VIDEO: फिर इतिहास को दोहराते दिखेगी राज्य की विधानसभा, नई ईमारत में कुछ तो गड़बड़ है !

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/06/12 11:07

जयपुर: राजस्थान विधानसभा के मौजूदा भवन में कभी भी 200 विधायक एक साथ नहीं बैठे. अब एक बार फिर राज्य विधानसभा के भावी सत्र में ऐसा नजर आयेगा. दो विधायकों के सांसद बनने के बाद 198 विधायक ही सदन में नजर आएंगे. विधानसभा की मौजूदा इमारत जब से स्थापित हुई है तभी से यह आमतौर पर देखा गया है कि कभी भी 200 विधायक एक साथ सदन के अंदर नहीं बैठे. किसी ना किसी घटनाक्रम के कारण ऐसा होता आया है. यहीं कारण है कि मौजूदा विधानसभा भवन को लेकर कई अंधविश्वास भी चर्चा में आये. विधायकों तक ने टोने-टोटकों के जरिये भूत प्रेत भगाने तक की बात कर दी थी. अब फिर वहीं हालात हमें नजर आ रहे है जब भावी सत्र 198 विधायकों का ही होगा 200 का नहीं. 

गहलोत सरकार के निर्माण के बाद जब विधानसभा का पहला सत्र बुलाया गया था उससे पहले ही यह तय हो चुका था कि 200 विधायकों के पूरी तरह सदन में नहीं बैठने का इतिहास वो टूटने वाला नहीं है, कारण साफ है रामगढ़ विधानसभा का चुनाव होना बाकि रह गया था. रामगढ़ विधानसभा का चुनाव होने के बाद  विधायकों की संख्या पूरी तो हो गई लेकिन तभी आ गये लोकसभा के चुनाव. मौजूदा विधानसभा के 2 विधायकों ने लोकसभा का चुनाव लड़कर जीत लिया और सांसद बन गये. अब हनुमान बेनीवाल और नरेन्द्र खींचड़ विधायक की जगह सांसद बन चुके है. दोनों ने ही राज्यविधानसभा की सदस्यता भी त्याग दी. तमाम घटनाक्रमों से इस बात को फिर बल मिला गया है कि कोई ना कोई ऐसी बात है जो यह बार बार जता देती है कि विधानसभा की नई इमारत में कुछ तो है. 

राजस्थान विधानसभा लगातार अंधविश्वासी बातों से दो चार हो रही है
यहीं कारण है कि जिस विधानसभा में टोने टोटके कुरीतियां अंधविश्वास जैसी कुप्रथाओं को तोड़ने के कानून बनाए जाते हैं वह राजस्थान विधानसभा लगातार अंधविश्वासी बातों से दो चार हो रही है. तमाम तरह की किवदंतियों का बरसों से नई विधानसभा को सामना करना पड़ रहा है. मौजूदा राजस्थान विधानसभा के भवन को लेकर यह बात पूरी तरह साफ हो चुकी है कि यहां कभी भी 200 विधायकों का एक साथ पूरे समय तक बैठना नहीं हो पाया है. वसुंधरा राजे के शासन के दौरान चले विधानसभा के सत्रों में भूत प्रेतों को लेकर खुद विधायकों ने भी आगे चलकर आशंका जताई थी, जब नाथद्वारा विधायक कल्याण सिंह चौहान का निधन हुआ था तब उस समय के विधायक हबीबुर्रहमान रहमान समेत कुछ विधायकों ने यह तक कहा था कि विधानसभा पर बुरी आत्मा का साया है, तत्कालीन मुख्य सचेतक कालूलाल गुर्जर ने भी उस दौरान यह बात कही थी. पूजा पाठ हवन के जरिए बुरे संयोग को हटाने की बात भी की गई, हवन कराने के लिये पुरोहित तक भी बुलाये गये, लेकिन इन बातों को नकार दिया गया, जबकि सवाल बरकरार है कि विधानसभा के अंदर आखिर क्यों 200 विधायक एक साथ मौजूद नहीं रह पाते. 

एक बार इतिहास को भी जान लेते है..
- फरवरी 2001 के दौरान जब 11 विधानसभा का सत्र था विधानसभा पुराने भवन से नए भवन में शिफ्ट हो चुकी थी. 
- 25 फरवरी को तत्कालीन राष्ट्रपति के आर नारायणन इसका उद्घाटन करने आने वाले थे जो बीमार होने की वजह से नहीं आ सके. 
- आखिरकार बिना उद्घाटन ही विधानसभा शुरु हो गई 
- इसके बाद नवंबर 2001 में इसका उद्घाटन हुआ तब से अब तक कुछ विधायकों का निधन हो चुका था. 
- यह विधायक थे किशन मोटवानी, जगत सिंह दायमा, भीखा भाई, भीमसेन चौधरी, रामसिंह विश्नोई, अरुण सिंह, नाथूराम अहारी 
- इसके अलावा 2011 में जब तेरहवीं विधानसभा सत्र था 
- तब कांग्रेस सरकार में कैबिनेट मंत्री महिपाल मदेरणा और कांग्रेस के विधायक मलखान सिंह को भंवरी देवी हत्याकांड के कारण जेल जाना पड़ा.  
- वहीं 2012 में बीजेपी विधायक राजेंद्र राठौड़ को दारिया एनकाउंटर मामले में जेल जाना पड़ा.
- 14 वीं विधानसभा सत्र के वक्त बीएसपी के विधायक बाबू सिंह कुशवाहा को मर्डर के आरोपों के चलते जेल जाना पड़ा.
- वसुंधरा राजे के पिछले शासन के दौरान कल्याण सिंह चौहान, कीर्ति कुमारी, धर्मपाल चौधरी का विधायक पद पर रहते हुये निधन हो गया था.   
- विधानसभा सत्र के दौरान बीजेपी विधायक कीर्ति कुमारी कल्याण सिंह का निधन हो गया मुंडावर विधायक धर्मपाल चौधरी का निधन हो गया. 

उप चुनावों का भी लगातार मौजूदा विधानसभा की इमारत से सामना----
- विधानसभा से अचानक विधायकों की गैर मौजूदगी की एक बड़ा कारण उपचुनाव रहे. 
- समय समय पर कई विधानसभा क्षेत्रों को उपचुनाव का सामना भी करना पड़ा. 
- फरवरी 2002 में किशन मोटवानी के निधन के बाद अजमेर पश्चिम में उपचुनाव हुए.  
- दिसंबर 2002 में बानसूर विधायक जगत सिंह दायमा के निधन के बाद चुनाव हुआ.  
- सागवाड़ा विधायक भीखा भाई के निधन बाद उपचुनाव हुआ 
- 2005 जनवरी में लूणी विधायक रामसिंह विश्नोई के निधन के बाद उपचुनाव हुआ. 
- 2006 मई में डीग विधायक अरुण सिंह के निधन के बाद उपचुनाव हुआ.  
- 2006 दिसंबर में डूंगरपुर विधायक नाथूराम अहारी के निधन के बाद उपचुनाव हुआ. 
- 2017 में धौलपुर विधायक बीएल कुशवाह के जेल जाने के बाद वहां भी उपचुनाव हुए.
- 2017 में सितंबर के महीने में बीजेपी विधायक कीर्ति कुमारी के निधन के बाद मांडलगढ़ में उपचुनाव हुआ. 
- 21 फरवरी 2018 को बीजेपी विधायक कल्याण सिंह का भी निधन हो गया उसके बाद मुंडावर विधायक धर्मपाल चौधरी भी इस दुनिया में नहीं रहे. 
- मौजूदा विधानसभा की शुरुआत में रामगढ़ उपचुनाव का सामना करना पड़ा. 

राजस्थान की पुरानी विधानसभा जयपुर के चारदीवारी के मानसिंह टाउन हॉल में चला करती थी, नई विधानसभा आधुनिक परिवेश के साथ नए जयपुर में बनाई गई. लेकिन विधानसभा में विधायकों की उपस्थिति हमेशा शंकाओं से घिरी रही. खुलकर विधायक भले ही अंधविश्वासों के बारे में बात नहीं करें लेकिन अंदरूनी तौर पर कानाफूसी के जरिए यह कहते रहते हैं की विधानसभा के भवन को शुद्धिकरण की जरूरत है. विधायकों के फोटो सेशन में शायद कभी ऐसा हुआ हो जब पूरे विधायक एक साथ नजर आये. साफ है सदन में कुर्सियां 200 है मगर कभी भी 200 नहीं बैठ पाते. यह ज्वलंत प्रश्न राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष डॉ सीपी जोशी के सामने भी. साईकॉलोजी के प्रोफेसर डॉ सीपी जोशी के पास इसका उत्तर भी है. जो अंधविश्वास और टोने टोटकों की बातों को सीधे तौर पर नकारता है. तर्क में विश्वास करने वाले जोशी शायद अब यह इलाज भी ढूंढ ही ले जिसके जरिये विधानसभा की नई इमारत के इतिहास को वास्तु विज्ञान से बदला जा सके और 200 की महिमा कायम रह सके.

....फर्स्ट इंडिया के लिये नरेश शर्मा के साथ योगेश शर्मा की रिपोर्ट

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