पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति और खराब, मंडरा रहा 6 अरब डॉलर राहत पैकेज पर खतरा

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/08/28 04:44

इस्लामाबाद पाकिस्तान में प्रधानमंत्री इमरान खान की सरकार के एक वर्ष के कार्यकाल में पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति और खराब हो गयी है तथा 2018-19 में देश का वित्तीय घाटा उसके इतिहास का सर्वाधिक 8.9 प्रतिशत पर पहुंच गया है.अखबार एक्सप्रेस ट्रिब्यून के मुताबिक पाकिस्तान की सरकार आर्थिक मोर्चे पर लगातार नए संकटों का सामना कर रही है.पाकिस्तान का इस वित्तीय वर्ष में बजट घाटा पिछले आठ सालों में सबसे ज्यादा है. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के फिजूलखर्ची रोकने की तमाम कोशिशों के बावजूद सरकार अपने खर्च को कम करने और राजस्व बढ़ाने में नाकाम रही है. यहां तक कि सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतें भी बढ़ा दी थीं. इससे पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) से स्वीकृत हुए 6 अरब डॉलर के राहत पैकेज पर भी खतरा मंडरा सकता है.आईएमएफ कुछ दिन बाद ही बेलआउट पैकेज के लिए पहली बार समीक्षा करने जा रहा है. ऐसे में पाकिस्तान के लिए नई चुनौतियां पैदा हो सकती हैं. आईएमएफ ने पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए तमाम कड़ी शर्तें रखी थीं लेकिन फिलहाल किसी भी शर्त पर इमरान की सरकार खरी उतरती नजर नहीं आ रही है.पाकिस्तान के वित्त मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, पाकिस्तान का बजट घाटा देश के कुल घरेलू उत्पाद का 8.9 फीसदी (3.45 ट्रिलियन रुपए) तक पहुंच गया है जबकि पिछले साल यह 6.6 फीसदी था. इमरान खान की सरकार की नाकामी का यह एक बड़ा सबूत है क्योंकि सरकार ने खुद बजट घाटा जीडीपी का 5.6 फीसदी तक सीमित रखने का लक्ष्य तय किया था.पाकिस्तान के वित्त मंत्रालय के मुताबिक, सरकार का बजट घाटा तय लक्ष्य से 82 फीसदी बढ़ गया है. भारी-भरकम बजट घाटे की वजह से 2019-20 का बजट दो महीने के भीतर ही अपनी अहमियत खो चुका है.

एक तरफ पाकिस्तान सरकार का खर्च लगातार बढ़ रहा है तो दूसरी तरफ उसकी आय (राजस्व) में गिरावट जारी है. पाकिस्तान ने जुलाई महीने में शुरू हुए नए वित्तीय वर्ष में सरकारी राजस्व 40 फीसदी तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा है. अगर पाकिस्तान की सरकार राजस्व का लक्ष्य को हासिल नहीं कर पाती है तो इससे आईएमएफ का 6 अरब डॉलर का पैकेज खतरे में पड़ सकता है.

कराची में आरिफ हबीब लिमिटेड में डायरेक्टर रिसर्च समीउल्लाह तारिक कहते हैं, यह एक असंभव लक्ष्य है. अगर वे इस तिमाही में आईएमएफ के लक्ष्यों को पूरा नहीं कर पाते हैं तो टैक्स बढ़ाने के लिए एक नया मिनी बजट लाया जा सकता है ताकि आईएमएफ के रीव्यू में पास हुआ जा सके. तारिक के मुताबिक, पिछली तिमाही में गैर-कर राजस्व में 98 फीसदी की गिरावट की वजह से कुल राजस्व में 20 फीसदी की कमी आई है.

आईएमएफ के तीन साल के बेलआउट कार्यक्रम के तहत पाकिस्तान ने धीरे-धीरे अपना प्राथमिक घाटा कम करते हुए इसे सरप्लस में बदलने का वादा किया है. ऐसे में, पाकिस्तान के लिए आने वाला समय काफी चुनौती भरा होने वाला है. 

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