गेस्टहाउस कांड को भुलाकर मुलायम को माया का साथ, कहा- कभी-कभी कठिन फैसले लेने पड़ते हैं

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/04/19 02:59

मैनपुरी। लोकसभा चुनावों के मद्देनजर यूपी के मैनपुरी में आज महागठबंधन के नेता मायवती और मुलायम सिंह यादव 26 साल बाद एक मंच पर नजर आए। इस रैली में मुलायम सिंह यादव के बेटे और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव भी मौजूद रहे। 

मैनपुरी में साझा रैली को संबोधित करते हुए बसपा सुप्रीमो मायावती ने कहा कि यहां पर उमड़ी भीड़ से साफ है कि आप लोग सपा संरक्षक मुलायम जी को भारी संख्या में जिताकर संसद भेजेंगे।

मायावती ने कहा कि 2 जून, 1995 के गेस्टहाउस कांड को भुलाकर हम एक साथ आए हैं। ''कभी-कभी कठिन फैसले लेने पड़ते हैं। मुलायम सिंह जी ने पिछड़े लोगों को जोड़ा है। वह (मुलायम) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरह फर्जी पिछड़ी जाति के नहीं हैं''।  

जनसभा को संबोधित करने के दौरान मायावती ने कहा कि मुलायम ही पिछड़े वर्गों के असली नेता हैं। ''(पीएम नरेंद्र मोदी) नकली व्यक्ति पिछड़े वर्गों का भला नहीं कर सकता है। पिछड़े वर्ग के नेता मुलायम सिंह यादव को जिताकर आप संसद भेजिए। इस चुनाव में असली और नकली के बीच पहचान की जरूरत है। नकली लोगों से धोखा खाने से बचें''।

वहीं, कांग्रेस पर हमला बोलते हुए मायावती ने कहा कि कांग्रेस ने अपने वादे कभी नहीं पूरे किए। कांग्रेस अब देश में घूम-घूमकर गरीबों को वोट हासिल करने में जुट गई है। आप लोगों को बहकावे में आकर वोट देने की जरूरत नहीं है। कांग्रेस कह रही है कि सरकार में आने पर थोड़ी सी आर्थिक मदद दी जाएगी। यह ढकोसला है। अगर हम सत्ता में आए तो आपको पूरी आर्थिक मदद करने के साथ ही आपको रोजगार देंगे।

बतादें,1992 में मुलायम सिंह यादव ने समाजवादी पार्टी बनाई और 1993 के विधानसभा चुनाव में दोनों पार्टियों ने मिलकर चुनाव लड़ा था। इस गठबंधन को जीत मिली थी और मुलायम सिंह यादव सीएम बने थे। हालांकि, दो ही साल में दोनों पार्टियों के बीच रिश्ते खराब होने लगे। इसी बीच मुलायम सिंह को भनक लग गई कि मायावती बीजेपी के साथ जा सकती हैं।

2 जून 1995 को मायावती लखनऊ स्थित गेस्ट हाउस में विधायकों के साथ बैठक कर रहीं थीं। इतने में एसपी के कार्यकर्ता और विधायक वहां पहुंचे और बीएसपी के कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट करने लगे।

आरोप है कि मायावती पर भी हमला करने की कोशिश की गई लेकिन उन्होंने खुद को एक कमरे में बंद करके खुद को बचा लिया। इस घटना के बाद मायावती ने समर्थन वापस लेने के ऐलान कर दिया। इसके बाद मायावती बीजेपी के समर्थन से सीएम बन गईं। 

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