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स्वर्ण नगरी में मां दुर्गा की हुई विदाई, चारों ओर बही भक्ति रस की धारा

 स्वर्ण नगरी में मां दुर्गा की हुई विदाई, चारों ओर बही भक्ति रस की धारा

जैसलमेर: कलात्मकता एवं भव्यता की धनी स्वर्णनगरी जैसलमेर में दस दिन आराधना के बाद मां दुर्गा की विदाई बेला में चारो और भक्तिरस की धारा बही. हवा में उड़ती गुलाल और झूमते भक्तों से शहर की सड़कें अट गई. भक्ति और माता के जयकारों से शहर की सड़कों पर श्रद्धा का सैलाब उमड़ पड़ा. शहर के रास्ते गुलाल और फूलों से रंग-बिरंगे होते चले गए. ऐसा लगा मानों पूरा शहर आस्था के सैलाब में डूब गया हो.

गड़ीसर झील में किया विसर्जन: 
स्वर्णनगरी जैसलमेर मां की मूर्ति का धूम-धाम से विसर्जन किया गया. स्वर्णनगरी की सड़के आज मां भक्ति से सारोबार दिखाई दी. जिले में सभी जगह मुख्य बजार से माता की मूर्ति को ढोल नगाड़ों से यात्रा निकालकर स्वर्णनगरी में जिले की गड़ीसर झील में विसर्जन किया गया. हर कोई आज हाथों में डांडिया के चटके लगता नजर आया. माता की जयकारे लागते बच्चों और सजी धजी महिलाओ ने मां की विदाई की.  

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Navratri 2020: स्कंदमाता की पूजा से मिलेगा संतान सुख, इन मंत्रों से करें प्रसन्न

Navratri 2020: स्कंदमाता की पूजा से मिलेगा संतान सुख, इन मंत्रों से करें प्रसन्न

जयपुर: आज नवरात्रि नवरात्रि का पांचवा दिन है. नवरात्रि की पंचमी तिथि को स्कंदमाता की अराधना की जाती है. स्कंद कुमार कार्तिकेय की माता के कारण इन्हें स्कन्दमाता कहा गया है. भगवान स्कंद बालरूप में इनकी गोद में विराजित हैं. मां की चार भुजाएं हैं जिसमें दोनों हाथों में कमल के पुष्प हैं. देवी स्कन्दमाता ने अपने एक हाथ से कार्तिकेय को अपनी गोद में बैठा रखा है और दूसरे हाथ से वह अपने भक्तों को आशीर्वाद प्रदान कर रही हैं. 

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स्कंदमाता मोक्ष प्रदान करने वाली देवी: 
कहा गया है कि स्कंदमाता की पूजा करने से जीवन मे सुख और शांति आती है. स्कंदमाता मोक्ष प्रदान करने वाली देवी हैं. स्कंदमाता अपने भक्तों से बहुत जल्द प्रसन्न हो जाती है. पूजा के दौरान इन मंत्र का जाप करने से स्कंदमाता सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करती हैं. स्कंदमाता की पूजा करने से भगवान कार्तिकेय भी प्रसन्न होते हैं. वहीं नि:संतान को माता के आर्शीवाद से संतान प्राप्ति होती है. इसके साथ ही स्कंदमाता संकट और शत्रुओं का नाश करती हैं.  मां स्कन्दमाता को वैसे तो जौ-बाजरे का भोग लगाया जाता है, 

स्कंदमाता की प्रार्थना: 
सिंहासनगता नित्यं पद्माञ्चित करद्वया.
शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विन.

स्कंदमाता की स्तुति मंत्र:
या देवी सर्वभूतेषु मां स्कन्दमाता रूपेण संस्थिता.
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:.

स्कन्दमाता की पूजा विधि:
आज मां की प्रतिमा एक चौकी पर स्थापित करके कलश की स्थापना करें. उसी चौकी पर श्रीगणेश, वरुण, नवग्रह, षोडश मातृका, सप्त घृत मातृका भी स्थापित करें. हाथ में फूल लेकर 'सिंहासनागता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी' मंत्र का जाप करते हुए फूल चढ़ा दें. मां की विधिवत पूजा करें, मां की कथा सुनें और मां की धूप और दीप से आरती उतारें. उसके बाद मां को केले का भोग लगाएं और प्रसाद के रूप में केसर की खीर का भोग लगाकर प्रसाद बांटें.


 

Horoscope Today, 21 October 2020: आज का दिन इन राशियों के लिए रहेगा शानदार, पढ़ें दैनिक राशिफल

Horoscope Today, 21 October 2020: आज का दिन इन राशियों के लिए रहेगा शानदार, पढ़ें दैनिक राशिफल

जयपुर: दैनिक राशिफल चंद्र ग्रह की गणना पर आधारित होता है. राशिफल की जानकारी करते समय पंचांग की गणना और सटीक खगोलीय विश्लेषण किया जाता है. दैनिक राशिफल में सभी 12 राशियों के भविष्य के बारे में बताया जाता है. ऐसे में आप इस राशिफल को पढ़कर अपनी दैनिक योजनाओं को सफल बना सकते हैं. आइये अब जानते है की हमारे पढ़ने वाले बच्चे जो अब स्कूल एक्साम्स या बोर्ड एक्साम्स या किसी कॉम्पिटशन के तैयारी कर रहे है उनके लिए माता रानी क्या सन्देश लायी है..

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मेष (Aries) :- आपको आज मन में उदासी और आशान्ति का समावेश रहेगा. बार-बार किसी न किसी कारण आपको अपने परिजनों और मित्रों से उपेक्षा और विरोध का सामना करना होगा.  

वृष(Taurus):- आपका स्वास्थ्य आज सुधार की ओरअग्रसर हो रहा है. हो सकता है इसी वजह से आपको अपने कामकाज में उत्साह बनाए रखने में मदद मिले. यदि आप अपने समय का सही उपयोग करेंगे तो निर्धारितलक्ष्य के नजदीक पहुंचने में देर नहीं लगेगी.

मिथुन(Gemini):- किसी सार्वजनिक घटना या घोषणा से आपकी सुख-शांति में व्यवधान पड़ सकता है. अचानक ही कुछ विपरीत परिस्थितियां पैदा होने से आपका आत्मविश्वास विचलित हो सकता है.

कर्क(Cancer):- आज किसी काम में लगातारअसफलता मिलने से मन में उदासी रहेगी. वरिष्ठ और परिवार के सदस्य आपकी खिलाफत कर सकते हैं. चलते-फिरते भी किसी नए बवाल में उलझने से आपको व्यर्थ का लांछन  झेलना पड़ सकता है.

सिंह(Leo):- आज आपके स्वाभाविक उत्साह और पराक्रम में वृद्धि हो रही है. आपको अपने प्रयासों में लगातारही सफलता भी मिलती जा रही है. यदि किसी संस्था या संगठन के प्रतिनिधि हैं तो आपको कुछ जिम्मेदारी भी सौंपी जा सकती हैं.

कन्या(Virgo):-  जिन लोगों ने आपके लिए रूकावट खड़ी की हैउनको पहचानना आपके लिए जरूरी होगा. तभी आपको आगे की चिन्ता कम होगी. लेकिन दूसरों की तरफ ध्यान आकर्षित होने से आपका काम रूक सकता है.

तुला(Libra):- किसी मोटे लाभ के लिए आज आपके मन में काफी चिन्ता और उत्सुकता रहेगी. हो सकता है कुछ बाधाओं की वजह से अभी इस काम को पूरा करने में कुछ समय और लग जाए.  

वृश्चिक(Scorpio):- आपके जीवन उतार-चढ़ाव बहुत जल्दी-जल्दी आते हैं. आज भी कुछ ऐसा ही संकेत आपको मिल रहे हैं. विचलित होने की जरूरत नहीं लेकिन थोड़ा इन्तजार जरूर करना होगा.

धनु(Sagittarius):- आज आपको अपनी शारीरिक और मानसिक इच्छापूर्ति का सुख मिलेगा. दीर्घकालीन योजनाओंऔर परियोजनाओं में आपकी भागीदारी न केवल आपके यश और ख्याति को बढ़ाएगी बल्कि धन लाभ भीकरवाएगी.

मकर(Capricorn):- बहुत समय से चल रहा कोई विवाद या मामला आज अचानक ही समाप्त होने जा रहाहै. आर्थिक और सामाजिक क्षेत्र में आपकी भागीदारी एक नया विकल्प बन सकती है.  

कुंभ(Aquarius):- कई दिनों से कोई अवरूद्ध लाभ आपको मिलने में देर लग रही है. आज के दिन आपके पास कोई ऐसी खबर आ रही है जो आपके लिए आगे चलकर लम्बी दौड़ का घोड़ा साबित हो.

मीन(Pisces):- आज का दिन आपके लिए मनोकामना पूर्ति करने में सहायक हो रहा है. अपने कामकाज में तल्लीन रहेंगे तोआगे का समय आपके लिए धन-समृद्धि से भरपूर हो जाएगा. मन की चिन्ताएं भी कम होंगी और नजदीकीलोगों पर भी अच्छा असर पड़ेगा.

सौजन्य - राज ज्योतिषी पंडित मुकेश शास्त्री

21 अक्टूबर 2020: जानिए आज का पंचांग, ये रहेगा शुभ-अशुभ मुहूर्त और राहुकाल का समय

21 अक्टूबर 2020: जानिए आज का पंचांग, ये रहेगा शुभ-अशुभ मुहूर्त और राहुकाल का समय

जयपुर: पंचांग का हिंदू धर्म में शुभ व अशुभ देखने के लिए विशेष महत्व होता है. पंचाम के माध्यम से समय एवं काल की सटीक गणना की जाती है. यहां हम दैनिक पंचांग में आपको शुभ मुहूर्त, शुभ तिथि, नक्षत्र, व्रतोत्सव, राहुकाल, दिशाशूल और आज शुभ चौघड़िये आदि की जानकारी देते हैं. तो ऐसे में आइए पंचांग से जानें आज का शुभ और अशुभ मुहूर्त और जानें कैसी रहेगी आज ग्रहों की चाल... 

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शुभ मास-  द्वितीय आश्विन (शुद्ध ) मास  शुक्ल पक्ष
शुभ तिथि पंचमी पूर्णा संज्ञक तिथि रात्रि  9 बजकर 8 मिनट तक तत्पश्चात षष्ठी तिथि रहेगी. पंचमी तिथि मे  सभी शुभ और मांगलिक कार्य विवाह, उपनयन, वास्तु, प्रतिष्ठा इत्यादि कार्य शुभ होते है किन्तु ऋण देना शुभ नहीं माना जाता है. पंचमी तिथि मे जन्मे जातक धनि, शौकीन, साहसी, बुद्धिवान, भाग्यवान, पराक्रमी होते हैं.

शुभ नक्षत्र  मूल "तीक्ष्ण व अधोमुख "नक्षत्र  रात्रि 1 बजकर 13  मिनट तक रहेगा. मूल नक्षत्र मे विद्या आरम्भ, बोरिंग, विवाह कर्म, वास्तु शांति, कृषि कार्य इत्यादि कार्य विशेष रूप से सिद्ध होते है. मूल नक्षत्र मे जन्म लेने वाला जातक स्वतन्त्र विचारों वाला, कठोर मेहनत करने वाला, क्रोधी स्वाभाव वाला, दानी, धनवान, बुद्धिमान होता है. गंड मूल नक्षत्र होने के कारण मूल नक्षत्र मे जन्मे जातकों को जन्म के 27 दिन बाद मूल अरिष्ट शांति हवन करवा लेना चाहिए.

चन्द्रमा - सम्पूर्ण दिन  धनु  राशि में संचार करेगा  

व्रतोत्सव - सरस्वति पूजा

राहुकाल - दोपहर 12 बजे से 1.30 बजे तक

दिशाशूल - बुधवार को उत्त्तर दिशा मे दिशाशूल रहता है. यात्रा को सफल बनाने लिए घर से गुड़, धनिया खा कर निकले.

आज के शुभ चौघड़िये - सूर्योदय से प्रातः 9.23 तक लाभ अमृत का, प्रातः 10.47 मिनट से दोपहर 12.19 मिनट तक शुभ और दोपहर 3.00 मिनट से सूर्यास्त तक चर, लाभ का चौघड़िया. 

सौजन्य - राज ज्योतिषी पंडित मुकेश शास्त्री
 

Navratri Special: प्राचीन काली माता मंदिर में आज भी आते है राजा भर्तुहरी, अखाड़े में निकलता है घी और भभूत

Navratri Special: प्राचीन काली माता मंदिर में आज भी आते है राजा भर्तुहरी, अखाड़े में निकलता है घी और भभूत

डीडवाना(नागौर): डीडवाना के प्राचीन और ऐतिहासिक शक्तिपीठ काली माता मंदिर अखाड़ा में इन दिनों नवरात्रि के विशेष आयोजन चल रहे काली माता मंदिर की मान्यता ऐसे है कि यहां आज भी राजा भर्तुहरी यहां मां काली के दर्शन कर यहां पूजा अर्चना करने आते है. मान्यता ऐसी भी है कि यह मंदिर भी 2 हजार वर्ष पहले यहां राजा भर्तुहरी ने तपस्या करने के लिए बनाया था. मंदिर की आस्था इसी वजह से और ज्यादा बढ़ जाती है और यहां देशभर से श्रद्धालु दर्शन करने आते है. इस बार कोविड गाइडलाइन्स की पालना का पूरा ध्यान रखा जा रहा है. 

राजा भर्तुहरी ने सन्यास लेकर की थी तपस्या:
किवदंतियां है कि डीडवाना के आसपास के क्षेत्र से निकलने वाली सरस्वती नदी के नजदीक घना जंगल हुआ करता था और यहां उज्जैन के राजा भर्तुहरी ने सन्यास लेकर जब तपस्या करने के लिए यहां आकर अपना डेरा जमाया और यहां पर मां काली का आज से 2000 वर्ष पहले छोटा सा मन्दिर बनाकर यहां तपस्या करने लगे, मंदिर में लगी मूर्ति की कार्बन डेटिंग से भी मूर्ति की उम्र 2000 से 2100 वर्ष पहले की सामने आई है. मंदिर में लगी मूर्ति भद्रकाली महिषासुर का मर्दन करते हुए है, मान्यता है कि यहां मंदिर में लगी काली माता की मूर्ति से विशेष रेज एक विशेष ओरा में निकलती रहती है, जिससे यहां आने वाले श्रद्धालुओं को मानसिक शारीरिक और दैहिक बीमारीयो से मुक्ति मिलती है.

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ये हैं घी और भभूत निकलने के पीछे मान्यता:
मंदिर परिसर में आज भी घी और भभूत निकलता रहता है. घी और भभूत निकलने के पीछे मान्यता ऐसी भी है कि जब राजा भर्तुहरी ने यहां तपस्या की तो मंदिर के आसपास कई बड़े बड़े यज्ञ और हवन कुंड बनाये हुए थे और उनके आसपास बड़े बड़े मिट्टी के घड़ों में घी भरा रहता था और यहां वर्षभर योगियों और ऋषि मुनियों द्वारा यहां यज्ञ और हवन किये जाते रहते थे और यही वजह है कि यहां प्राचीन काल मे यज्ञ हवन कुंडों के साथ राजा भर्तुहरी का धुणा बनाया हुआ था उसका घी आज भी मार्बल के फर्श के बीच जगह जगह निकलता रहता है मान्यता है कि इस घी के स्पर्श से असाध्य रोगों का यहाँ फर्श पर  चलने और स्पर्श मात्र से इलाज हो जाता है.

श्रद्धालु आते हैं श्रद्धा से शीश नवाने:
भारत धर्म और आस्थाओं वाला देश है यहां तरह तरह की धार्मिक मान्यताएं है और लोगो की आस्था और श्रद्धा के हिसाब से मंदिर और मठ बने हुए है. जहां लोग श्रद्धा से शीश नवाने आते है. और दर्शन करने भगवान से अपना साक्षात करवाते है. डीडवाना के काली माता मंदिर की आस्था भी कुछ इसी तरह की है. जंहा लोग खिंचे चले आते है.

...फर्स्ट इंडिया के लिए नरपत ज़ोया की रिपोर्ट

नवरात्रि 2020: नवरात्रि के चौथे दिन करें देवी कूष्मांडा की पूजा, मिलेगा यश, आयु का वरदान

नवरात्रि 2020: नवरात्रि के चौथे दिन करें देवी कूष्मांडा की पूजा, मिलेगा यश, आयु का वरदान

जयपुर: नवरात्रि के चौथे दिन मां दुर्गा की पूजा 'कुष्मांडा' के रूप में की जाती है. कूष्मांडा शब्द दो शब्दों यानि कुसुम मतलब फूलों के समान हंसी और आण्ड का अर्थ है ब्रह्मांड. अर्थात वो देवी जिन्होनें अपनी फूलों सी मंद मुस्कान से पूरे ब्रह्मांड को अपने गर्भ में उत्पन्न किया है. देवी कूष्मांडा की आठ भुजाएं हैं. साथ ही हाथ में अमृत कलश भी है. 

मान्‍यता है कि जब दुनिया नहीं थी, तब इन्होंने ही अपने हास्य से ब्रह्मांड की रचना की थी इसीलिए इन्‍हें सृष्टि की आदिशक्ति कहा गया है. इनके हाथों में कमंडल, धनुष, बाण, कमल-पुष्प, अमृतपूर्ण कलश, चक्र, गदा व जप माला है. देवी का वाहन सिंह है. शांत और संयम भाव से माता कुष्मांडा की पूजा करनी चाहिए. इनकी उपासना से भक्तों को सभी सिद्धियां प्राप्त होती हैं. लोग नीरोग होते हैं और आयु व यश में बढ़ोतरी होती है. मां ती सवारी सिंह है जो कि धर्म का प्रतीक है. 

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क्या चढाएं माता को भोग में:
मां कूष्मांडा को मालपुए का भोग अतिप्रिय है. लेकिन भक्तों के पास जो होता है मां उस भोग को भी सहर्ष स्वीकरा कर लेती हैं. 

मां कूष्मांडा की पूजन विधि:
सुबह स्नान करने के हाद हरे वस्त्रों को धारण करें. उसके बाज देवी को हरी इलायची, सौंफ और कुम्हणे का भोग लगाएं. फिर "ओम कूष्मांडा दैव्यै: नम:" मंत्र का 108 बार जाप करें। मां कूष्मांडा की आरती उतारें और प्रसाद चढ़ाएं.

प्रार्थना मंत्र:
सुरासम्पूर्ण कलशं रुधिराप्लुतमेव च.
दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तु में. 

Horoscope Today, 20 October 2020: नौकरी और मुनाफे में ये राशियां रहेंगी भाग्यशाली, करे ये उपाय

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जयपुर: दैनिक राशिफल चंद्र ग्रह की गणना पर आधारित होता है. राशिफल की जानकारी करते समय पंचांग की गणना और सटीक खगोलीय विश्लेषण किया जाता है. दैनिक राशिफल में सभी 12 राशियों के भविष्य के बारे में बताया जाता है. ऐसे में आप इस राशिफल को पढ़कर अपनी दैनिक योजनाओं को सफल बना सकते हैं. आइये अब जानते है की हमारे पढ़ने वाले बच्चे जो अब स्कूल एक्साम्स या बोर्ड एक्साम्स या किसी कॉम्पिटशन के तैयारी कर रहे है उनके लिए माता रानी क्या सन्देश लायी है..

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मेष राशि - आज आप माता रानी को चन्दन का तिलक लगाएं, गुलाब के पुष्पों की माला अर्पण करे और धन धान्य में वृद्धि के लिए, नौकरी व्यवसाय में तरक्की के लिए माँ को रसमलाई चढ़ाएं. धन प्राप्ति मन्त्र का पाठ पूर्व की ओर मुंह करके 24 बार रोज करें. 

वृष राशि - आज आप माता रानी को नारंगी सिंदूर का तिलक लगाएं, मोगरे के पुष्पों की माला अर्पण करे. धन धान्य में वृद्धि के लिए, नौकरी व्यवसाय में तरक्की के लिए मां को गुड़ का भोग लगाए. धन प्राप्ति मन्त्र का पाठ 21 बार रोज करें. 

मिथुन राशि - आज आप माता रानी को दही-हल्दी का तिलक लगाएं, पान के पत्तो की माला बना कर अर्पण करे. धन धान्य में वृद्धि के लिए, नौकरी व्यवसाय में तरक्की के लिए माँ को मोतीचूर के लडडू चढ़ाएं. धन प्राप्ति मन्त्र का 21 बार जप ईशान दिशा की ओर मुंह करके रोज करें. 

कर्क राशि - आज आप माता रानी को सफ़ेद चन्दन का तिलक लगाए, मोगरे के पुष्पों की माला अर्पण करे. धन धान्य में वृद्धि के लिए, नौकरी व्यवसाय में तरक्की के लिए माँ को सफ़ेद तिल की बनी मिठाई का भोग लगाये. धन प्राप्ति मन्त्र को 51 बार रोज पढ़ें. 

सिंह राशि - आज आप माता रानी को केसर का तिलक लगाए, हज़ारे के पुष्पों की माला अर्पण करे. धन धान्य में वृद्धि के लिए, नौकरी व्यवसाय में तरक्की के लिए मां को पञ्च मेवे  की बनी मिठाई का भोग लगाये. धन प्राप्ति मन्त्र का पाठ 27 बार रोज करें. 

कन्या राशि - आज आप माता रानी को हल्दी का तिलक लगाए, कमल का पुष्प अर्पण करे. धन धान्य में वृद्धि के लिए, नौकरी व्यवसाय में तरक्की के लिए माँ को पिस्ते  की बनी मिठाई का भोग लगाये. धन प्राप्ति मन्त्र का जप उत्तर दिशा की ओर मुंह करके 54 बार करें. 

तुला राशि - आज आप माता रानी को सफ़ेद चन्दन का तिलक लगाए, मोगरे के पुष्पों की माला अर्पण करे. धन धान्य में वृद्धि के लिए, नौकरी व्यवसाय में तरक्की के लिए माँ को गुड़ से बनी खीर का भोग लगाये. धन प्राप्ति मन्त्र का पाठ 28 बार रोज करें. 

वृश्चिक राशि - आज आप माता रानी को लाल सिंदूर, गुलाब के पुष्पों की माला अर्पण करे. धन धान्य में वृद्धि के लिए, नौकरी व्यवसाय में तरक्की के लिए माँ को मखाने  का भोग लगाये. रोज धन प्राप्ति मन्त्र 41 बार पढ़ने से लाभ होगा. 

धनु राशि - आज आप माता रानी को पीले चन्दन का तिलक लगाए, हजारे के पुष्पों की माला अर्पण करे. धन धान्य में वृद्धि के लिए, नौकरी व्यवसाय में तरक्की के लिए माँ को ड्राई फ्रूट बर्फी का भोग लगाये. धन प्राप्ति मन्त्र को उत्तर दिशा की ओर मुंह करके 25 बार रोज पढ़ें. 

मकर राशि - आज आप माता रानी को लाल चन्दन का तिलक लगाए, गुलाब के पुष्पों की माला अर्पण करे. धन धान्य में वृद्धि के लिए, नौकरी व्यवसाय में तरक्की के लिए माँ को माखन मिश्री का भोग लगाये. धन प्राप्ति मन्त्र को रोज 33 बार जरुर पढ़ें. 

कुम्भ राशि - आज आप माता रानी को लाल सिंदूर का तिलक लगाए, नील कमल का पुष्प अर्पण करे. धन धान्य में वृद्धि के लिए, नौकरी व्यवसाय में तरक्की के लिए माँ को गुलाब जामुन मिठाई का भोग लगाये. उत्तर की ओर मुंह करके 32 बार रोज धन प्राप्ति मन्त्र पढ़ें. 

मीन राशि - आज आप माता रानी को केसर का तिलक लगाए, पीले गुलाब के पुष्पों की माला अर्पण करे. धन धान्य में वृद्धि के लिए, नौकरी व्यवसाय में तरक्की के लिए माँ को केसर बर्फी मिठाई का भोग लगाये. धन प्राप्ति मन्त्र को 27 बार रोज पढ़ें. 

धन प्राप्ति मन्त्र -
ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालेय प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नम :

सौजन्य - राज ज्योतिषी पंडित मुकेश शास्त्री

20 अक्टूबर 2020: पंचांग से जानें आज का शुभ-अशुभ मुहूर्त और राहुकाल का समय

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जयपुर: पंचांग का हिंदू धर्म में शुभ व अशुभ देखने के लिए विशेष महत्व होता है. पंचाम के माध्यम से समय एवं काल की सटीक गणना की जाती है. यहां हम दैनिक पंचांग में आपको शुभ मुहूर्त, शुभ तिथि, नक्षत्र, व्रतोत्सव, राहुकाल, दिशाशूल और आज शुभ चौघड़िये आदि की जानकारी देते हैं. तो ऐसे में आइए पंचांग से जानें आज का शुभ और अशुभ मुहूर्त और जानें कैसी रहेगी आज ग्रहों की चाल... 

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शुभ मास-  द्वितीय आश्विन (शुद्ध ) मास शुक्ल पक्ष
शुभ तिथि चतुर्थी रिक्ता संज्ञक तिथि दोपहर 11 बजकर 19 मिनट तक तत्पश्चात पंचमी तिथि रहेगी. चतुर्थी तिथि में अग्नि, विषादिक असद कार्य, शत्रु मर्दन, इत्यादि कार्य विशेष रूप से सिद्ध होते हैं. शुभ और मांगलिक कार्य वर्जित हैं. चतुर्थी तिथि मे जन्मे जातक धनवान, बुद्धिवान, भाग्यवान, पराक्रमी होते हैं.  

शुभ नक्षत्र ज्येष्ठा नक्षत्र रात्रि 2 बजकर 12 मिनट तक तत्पश्चात मूल नक्षत्र रहेगा. ज्येष्ठा नक्षत्र मे अग्नि, शिल्प, चित्रकारी इत्यादि कार्य विशेष रूप से सिद्ध होते हैं. ज्येष्ठा नक्षत्र गण्डान्त मूल संज्ञक नक्षत्र है अतः ज्येष्ठा नक्षत्र मे जन्मे जातको कि 27 दिन बाद पुनः इसी नक्षत्र के दिन मूल शांति करवा लेनी चाहिए. ज्येष्ठा नक्षत्र मे जन्म लेने वाला जातक स्वतन्त्र विचारों वाला,कठोर मेहनत करने वाला, क्रोधी स्वाभाव वाला, सुन्दर, साहसी, व्यापार निपुण, धनवान, बुद्धिमान होता है.

चन्द्रमा - सम्पूर्ण दिन वृश्चिक राशि में संचार करेगा  

व्रतोत्सव -  अंगारक चतुर्थी

राहुकाल - दोपहर 3 बजे से 4.30 बजे तक

दिशाशूल - मंगलवार को उत्त्तर दिशा मे दिशाशूल रहता है. यात्रा को सफल बनाने लिए घर से गुड़ खा कर निकले.    

आज के शुभ चौघड़िये - प्रातः 9.22 मिनट से दोपहर 01.36  मिनट तक चर, लाभ, अमृत का और दोपहर 3.01 मिनट से सायं 4.26 तक शुभ का चौघड़िया

सौजन्य - राज ज्योतिषी पंडित मुकेश शास्त्री


 

Navratri 2020: मां चंद्रघंटा की इस विधि से करें पूजा, पापों का होता है नाश

Navratri 2020: मां चंद्रघंटा की इस विधि से करें पूजा, पापों का होता है नाश

जयपुर: नवरात्रि के तीसरे दिन देवी के तृतीय स्वरूप मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है. माता के सिर पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र है. इसी वजह से इन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है. देवी चंद्रघंटा का वाहन सिंह है. इनकी दस भुजाएं और तीन आंखें हैं. आठ हाथों में खड्ग, बाण जैसे दिव्य अस्त्र-शस्त्र हैं और दो हाथों से ये भक्तों को आशीष देती हैं. इनका संपूर्ण शरीर दिव्य आभामय है. मान्यता है कि माता रानी का चंद्रघंटा स्वरूप भक्तों को निर्भय और सौम्य बनाता है. ज्योतिषियों के अनुसार जिन जातकों का चंद्रमा कमजोर होता है उन्हें मां चंद्रघंटा की पूजा अवश्य करनी चाहिए. 

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कैसे करें पूजा:
मां चंद्रघंटा की पूजा लाल वस्त्र धारण करके करना श्रेष्ठ होता है. मां को लाल पुष्प,रक्त चन्दन और लाल चुनरी समर्पित करना उत्तम होता है. इनकी पूजा से मणिपुर चक्र मजबूत होता है. मां को केसर की खीर और दूध से बनी मिठाई का भोग लगाना चाहिए.  पंचामृत, चीनी व मिश्री भी मां को अर्पित करनी चाहिए.

मां की उपासना का मंत्र
पिण्डजप्रवरारूढ़ा चण्डकोपास्त्रकेर्युता.
प्रसादं तनुते मह्यं चंद्रघण्टेति विश्रुत.

या देवी सर्वभूतेषु मां चंद्रघंटा रूपेण संस्थिता.
नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमो नम:.

मां चंद्रघंटा की पूजा से पापों का होता है नाश:
माता भक्तों को सभी तरह के पापों से मुक्त करती हैं. इनकी पूजा से बल और यश में बढ़ोतरी होती है. स्वर में दिव्य अलौकिक मधुरता आती है. देवी की घंटे-सी प्रचंड ध्वनि से भयानक राक्षस भय खाते हैं.