VIDEO: इस शख्स ने निभाई भाजपा को सत्ताएं दिलाने में असली भूमिका, बनाये कई 'चंद्रगुप्त'

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/06/06 01:38

जयपुर: आज के दौर में भले ही चाणक्य जैसे इतिहास पुरुष के नाम से किसी को भी संबोधित किया जाता हो लेकिन भाजपा को सत्ताएं दिलवाने वाला असली चाणक्य कौन है? आप खुद इस रिपोर्ट को देखकर अंदाजा लगा सकते है. बस यूं ही नहीं उस व्यक्ति के विचार व शिक्षा भाजपा के दिग्गजों के डीएनए में ऐसे घुले कि आज नतीजे सभी के सामने है. 

माधवराव सदाशिवराव गोलवलकर आरएसएस के चाणक्य
जनसंघ से भाजपा और, भाजपा में अटल बिहारी वाजपेयी से लेकर अब नरेंद्र मोदी का स्वर्णिम दौर बनने के पीछे आरएसएस की एक शख्सियत का नाम इतिहास में ठीक वैसे ही होगा जैसे कि प्राचीन काल में चाणक्य को कहा जाता है. वो है माधवराव सदाशिवराव गोलवलकर यानी श्री गुरुजी. फर्क सिर्फ इतना है कि चाणक्य ने एक चंदगुप्त को पैदा किया लेकिन इस आधुनिक चाणक्य ने कई चंद्रगुप्त बनाये और दुनिया से जाने के बाद भी चंद्रगुप्त निर्माण जारी है. बुधवार को गुरूजी की पुण्यतिथि थी. हालांकि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को अपने निर्माण के बाद किसी राजनैतिक संगठन से इत्तेफाक नही था. लेकिन महात्मा गांधी की हत्या के बाद आरोपों ने संघ पर प्रतिबंध लगा दिए हालांकि बाद में इस आरोप से संघ को क्लीनचिट मिल गई. 30 जनवरी 1948 को जब महात्मा गांधी की हत्या हुई तब तत्कालीन सरकार ने आरएसएस पर प्रतिबंध लगाया उस वक्त सरसंघचालक गोलवलकर ने इस घटना की निंदा की और कहा कि संघ पर आरोप सिद्ध करो या फिर प्रतिबंध हटाओ. 

लोकतंत्र में बिना राजनीतिक मज़बूती के आरएसएस का चलना कठिन था
26 फरवरी 1948 को देश के प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू को गृहमंत्री वल्लभभाई पटेल ने अपने पत्र में लिखा था कि गांधी हत्याकांड में मैंने स्वयं अपना ध्यान लगाकर पूरी जानकारी प्राप्त की है. उससे जुड़े हुए सभी अपराधी लोग पकड़ में आ गए हैं. एक भी व्यक्ति राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का व्यक्ति नहीं है. उसके बाद 9 दिसंबर 1948 को सत्याग्रह आंदोलन का नाम देखकर आर एस एस के स्वयंसेवकों ने करीब 77 हजार की संख्या में जेल भरो आंदोलन किया. उसके बाद संघ को लिखित संविधान बनाने का आदेश देकर प्रतिबंध हटा लिया गया. लेकिन उसी वक्त संघ का आरोप था कि कांग्रेस तुष्टीकरण की राजनीति कर रही है. ऐसे में किसी एक पार्टी को खड़ा करना संघ के सामने इसलिए जरूरी था कि लोकतंत्र में बिना राजनीतिक मज़बूती के आरएसएस का चलना कठिन था. साथ ही एक तरफ कांग्रेस का विचार परिवार दूसरी तरफ कम्युनिस्ट ऐसे में तीसरे विकल्प के तौर पर जनसंघ को आरएसएस का साथ मिला और श्यामा प्रसाद मुखर्जी के लिए दीनदयाल उपाध्याय सरीखे प्रचारक को खुद गोलवलकर ने भेजा. क्योंकि गोलवलकर ही वह व्यक्ति थे जिसने एक तरफ तो आरएसएस के विचार परिवारों के हर संगठन को खड़ा करना शुरू किया तो दूसरी तरफ देशभर में पूर्णकालिक प्रचारक परंपरा निर्मित की. वहीं से निकले थे सुंदर सिंह भंडारी, अटलबिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी सरीखे कई दिग्गज जिन्होंने शायद सोच रखा था कि गोलवलकर के विचारों के जरिये राजनीति में विचार खड़ा करना है. 

गुरुजी संघ के द्वितिय सरसंघचालक बने 
यही कारण रहा कि कई बार आरएसएस पर प्रतिबंध के बाद भी धीरे-धीरे गोलवलकर के दर्शन से ही आज नरेंद्र मोदी सरीखे वैश्विक नेता सभी के सामने है. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पहले सरसंघचालक डॉ केशवराव बलिराम हेडगेवार के बाद दूसरे सरसंघचालक गुरुजी को जिम्मेदारी 1940 में मिली लेकिन उच्च शिक्षित गुरुजी ने 1952 में जनसंघ की स्थापना में अहम योगदान निभाया.  गुरुजी संघ के द्वितिय सरसंघचालक बने और उन्होंने यह दायित्व 1973 की 5 जून तक अर्थात लगभग 33 वर्षों तक संभाला. ये 33 वर्ष संघ और राष्ट्र के जीवन में अत्यंत महत्वपूर्ण रहे.  विश्व हिंदू परिषद्, विवेकानंद शिला स्मारक, अखिल भारतीय विद्दार्थी परिषद्, भारतीय मजदूर संघ, वनवासी कल्याण आश्रम, शिशु मंदिरों आदि विविध सेवा संस्थाओं के पीछे गुरुजी की ही प्रेरणा रही है. आज भले ही भारतीय मजदूर संघ हो या भारतीय किसान संघ और सबसे महत्वपूर्ण आर एस एस के लिए और भारतीय जनता पार्टी के लिए विश्व हिंदू परिषद भी.  ये तमाम ऐसे दर्जनों अनुषांगिक संगठन माधव राव सदाशिव राव गोलवलकर की ही देन है कारण साफ़ एक व्यक्ति के निर्माण में व्यक्ति के जाने के बाद विचार भी खत्म हो जाते हैं. लेकिन गोलवलकर ने विचारों को आगे बढ़ाने की परंपरा पर जोर दिया जिसकी बदौलत ही आज नरेंद्र मोदी तो सामने है. 

भाजपा के नेता गोलवलकर की तस्वीर की करते है पूजा
यही कारण है चाहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हो या फिर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह या फिर भाजपा के कोई भी शीर्ष से लेकर नीचे के स्तर तक के नेता और कार्यकर्ता सभी इस तस्वीर को किसी देवता या ऋषि से कम नहीं मानते और इस तस्वीर की पूजा भी शायद इसीलिए करते हैं. संक्षेप में कहा जाए तो आरएसएस के विस्तार का जो काम गोलवलकर ने किया उसी की बदौलत आज भाजपा देश में लगातार दूसरी बार सत्ता में है साथ ही अन्य राज्यों में तो सिलसिला पहले से जारी है. 

...ऐश्वर्य प्रधान फर्स्ट इंडिया न्यूज जयपुर

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