जयपुर Rajasthan: मंत्रिपरिषद फेरबदल विस्तार और चुनौतियां ! 13 निर्दलीय विधायकों में से कौन बनेगा मंत्री और संसदीय सचिव... पढ़िए पूरी पृष्ठभूमि

Rajasthan: मंत्रिपरिषद फेरबदल विस्तार और चुनौतियां ! 13 निर्दलीय विधायकों में से कौन बनेगा मंत्री और संसदीय सचिव... पढ़िए पूरी पृष्ठभूमि

जयपुर: गहलोत मंत्री परिषद फेरबदल और विस्तार की चर्चाओं के बीच निर्दलीय विधायकों की रेस काफी अहम मानी जा रही है. 13 में से कौन मंत्री बनेगा और कौन संसदीय सचिव इस पर से भी जल्द पर्दा उठने वाला है. सभी निर्दलीय विधायक गहलोत के साथ खड़े हैं. 

राजस्थान के सभी 13 निर्दलीय विधायक अशोक गहलोत के साथ खड़े हैं. वफादारी इन्होंने बगावत के वक्त जता दी. अब इन्हें सरकार में साथ लेने की चुनौती है. कुछ दिग्गज तो मंत्रिपरिषद में आने के प्रबल दावेदार है. इनकी निष्ठा कांग्रेस के साथ हो या नहीं हो लेकिन गहलोत के साथ पूरी है. करीब 9 निर्दलीय विधायक तो ऐसे ही है जिनकी पृष्ठभूमि कांग्रेसी है, टिकट नहीं मिला तो बागी बनकर चुनाव जीत गए थे.

--- कांग्रेस विचारधारा के वो निर्दलीय विधायक जो गहलोत के साथ है और क्यों ! ---

---महादेव सिंह खंडेला, विधायक खंडेला
- शेखावाटी के कद्दावर जाट नेता
- पहले रह चुके खंडेला से कांग्रेस विधायक, इस बार निर्दलीय जीते
- सीकर से सांसद रह चुके और केन्द्र सरकार में राज्य मंत्री का जिम्मा
- अशोक गहलोत के करीबी और सिपहसलार माने जाते है
- गहलोत ने ही इन्हें सांसद का टिकट दिलवाया था
- निर्दलीय विधायकों में सबसे सीनियर 1980 में पहली बार विधायक बने थे

---बाबू लाल नागर, विधायक दूदू
- बाबू लाल नागर जीते है दूदू से बागी होकर चुनाव
- राज्य के बड़े दलित नेताओं में होती है गिनती
- पिछली गहलोत सरकार में रह चुके खाद्य नागरिक आपूर्ति मंत्री
- गहलोत को मानते है "राजनीतिक गॉडफादर"
- दूदू से चौथी बार चुने गये है विधायक
- गहलोत की सोच पर सेवादल में रहते हुए सूखे के खिलाफ अभियान चलाया
- कांग्रेस में भीड़ एकत्रित करने में एक्सपर्ट माने जाते

---संयम लोढ़ा, विधायक सिरोही
- सिरोही से बागी होकर चुनाव जीते संयम लोढ़ा
- वैश्य वर्ग से ताल्लुक
- लेकिन कांग्रेस के प्रति निष्ठा बरकरार
- जालोर-सिरोही के बड़े नेताओं में संयम की गिनती
- पहले रह चुके सिरोही से कांग्रेस के विधायक
- जब लड़ते थे गहलोत जोधपुर से लोकसभा चुनाव
- उस दौरान लोढ़ा संभालते थे गहलोत का चुनावी मैनेजमेंट
 
---रामकेश मीना, विधायक गंगापुर सिटी
- रामकेश मीना बने निर्दलीय विधायक
- पूर्वी राजस्थान के कद्दावर मीणा क्षत्रप
- गंगापुर सिटी से बागी होकर जीता विस चुनाव
- पिछली गहलोत सरकार में रहे थे रामकेश थे संसदीय सचिव
- कट्टर गहलोत समर्थक कहे जाते हैं

---खुशवीर सिंह जोजावर, विधायक मारवाड़-जंक्शन
- मारवाड़-गोडवाड के राजपूत नेताओं में होती है गिनती
- जोजावर बने मारवाड़ जंक्शन से निर्दलीय विधायक
- पहले 1 बार कांग्रेस पार्टी से रह चुके है विधायक
- पाली के जिला प्रमुख भी रह चुके
- बाड़ेबंदी के दौरान इधर उधर हुए अब फिर गहलोत समर्थक 

---आलोक बेनीवाल, विधायक शाहपुरा
- आलोक बेनीवाल ने जीता था शाहपुरा से चुनाव
- जाट वर्ग से ताल्लुक
- राव राजेन्द्र सिंह जैसे दिग्गज को हराया था चुनाव
- पूर्व राज्यपाल डॉ कमला के पुत्र है आलोक
- डॉ कमला एक बार रही थी गहलोत मंत्रीमंडल में डिप्टी सीएम
- कांग्रेस में गहलोत और पायलट दोनों की पसंद
- व्यक्तिगत तौर पर गहलोत के साथ आलोक बेनीवाल

---लक्ष्मण मीना, विधायक बस्सी
- बस्सी से बागी होकर जीते थे लक्ष्मण मीना चुनाव
- एसटी वर्ग से ताल्लुक 
- पहले लड़ चुके कांग्रेस टिकट पर दौसा से लोस चुनाव
- चुनाव जीतते ही कह दिया था मैं अशोक गहलोत के साथ
- हाल ही में ट्विट करके जता दी प्रतिबद्धता
- आईपीएस के बाद राज्य की सियासत में आए

----राजकुमार गौड़, विधायक श्रीगंगानगर
- राजकुमार गौड़ ने जीता श्रीगंगानगर से बागी होकर जीता चुनाव
- नहरी क्षेत्र के कद्दावर ब्राह्मण नेताओ में गिनती
- पहली बार बने है विधायक
- सरल छवि के नेता और कांग्रेस के कद्दावर नेता रहे
- गौड़ को जनता ने ही चुनाव लड़ाया और जीताया भी
- चुनाव जीतते ही गहलोत आवास पहुंच गये थे गौड़
- कांग्रेस और गहलोत के प्रबल समर्थक 

---रमीला खडिया, विधायक कुशलगढ़
- आदिवासी एसटी वर्ग में विधायक
- आदिवासी इलाके कुशलगढ़ से जीता बागी होकर चुनाव
- एक जमाने भर तक कुशलगढ़ रहा है जेडीयू की धरती
- अशोक गहलोत के समर्थन में खड़िया
- बाड़ेबंदी के दौरान विचार बदले लेकिन गहलोत के साथ

---भाजपा के बागी जो कांग्रेस के साथ---

---ओम प्रकाश हुडला, महुवा विधायक
- कांग्रेस कार्यकर्ता के तौर पर सियासत शुरू की
- पूर्वी राजस्थान के मीणा वर्ग से ताल्लुक
- उस वक्त दौसा की राजनीति में परसादी लाल मीणा के समर्थक
- परसादी लाल को माना जाता रहा है गहलोत समर्थक
- कस्टम की सरकारी नौकरी छोड़कर आए राजनीति में
- आगे चलकर वसुंधरा राजे के साथ जुड़े 
- राजे सरकार में रह चुके संसदीय सचिव
- अभी साथ है सीएम अशोक गहलोत के
- हालांकि बाड़ेबंदी के दौरान निष्ठाओं पर सवाल खड़े हुए थे
- नाटकीय घटनाक्रम के तहत साथ आ गए थे सीएम कैंप के

---सुरेश टांक, विधायक किशनगढ़
- सुरेश टांक होंगे अभी कांग्रेस के साथ
- किशनगढ़ से निर्दलीय विधायक है टांक
- टांक को भाजपा से नहीं मिल पाया था टिकट
- मूल रुप से भाजपा-संघ से रहा है सुरेश टांक का नाता
- भाजपा में मंडल से लेकर जिला इकाइयों में विभिन्न पदों पर रहे
- बाड़ेबंदी के दौरान हुडला के साथ दिल्ली पहुंच गए थे
- फिलहाल पूरी तरह अशोक गहलोत के साथ
 
कभी बीजेपी से विधायक रहे ओम प्रकाश हुडला पूरी तरह गहलोत के साथ है उन्होंने तो यहां तक कह दिया कि कोरोना में जैसा काम अशोक गहलोत ने किया है उन्हें देश में बेस्ट चीफ मिनिस्टर घोषित करना चाहिये.

---वो गैर कांग्रेसी निर्दलीय, जो गहलोत के साथ---

---कांति प्रसाद मीना, विधायक थानागाजी
- कांति प्रसाद मीना आये कांग्रेस के साथ
- थानागाजी से निर्दलीय विधायक बने कांति मीना
- गहलोत के प्रति इन्होंने चुनाव जीतते ही आस्था जता दी थी
- आज पूरी तरह कर गहलोत का समर्थन

---बलजीत यादव, विधायक बहरोड़
- यादव सियासत के नये दिग्गज
- बलजीत यादव जीते है बहरोड़ से निर्दलीय चुनाव
- कांग्रेस से टिकट मांगा था लेकिन नहीं मिला था
- पहले भी बहरोड़ से चुनाव लड़ा लेकिन कम अंतर से हारे
- मजदूर हितों के संघर्ष की राजनीति से चमके
- अशोक गहलोत के माने जाते है समर्थक

कांग्रेस के अंदर चल रहे मौजूदा घटनाक्रम में 13 निर्दलीय विधायकों का नंबर गेम ही नहीं बल्कि सोशल इंजीनियरिंग भी अहम है.

---गहलोत के साथ ST वर्ग के निर्दलीय विधायक
रामकेश मीणा, ओपी हुडला, लक्ष्मण मीणा, कांति प्रसाद मीणा, रमिला खड़िया आते है आदिवासी मीणा वर्ग से. इनमें से रामकेश मीणा, हुडला, लक्ष्मण मीणा, कांति प्रसाद मीणा का ताल्लुक पूर्वी राजस्थान से, कांति का विधानसभा क्षेत्र थानागाजी आता है दौसा लोकसभा क्षेत्र में, यह वो इलाका है जो राज्य की राजनीति में सचिन पायलट का प्रभाव क्षेत्र माना जाता, इसी इलाके से आने वाले विधायको में से कई पायलट के साथ खड़े हैं. लिहाजा निर्दलियों का साथ गहलोत के लिए बड़ा सपोर्ट हैं पूर्वी राजस्थान से.
रमिला का ताल्लुक दक्षिणी राजस्थान से हैं.  

---गहलोत के साथ जाट वर्ग से आने वाले निर्दलीय विधायक 
महादेव सिंह खंडेला की तुलना शेखावाटी से आने कद्दावर जाट नेताओं में होती है. अक्सर राज्य की राजनीति में कहा जाता है गहलोत के साथ जाट नहीं लेकिन इस मिथक को यह निर्दलीय विधायक ही तोड़ रहे. खंडेला खांटी जाट राजनीति के लिए जाने जाते हैं. डॉ कमला के पुत्र और जाट नेता आलोक बेनीवाल भी गहलोत के साथ है, यहां बात आलोक बेनीवाल की नहीं बल्कि डॉ कमला की है, वो कभी गहलोत समर्थक के तौर पर नहीं मानी गई, अपने दम पर सियासत की, जयपुर जिले की सबसे बड़ी नेता कहलाई, आलाकमान भी सम्मान से देखता है इसलिए तो नरेंद्र मोदी जब गुजरात सीएम थे तब डॉ कमला वहां की राज्यपाल रही, राजस्थान की राजनीति में डॉ कमला ने महिलाओं की शिक्षा और उत्थान के लिए जो काम किया वो mile stone है. लिहाजा उनके विधायक पुत्र का गहलोत को सपोर्ट बेहद अहम.

---गहलोत के साथ एकमात्र दलित निर्दलीय विधायक 
दूदू के दलित विधायक बाबूलाल नागर का साथ गहलोत के लिए अहम ऐसे में जब पायलट कैंप के दलित विधायक वेद प्रकाश सोलंकी लगातार गहलोत सरकार पर दलित विरोधी हमले कर रहे. नागर को प्रदेश का बड़ा दलित नेता माना जाता है और जयपुर जिला और अजमेर लोकसभा की राजनीति और भूगोल को प्रभावित करते हैं.

इतने पर भी लंबे समय तक निर्दलीय विधायकों को साथ रखना आसान काम नहीं है. सरकार में प्रतिनिधित्व देने के साथ ही पूरा तालमेल रखना होगा, ताली एक हाथ से नहीं बजती. कहा जा रहा है कि वरीयता मिलेगी. 

...फर्स्ट इंडिया के लिए योगेश शर्मा की रिपोर्ट

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