महंगा होगा पेट्रोल, तेल की कीमत में सर्वाधिक उछाल की सम्भावना

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/09/17 12:08

नई दिल्ली  :सऊदी अरब में तेल प्लांट पर हमले के बाद कच्चे तेल की कीमतों में लगी आग ने टेंशन बढ़ा दी है सोमवार को वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमत में 19 फीसदी तक तेजी आई.सऊदी अरब के तेल के खदानों पर ड्रोन से हमला हुआ है. शनिवार की सुबह दो धमाके हुए जिसके कारण सऊदी अरब में तेल का उत्पादन घट गया है. दुनिया में हर दिन तेल का जितना उत्पादन होता है उसका पांच प्रतिशत उत्पादन घट गया है. अबक़ैक में दुनिया का सबसे बड़ा तेल संशोधन कारखाना है. ख़ुरैस तेल के खदान पर भी हमला हुआ है. ये दोनों ही सऊदी अरब की तेल कंपनी अरामको के हैं. इस हमले के कारण तेल की कीमतें बढ़ने लगी हैं. सोमवार को ही कच्चे तेल की कीमत 20 प्रतिशत बढ़ गई. 60 डॉलर प्रति बैरल से 72 डॉलर प्रति बैरल हो गया. 1980 के बाद पहली बार एक दिन में इतना उछाल आया है तेल की कीमतों में.

5-6 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ सकते हैं दाम  
अगले 15 दिनों में भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम में 5 से 6 रुपये प्रति लीटर का इजाफा हो सकता है. ऐसा विशेषज्ञों का अनुमान है. कोटक की हालिया एक रिपोर्ट के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम में उछाल आने के कारण भारत की ऑइल मार्केटिंग कंपनियां अगामी पखवाड़े में डीजल और गैसोलीन के दाम में 5 रुपये से 6 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि कर सकती हैं.

विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि अधिक समय तक कीमतें अधिक रहीं तो यह भारत के आर्थिक विकास पर बुरा असर डालेगा क्योंकि यह अपनी जरूरत का 83% आयात करता है.इससे करंट अकाउंट डेफिसिट बढ़ने के साथ जीडीपी ग्रोथ पर दबाव बनेगा और करंसी में भी कमजोरी बढ़ेगी.1991 के खाड़ी युद्ध के बाद यह एक दिन में आया सर्वाधिक उछाल है इससे भारत में भी पेट्रोल-डीजल की कीमतों में वृद्धि को लेकर चिंता बढ़ी है और आर्थिक विकास को दोबारा गति देने के प्रयास में जुटी सरकार की चुनौतियों में इजाफा होगा

सऊदी के तेल उद्योग के केंद्र में ड्रोन हमले के बाद पहली बार खुले बाजार में ग्लोबल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 19 फीसदी महंगा होकर 72 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया. हालांकि, बाद में यह 67 डॉलर पर बंद हुआ। ड्रोन अटैक के कारण सऊदी अरब में ऑइल प्रॉडक्शन का आधा हिस्सा ठप पड़ गया है, जोकि डेली ग्लोबल सप्लाई का 6% है

दशकों में सबसे बड़ा संकट
इंटरनैशनल एनर्जी एजेंसी के मुताबिक, सऊदी संकट ने कुवैत और इराक के तेल उत्पादन को अगस्त 1990 में हुए नुकसान के स्तर को भी पार कर लिया है, जब सद्दाम हुसैन ने अपने पड़ोसी पर आक्रमण कर दिया था. यह 1979 में इस्लामिक क्रांति के दौरान ईरानी तेल उत्पादन के घाटे को भी पार कर गया है. हालांकि, ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, तेल उत्पादक देशों के संगठन ओपेक के महासचिव मोहम्मद बरकिंडो ने कहा है कि पैनिक होने की जरूरत नहीं है.

 

 

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