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Twitter CEO ने की घोषणा, ट्विटर अगले महीने से राजनीतिक विज्ञापनों पर लगाएगा रोक

Twitter CEO ने की घोषणा, ट्विटर अगले महीने से राजनीतिक विज्ञापनों पर लगाएगा रोक

नई दिल्ली: ट्विटर अपनी रणनीति में कुछ बदलाव करने वाला है वजह है भारतीय राजनीति में सोशल मीडिया का  ज्यादा इस्तेमाल. ट्विटर के सीईओ जैक डोर्सी ने कहा, ''इंटरनेट पर विज्ञापन बहुत ताक़तवर और प्रभावी होते हैं, क़ारोबारी विज्ञापनों तक ठीक है लेकिन यही ताक़त राजनीति में बहुत बड़ा जोख़िम भी लाती है.''ट्विटर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने बुधवार (30 अक्टूबर) को बयान जारी करते हुए कहा है कि चूंकि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म झूठी सूचनाओं के साथ चुनाव जीतने की कोशिश को रोकने के लिए दबाव का सामना करते हैं इसलिए ट्विटर अगले महीने से राजनीतिक विज्ञापनों पर बैन लगाएगा.जबकि इसके विपरीत फेसबुक कहचुका है कि वो राजनीतिक विज्ञापनों को बंद नहीं करेगा.ट्विटर के रणनीतिक बदलाव की वजह से हो सकता है आने वाले दिनों में आपको ट्विटर पर राजनीतिक पार्टियों की पोस्ट और प्रचार देखने को ना मिले

ट्विटर पर राजनीतिक विज्ञापनों पर रोक की ख़बर पर अमरीकी राजनीतिक धड़े बंटे हुए हैं.राष्ट्रपति ट्रंप के चुनावी प्रचार के मैनेजर ब्रेड पास्कल ने इसे ट्रंप और कंज़रवेटिव्स को ख़ामोश करने की कोशिश बताया है.सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म झूठी सूचनाओं के साथ चुनाव जीतने की कोशिश को रोकने के लिए दबाव का सामना करते हैं इसलिए ट्विटर अगले महीने से राजनीतिक विज्ञापनों पर बैन लगाएगा.इन दिनों सोशल मीडिया कंपनियों, जिनमें ट्विटर और उसकी प्रतिद्वंदी फेसबुक भी शामिल है, पर गलत जानकारी फैलाने वाले विज्ञापनों को रोकने के लिए दबाव काफी बढ़ गया है. आपको बता दें ट्विटर पर राजनीतिक प्रचारों पर लगने वाला यह बैन 22 नवंबर से शुरू हो रहा है.

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Nasa का दावा: हम अपनी सफलता का ही शिकार हुए, अंतरिक्ष यान से छलककर अंतरिक्ष में ही गिर रहे बेनू छुद्र ग्रह के नमूने

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केप केनावरल, अमेरिका: हाल ही में नासा ने एक बड़ा खुलासा किया है. एक रिपोर्ट के अनुसार बेनू छुद्र ग्रह के नमूने लेकर आने वाले नासा के अंतरिक्ष यान ऑरिसिस-रेक्स के कंटेनर से नमूनों के बहूमूल्य कण छलककर अंतरिक्ष में ही गिर रहे हैं.  वैज्ञानिकों ने इस बात की जानकारी दी है और पुष्टि भी की है. तीन दिन पहले वैज्ञानिकों ने बताया था कि अंतरिक्ष यान ऑरिसिस-रेक्स ने बेनू छुद्र ग्रह पर कुछ देर रुककर उसके नमूने एकत्रित कर लिये हैं. 

आपको बता दे कि नासा का इस तरह का ये पहला अभियान है. नासा को उम्मीद है कि अंतरिक्ष यान से लाए गए बेनू ग्रह के नमूनों की मदद से सौरमंडल की उत्पत्ति के राज खुल सकते हैं. माना जाता है कि इन ग्रहों की उत्पत्ति भी सौरमंडल के साथ हुई थी. अभियान के मुख्य वैज्ञानिक डेंटे लॉरेटा ने मंगलवार को हुए उस अभियान के बारे में बताते हुए कहा था कि यान ने उम्मीद से अधिक नमूने एकत्रित कर लिये हैं और उसके धरती पर लौटने की उम्मीद है.

नासा वैज्ञानिक लॉरेटा ने आनन-फानन में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा है कि हम अपनी सफलता का ही शिकार बन गए हैं. उन्होंने कहा कि यान नियंत्रक बाधाओं को दूर कर बेनू के और अधिक नमूनों को गिरने से रोकने के अलावा कुछ नहीं कर सकते है. आगे और क्या-क्या अद्भूत घटनाएं देखने को मिलेंगी ये तो वक्त ही बताएगा. (सोर्स-भाषा)

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2008 में आज के दिन हुआ था ‘चंद्रयान-1’ का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण

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नई दिल्ली: इतिहास के पन्नों में 22 अक्टूबर का दिन भारत के लिए अंतरिक्ष की एक बड़ी उपलब्धि के साथ जुड़ा है. जी हां आज के दिन सन् 2008 में भारत ने अपने पहले चंद्र मिशन ‘चंद्रयान-1’ का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया था. जिसके बाद दुनिया भारत का लोहा मान गई थी. इस प्रोजेक्ट को अंजान तत्कालिन इसरो प्रमुख जी माधवन की अध्यक्षता मे दिया गया था.

आपको बता दे कि आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा में प्रक्षेपण स्थल पर कई दिनों से  बारिश और खराब मौसम की शिकायत थी मगर इसके बाद भी आखिरकार भारत ने इस दिन ‘चंद्रयान-1’ के रूप में अपने पहले मानवरहित चंद्र अभियान को अमली जामा पहनाया और दुनिया भर में अपनी ताकत की उदाहरण पेश किया था. (सोर्स-भाषा)

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6 महीने की सुरक्षित अंतरिक्ष यात्रा के बाद धरती पर लौटे तीन अंतरिक्ष यात्री

 6 महीने की सुरक्षित अंतरिक्ष यात्रा के बाद धरती पर लौटे तीन अंतरिक्ष यात्री

मास्को: अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन में छह महीने के अभियान के बाद तीन अंतरिक्ष यात्री सुरक्षित धरती पर लौट आए है. नासा के तीनों खगोल यात्रीओं में अमेरिका के क्रिस केसिडी, रूस के अनातोली इवानिशीन तथा इवान वेगनर शामिल है. सूत्रों के अनुसार तीनों को लेकर आ रहे सोयूज कैप्सूल कजाखस्तान के देजकाजगन शहर के दक्षिण पूर्व में बृहस्पतिवार की सुबह सात बजकर 54 मिनट पर लैंडिग की है. 

चिकित्सा जांच के बाद तीनों को हेलीकॉप्टर से देजकाजगन लाया जायेगा जहां वह अपने घर के लिये उड़ान भरेंगे. कोरोना वायरस महामारी के कारण अतिरिक्त सावधानी को ध्यान में रखते हुये रूसी बचाव दल की टीम के साथ जब उनकी (अंतरिक्ष यात्रियों) मुलाकात हुयी तो उससे पूर्व उनकी कोरोना वायरस जांच की गयी है. हांलाकि इन राहत प्रयासों में शामिल लोगों की संख्या सीमित थी. 

जानकारी है कि केसिडी, इवानिशीन एवं वेगनर अप्रैल से ही अंतरिक्ष स्टेशन में रह रहे थे. नासा के केट रूबिंस, रूस के सर्गेई रेजिकोव तथा सर्गेई कुद-सेवरेचकोव एक सप्ताह पहले छह महीने के लिए अंतरिक्ष स्टेशन के लिए रवाना हो चुके हैं. फिलहाल सेफ लैडिंग से सभी वैज्ञानिकों ने राहत की सांस ली है.  (सोर्स-भाषा)

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गोबर के चिप से मोबाइल फोन विकिरण कम होने के सबूत दे कथीरिया: IMOS वैज्ञानिक

गोबर के चिप से मोबाइल फोन विकिरण कम होने के सबूत दे कथीरिया: IMOS वैज्ञानिक

नई दिल्ली: देश की राजधानी में राष्ट्रीय कामधेनु आयोग के अध्यक्ष वल्लभभाई कथीरिया द्वारा किए गए दावे में नया मोड़ आया है. असल में करीब छह सौ वैज्ञानिकों और विज्ञान के शिक्षकों ने को पत्र लिखकर कहा है कि वह गोबर की चिप से मोबाइल फोन विकिरण कम करने में मदद मिलने संबंधी अपनी दावों को साबित करने के लिए जल्दी से जल्दी साक्ष्य पेश करें. 

‘इंडिया मार्च फॉर साइंस’ की मुंबई शाखा ने एक बयान में कहा कि वैज्ञानिकों ने यह भी जानकारी मांगी है कि इस संबंध में वैज्ञानिक प्रयोग कब एवं कहां हुए और मुख्य जांचकर्ता कौन था. जिसके पीछे ये जानना है कि कहीं भ्रामकता फैलाने के लिहाज से तो कहीं ऐसे दावे नहीं किए जा रहे है. 

उन्होंने यह भी जानकारी मांगी कि इस संबंधी अध्ययन के परिणाम कहां प्रकाशित हुए. आपको बता दे कि कथीरिया ने पिछले सप्ताह दावा किया था कि घरों में गोबर रखने से विकिरण कम होता है और एक गोबर की चिप बनाई गई है जो मोबाइल फोन से होने वाले विकिरण को कम कर सकती है. फिलहाल सभी को कथीरिया  की ओर से रिपोर्ट का इंतजार है. (सोर्स-भाषा)

 

गोबर के चिप से मोबाइल फोन विकिरण कम होने के सबूत दे कथीरिया: IMOS वैज्ञानिक

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नई दिल्ली: देश की राजधानी में राष्ट्रीय कामधेनु आयोग के अध्यक्ष वल्लभभाई कथीरिया द्वारा किए गए दावे में नया मोड़ आया है. असल में करीब छह सौ वैज्ञानिकों और विज्ञान के शिक्षकों ने को पत्र लिखकर कहा है कि वह गोबर की चिप से मोबाइल फोन विकिरण कम करने में मदद मिलने संबंधी अपनी दावों को साबित करने के लिए जल्दी से जल्दी साक्ष्य पेश करें. 

‘इंडिया मार्च फॉर साइंस’ की मुंबई शाखा ने एक बयान में कहा कि वैज्ञानिकों ने यह भी जानकारी मांगी है कि इस संबंध में वैज्ञानिक प्रयोग कब एवं कहां हुए और मुख्य जांचकर्ता कौन था. जिसके पीछे ये जानना है कि कहीं भ्रामकता फैलाने के लिहाज से तो कहीं ऐसे दावे नहीं किए जा रहे है. 

उन्होंने यह भी जानकारी मांगी कि इस संबंधी अध्ययन के परिणाम कहां प्रकाशित हुए. आपको बता दे कि कथीरिया ने पिछले सप्ताह दावा किया था कि घरों में गोबर रखने से विकिरण कम होता है और एक गोबर की चिप बनाई गई है जो मोबाइल फोन से होने वाले विकिरण को कम कर सकती है. फिलहाल सभी को कथीरिया  की ओर से रिपोर्ट का इंतजार है. (सोर्स-भाषा)

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जियो की ढाई-तीन हजार रुपए में 5जी स्मार्टफोन बेचने की योजना: कंपनी अधिकारी

जियो की ढाई-तीन हजार रुपए में 5जी स्मार्टफोन बेचने की योजना: कंपनी अधिकारी

नई दिल्ली: रिलायंस जियो के एक अधिकारी ने बताया कि कंपनी 5,000 रुपए से कम कीमत में 5जी स्मार्टफोन पेश करने की योजना बना रही है, और आगे बिक्री बढ़ने पर इसकी कीमत घटाकर 2500-3000 हजार रुपए तक की जाएगी. कंपनी इस पहल के तहत वर्तमान में 2जी कनेक्शन का इस्तेमाल करने वाले 20-30 करोड़ मोबाइल उपयोगकर्ताओं को लुभाने की कोशिश करेगी.

कंपनी के एक अधिकारी ने नाम गोपनीय रखने की शर्त पर बताया कि जियो उपकरण की कीमत 5,000 रुपए से कम रखना चाहती है. जब हम बिक्री बढ़ा लेंगे, तो इसकी कीमत 2,500-3,000 रुपए हो सकती है. रिलायंस जियो ने इस संबंध में भेजे गए ईमेल का कोई जवाब नहीं दिया. इस समय भारत में मिलने वाले 5जी स्मार्टफोन की कीमत 27,000 रुपए से शुरू है.

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जियो भारत में उपभोक्ताओं के लिए मुफ्त में 4जी मोबाइल फोन पेश करने वाली पहली कंपनी. इसके तहत जियो फोन के लिए 1,500 रुपए देने थे, जो बाद में वापस हो सकते थे. रिलायंस इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक मुकेश अंबानी ने कंपनी की 43वीं वार्षिक आम बैठक में भारत को 2जी मुक्त (2जी कनेक्शनों से मुक्त) बनाने की बात कही थी और एक सस्ते 5जी स्मार्टफोन की जरूरत पर जोर दिया था.

कंपनी अपने 5जी नेटवर्क उपकरण पर भी काम कर रही है और उसने दूरसंचार विभाग से इन उत्पादों के परीक्षण के लिए स्पेक्ट्रम आवंटित करने के लिए कहा है. सरकार ने अभी रिलायंस जियो के अनुरोध पर फैसला नहीं किया है. इस समय भारत में 5जी सेवाएं नहीं हैं और सरकार ने 5जी तकनीक के परीक्षण के लिए दूरसंचार परिचालकों को स्पेक्ट्रम आवंटित नहीं किया है. (भाषा)

स्पेशल 5जी वायरलेस नेटवर्क एप्रोच लेकर मार्केट में आया Iphone 12, साथ में है तीन और नये मॉडल्स

स्पेशल 5जी वायरलेस नेटवर्क एप्रोच लेकर मार्केट में आया Iphone 12, साथ में है तीन और नये मॉडल्स

वाशिंगटन: एप्पल एक बार फिर पूरी तैयारी के साथ मार्केट में उतरने के लिए तैयार है. इस बार कंपनी ने तेज 5जी वायरलेस नेटवर्क का इस्तेमाल करने के लिए जरूरी तकनीक से लैस चार आईफोन पेश किए हैं. इनमें पहला मॉडल 6.1 इंच डिस्प्ले वाला आईफोन 12 है, जो आईफोन 11 की तरह ही है, लेकिन उससे हल्का और पतला है. इसकी कीमत 800 अमेरिकी डॉलर से शुरू है. दूसरा मॉडल 5.4 इंच डिस्प्ले के साथ आईफोन 12 मिनी है, जिसकी कीमत लगभग 700 डॉलर है. उच्च श्रेणी वाला आईफोन 12 प्रो अधिक बेहतर कैमरे के साथ आता है और इसकी कीमत करीब 1000 डॉलर है.
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चौथा मॉडल 6.7 इंच डिस्प्ले वाला 12 प्रो मैक्स है, और इसकी कीमत 1,100 डॉलर से शुरू है. मगर इस बार एप्पल के कुछ ग्राहकों को यह जानकार नाराजगी भी हो सकती है क्योंकि कंपनी फोन के साथ एडॉप्टर नहीं दे रही है. कंपनी का कहना है कि ऐसा करने से फोन की पैकिंग वाला डिब्बा छोटा और हल्का रहेगा, जो पर्यावरण के अनुकूल और निर्यात के लिए लिहाज से भी सुविधाजनक रहेगा. एप्पल हालांकि पावर एडॉप्टर अगल से बेच रहा है, जिसकी कीमत 20 डॉलर से 50 डॉलर के बीच है. आईफोन लवर्स जल्दी ही अपने पसंद के फोन का आनंद उठा सकते है. (सोर्स-भाषा)

ट्राई की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, 40 करोड़ ग्राहकों का आंकड़ा पार करने वाली पहली कंपनी बनी JIO

ट्राई की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा,  40 करोड़ ग्राहकों का आंकड़ा पार करने वाली पहली कंपनी बनी  JIO

नई दिल्ली: रिलायंस जियो देश में 40 करोड़ ग्राहक का आंकड़ा पार करने वाली देश की पहली दूरसंचार सेवा कंपनी बन गयी है. दूर संचार विनियामक ट्राई की सोमवार को जारी एक रिपोर्ट के अनुसार कंपनी ने जुलाई में शुद्ध रूप से 35 लाख नए ग्राहक कंपनी से जुड़े है. इस रिपोर्ट  के मुताबिक कुल देश में कुल दूरसंचार ग्राहकों की संख्या जुलाई थोड़ी बढ कर 116.4 करोड़ हो गयी. जुलाई में यह संख्या 116 करोड़ थी. 

भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) की ताजा रपट के अनुसार जुलाई में मोबाइल फोन कनेक्शन बढ़ कर 114.4 करोड़ हो गए. जून में यह संख्या 114 करोड़ थी। इनमें शहरी और ग्रामीण क्षेत्र के कनेक्शन क्रमश: 61.9 करोड़ और 52.1 करोड़ थे. स्थिर लाइन कनेक्शन की संख्या कई वर्ष बाद जुलाई में हल्की बढ कर 1,98,20,419 हो गयी. इसमें जियो और अन्य निजी कंपनियों का बड़ा योगदान रहा है. इस दौरान सरकारी क्षेत्र की भारत संचार निगम लि. और एमटीएनएल तथा रिलायंस कम्यूनिकेशन्स तथा टाटा टेली सविसेज के स्थिर लाइन कनेक्शनों की संख्या में गिरावट का सिलसिला लगातार बना रहा. 
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अगर भारत की बात करे तो यहां के मोबाइल बाजार में रिलायंस जियो का हिस्सा 40,08,03,819 ग्राहकों के साथ 35.03 प्रतिशत पर पहुंच गया है. भारती एयरटेल ने जुलाई में 32.6 बीएसएनएल ने 3.88 लाख मोबाइल ग्रहक जोड़े गये है . इसी दौरान वोडाफोन ने 37 लाख से अधिक और एमटीएनएल ने 5,457 लाख मोबाइल ग्राहक गंवा दिए है. आलोच्य माह में ब्राडबैंड कनेक्शन की संख्या 1.03 प्रतिशत से बढ़ कर 70.54 करोड़ हो गयी.  आपकी जानकारी के लिए बता दे कि जून में यह 69.82 करोड़ थी. (सोर्स-भाषा)