UNHRC में पाकिस्तान को मिली करारी शिकस्त, अब तो बाज़ आओ पाकिस्तान

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/09/20 12:45

जिनेवा:  जम्मू कश्मीर (Jammu Kashmir) के मसले को लेकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान (Pakistan) को एक और कूटनीतिक हार मिली है.कश्मीर मुद्दे पर पूरी दूनिया में अलग थलग पड़े पाकिस्तान को एक बार फिर संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) में मुंह की खानी पड़ी है.कुछ दिन पहले पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान ने 50 से देशों का समर्थन मिलने का दावा किया था लेकिन इसके बावजूद भी पाकिस्तान गुरुवार को कश्मीर पर प्रस्ताव नहीं ला सका. इससे साफ हो गया है कि पाकिस्तान के इस प्रस्ताव पर एक भी देश ने साथ नही दिया कूटनीतिक नजरिये से देखा जाए तो यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की बड़ी जीत है.

प्रधानमंत्री इमरान खान का कश्मीर मसले को अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बनाने का मंसूबा चूर-चूर हो गया है.यूएनआरएचसी में भारत  की स्थाई मिशन की प्रथम सचिव कुमम मिनी देवी ने पाकिस्तान को आड़े हाथों लेते हुए कहा, मैं पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में लोगों पर हो रहे अत्याचारों पर ध्यान दिलाना चाहती हूं जहां लोगों के लापता होने के मामलों, हिरासत में लोगों की मौत, रेप के मामले बलात्कारों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और पत्रकारों की हत्या के मामले सामने आ रहे हैं.गिलगित-बाल्टिस्तान में हो रहे अत्याचारों के खिलाफ सरकार द्वारा मौन साध लेना आम बात है

जम्मू कश्मीर को भारत का आंतरिक मसला बताते हुए कुमम मिनी देवी ने कहा, 'जम्मू और कश्मीर को लेकर सरकार द्वारा लिया गया निर्णय हमारा संप्रभु अधिकार है और यह भारत का आंतरिक मामला है. हमारे फैसले को गलत बताने की पाकिस्तान की कोई भी कोशिश उसकी क्षेत्रीय महत्वाकांक्षाओं को छिपा नहीं सकती है. उन्होंने बलूचिस्तान, सिंध और पाक अधिकृत कश्मीर में पाकिस्तान द्वारा किए जा रहे मानवाधिकार उल्लंधन को लेकर पाक की कड़े शब्दों में निंदा की.

खबरों की मानें तो पाकिस्तान को मुस्लिम देशों तक से समर्थन नहीं मिल सका। दरअसल यूएनएचआरसी में इस्लामी सहयोग संगठन (ओआईसी) के 15 देश हैं और पाकिस्तान को उम्मीद थी कि वो कश्मीर मसले को लेकर इस्लामाबाद का समर्थन करेंगे लेकिन ऐसा हुआ नहीं. आपको बता दें कि कुछ दिन पहले ही इमरान खान ने कहा था कि कश्मीर को लेकर 58 से ज्यादा देश पाकिस्तान का समर्थन कर रहे हैं लेकिन उनका यह बयान हवाबाजी से ज्यादा कुछ नहीं था. यूएनएचआरसी में किसी भी प्रस्ताव पर बहस के लिए कम से कम 24 देशों के समर्थन की जरूरत होती है.

UNHRC में पाकिस्तान (Pakistan) जम्मू-कश्मीर मुद्दे पर संकल्प पेश करना चाहता था, लेकिन वह इसके लिए पर्याप्त समर्थन जुटाने में नाकाम रहा है. संयुक्‍त राष्‍ट्र मानवाधिकार आयोग (UNHRC) में भारत ने पाकिस्तान को दो टूक कहा कि जम्मू और कश्मीर भारत का आतंरिक मामला है.

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