नाग पंचमी पर 125 साल बाद आज बन रहा दुलर्भ संयोग, कैसे और कहां पाएं कालसर्प दोष से मुक्ति

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/08/05 11:43

जयपुर : सावन के महीने में पड़ने वाली नाग पंचमी के दिन नाग देवता की पूजा का विशेष महत्व है सावन के तीसरे सोमवार यानी आज नाग पंचमी मनाई जाएगी पूरे 125 वर्ष बाद ऐसा संयोग लग रहा है, जब सोमवार के दिन ही नागपंचमी है इसलिए इस पर्व का फल दोगुना मिलेगा  संयोग के साथ-साथ इस दिन यायीजयद योग के साथ हस्त नक्षत्र है

क्यों मनाते हैं नाग पंचमी
एक पौराणिक कथा के अनुसार, ऋषि शापित महाराज परीक्षित के पुत्र जनमेजय ने नाग जाति को समाप्त करने के संकल्प से नाग-यज्ञ किया, जिससे सभी जाति-प्रजाति के नाग भस्म होने लगे; किन्तु अत्यन्त अनुनय-विनय के कारण पद्म एवं तक्षक नामक नाग देवों को ऋषि अगस्त से अभयदान प्राप्त हो गया.
अभयदान प्राप्त दोनों नागों से ऋषि ने यह वचन लिया कि श्रावण मास शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को जो भू-लोकवासी नाग का पूजन करेंगे, हे पद्म-तक्षक! तुम्हारे वंश में उत्पन्न कोई भी नाग उन्हें आघात नहीं करेगा। तब से इस पर्व की परम्परा प्रारम्भ हुई, जो वर्तमान तक अनवरत चले आ रहे इस पर्व को नाग पंचमी के नाम से ख्याति मिली..

मान्यता है कि इस दिन नाग देवता की पूजा करने से उनकी कृपा मिलती और सर्प से किसी भी प्रकार की हानि का भय दूर हो जाता है नागों से जुड़े देश में कई प्रसिद्ध मंदिर हैं। जहां पर कालसर्प दोष योग की विशेष पूजा की जाती है

नाग वासुकी मंदिर
प्रयागराज में संगम के पास ही दारागंज क्षेत्र में नाग वासुकी का मंदिर स्थित है नाग वासुकी मंदिर को शेषराज, सर्पनाथ, अनंत और सर्वाध्यक्ष कहा गया है इस मंदिर के बारे में मान्यता है कि यहां नागपंचमी के दिन दर्शन और पूजन से कुंडली का कालसर्प दोष दूर हो जाता है। नाग पंचमी के दिन यहां एक बड़ा मेला लगता है

नागचंद्रेश्वर मंदिर
देश के प्रसिद्ध नाग मंदिरों में सबसे पहले बात करते हैं जो देश के 12 ज्योर्तिलिंगों में से एक महाकाल मंदिर के परिसर में स्थित है। नाग देवता के इस मंदिर की खासियत है कि यह साल में केवल एक बार आम लोगों के दर्शन के लिए खोला जाता है। महाकाल मंदिर के तीसरी मंजिल पर भगवान शंकर और माता पार्वती फन फैलाए नाग के सिंहासन पर विराजमान हैं मान्यता है कि नागपंचमी के दिन इस तक्षक नाग के ऊपर विराजमान शिव-पार्वती के दर्शन मात्र से कालसर्प दोष दूर हो जाता है 


तक्षकेश्वर नाथ
प्रयागराज स्थित तक्षकेश्वर नाथ का मंदिर यमुना नदी के किनारे स्थित है। इस अति प्राचीन मंदिर वर्णन पद्म पुराण के 82 पाताल खंड के प्रयाग माहात्म्य में 82वें अध्याय में मिलता है। मान्यता है कि कि इस मंदिर में भगवान शिव के दर्शन से न सिर्फ व्यक्ति का बल्कि उसकी आने वाली पीढ़ी का भी सर्पभय दूर हो जाता है


मन्नारशाला
केरल के अलेप्पी जिले से तकरीबन 40 किलोमीटर दूर स्थित मन्नारशाला मंदिर एक नहीं, दो नहीं बल्कि 30 हजार नागों वाला मंदिर है 30 हजार नागों की प्रतिमाओं वाला यह मंदिर 16 एकड़ में हरे-भरे जंगलों से घिरा हुआ है। नागराज को समर्पित इस मंदिर में नागराज तथा उनकी जीवन संगिनी नागयक्षी देवी की प्रतिमा स्थित है
 

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