Indian Railways : रेलवे में टिकट की वेटिंग की टेंशन से मिलेगी मुक्ति , यात्रियों की डिमांड पर चलेगी ट्रेन

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/09/18 01:25

नई दिल्ली: रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष वी के यादव ने मंगलवार को कहा कि भारतीय रेलवे अगले चार साल में दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-हावड़ा मार्ग पर 'मांग के आधार पर' यात्री रेलगाड़ी चला सकेगी, जो प्रतीक्षा सूची के झंझट से मुक्त होगी. समर्पित माल गलियारे (डीएफसी) के 2021 तक बनने के बाद ऐसा हो सकेगा.भारतीय रेलवे जल्द आपको एक स्पेशल फैसिलिटी देने वाली है. इसके तहत आपकी डिमांड पर ट्रेन चलाएगी. रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष वीके यादव ने बताया कि रेलवे अगले 4 साल में दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-हावड़ा रूट पर मांग के आधार पर यात्री रेलगाड़ी चलाएगी

भारतीय रेलवे जल्द आपको एक स्पेशल फैसिलिटी देने वाली है..यादव ने कहा कि इन दो मार्गों पर समर्पित माल गलियारे का निर्माण 2021 तक पूरा होने से मालगाड़ियां मौजूदा रेललाइनों से हट जाएंगी, जिससे उन पर अधिक यात्री रेलगाड़ियां चलाई जा सकेंगी.जब इन दो मार्गों पर डीएफसी का काम पूरा हो जाएगा, तो दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-हावड़ा की मौजूदा लाइनों से मालगाड़ियां पूरी तरह हट जाएंगी तब हम मांग पर यात्री गाड़ियां चला सकेंगे इस रूट पर (रेलगाड़ियों की गति) बढ़ाकर 160 किलोमीटर प्रति घंटा करने को पहले ही मंजूरी मिल गई है और ये काम अगले चार साल में पूरा हो जाएगा.

यादव ने कहा, 'इसलिए अगले चार साल में मालभाड़ा और यात्री रेलगाड़ियां मांग के आधार पर चला सकेंगे और इसका अर्थ है कि हम आवागमन की जरूरतें पूरी कर सकेंगे इन मार्गों पर अगले चार साल के अंदर कोई प्रतीक्षा नहीं होगी.उन्होंने कहा कि उत्तर-दक्षिण (दिल्ली-चेन्नई), पूर्व-पश्चिम (मुंबई-हावड़ा) और खड़गपुर-विजयवाड़ा समर्पित माल गलियारे पर काम चल रहा है और अगले एक साल के भीतर लोकेशन सर्वे का काम पूरा हो जाएग.

उन्होंने बताया, 'ये डीएफसी करीब 6,000 किलोमीटर लंबे होंगे और इन्हें अगले 10 साल में पूरा किया जाएगा। जब ये काम हो जाएगा, हमारे पास बहुत अधिक क्षमता होगी और हम कई रेलगाड़ियां चला सकेंगे..यादव ने कहा, 'इसलिए समय के साथ हमारे पास इतनी अधिक क्षमता होगी कि हम निजी संचालकों को भी शामिल कर सकते हैं और उत्पादन इकाइयों का निगमितीकरण भी किया जा सकता है. ताकि देश में 160 किलोमीटर प्रति किलोमीटर की रफ्तार से चलने वाले आधुनिक डिब्बे उपलब्ध हो सकें और साथ ही हम उनका निर्यात भी कर सकें

यादव के मुताबिक कि समय के साथ हमारे पास इतनी अधिक क्षमता होगी कि हम निजी संचालकों को भी शामिल कर सकते हैं और प्रॉडक्शन यूनिट्स को कॉरपोरेटाइज भी किया जा सकता है. ताकि देश में 160 किलोमीटर प्रति किलोमीटर की रफ्तार से चलने वाले आधुनिक डिब्बे उपलब्ध हो सकें और साथ ही हम उनका निर्यात भी कर सकें.

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