VIDEO: रियायती दर पर भूमि आवंटन को लेकर सरकार सख्त, सवालों के घेरे में निकायों की कार्यशैली

VIDEO: रियायती दर पर भूमि आवंटन को लेकर सरकार सख्त, सवालों के घेरे में निकायों की कार्यशैली

जयपुर: आखिर प्रदेश के शहरी निकाय हैं कि मानते ही नहीं जब तक इन निकाय अधिकारियों को सरकार की ओर से डांट फटकार या लताड़ नहीं पिलाई जाए तब तक इन पर असर नहीं होता. हम जिस मामले की बात कर रहे हैं उसमें तो सारी हदें ही पार हो गई. यह मामला है रियायती दर पर संस्थाओं को आवंटित की गई भूमि का. रियायती दर पर संस्थाओं के आवंटन के मामले में आवंटन की शर्तो की पालना सुनिश्चित करने के लिहाज से मंत्री शांति धारीवाल के आदेश पर स्वायत शासन विभाग ने 4 दिसंबर को निकायों को निर्देश जारी किए थे. आपको बताते हैं इन निर्देशों के तहत निकायों को क्या कार्यवाही करनी है, जिसकी रिपोर्ट स्वायत शासन विभाग मांग रहा है.

निकायों को यह करनी है कार्यवाही:
- आवंटन नीति के तहत निकाय की गठित समिति अपने क्षेत्र के प्रकरणों का भौतिक सत्यापन करें.
-15 दिन में भौतिक सत्यापन की कार्यवाही पूरी करें.
- आवंटन की शर्तों की अवहेलना की स्थिति में अथवा भूमि का भिन्न उपयोग होने की स्थिति में आवंटन निरस्त करने की कार्यवाही करें.
-आवंटन निरस्त करने के 3 दिन में जमीन का भौतिक कब्जा लें.
-जिन प्रकरणों में आवंटन की शर्तों की पालना और भूमि का सही उपयोग पाया जाए.
-उन प्रकरणों में समिति में शामिल प्रत्येक अधिकारी प्रमाण पत्र दे.
-प्रमाण पत्र में प्रमाणित किया जाए कि प्रकरण में आवंटन की शर्तों और भूमि के उपयोग की शर्त की पालना की जा रही है.
-इसके बाद उस प्रकरण में शर्तो की अवहेलना की मिलती है सही शिकायत और जिम्मेदार अधिकारी ने इस बारे में रिपोर्ट नहीं की है.
-तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ कड़ी कार्यवाही की जाएगी.

नगरीय विकास एवं स्वायत्त शासन मंत्री शांति धारीवाल रियायती दर पर संस्थाओं को आवंटन के मामले में आवंटन की शर्तों की पालना कराने को लेकर मामले में गंभीर हैं. आपको बताते हैं कि विभाग के मंत्री की इस गंभीरता के बावजूद प्रदेश के शहरी निकायों के अधिकारी मामले में लगातार लापरवाही बरत रहे हैं.

- मंत्री शांति धारीवाल ने 1 जून 2020 को प्रदेशभर के सभी विकास प्राधिकरण, नगर सुधार न्यास और शहरी निकायों को निर्देश दिए थे कि अब तक रियायती दर पर भूमि आवंटन के सभी प्रकरणों की जानकारी भिजवाई जाए.

-इन निर्देशों की पालना में प्रदेश के विकास प्राधिकरण और नगर सुधार न्यासों ने तो यह जानकारी भिजवा दी.

-लेकिन अधिकतर नगर परिषद, नगर निगम और नगर पालिका ने यह जानकारी 5 महीने बीतने के बावजूद भी नहीं भिजवाई थी.

- स्वायत शासन विभाग ने नवंबर अंत में जब उप क्षेत्रीय निदेशकों को व्यक्तिगत जिम्मेदारी दी तब जाकर निकायों ने 463 प्रकरणों की जानकारी विभाग को भिजवाई.

- इसके बाद मंत्री शांति धारीवाल के आदेश पर स्वास्थ्य शासन विभाग ने सभी निकायों को 4 दिसंबर को निर्देश जारी कर इन प्रकरणों में कार्यवाही कर रिपोर्ट भेजने की हिदायत दी.

- निर्धारित समय में रिपोर्ट नहीं भेजे जाने पर विभाग ने 16 दिसंबर को उप क्षेत्रीय निदेशकों को रिपोर्ट भिजवाने के लिए पाबंद किया.

- इसके बावजूद अब तक जयपुर संभाग के कुछ छोटे निकायों ने ही इस बारे में रिपोर्ट भिजवाई है.

मंत्री शांति धारीवाल मामले में काफी सजग और गंभीर:
यह पहला मामला नहीं है जब शहरी निकायों के जिम्मेदार अधिकारियों ने लापरवाही बरती हो, लेकिन यह मामला और मामलों से इस लिहाज से अलग है कि खुद विभाग के मंत्री शांति धारीवाल मामले में काफी सजग और गंभीर हैं. वे चाहते हैं कि गरीबों के कल्याण के जिस उद्देश्य से कौड़ियों के भाव संस्थाओं को जमीन दी गई, वह उद्देश्य पूरा हो. लेकिन इसके बावजूद अधिकतर शहरी निकायों के अधिकारियों के कानों में जूं नहीं रेंग रही है.

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