरा है. वहीं अब इस मामले से दिल्‍ली में आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की मुश्‍किलें बढ़ सकती है.

मुख्तयार सिंह ने बड़ा कदम उठाते हुए सोमवार को दक्षिणी दिल्ली के खान मार्केट इलाके में बने SIT के कार्यालय जाकर घटना का ब्योरा दिया. यह पहला मौका है जब मुख्तयार सिंह 3 सदस्यीय SIT टीम के सामने पेश हुए हैं. SIT में बयान दर्ज कराने के बाद उन्होंने मीडिया से बात करने से इन्कार कर दिया. सिर्फ इतना कहा कि वे SIT के समक्ष दिए बयान के बारे में नहीं बताएंगे.एसआइटी में बयान दर्ज कराने के बाद उन्होंने कहा कि वह जो कुछ कहा है उसके बारे में कोई जानकारी सार्वजनिक नहीं करेंगे

सूत्रों के मुताबिक मुख्तयार सिंह ने SIT सदस्यों को पूरी घटना के बारे में बता दिया है.इस टीम में एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी, एक पुलिस उपायुक्त और एक रिटायर जिला एवं सत्र न्यायाधीश शामिल हैं 9 सिंतबर को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मामला फिर से खोलने की मंजूरी दी थी.मोदी सरकार ने 2015 में सिख विरोधी दंगों की जांच के लिए SIT गठित कर दी थी

31 अक्टूबर 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद सिख विरोधी दंगे शुरू हो गए थे.शुरू में कमलनाथ मामले में आरोपित थे लेकिन कोर्ट ने उनके खिलाफ कोई सुबूत नहीं पाया था.72 वर्षीय कांग्रेस नेता और नेहरू-गांधी परिवार के भरोसेमंद माने जाने वाले कमलनाथ संकट का सामना कर रहे हैं क्योंकि लंदन में रहने वाले पत्रकार संजय सूरी ने भी मामले में गवाही देने की इच्छा जताई है.
सूरी ने 15 सितंबर को एसआइटी को पत्र भेजकर पेश होने के लिए उपयुक्त समय और तारीख तय करने को कहा हैसूरी का पत्र शिअद नेता मनिंदर सिरसा ने ट्विटर पर साझा किया है

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PCC चीफ गोविंद डोटासरा का बयान, कहा- तीनों कानून किसानों की जमीनों पर पूंजीपतियों के कब्जा करवाने का षड्यंत्र

जयपुर: भारत सरकार के कृषि विधेयकों के विरोध में पीसीसी चीफ गोविन्द सिंह डोटासरा के नेतृत्व में कांग्रेस नेताओं के प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को जिला कलेक्टर को राज्यपाल के नाम ज्ञापन दिया. डोटासरा के साथ परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास, राजस्व मंत्री हरीश चौधरी सहित अन्य कांग्रेस नेता मौजूद रहे. इस अवसर पर पीसीसी चीफ डोटासरा ने कहा कि तीनों केंद्रीय कानूनों के खिलाफ कलेक्टर को ज्ञापन दिया. तीनों कानून किसान विरोधी है, यह किसानों की जमीनों पर पूंजीपतियों के कब्जा करवाने का षड्यंत्र हैं. सुषमा स्वराज के बयान का उल्लेख करते हुए डोटासरा ने कहा कि बीजेपी की सोच किसानों के बारे में बदल गई है. डोटासरा ने कहा कि केंद्र तीनों कानूनों को वापस ले. ये कानून बिना किसी से सलाह के लाए गए, कांग्रेस ने पहले भी विरोध किया था आगे भी विरोध करेगी. 

भारत में किसान को 15 हजार रुपए से कम सब्सिडी मिलती है:
राजस्व मंत्री हरीश चौधरी ने कहा कि केंद्र सरकार की सोच शहर और कॉरपोरेट को मजबूत करने की है. भारत में किसान को 15 हजार रुपए से कम सब्सिडी मिलती है. अमेरिका में हर किसान को 44 लाख रुपए की सब्सिडी मिलती है. हम अंतिम दम तक लड़ेंगे. परिवहन मंत्री प्रतापसिंह खाचरियावास ने कहा कि केंद्र सरकार तानाशाही पर उतर आई है. तीन बिलों के खिलाफ किसान सड़कों पर आ गया है. किसान किसी की गुलामी बर्दाश्त नहीं करेगा. मंत्री प्रतापसिंह खाचरियावास ने कहा कि जुल्म और आतंक के जोर पर आप बिल पास करवा सकते हैं, लेकिन आप किसान का दिल नहीं जीत सकते, मोदी सरकार तानाशाही पर उतर आई है. 

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धारा 144 का उल्लंघन नजर आया:
राज्य सरकार ने कोरोना संक्रमण के चलते राजधानी जयपुर सहित 11 जिला मुख्यालय पर धारा 144 लगा रखी है जिसमें नियमानुसार 5 से अधिक व्यक्ति एक जगह इकट्ठे नहीं हो सकते. लेकिन जयपुर कलेक्ट्रेट में ज्ञापन देने के समय इसका उल्लंघन साफ नजर आया. ज्ञापन देने वालों में तीनों मंत्रियों के अलावा विधायक कृष्णा पूनिया, पुष्पेंद्र भारद्वाज, मुमताज मसीह व मनोज मुद्गल सहित अन्य कांग्रेसी नेता भी मौजूद थे. 

कृषि मंडियों में जैसे काम पहले होता था, वैसे ही अब भी होगा - PM मोदी

कृषि मंडियों में जैसे काम पहले होता था, वैसे ही अब भी होगा - PM मोदी

नई दिल्ली: बिहार को विधानसभा चुनाव से पहले सौगात मिलने का सिलसिला जारी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज बिहार के सभी 45,945 गांवों को ऑप्टिकल फाइबर इंटरनेट सेवाओं से जोड़ने के प्रोजेक्ट और राजमार्गों से जुड़ी 9 परियोजनाओं का उद्घाटन किया है. इस दौरान उन्होंने कहा कि देश के गांवों में इंटरनेट उपयोग करने वालों की संख्या शहरों से ज्यादा हो जाएगी. किसान, गांव के युवा, महिलाएं आसानी से इंटरनेट का इस्तेमाल करेंगे इस पर भी लोग सवाल उठाते थे, लेकिन अब सारी स्थितियां बदल गई है.

ये सुधार 21वीं सदी के भारत की जरूरत:  
इस दौरान कृषि बिल पर बोलते हुए पीएम मोदी ने कहा कि कल देश की संसद ने, देश के किसानों को नए अधिकार देने वाले बहुत ही ऐतिहासिक कानूनों को पारित किया है. मैं देश के लोगों को, देश के किसानों, देश के उज्ज्वल भविष्य के आशावान लोगों को भी इसके लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूं. ये सुधार 21वीं सदी के भारत की जरूरत हैं.

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ये कानून, ये बदलाव कृषि मंडियों के खिलाफ नहीं: 
प्रधानमंत्री ने कहा कि मैं यहां स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि ये कानून, ये बदलाव कृषि मंडियों के खिलाफ नहीं हैं. कृषि मंडियों में जैसे काम पहले होता था, वैसे ही अब भी होगा. बल्कि ये हमारी ही एनडीए सरकार है जिसने देश की कृषि मंडियों को आधुनिक बनाने के लिए निरंतर काम किया है. 

नए कृषि सुधारों ने किसान को ये आजादी दी:
उन्होंने कहा कि हमारे देश में अब तक उपज बिक्री की जो व्यवस्था चली आ रही थी, जो कानून थे, उसने किसानों के हाथ-पांव बांधे हुए थे. इन कानूनों की आड़ में देश में ऐसे ताकतवर गिरोह पैदा हो गए थे, जो किसानों की मजबूरी का फायदा उठा रहे थे. आखिर ये कब तक चलता रहता? नए कृषि सुधारों ने किसान को ये आजादी दी है कि वो किसी को भी, कहीं पर भी अपनी फसल अपनी शर्तों बेच सकता है. उसे अगर मंडी में ज्यादा लाभ मिलेगा, तो वहां अपनी फसल बेचेगा. मंडी के अलावा कहीं और से ज्यादा लाभ मिल रहा होगा, तो वहां बेचने पर भी मनाही नहीं होगी.


 

राज्यसभा में किसान बिल पर जोरदार हंगामा, 8 सांसद एक हफ्ते के लिए हुए निलंबित

राज्यसभा में किसान बिल पर जोरदार हंगामा, 8 सांसद एक हफ्ते के लिए हुए निलंबित

नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र का आज आठवां दिन है. राज्यसभा में आज विपक्षी सांसदों के हंगामे का मुद्दा उठा. सभापति ने हंगामा करने वाले सांसदों के खिलाफ कार्रवाई की है. उन्होंने हंगामा करने वाले आठ विपक्षी सांसदों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उन्हें एक हफ्ते के लिए निलंबित कर दिया है. यानी वे एक हफ्ते तक सदन की कार्यवाही में हिस्सा नहीं ले पाएंगे. निलंबित होने वाले सांसदों में डेरेक ओ ब्रायन, संजय सिंह, रिपुन बोरा, नजीर हुसैन, केके रागेश, ए करीम, राजीव साटव, डोला सेन हैं. 

अविश्‍वास प्रस्‍ताव नियमों के हिसाब से सही नहीं: 
सभापति ने कहा कि कहा कि उपसभापति के खिलाफ विपक्षी सांसदों की तरफ से लाया गया अविश्‍वास प्रस्‍ताव नियमों के हिसाब से सही नहीं है. सभापति की कार्रवाई के बाद भी सदन में हंगामा जारी रहा.

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कल राज्यसभा के लिए सबसे खराब दिन था:
राज्यसभा के सभापति ने कल की घटना पर कहा कि राज्यसभा के लिए सबसे खराब दिन था. कुछ सांसदों ने पेपर को फेंका. माइक को तोड़ दिया. रूल बुक को फेंका गया. इस घटना से मैं बेहद दुखी हूं. उपसभापति को धमकी दी गई. उनपर आपत्तिजनक टिप्पणी की गई.

किसानों को उनकी फसल का पूरा समर्थन मूल्य मिलेगा:
कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर ने कहा कि सरकारी खरीद जारी रहेगी और किसानों को उनकी फसल का पूरा समर्थन मूल्य मिलेगा. ये बिल पूरी तरह किसानों के हित में है और किसी को कोई आशंका नहीं होनी चाहिए. किसान वैश्विक मानदंडों के तहत कार्य कर पाएगा और उनकी पहुंच पूरी तरह से बाजार पर अपनी आजादी के तहत होगी.


 

जेपी नड्डा बोले, किसानों और गरीबों को गुमराह कर राजनीति करना कांग्रेस की पुरानी आदत है

जेपी नड्डा बोले, किसानों और गरीबों को गुमराह कर राजनीति करना कांग्रेस की पुरानी आदत है

नई दिल्ली: बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कृषि से जुड़े विधेयक राज्यसभा में पास होने पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का अभिनंदन करते हुए कांग्रेस पर पलटवार किया है. जेपी नड्डा ने कहा कि कांग्रेस ने किसानों के सशक्तिकरण के लिए कभी कोई रिफॉर्म्स नहीं किया. उसके पास न इसके लिए सोच थी, न ही इच्छाशक्ति. किसानों और गरीबों को गुमराह कर राजनीति करने की कांग्रेस की पुरानी आदत रही है. कांग्रेस के दोहरे चरित्र से किसान वाकिफ हैं, वे अब उसके बहकावे में आने वाले नहीं हैं. जेपी नड्डा ने कहा कि कृषि एवं किसानों के सशक्तिकरण के लिए केंद्र सरकार द्वारा लाए गए विधेयकों के संसद में पास होने पर मैं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का अभिनंदन करता हूं और देश के सभी किसान भाइयों को शुभकामनाएं देता हूं. मैं समर्थन के लिए सभी सांसदों एवं राजनीतिक दलों को भी साधुवाद देता हूं.

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किसानों की आय को दोगुना करने में निभाएंगे महत्वपूर्ण भूमिका: 
जेपी नड्डा ने कहा कि संसद द्वारा पारित उपज व्यापार एवं वाणिज्य (संवर्धन एवं सरलीकरण), कृषक (सशक्तिकरण व संरक्षण) कीमत आश्वासन एवं कृषि सेवा पर करार और आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक सही मायनों में किसानों को अपने फसल के भंडारण, और बिक्री की आजादी देंगे और बिचौलियों के चंगुल से उन्हें मुक्त करेंगे. उन्होंने कहा कि MSP अर्थात मिनिमम सपोर्ट प्राइस था, है और रहेगा. APMC की व्यवस्था भी बनी रहेगी. प्रधानमंत्री मोदी ने दूरदर्शिता का परिचय देते हुए किसानों के बेहतर भविष्य के लिए ये कदम उठाए हैं जो किसानों की आय को दोगुना करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे.

अब किसान अपनी मर्जी का होगा मालिक:
उन्होंने कहा कि अब किसान अपनी मर्जी का मालिक होगा. किसानों को उपज बेचने का विकल्प देकर उन्हें सशक्त बनाया गया है. बिक्री लाभदायक मूल्यों पर करने से संबंधित चयन की सुविधा का भी लाभ किसान ले सकेंगे. इससे जुड़ी किसी भी समस्या का समाधान किसान के घर पर ही उपलब्ध होगा. यह मोदी सरकार है जिसने स्वामीनाथन कमेटी की रिपोर्ट को लागू किया, किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि दी, फसल बीमा की सौगात दी और कृषिगत सुधार के लिए एक लाख करोड़ रुपए का अलग से आवंटन किया. कांग्रेस ने लोक सभा चुनाव 2019 के अपने घोषणापत्र में एपीएमसी व्यवस्था को खत्म करने की बात की थी जबकि इन विधेयकों के अनुसार MSP और APMC चलती रहेगी. मोदी सरकार तो किसानों को बेहतर विकल्प उपलब्ध करा रही है. आखिर राहुल गांधी और कांग्रेस किसानों को सशक्त होते देखना क्यों नहीं चाहते.

कृषि से जुड़े विधेयकों को लेकर राहुल गांधी बोले, पीएम मोदी बना रहे है किसानों को पूंजीपतियों का गुलाम

 कृषि से जुड़े विधेयकों को लेकर राहुल गांधी बोले, पीएम मोदी बना रहे है किसानों को पूंजीपतियों का गुलाम

नई दिल्ली: आज कृषि से जुडे 2 बिलों को राज्यसभा में पेश कर दिया गया.  लोकसभा से ये बिल पहले ही पास हो चुके हैं. कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, बसपा और अकाली दल सहित कई पार्टियां इस बिल का विरोध कर रही हैं. वहीं कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कृषि बिलों को लेकर मोदी सरकार पर हमला बोला है. 

पीएम मोदी किसानों को बना रहे है पूंजीपतियों का गुलाम:
राहुल गांधी ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी किसानों को पूंजीपतियों का गुलाम बना रहे हैं, जिसे देश कभी सफल नहीं होने देगा. राहुल गांधी ने कहा कि मोदी सरकार के कृषि-विरोधी काले कानून से किसानों को APMC/किसान मार्केट खत्म होने पर न्यूनतम समर्थन मूल्य कैसे मिलेगा? इस बिल में MSP की गारंटी क्यों नहीं. 

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भाजपा की अगुआई वाली एनडीए में फूट:
इन बिलों को लेकर भाजपा की अगुआई वाली एनडीए में फूट पड़ चुकी है. भाजपा की सबसे पुरानी सहयोगी अकाली दल और मोदी कैबिनेट में केंद्रीय मंत्री रहीं हरसिमरत कौर इन बिलों के विरोध में इस्तीफा दे चुकी हैं. 

तकनीकी खराबी के चलते आप यह खबर नहीं देख पा रहे हैं

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हरसिमरत कौर के इस्तीफे से दुष्यंत चौटाला पर बढ़ा दबाव, कांग्रेस ने कहा - किसानों से ज्यादा अपनी कुर्सी प्यारी

हरसिमरत कौर के इस्तीफे से दुष्यंत चौटाला पर बढ़ा दबाव, कांग्रेस ने कहा - किसानों से ज्यादा अपनी कुर्सी प्यारी

चंडीगढ़: कृषि विधेयकों को लेकर नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाले एनडीए में मतभेद साफ तौर पर उभरकर सामने आ गया है. कृषि विधेयक के खिलाफ हरियाणा और पंजाब के किसान आंदोलित हैं. इसी के चलते NDA में बीजेपी के सबसे पुराने सहयोगी शिरोमणि अकाली दल के कोटे से मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने गुरुवार को इस्तीफा दे दिया. जिसके बाद हरियाणा में बीजेपी की सहयोगी जननायक जनता पार्टी (JJP) पर साथ छोड़ने का दबाव बढ़ रहा है. ऐसे में जेजेपी प्रमुख डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला कशमकश में फंसे हुए हैं. 

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दुष्यंत जी आपको भी डिप्टी सीएम से इस्तीफा दे देना चाहिए: 
वहीं इसी बीच कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने भी एक ट्वीट करते हुए कहा कि दुष्यंत जी हरसिमरत कौर बादल की तरह आपको भी कम से कम डिप्टी सीएम की पोस्ट से इस्तीफा दे देना चाहिए. आपको किसानों से ज्यादा अपनी कुर्सी प्यारी है. 

BJP, JJP नेता किसान से विश्वासघात करने में लगे हुए: 
कांग्रेस नेता व राज्यसभा सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने भी ट्वीट करते हुए कहा कि पंजाब के अकाली दल, AAP ने संसद में कांग्रेस के साथ किसान विरोधी 3 अध्यादेशों का विरोध करने का साहस दिखाया, पर दुर्भाग्य कि हरियाणा के BJP, JJP नेता सत्ता-सुख के लिए किसान से विश्वासघात करने में लगे हुए हैं. जब पंजाब के सब दल किसान के पक्ष में एक हो सकते हैं तो हरियाणा BJP-JJP क्यूँ नहीं? अकाली हरसिमरत जी के इस्तीफे के बाद इस प्रश्न को और बल मिलता है- जब पंजाब के सारे दल किसान के पक्ष में एक होकर केंद्र के इन किसान-घातक अध्यादेशों के विरोध में आ सकते हैं तो हरियाणा के सत्तासीन BJP-JJP नेता क्यूँ किसान से विश्वासघात कर रहे हैं? किसान-हित से ऊपर सत्ता-लोभ.

खट्टर के नेतृत्व वाली सरकार जेजेपी के सहयोग से चल रही: 
बता दें कि हरियाणा में मनोहर लाल खट्टर के नेतृत्व वाली सरकार जेजेपी के सहयोग से चल रही है. जेजेपी का राजनीतिक आधार ग्रामीण इलाके और किसानों पर टिका हुआ है, क्योंकि चौधरी  देवीलाल किसान नेता के तौर पर देश भर जाने जाते थे. किसानों की नाराजगी और राजनैतिक नुकसान को देखते हुए जेजेपी ने लाठीचार्ज को लेकर किसानों से माफी मांगी है. दुष्यंत चौटाला के छोटे भाई दिग्विजय चौटाला ने कहा, 'किसानों पर हुए लाठीचार्ज को लेकर जेजेपी माफी मांगती है. जेजेपी हमेशा किसानों के साथ है और किसानों के हित की बात पार्टी के लिए सबसे ऊपर है. 

सीएम दुष्यंत चौटाला कृषि संबंधी विधेयक के समर्थन में:
जेजेपी प्रमुख और डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला कृषि संबंधी विधेयक के समर्थन में हैं और कांग्रेस पर किसानों को बहकाने का आरोप लगा रहे हैं. दुष्यंत चौटाला ने अभी तक इस किसान विधेयक का विरोध नहीं किया है, लेकिन यह जरूर कहा है कि इसमें एमएसपी का जिक्र होना चाहिए.
 

केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर का इस्तीफा मंजूर, तोमर को मिला अतिरिक्त प्रभार

केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर का इस्तीफा मंजूर, तोमर को मिला अतिरिक्त प्रभार

नई दिल्ली: पीएम मोदी से सलाह के बाद राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है. लोकसभा में तीन कृषि बिलों को पारित कराए जाने से नाराज हरसिमरत ने गुरुवार को मंत्रिपद से इस्तीफा दे दिया था. राष्ट्रपति ने केंद्रीय मंत्री परिषद से हरसिमरत का इस्तीफा संविधान के अनुच्छेद 75 के खंड (2) के तहत स्वीकार किया है. प्रधानमंत्री द्वारा सलाह-मशविरा के बाद राष्ट्रपति ने कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर को खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा है. 

विधेयकों पर सत्तारूढ़ राजग में फूट पड़ गई: 
कृषि संबंधी तीन अध्यादेशों को कानूनी जामा पहनाने संबंधी विधेयकों पर सत्तारूढ़ राजग में फूट पड़ गई है. विधेयक से जुड़े प्रावधानों पर नाराजगी जताते हुए केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने कल मोदी मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया था. इससे पहले लोकसभा में विधेयकों पर चर्चा के दौरान पार्टी अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने उनके इस्तीफे की घोषणा की थी. हालांकि उन्होंने कहा कि पार्टी एनडीए सरकार को समर्थन जारी रखेगी. 

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इस्तीफे की जानकारी हरसिमरत कौर बादल ने ट्वीट कर दी: 
बता दें कि मोदी कैबिनेट से अपने इस्तीफे की जानकारी हरसिमरत कौर बादल ने ट्वीट कर दी थी. अपने ट्वीट में उन्होंने कहा कि मैंने किसान विरोधी अध्यादेशों और कानून के विरोध में केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया है. किसानों के साथ उनकी बेटी और बहन के रूप में खड़े होने का गर्व है. हरसिमरत कौर बादल केंद्रीय खाद्य एवं प्रसंस्करण उद्योग मंत्री थीं. यह फैसला इसलिए लिया गया क्योंकि बीजेपी की सहयोगी शिरोमणि अकाली दल अध्यादेश का विरोध कर रही है.


 

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