पोप फ्रांसिस ने वेटिकन सिटी में नन मरियम थ्रेसिया को संत' घोषित किया

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/10/14 14:10

केरल : निधन के 93 साल बाद रविवार को वेटिकन सिटी में पोप फ्रांसिस ने सिस्टर मरियम थ्रेसिया को संत घोषित किया..मई 1914 में केरल के त्रिशूर में सिस्टर्स ऑफ होली फैमिली की स्थापना करने वाली भारतीय नन मरियम थ्रेसिया और चार अन्य को संत की उपाधि मिली है. एक संत के बनने की विधिवत प्रक्रिया चार अलग-अलग चरणों में होती है.आदरणीय, भगवान का सेवक, धन्य और संत. 9 अप्रैल, 2000 को पोप सेंट जॉन पॉल द्वितीय द्वारा उन्हें 'धन्य' घोषित किया गया था. एक आदेश के जरिए उनके 'चमत्कार' को पोप फ्रांसिस ने 12 फरवरी को मान्यता दी. इसके साथ ही उन्हें संत की उपाधि के लिए मंजूरी दी गई और 1 जुलाई को पोप ने निर्णय लिया कि 13 अक्टूबर को मरियम थ्रेसिया के संत बनने की घोषणा की जाएगी.

विदेश राज्यमंत्री वी मुरलीधरन ने समारोह में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया. इस उपलब्धि के साथ केरल की नन मरियम को ब्रिटिश कार्डिनल जॉन हेनरी न्यूमैन, स्विस लेवोमन मार्गगुइट बेस, ब्राजीलियन सिस्टर दुलस लोप्स और इतालवी सिस्टर गिउसेपिना वन्नीनी के साथ जोड़ा गया.सिस्टर थ्रेसिया का 8 जून, 1926 को 50 साल की उम्र में निधन हो गया था.

साइरो-मालाबार चर्च के चार संत 
सिस्टर मरियम की सेवा की वजह से उनकी तुलना मदर टेरेसा से की जाती रही है. नन मरियम थ्रेसिया से पहले केरल के कैथॉलिक चर्च से तीन और नन को संत की उपाधि से नवाजा जा चुका है..मरियम थ्रेसिया को संत की उपाधि मिलने के साथ ही केरल के सदियों पुराने साइरो-मालाबार चर्च में अब चार संत हैं, पहली सिस्टर अल्फोंसा, जिन्हें 2008 में एक संत घोषित किया गया था. इसके बाद फादर कुरियाकोस, जिन्हें चावारा अचेन के नाम से भी जाना जाता है, उन्हें 2014 में संत घोषित किया गया.उनके साथ ही सिस्टर यूफ्रेसिया को भी 2014 में पोप द्वारा संत घोषित किया गया था

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