कश्मीर में हालात सामान्य, नजरबंद नेता जल्द हो सकते हैं रिहा

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/11/16 12:11

नई दिल्ली गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने शुक्रवार को संसद की एक समिति को बताया कि केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में हालात सामान्य हो रहे हैं.जम्मू व कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटाने के बाद नजरबंद हुए राजनीतिक दलों के नेता जल्द ही रिहा हो सकते हैं. केंद्रीय गृह सचिव ए.के. भल्ला ने शुक्रवार को गृह मंत्रालय से संबंधित संसदीय समिति की बैठक में यह जानकारी दी है. पूर्व मुख्यमंत्रियों समेत हिरासत में लिए गए नेताओं को रिहा किया जाएगा लेकिन इसके लिए उन्होंने कोई समय सीमा नहीं बताई.

कांग्रेस नेता आनंद शर्मा की अध्यक्षता वाली गृह मामलों की संसद की स्थायी समिति को केंद्रीय गृह सचिव अजय कुमार भल्ला, मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव ज्ञानेश कुमार और अन्य अधिकारियों ने केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के हालात से अवगत कराया. जम्मू कश्मीर में अब स्थिति सामान्य होती जा रही है. स्कूल, कॉलेज और सरकारी दफ्तरों में सामान्य तरीके से कामकाज हो रहा है. सड़क एवं रेल मार्ग, सब खुल गए हैं. दूरसंचार सेवाओं पर लगी पाबंदी भी लगभग खत्म हो चुकी है. कुछ संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा के लिहाज से इंटरनेट पर छोटे अंतराल के लिए पाबंदियां जारी हैं.समिति के कुछ सदस्यों ने सरकारी अधिकारियों से कहा कि उन्हें कश्मीर जाने दिया जाने दिया जाना चाहिए, लेकिन इस मांग को खारिज कर दिया गया

नए केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में भी पूरी तरह से शांति है. विकास योजनाओं पर भी तेजी से काम शुरू हुआ है. इस संसदीय समिति में राज्यसभा के नौ और लोकसभा के 21 सदस्य हैं और इसकी अध्यक्षता आनंद शर्मा ने की. केंद्रीय गृह सचिव ए.के. भल्ला के साथ अतिरिक्त सचिव जम्मू व कश्मीर और दूसरे अधिकारी भी मौजूद रहे.सूत्रों के मुताबिक केंद्रीय गृह सचिव भल्ला ने संसदीय समिति के समक्ष कहा, 'जम्मू कश्मीर और लद्दाख के अलग केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद वहां बड़े स्तर पर विकास योजनाएं शुरू की गई हैं. लोगों के साथ नियमित बैठक की जा रही हैं. सेब एवं दूसरे व्यवसायों पर सरकार की नजर है.

सचिव भल्ला ने कहा, 'इसके लिए केंद्र की ओर से जम्मू कश्मीर और लद्दाख क्षेत्र के उप राज्यपाल को जरूरी हिदायतें दी गई हैं. घाटी में युवाओं को सरकारी नौकरी या प्राइवेट काम-धंधा दिलाने पर काम हो रहा है.' केंद्रीय गृह सचिव ने कहा कि पंचायतों को विश्वास में लेकर ग्रामीण इलाक़ों के विकास की रूपरेखा तैयार की गई है.संसदीय समिति के एक सदस्य ने राजनीतिक नेताओं की रिहाई बाबत जब पूछा तो गृह सचिव ने कहा कि अब काफी हद तक हालात सामान्य हो गए हैं. जल्द ही अधिकांश नेताओं को रिहा कर दिया जाएगा.  सांसदों को अधिकारियों ने बताया कि 1990 से अबतक जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी हिंसा की 71,254 घटनाएं हुई जिनमें 14,049 नागरिकों की मौत हो गई और 5,293 सुरक्षा कर्मी शहीद हो गए। इसी दौरान 22,552 आतंकवादी भी मारे गए.

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