महान वैज्ञानिक डॉ साराभाई, जिन्होंने डॉ कलाम को बनाया मिसाइल मैन

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/08/12 03:48

नई दिल्‍ली .डॉ विक्रम साराभाई ने भारत के अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में काफी योगदान दिया है. उन्होंने 1947 में अहमदाबाद में भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला (पीआरएल) की स्थापना की और थोड़ी ही समय में इसे विश्वस्तरीय संस्थान बना दिया. भारत आज अंतरिक्ष मिशन में पूरी दुनिया को राह दिखा रहा है 22 जुलाई को भारत ने चंद्रयान-2 लॉच कर अंतरिक्ष में एक नई छलांग लगाई है.
भारत को अंतरिक्ष तक पहुंचाने वाले वैज्ञानिक विक्रम साराभाई की 100वीं जयंती के मौके पर गूगल ने डूडल बनाकर उन्हें याद किया है अहमदाबाद के एक अग्रणी कपड़ा व्यापारी के घर 12 अगस्त, 1919 को को जन्मे श्री साराभाई की गिनती भारत के महान वैज्ञानिकों में की जाती है. वह अपने साथ काम करने वाले वैज्ञानिकों, विशेषकर युवा वैज्ञानिकों को आगे बढ़ने में काफी मदद करते थे
डॉ विक्रम साराभाई को देश के महान वैज्ञानिक और अंतरिक्ष कार्यक्रमों के जनक के तौर पर जाना जाता है उन्होंने ही भारत रत्न से सम्मानित पूर्व राष्ट्रपति व प्रख्यात वैज्ञानिक डॉ एपीजे अब्दुल कलाम को मिसाइल मैन बनाया था उनकी आज 100वीं जंयती है डॉ विक्रम साराभाई ने कैंब्रिज विश्वविद्यालय से अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद अहमदाबाद में ही फिजिकल रिसर्च लेबोरेटरी (पीआरएल) की स्थापना की थी उस समय उनकी उम्र महज 28 साल थी. पीआरएल की सफल स्थापना के बाद डॉ साराभाई ने कई संस्थानों की स्थापना में अपना महत्वपूर्ण सहयोग दिया.
साराभाई ने कहा था, ‘कुछ ऐसे हैं जो एक विकासशील राष्ट्र में अंतरिक्ष गतिविधियों की प्रासंगिकता पर सवाल उठाते हैं. हमारे लिए, उद्देश्य को लेकर कोई अस्पष्टता नहीं है.विक्रम साराभाई का महज 52 साल की उम्र में 30 दिसंबर, 1971 को तिरुवनंतपुरम में निधन हो गया

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