आज है काल भैरव अष्टमी, जानें इसका महत्व और विधि

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/11/19 12:11

कालाष्टमी जिसे काल भैरव जयंती भी कहा जाता है. ये हर माह कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है. इस विशेष दिन भगवान शिव के रूद्र अवतार कालभैरव की पूजा-अर्चना करने का विधान हैं.काल भैरव को समर्पित इस दिन भक्त साल भर आने वाली हर कालाष्टमी पर उपवास कर भगवान शिव, मां दुर्गा और भैरवनाथ को प्रसन्न करते हैं. ये व्रत हर महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है, इसलिए भी इसे कालाष्टमी कहते है.

काल भैरव अष्टमी और काल भैरव जयंती के बारे में आज जानेंगे  कि इस दिन आप पूजा पाठ कैसे करें और काल भैरव जयंती का क्या महत्व होता है एवं भैरव बाबा का पूजा पाठ कैसे किया जाता है.पहले जान लेते हैं कालाष्टमी के महत्व के बारें में 

कालाष्टमी व्रत का पौराणिक महत्व 
जैसा हमने आपको पहले ही बताया कि कालभैरव को भगवान शिव का रूद्र अवतार माना जाता है, इसलिए शास्त्रों अनुसार जो भी व्यक्ति इस विशेष दिन उपवास कर कालभैरव की सच्ची भाव सहित आराधना करता है उसे भगवान शिव सदैव सभी नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति दिलाते हैं

इसके साथ ही काल भैरव की उपासना करने से व्यक्ति को शीघ्र ही शुभ फलों की प्राप्ति तो होती ही है। साथ ही व्यक्ति की कुंडली में मौजूद किसी भी प्रकार का राहु दोष भी दूर हो जाता है। तो आइये अब जानते है काल भैरव को प्रसन्न करके और उनसे मनचाहा फल पाने के लिए कालाष्टमी पर किन विशेष बातों का हर जातक को ज़रूर ध्यान रखना चाहिए.चूँकि भैरव को तांत्रिकों के देवता माना गया है, इसलिए कालभैरव जयंती की पूजा केवल और केवल रात के समय ही की जानी चाहिए 

कालभैरव जयंती व्रत की सही पूजा विधि
इस दिन काले कुत्ते को भोजन कराना शुभ होता है। क्योंकि माना गया है कि ऐसा करने से भैरवनाथ प्रसन्न होते हैं 
इस दिन भैरवनाथ की पूजा के साथ-साथ माता वैष्णो देवी की भी पूजा करने का विधान है 
इस दिन विशेष तौर पर भैरव जयंती से एक दिन पहले रात्रि के समय पूजा करने का अधिक महत्व होता है। इसलिए रात के समय काल भैरव के साथ-साथ मां दुर्गा की भी रात्रि में पूजा-आराधना करें 
रात भर पूजा करने से इसके बाद अगली सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान आदि कर साफ़ वस्त्र पहने और उसके बाद ही भैरव देव की पूजा करें
मान्यता अनुसार कालभैरव जयंती पर भैरव देव की पूजा के लिए शमशान घाट से लायी गयी राख ही चढ़ाई जाती है
इसके पश्चात पूजा कर काल भैरव कथा सुनने से लाभ मिलता है  
इस दौरान काल भैरव के मंत्र “ॐ काल भैरवाय नमः” का जाप करना चाहिए
इसके साथ ही इस दिन मां बंगलामुखी का अनुष्ठान भी इस दौरान करना बेहद शुभ माना गया है। इससे व्यक्ति को शुभाशुभ लाभ की प्राप्ति होती है
इस दिन श्रद्धा अनुसार ग़रीबों को अन्न और वस्त्र का दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। 
अगर मुमकिन हो तो कालाष्टमी के दिन मंदिर में जाकर कालभैरव के समक्ष तेल का एक दीपक ज़रूर जलाएं

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