10% सवर्ण आरक्षण को यूपी सरकार की मंजूरी, रखी शर्त

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/01/18 05:11

उत्तरप्रदेश। मोदी सरकार द्वारा देश में आर्थिक रुप से पिछड़े सवर्णों को आरक्षण देने वाला प्रस्ताव राष्ट्रपति की मुहर के बाद कानून बन गया है। यह कानून लागू करने वाला गुजरात पहला, झारखंड दूसरा और अब यूपी तीसरा राज्य बन गया है। इस कानून को यूपी की योगी सरकार ने प्रदेश में मंजूरी दे दी है। सूबे में यह व्यवस्था 14 जनवरी से लागू हो गई है। जिसके बाद शिक्षा और नौकरी में इसके दायरे में आने वाले सवर्णों को आरक्षण का लाभ मिलेगा।

वहीं दूसरी और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस व्यवस्था को लागू करने से इनकार कर दिया है। ममता के अलावा डीएमके प्रमुख ने एमके स्टालिन ने भी गरीबी आधारित आरक्षण का पूरजोर विरोध किया है। यही नहीं, डीएमके ने इसके खिलाफ मद्रास हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

डीएमके द्वारा दायर की गई याचिका में आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग के लोगों के लिए केंद्र द्वारा लागू किए गए आरक्षण व्यवस्था को संविधान के खिलाफ और एससी-एसटी के खिलाफ बताया है। डीएमके ने यहां इंदिरा साहनी केस का हवाला दिया है जिसमें कहा गया था कि आर्थिक मानदंड संविधान के तहत आरक्षण का एकमात्र आधार नहीं हो सकता।

बीते शनिवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने सामान्य वर्ग के गरीबों को नौकरियों और शिक्षा में 10 फीसदी आरक्षण से संबंधित संविधान (124वां संशोधन) अधिनियम 2019 को मंजूरी दे दी थी। यह अधिनियम संविधान के अनुच्छेद 15 और 16 में संशोधन कर सामान्य वर्ग के गरीबों को आरक्षण का प्रावधान करता है। इससे तहत जो लोग 8 लाख की सालाना आय और 5 बीघा से तक जमीन के दायरे में आते हैं, उन्हें इसका लाभ मिलेगा। 

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