ऑक्सीजन की कमी से 10 की मौत, व्यवस्था करने के बजाय अस्पताल प्रबंधन ने बुलाई पुलिस और RAF

ऑक्सीजन की कमी से 10 की मौत, व्यवस्था करने के बजाय अस्पताल प्रबंधन ने बुलाई पुलिस और RAF

ऑक्सीजन की कमी से 10 की मौत, व्यवस्था करने के बजाय अस्पताल प्रबंधन ने बुलाई पुलिस और RAF

भोपाल: मध्यप्रदेश में इस कोरोना संकट के दौरान ऑक्सीजन की कमी (Lack of Oxygen) लगातार बनी हुई है. शिवराज सरकार (Shivraj Government) रोजाना ऑक्सीजन की कमी नही होने का ढिंढोरा पीट रहे है. किंतु हर दिन सरकार के दावों की पोल खुलती नजर आ रही है. हाल ही में प्रदेश में कई जगहों पर ऑक्सीजन की कमी के कारण मरीजों की मौत हुई थी. अब ऑक्सीजन की कमी से भोपाल के पीपुल्स अस्पताल (People's Hospital) में 10 की मौत हो गई.

अस्पताल ऑक्सीजन मंगाने के बजाय बुलाई पुलिस:
डॉक्टर बार-बार ऑक्सीजन कम होने की बात कह रहे थे, लेकिन प्रबंधन ने सुना ही नहीं. जब गंभीर संक्रमित मरीजों की तड़प-तड़प कर मौतें (Yearningly Death) होने लगीं तो परिजन हंगामा करे लगे. प्रबंधन ने ऑक्सीजन की जगह पुलिस (Police) बुला ली गई. बाद में RAF (Rapid Action Force) तैनात करके मामले को दबाने की कोशिश की गई. डॉक्टरों ने हड़ताल (Strike) पर जाने की धमकी दी तब जाकर ऑक्सीजन की व्यवस्था की गई.

चिकित्सकों की हड़ताल पर जाने की चेतावनी के बाद प्रबंधन की नींद खुली:
अल सुबह से ही ऑक्सीजन सप्लाई स्लो (Oxygen Supply Slow) पड़ने लगी थी. इसकी सूचना स्टॉफ ने संबंधित डॉक्टरों को दी थी. डॉक्टरों ने प्रबंधन से तत्काल ऑक्सीजन की व्यवस्था करने के लिए कहा. लेकिन कुछ नहीं हुआ. अपनों की हालत बिगड़ते देख परिजनों का सब्र टूट गया. उन्होंने ड्यूटी पर तैनात डॉक्टरों पर दबाव बनाना शुरू किया. डॉक्टरों ने चेतावनी दी कि अगर जल्द ऑक्सीजन नहीं मिला तो वे हड़ताल पर चलने जाएंगे. हंगामे के बीच ही मौत का सिलसिला (Continuation of Death) शुरू हो गया और फिर इसने रुकने का नाम नहीं लिया.

अस्पताल प्रबंधन की सफाई, सोशल मीडिया पर चल रही हैं भ्रामक खबरें: 
यदि और देर हो जाती तो वार्ड में मौजूद 40 अन्य मरीजों की जान चली जाती. फिलहाल मामले में पीपुल्स प्रबंधन का कहना है कि सोशल मीडिया (Social Media) पर ऑक्सीजन की कमी से मौत की भ्रामक खबरें (False News) चल रही हैं. सप्लाई कुछ देर के लिए कम हुई थी, लेकिन थोड़ी देर में ठीक कर ली गई थी. दूसरी ओर, पीपुल्स से दिनभर एक-एक कर शव निकलते रहे. जब मीडियाकर्मी वहां पहुंचे, तो कुछ देर के लिए शवों को निकालने का काम रोक दिया गया. यहां से 10 शव सुभाषनगर विश्राम घाट पहुंचे. बता दें कि प्रदेश में बीते 13 दिन में 56 मरीज ऑक्सीजन की कमी से दम तोड़ चुके हैं.

अस्पताल के कोविड वार्ड में अचानक मची अफरा-तफरी:
सोमवार अलसुबह अचानक से ऑक्सीजन सप्लाई का प्रेशर कम हुआ और ICU (Intensive Care Unit) में भर्ती मरीजों को घबराहट होने लगी. इसे देख वार्ड का नर्सिंग स्टाफ चीखने-चिल्लाने लगा. अफरा-तफरी मच गई. कुछ नर्साें ने अपने परिचित मरीजों के परिजनों को सूचना दी तो वे दौड़ते-भागते कोविड डी-ब्लॉक के चैनल गेट पर आ गए. यहां ताला लगा था. वे चिल्लाए कि ऑक्सीजन खत्म हो गई है, हमें भीतर जाने दो.

परिजनों की आवाज दबाने के लिए तैनात की पुलिस:
उन्हें देखकर गेट पर मौजूद गार्ड घबराकर अंदर भाग गया. कुछ परिजन अपनों की जान बचाने के लिए इमरजेंसी में रखे छोटे सिलेंडर उठा लाए, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी. कुछ मरीज दम तोड़ चुके थे. इसके बाद परिजनों ने हंगामा शुरू (Family Members Created Ruckus) कर दिया. इन्हें रोकने के लिए पुलिस तैनात करनी पड़ी. पड़ताल में घटना की बड़ी वजह पता चली. वो ये कि जब ऑक्सीजन प्रेशर डाउन हुआ, तब पीपुल्स प्रबंधन ने तुरंत इसकी सूचना प्रशासनिक अधिकारियों को नहीं दी. प्रशासन को जब सूचना मिली, तब उसने जंबो सिलेंडर (Jumbo Cylinder) अस्पताल पहुंचाए और प्रेशर मेंटेन कराया.

 

और पढ़ें