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VIDEO: फिर इतिहास को दोहराते दिखेगी राज्य की विधानसभा, नई ईमारत में कुछ तो गड़बड़ है !

VIDEO: फिर इतिहास को दोहराते दिखेगी राज्य की विधानसभा, नई ईमारत में कुछ तो गड़बड़ है !

जयपुर: राजस्थान विधानसभा के मौजूदा भवन में कभी भी 200 विधायक एक साथ नहीं बैठे. अब एक बार फिर राज्य विधानसभा के भावी सत्र में ऐसा नजर आयेगा. दो विधायकों के सांसद बनने के बाद 198 विधायक ही सदन में नजर आएंगे. विधानसभा की मौजूदा इमारत जब से स्थापित हुई है तभी से यह आमतौर पर देखा गया है कि कभी भी 200 विधायक एक साथ सदन के अंदर नहीं बैठे. किसी ना किसी घटनाक्रम के कारण ऐसा होता आया है. यहीं कारण है कि मौजूदा विधानसभा भवन को लेकर कई अंधविश्वास भी चर्चा में आये. विधायकों तक ने टोने-टोटकों के जरिये भूत प्रेत भगाने तक की बात कर दी थी. अब फिर वहीं हालात हमें नजर आ रहे है जब भावी सत्र 198 विधायकों का ही होगा 200 का नहीं. 

गहलोत सरकार के निर्माण के बाद जब विधानसभा का पहला सत्र बुलाया गया था उससे पहले ही यह तय हो चुका था कि 200 विधायकों के पूरी तरह सदन में नहीं बैठने का इतिहास वो टूटने वाला नहीं है, कारण साफ है रामगढ़ विधानसभा का चुनाव होना बाकि रह गया था. रामगढ़ विधानसभा का चुनाव होने के बाद  विधायकों की संख्या पूरी तो हो गई लेकिन तभी आ गये लोकसभा के चुनाव. मौजूदा विधानसभा के 2 विधायकों ने लोकसभा का चुनाव लड़कर जीत लिया और सांसद बन गये. अब हनुमान बेनीवाल और नरेन्द्र खींचड़ विधायक की जगह सांसद बन चुके है. दोनों ने ही राज्यविधानसभा की सदस्यता भी त्याग दी. तमाम घटनाक्रमों से इस बात को फिर बल मिला गया है कि कोई ना कोई ऐसी बात है जो यह बार बार जता देती है कि विधानसभा की नई इमारत में कुछ तो है. 

राजस्थान विधानसभा लगातार अंधविश्वासी बातों से दो चार हो रही है
यहीं कारण है कि जिस विधानसभा में टोने टोटके कुरीतियां अंधविश्वास जैसी कुप्रथाओं को तोड़ने के कानून बनाए जाते हैं वह राजस्थान विधानसभा लगातार अंधविश्वासी बातों से दो चार हो रही है. तमाम तरह की किवदंतियों का बरसों से नई विधानसभा को सामना करना पड़ रहा है. मौजूदा राजस्थान विधानसभा के भवन को लेकर यह बात पूरी तरह साफ हो चुकी है कि यहां कभी भी 200 विधायकों का एक साथ पूरे समय तक बैठना नहीं हो पाया है. वसुंधरा राजे के शासन के दौरान चले विधानसभा के सत्रों में भूत प्रेतों को लेकर खुद विधायकों ने भी आगे चलकर आशंका जताई थी, जब नाथद्वारा विधायक कल्याण सिंह चौहान का निधन हुआ था तब उस समय के विधायक हबीबुर्रहमान रहमान समेत कुछ विधायकों ने यह तक कहा था कि विधानसभा पर बुरी आत्मा का साया है, तत्कालीन मुख्य सचेतक कालूलाल गुर्जर ने भी उस दौरान यह बात कही थी. पूजा पाठ हवन के जरिए बुरे संयोग को हटाने की बात भी की गई, हवन कराने के लिये पुरोहित तक भी बुलाये गये, लेकिन इन बातों को नकार दिया गया, जबकि सवाल बरकरार है कि विधानसभा के अंदर आखिर क्यों 200 विधायक एक साथ मौजूद नहीं रह पाते. 

एक बार इतिहास को भी जान लेते है..
- फरवरी 2001 के दौरान जब 11 विधानसभा का सत्र था विधानसभा पुराने भवन से नए भवन में शिफ्ट हो चुकी थी. 
- 25 फरवरी को तत्कालीन राष्ट्रपति के आर नारायणन इसका उद्घाटन करने आने वाले थे जो बीमार होने की वजह से नहीं आ सके. 
- आखिरकार बिना उद्घाटन ही विधानसभा शुरु हो गई 
- इसके बाद नवंबर 2001 में इसका उद्घाटन हुआ तब से अब तक कुछ विधायकों का निधन हो चुका था. 
- यह विधायक थे किशन मोटवानी, जगत सिंह दायमा, भीखा भाई, भीमसेन चौधरी, रामसिंह विश्नोई, अरुण सिंह, नाथूराम अहारी 
- इसके अलावा 2011 में जब तेरहवीं विधानसभा सत्र था 
- तब कांग्रेस सरकार में कैबिनेट मंत्री महिपाल मदेरणा और कांग्रेस के विधायक मलखान सिंह को भंवरी देवी हत्याकांड के कारण जेल जाना पड़ा.  
- वहीं 2012 में बीजेपी विधायक राजेंद्र राठौड़ को दारिया एनकाउंटर मामले में जेल जाना पड़ा.
- 14 वीं विधानसभा सत्र के वक्त बीएसपी के विधायक बाबू सिंह कुशवाहा को मर्डर के आरोपों के चलते जेल जाना पड़ा.
- वसुंधरा राजे के पिछले शासन के दौरान कल्याण सिंह चौहान, कीर्ति कुमारी, धर्मपाल चौधरी का विधायक पद पर रहते हुये निधन हो गया था.   
- विधानसभा सत्र के दौरान बीजेपी विधायक कीर्ति कुमारी कल्याण सिंह का निधन हो गया मुंडावर विधायक धर्मपाल चौधरी का निधन हो गया. 

उप चुनावों का भी लगातार मौजूदा विधानसभा की इमारत से सामना----
- विधानसभा से अचानक विधायकों की गैर मौजूदगी की एक बड़ा कारण उपचुनाव रहे. 
- समय समय पर कई विधानसभा क्षेत्रों को उपचुनाव का सामना भी करना पड़ा. 
- फरवरी 2002 में किशन मोटवानी के निधन के बाद अजमेर पश्चिम में उपचुनाव हुए.  
- दिसंबर 2002 में बानसूर विधायक जगत सिंह दायमा के निधन के बाद चुनाव हुआ.  
- सागवाड़ा विधायक भीखा भाई के निधन बाद उपचुनाव हुआ 
- 2005 जनवरी में लूणी विधायक रामसिंह विश्नोई के निधन के बाद उपचुनाव हुआ. 
- 2006 मई में डीग विधायक अरुण सिंह के निधन के बाद उपचुनाव हुआ.  
- 2006 दिसंबर में डूंगरपुर विधायक नाथूराम अहारी के निधन के बाद उपचुनाव हुआ. 
- 2017 में धौलपुर विधायक बीएल कुशवाह के जेल जाने के बाद वहां भी उपचुनाव हुए.
- 2017 में सितंबर के महीने में बीजेपी विधायक कीर्ति कुमारी के निधन के बाद मांडलगढ़ में उपचुनाव हुआ. 
- 21 फरवरी 2018 को बीजेपी विधायक कल्याण सिंह का भी निधन हो गया उसके बाद मुंडावर विधायक धर्मपाल चौधरी भी इस दुनिया में नहीं रहे. 
- मौजूदा विधानसभा की शुरुआत में रामगढ़ उपचुनाव का सामना करना पड़ा. 

राजस्थान की पुरानी विधानसभा जयपुर के चारदीवारी के मानसिंह टाउन हॉल में चला करती थी, नई विधानसभा आधुनिक परिवेश के साथ नए जयपुर में बनाई गई. लेकिन विधानसभा में विधायकों की उपस्थिति हमेशा शंकाओं से घिरी रही. खुलकर विधायक भले ही अंधविश्वासों के बारे में बात नहीं करें लेकिन अंदरूनी तौर पर कानाफूसी के जरिए यह कहते रहते हैं की विधानसभा के भवन को शुद्धिकरण की जरूरत है. विधायकों के फोटो सेशन में शायद कभी ऐसा हुआ हो जब पूरे विधायक एक साथ नजर आये. साफ है सदन में कुर्सियां 200 है मगर कभी भी 200 नहीं बैठ पाते. यह ज्वलंत प्रश्न राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष डॉ सीपी जोशी के सामने भी. साईकॉलोजी के प्रोफेसर डॉ सीपी जोशी के पास इसका उत्तर भी है. जो अंधविश्वास और टोने टोटकों की बातों को सीधे तौर पर नकारता है. तर्क में विश्वास करने वाले जोशी शायद अब यह इलाज भी ढूंढ ही ले जिसके जरिये विधानसभा की नई इमारत के इतिहास को वास्तु विज्ञान से बदला जा सके और 200 की महिमा कायम रह सके.

....फर्स्ट इंडिया के लिये नरेश शर्मा के साथ योगेश शर्मा की रिपोर्ट

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नई दिल्ली: केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राजीव गांधी फाउंडेशन सहित नेहरू-गांधी परिवार से संबंधित तीन ट्रस्ट की जांच के लिए एक कमेटी बनाई है. यह कमेटी इन फाउंडेशन की फंडिंग और इनके द्वारा किए गए उल्लंघनों की जांच करेगी. वहीं कांग्रेस ने इसे डराने वाली कार्रवाई बताया है. 

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मोदी को लगता है कि सारी दुनिया उनके जैसी: 
कांग्रेस सांसद और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने इसको लेकर ट्वीट करते हुए कहा कि मिस्टर मोदी को लगता है कि सारी दुनिया उनके जैसी है. वो सोचते हैं कि हर किसी की कोई कीमत होती है या हर किसी को डराया जा सकता है. वो ये कभी नहीं समझेंगे कि जो सच्चाई के लिए लड़ते हैं उनकी कोई कीमत नहीं होती है और उन्हों डराया नहीं जा सकता है. 

गहलोत ने राजनीतिक प्रतिशोध का मामला बताया: 
वहीं राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने ट्वीट करते हुए इसे राजनीतिक प्रतिशोध का मामला बताया है. उन्होंने कहा कि एनडीए सरकार पीएम केयर फंड में पारदर्शिता की आवश्यकता का मुद्दा पचा नहीं पाई. तीनों ट्रस्टों के खिलाफ कार्रवाई इसका प्रत्यक्ष परिणाम है. इसके साथ ही सीएम गहलोत ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि विपक्ष को चुप कराने और विपक्षी नेताओं को राष्ट्रीय हित के मुद्दों को उठाने से रोकने के लिए यह रणनीति बनाई गई है. 

अभिमानी रवैये के कारण सरकार ने आर्थिक संकट पर ध्यान नहीं दिया: 
मुख्यमंत्री गहलोत ने कहा कि राहुल गांधी ने NDA की गलत नीतियों के कारण गहरे आर्थिक संकट के बारे में चेतावनी दी थी और अब हम दुर्भाग्य से वहीं देख रहे हैं. सोनिया गांधी, डॉ मनमोहन सिंह और राहुल जी ने पिछले महीनों में आम लोगों, MSMEs, उद्यमों और बैंकों के सामने आने वाली कठिनाइयों को उठाया. कांग्रेस ने अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए कई सुझावों की पेशकश की लेकिन सरकार ने उनके अभिमानी रवैये के कारण कोई ध्यान नहीं दिया. 

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एक अंतर-मंत्रालय कमेटी का गठन किया: 
वहीं इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्रालय के प्रवक्ता ने ट्वीट कर जानकारी देते हुए बताया कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एक अंतर-मंत्रालय कमेटी का गठन किया है, जो कि राजीव गांधी फाउंडेशन, राजीव गांधी चैरिटेबल ट्रस्ट और इंदिरा गांधी मेमोरियल ट्रस्ट की जांच करेगी. इस जांच में इनकम टैक्स एक्ट, PMLA एक्ट और FCRA एक्ट के नियमों के उल्लंघन के बारे में जांच की जाएगी. 

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यह है पूरा विवाद: 
भारत और चीन के बीच जारी विवाद के चलते कांग्रेस पार्टी लगातार केंद्र सरकार पर हमला बोल रही है तो बीजेपी ने इसके उलट कांग्रेस को ही घेर लिया. बीजेपी के अध्यक्ष जेपी नड्डा की ओर से आरोल लगाया गया कि राजीव गांधी फाउंडेशन को चीन से फंडिंग मलिती थी. इसके साथ ही देश के लिए प्रधानमंत्रा राहत कोष बनाया गया था, उससे भी यूपीए सरकार ने पैसा राजीव गांधी फाउंडेशन को दिया था. बीजेपी का आरोप है कि 2005-08 तक PMNRF की ओर से राजीव गांधी फाउंडेशन को यह राशि मिली थी. 

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जयपुर: राजस्थान में अशोक गहलोत सरकार में मंत्रिमंडल विस्तार या फेरबदल को लेकर एक बार चर्चाएं तेज हो गई हैं. इसकी वजह आज मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की राज्यपाल कलराज मिश्र से मुलाकात मानी जा रही है. हालांकि इस मुलाकात को शिष्टाचार भेंट बताया जा रहा है. लेकिन राजनीतिक जानकार इस मुलाकात को मंत्रिमंडल फेरबदल से जोड़कर देख रहे हैं. सीएम गहलोत के राजभवन पहुंचते ही चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है. विधायक एक-दूसरे को फोन करने लगे हैं. इसके साथ ही सीएम की राजभवन यात्रा के कारण पूछे जा रहे हैं. लेकिन फिलहाल सीएम गहलोत व राज्यपाल कलराज मिश्र को ही इस बारे में जानकारी है. 

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राजभवन आने से पहले 4 मंत्री मिले मुख्यमंत्री से: 
मुख्यमंत्री गहलोत के राजभवन आने से पहले 4 मंत्री मुख्यमंत्री से मिले थे. आंजना, जाटव, जूली व प्रताप सिंह ने सीएम से मुलाकात की. उसके बाद सीएम की राज्यपाल से मुलाकात होने पर चर्चाओं को बल मिल गया है. ऐसे में संभवतया जल्द ही मंत्रिमंडल में फेरबदल हो सकता है. मुख्यमंत्री व राज्यपाल की मुलाकात के बाद संभावित मंत्रिमंडल फेरबदल को लेकर कई मंत्रियों व विधायकों की धड़कनें बढ़ गई है. हालांकि फिलहाल इसे शिष्टाचार मुलाकात बताया जा रहा है. लेकिन शाम तक ही मुलाकात की स्थिति साफ हो पाएगी. वहीं राजनीतिक नियुक्तियों व कुलपति नियुक्ति को लेकर चर्चा होने की भी संभावना जताई जा रही है. 

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किसी भी समय मंत्रिमंडल में विस्तार और फेरबदल संभव:
यह बिल्कुल साफ है कि प्रदेश में अब किसी भी वक्त कार्यकर्ताओं को राजनीतिक नियुक्तियों के तोहफे के साथ मंत्रिमंडल में विस्तार और फेरबदल हो सकता है. उसके मद्देनजर यह देखना दिलचस्प होगा कि सीएम गहलोत की राज्यपाल से मुलाकात के क्या मायने सामने आते हैं? लेकिन इसके लिए फिलहाल आधिकारिक बयान सामने आने तक इंतजार करना होगा. 


 

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अजमेर: शहर कांग्रेस ओर यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं द्वारा आज जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के बाहर दादागिरी दिखाते हुए हंगामा खड़ा कर दिया. अजमेर दक्षिण के कांग्रेस नेता हेमंत भाटी के नेतृत्व में कार्यकर्ता जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय पहुंचे और अपना मांग पत्र देने की मांग रखी जिस पर पुलिस ने कुछ ही कार्यकर्ताओं को कार्यालय पर जाने की अनुमति दी, लेकिन कांग्रेसी कार्यकर्ता अपनी सत्ता का रुतबा दिखाते हुए शिक्षा अधिकारी के कक्ष में जाकर वहां पर खड़े होकर के नारेबाजी करने लगे. 

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मेरी रिकॉर्डिंग कर लो मैं डरता नहीं:  
वहीं उसी समय शिक्षा अधिकारी कार्यालय पर एलडीसी भर्ती की काउंसलिंग भी चल रही थी लेकिन सत्ता के घमंड में चूर कांग्रेसी कार्यकर्ताओं को वह बच्चे नहीं दिखाई दिए और उनकी नारेबाजी लगातार जारी रही. हद तो तब पार हो गई जब यूथ कांग्रेस शहर अध्यक्ष यासीन चिश्ती ने जिला शिक्षा अधिकारी देवी सिंह कच्छावा को खुले में धमकी दे डाली और कुछ अपशब्द तक कह डाले. उन्होंने यह भी कहा कि मेरी रिकॉर्डिंग कर लो मैं डरता नहीं उन्होंने सत्ता का रोब झाड़ते हुए कहा कि कांग्रेस की सरकार है और हमारे ही आदमियों को नियुक्ति दी जाएगी. 

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मामला बढ़ता देख मौके पर पुलिस पहुंची और पुलिस ने सभी कार्यकर्ताओं को कक्ष से बाहर निकाला. साथ ही शिक्षा अधिकारी से जब बात की तो उन्होंने कहा कि इस तरह से कार्यकर्ताओं का कक्षा में आ कर नारेबाजी करन गलत है और राजकार्य में बाधा का काम किया है. वहीं पुलिस भी मौके पर थी और उनके सामने ही यह सब कृत्य किए गए है. लेकिन एक यूथ कांग्रेस के पदाधिकारी को इस तरह से खुल्ले में एक अधिकारी को धमकी देना कितना शोभा देता है यह वह ही जान सकता है. देखना यह होगा को अब इस मामले पर आगे क्या कार्यवाही की जाती है. 

...अजमेर से फर्स्ट इंडिया के लिए शुभम जैन की रिपोर्ट

राजस्थान में पंचायत चुनाव के चौथे चरण को लेकर सुप्रीम कोर्ट का अहम आदेश, राज्य सरकार और चुनाव आयोग को दिया निर्देश

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जयपुर: राजस्थान में पंचायत चुनाव के चौथे चरण को लेकर सुप्रीम कोर्ट का अहम आदेश आया है. कोर्ट ने राजस्थान सरकार और चुनाव आयोग 15 अक्टूबर से पहले पंचायत चुनाव पूरा करने का आदेश दिया है. चौथे चरण में 26 जिलों में पंचायत चुनाव होंगे. चौथे चरण में 1954 ग्राम पंचायत व 126 पंचायत समितियां शामिल हैं. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने अप्रैल में चुनाव सम्पन्न कराने के आदेश दिए थे. लेकिन कोरोना के चलते यह संभव नहीं हो पाया. लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद प्रदेश में पंचायत चुनावों का रास्ता साफ हो गया है. हालांकि पूरा आदेश सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर डलने के बाद ही सामने आएगा. 

केंद्रीय गृह मंत्रालय का बड़ा फैसला, राजीव गांधी फाउंडेशन के लेनदेन की होगी जांच 

इन जिलों में होंगे चौथे चरण के चुनाव:
पंचायतों के चौथे चरण के चुनाव जिन जिलों में होने हैं उनमें अजमेर, अलवर, बांसवाड़ा, बारां, बाड़मेर, भरतपुर, बीकानेर, चूरू, दौसा, धौलपुर है. इसके अलावा हनुमानगढ़, जयपुर, जैसलमेर, जालोर, जोधपुर, झुंझुनू, करौली, नागौर, पाली, प्रतापगढ़, सवाई माधोपुर, सीकर, सिरोही, उदयपुर और श्रीगंगानगर जिलों की पंचायती राज संस्थाओं में चुनाव होने हैं. 

तीन चरणों के चुनाव जनवरी माह में संपन्न हुए: 
इससे पहले प्रदेश में ग्राम पंचायतों के तीन चरणों के चुनाव जनवरी माह में संपन्न हुए थे. इसके बाद चौथे चरण के चुनाव अप्रैल में होने थे लेकिन कोरोना संकट के चलते इसे स्थगित कर दिया गया. लेकिन अब हालात धीरे-धीरे सामान्य होने के बाद चौथे चरण के चुनाव करवाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार और चुनाव आयोग को निर्देश जारी किया है. 

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प्रशासकों को कर रखा नियुक्त:
गौरतलब है कि ग्राम पंचायतों, पंचायत समितियों और जिला परिषदों का कार्यकाल पंचायत समितियों का कार्यकाल जनवरी माह में समाप्त हो गया था, जिसके बाद सरकार ने यहां प्रशासकों को तैनात कर रखा है. 

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नई दिल्ली: केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राजीव गांधी फाउंडेशन में फंडिंग को लेकर बड़ा फैसला लिया है. गृह मंत्रालय ने एक कमेटी बनाई है जो कि इन फाउंडेशन की फंडिंग और इनके द्वारा किए गए उल्लंघनों की जांच करेगी. इस कमेटी की अगुवाई सिमांचल दास, स्पेशल डायरेक्टर (प्रवर्तन निदेशालय) करेंगे.

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गृह मंत्रालय ने एक अंतर-मंत्रालय कमेटी का गठन किया:
इस बारे में केंद्रीय गृह मंत्रालय के प्रवक्ता ने ट्वीट कर जानकारी देते हुए बताया कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एक अंतर-मंत्रालय कमेटी का गठन किया है, जो कि राजीव गांधी फाउंडेशन, राजीव गांधी चैरिटेबल ट्रस्ट और इंदिरा गांधी मेमोरियल ट्रस्ट की जांच करेगी. इस जांच में इनकम टैक्स एक्ट, PMLA एक्ट और FCRA एक्ट के नियमों के उल्लंघन के बारे में जांच की जाएगी. 

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VIDEO: कोरोना का प्रदेश कांग्रेस की गतिविधियों पर असर, सेवादल की प्रदेश कार्यकारिणी को नहीं मिली मंजूरी

जयपुर: कोरोना काल में प्रदेश कांग्रेस संगठन के अग्रिम संगठनों,विभागों और प्रकोष्ठों की गतिविधियों पर असर पड़ा है. कुछ अग्रिम संगठनों के काम ठप्प पड़े है तो कुछ के कामों में शिथिलता आई है. वहीं कांग्रेस सेवादल की प्रदेश कार्यकारिणी डेढ़ साल से भंग है , यूथ कांग्रेस अंतर विरोध के कारण रहा जरुरत से अधिक सक्रिय नजर आया. लेकिन निकाय और पंचायतों के चुनाव मद्देनजर सक्रियता जरुरी है. कोविड की मार आम जन जीवन के साथ ही राजनीतिक गतिविधियों पर व्यापक रुप से पड़ी है. सियासी गतिविधियों पर आंच आई है. कांग्रेस के अग्रिम संगठनों, विभाग और प्रकोष्ठों की गतिविधियां बेहद सुस्त है. आइये बताते है कांग्रेस के हरावल दस्तों के बारे में.

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अग्रिम संगठन 
युवा कांग्रेस
महिला कांग्रेस
कांग्रेस सेवा दल
एन एस यू आई
इंटक
विभाग- 12 
एससी ,एसटी 
अल्पसंख्यक
विधि व मानवाधिकार
किसान ,खेत मजदूर कांग्रेस
विचार विभाग
पूर्व सैनिक विभाग
राजीव गांधी पंचायती राज संगठन
प्रोफेशनल कांग्रेस
मजदूर,कामगार 
डाटा- एनालिसिस विभाग
ओबीसी

प्रकोष्ठ - 18

शिक्षक
सामाजिक न्याय आधिकारिता
पर्यावरण संरक्षण
पेंशन व सामाजिकता
खेलकूद 
सीए
सूचना प्रोद्योगिकी
सहकारिता
कच्ची बस्ती
उधोग व्यापार 
खनन विकास 
अभाव अभियोग
प्रवासी राजस्थानी
स्थानीय निकाय
निशक्तजन
खादी ग्रामोद्योग 
विशेष पिछड़ा वर्ग 
चिकित्सा 
अन्य अति पिछड़ा वर्ग

लंबे समय तक स्थगित रह सकते है आईपीएल मैच, IPL जयपुर से बाहर ले जाने के खिलाफ याचिका निस्तारित

सेवादल की नई प्रदेश कार्यकारिणी को नहीं मिल रही मंजूरी:
कोविड के कारण ही सेवादल की नई प्रदेश कार्यकारिणी को मंजूरी नहीं मिल रही ,केंद्रीय नेताओं की मंजूरी मिलने के इंतजार में 6 माह से अटकी है लिस्ट,हरावल दस्ते के रूप में मशहूर प्रदेश कांग्रेस सेवादल की कार्यकारिणी को भंग किए हुए डेढ़ साल से ज्यादा का समय हो गया है, लेकिन अभी तक सेवादल की नई कार्यकारिणी घोषित नहीं हो पाई है.जबकि कांग्रेस सेवादल का प्रदेश नेतृत्व 6 माह पहले नई कार्यकारिणी की लिस्ट तैयार कर सेवादल के केंद्रीय नेतृत्व को मंजूरी को के लिए भेज चुका है कि लेकिन 6 माह बाद भी केंद्रीय नेतृत्व कार्यकारिणी की लिस्ट को मंजूरी नहीं दी,केंद्रीय नेतृत्व ने 42 जिलाध्यक्षों में से 31 जिलाध्यक्षों की नियुक्तियों को मंजूरी दे दी थी, लेकिन 11 जिलाध्यक्षों और प्रदेश कार्यकारिणी की घोषणा  अभी भी अटकी  हुई. निष्क्रिय संगठनों को जगाने के लिये कोशिशे हो रही है जिससे निकाय और पंचायत चुनावों में इनकी भागीदारी हो सके.

...फर्स्ट इंडिया के लिए योगेश शर्मा की रिपोर्ट

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राजसमंद: सांसद दिया कुमारी का फेसबुक पेज बनाकर अश्लील वीडियो डालने के मामले में पुलिस ने आरोपी गौरव जोशी को गिरफ्तार किया है. राजनगर थाना पुलिस ने 9 माह पूर्व दर्ज इस मामले में जांच रिपोर्ट आने पर कार्रवाई की है. मामला 26 सितंबर 2019 का है और आरोपी गौरव जोशी उस समय भाजयुमो लोकसभा आईटी सेल का प्रभारी रहा है. 

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Coronavirus Updates: सात लाख के करीब पहुंचा कोरोना के मरीजों का आंकड़ा, दुनिया में तीसरा सबसे प्रभावित देश बना भारत 

तीन विफलताएं हार्वर्ड बिजनेस स्कूल में अध्ययन का विषय होंगी:
राहुल गांधी ने ट्वीट कर केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए पीएम मोदी  के कोरोना को 21 दिनों में पराजित करने से जुड़े एक बयान का वीडियो शेयर करते हुए ट्वीट किया. इसमें कोरोना के दिन और बढ़ती संख्या का ग्राफ के साथ पीएम मोदी का लॉकडाउन के पूर्व का भाषण है. इसके साथ ही लिखा कि भविष्य में कोविड-19, नोटबंदी और जीएसटी से जुड़ी विफलताएं हार्वर्ड बिजनेस स्कूल में अध्ययन का विषय होंगी. 

कोरोना का युद्ध जीतने में 21 दिन लगने वाले:
राहुल गांधी ने शेयर किए वीडियो में पीएम मोदी ने कहा था कि महाभारत का युद्ध 18 दिनों में जीता गया था इस बार कोरोना का युद्ध जीतने में 21 दिन लगने वाले हैं. उन्होंने कहा था कि आज कोरोना के खिलाफ जो युद्ध पूरा देश लड़ रहा है, उसमें 21 दिन लगने वाले हैं. हमारा प्रयास है इसे 21 दिन में जीत लिया जाए. 

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संक्रमित मरीजों के मामले में तीसरे नंबर पर पहुंचा भारत: 
बता दें कि कोरोना वायरस मरीजों की संख्या मामले में भारत ने रूस को पीछे छोड़ दिया है. मेरिका और ब्राजील के बाद भारत अब दुनिया में संक्रमित मरीजों के मामले में तीसरे नंबर पर पहुंच गया है. स्थ्य मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, देश में अबतक 6 लाख 97 हजार लोग कोरोना से संक्रमित हो चुके हैं. इनमें से 19,693 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि चार लाख 24 हजार लोग ठीक भी हुए हैं. पिछले 24 घंटों में कोरोना वायरस के 24 हजार नए मामले सामने आए और 425 मौतें हुईं.

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