त्रेतायुग से जुड़ा है भगवान परशुराम का इतिहास

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/05/07 04:59

नई दिल्ली। 7 मई को वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया है। इस तिथि को अक्षय तृतीया के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु के छठे अवतार भगवान परशुराम का भी जन्म हुआ था। परशुराम ऋषि जमदग्नि और रेणुका के पुत्र थे। परशुराम भगवान शिव के परमभक्त होने के साथ न्याय के देवता भी माने जाते हैं। 

कहते हैं त्रेतायुग में सीता स्वयंवर के दौरान टूटने वाला धनुष भगवान परशुराम का ही था। अपने धनुष के टूटने से क्रोधित परशुराम का जब लक्ष्मण के साथ संवाद हुआ तो भगवान श्री राम ने परशुराम जी को अपना सुदर्शन चक्र सौंप दिया था। यह वहीं सुदर्शन चक्र था जो द्वापर युग में भगवान श्री कृष्ण के पास था।

वहीं महाभारत से जुड़ीं प्रचलित कथाओं के अनुसार भीष्म पितामह परशुराम के ही शिष्य थे। एक बार जब भीष्म ने अपने छोटे भाई से विवाह करवाने के लिए काशीराज की तीनों बेटियों अंबा, अंबिका और अंबालिका का हरण कर लिया। लेकिन जब अंबा ने भीष्म को बताया कि वह राजा शाल्व से प्रेम करती हैं, तो भीष्म ने उसे छोड़ दिया। लेकिन शाल्व ने अंबा के हरण होने के बाद उससे विवाह करन से इंकार कर दिया। 

अंबा ने जब यह बात परशुराम को बताई तो उन्होंने भीष्म को उससे विवाह करने का आदेश दिया। लेकिन आजीवन ब्रह्मचर्य पालन करने की प्रतिज्ञा लेने वाले भीष्म ने ऐसा करने से मना कर दिया। जिसके बाद परशुराम और भीष्म के बीच युद्ध हुआ। हालांकि बाद में अपने पितरों की बात मानकर परशुराम ने अपने अस्त्र रख दिए थे।

First India News से जुड़े अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करे!
हर पल अपडेट रहने के लिए अभी डाउनलोड करें First India News Mobile Application
लेटेस्ट वीडियो के लिए हमारे YOUTUBE चैनल को विजिट करें

और पढ़ें

Most Related Stories

Stories You May be Interested in