संसद का शीतकालीन सत्र सोमवार से शुरू , सत्र में नागरिकता संशोधन बिल पेश करने की तैयारी में सरकार

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/07/16 02:07

नई दिल्ली: संसद का शीतकालीन सत्र सोमवार से शुरू हो रहा है.केंद्र सरकार शीतकालीन सत्र में नागरिकता संशोधन बिल पेश करने की तैयारी में है. नागरिकता संशोधन बिल का पूर्वोत्तर के राज्य विरोध कर रहे हैं. पूर्वोत्तर के लोग इस बिल को राज्यों की सांस्कृतिक, भाषाई और पारंपरिक विरासत से खिलवाड़ बता रहे हैं.राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) का फाइनल ड्राफ्ट आने के बाद असम में विरोध-प्रदर्शन भी हुए थे. हालांकि इसमें जिन लोगों के नाम नहीं हैं, उन्हें सरकार ने शिकायत का मौका भी दिया.

सुप्रीम कोर्ट ने एनआरसी से बाहर हुए लोगों के साथ सख्ती बरतने पर रोक लगा दी थी. अब, जबकि सरकार नागरिकता संशोधन विधेयक लाने जा रही है, विरोध एक बार फिर मुखर होने लगा है.आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि सरकार ने सत्र के लिए अपनी कार्यसूची में नागरिकता विधेयक को रखा है मोदी सरकार ने अपने पहले कार्यकाल में इस बिल को संसद में पेश किया था, लेकिन विपक्ष के विरोध के चलते यह पारित नहीं हो सका था.लोकसभा का कार्यकाल खत्म होने के बाद यह बिल भी खत्म हो गया था।

नागरिकता संशोधन बिल क्या है 

नागरिकता संशोधन बिल नागरिकता अधिनियम 1955 के प्रावधानों को बदलने के लिए पेश किया जा रहा है, जिससे नागरिकता प्रदान करने से संबंधित नियमों में बदलाव होगा. नागरिकता बिल में इस संशोधन से बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से आए हिंदुओं के साथ ही सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाइयों के लिए बगैर वैध दस्तावेजों के भी भारतीय नागरिकता हासिल करने का रास्ता साफ हो जाएगा.

कितनी कम हो जाएगी निवास अवधि

भारत की नागरिकता हासिल करने के लिए देश में 11 साल निवास करने वाले लोग योग्य होते हैं. नागरिकता संशोधन बिल में बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के शरणार्थियों के लिए निवास अवधि की बाध्यता को 11 साल से घटाकर 6 साल करने का प्रावधान है.

 क्यों गूंज रहे हैं विरोध के स्वर 

इसे सरकार की ओर से अवैध प्रवासियों की परिभाषा बदलने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है. गैर मुस्लिम 6 धर्म के लोगों को नागरिकता प्रदान करने के प्रावधान को आधार बना कांग्रेस और ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट धार्मिक आधार पर नागरिकता प्रदान किए जाने का विरोध कर रहे हैं. नागरिकता अधिनियम में इस संशोधन को 1985 के असम करार का उल्लंघन भी बताया जा रहा है, जिसमें सन 1971 के बाद बांग्लादेश से आए सभी धर्मों के नागरिकों को निर्वासित करने की बात थी.

इस सत्र में सरकार का जोर नागरिकता समेत कई अहम बिल पास कराने पर होगा.वहीं विपक्ष राफेल सौदे की जांच के लिए जेपीसी के गठन और महाराष्ट्र के मौजूदा राजनीतिक हालात पर चर्चा कराने के लिए दबाव बना सकता है,शीतकालीन सत्र 13 दिसंबर तक चलेगा.

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