लोकसभा में बहुमत के साथ पास हुआ 10% सवर्ण आरक्षण बिल

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/01/08 09:56

नई दिल्ली। संसद के शीतकालीन सत्र का आज 17वां एवं आखिरी दिन है और मंगलवार को लोकसभा में आर्थिक रूप से कमजोर सवर्णों को 10 फीसदी आरक्षण से जुड़ा संविधान संशोधन बिल पेश किया गया। लोकसभा में सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री थावरचंद गहलोत ने आर्थिक रूप से कमजोर सवर्णों के लिए पेश होने वाले बिल को प्रस्तुत किया। इस बिल पर सदन चली लम्बी बहस के बाद वोटिंग कराई गई, जिसके बाद यह बिल लोकसभा में बहुमत के साथ पास हो गया। इस बिल के समर्थन में जहां उपस्थित कुल 326 सदस्यों में से 323 ने इसके समर्थन में वोट किया, वहीं 3 सदस्यों ने इसके विरोध में वोट किया।

इससे पूर्व आर्थिक रूप से कमजोर सवर्णों को 10 फीसदी आरक्षण दिए जाने के फैसले को कल हुई मोदी कैबिनेट की बैठ​​क में मंजूरी मिलने के बाद इस बिल को आज लोकसभा में रखा गया। सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री थावरचंद गहलोत ने कहा कि एससी-एसटी आरक्षण व्यवस्था को छेड़ा नहीं जाएगा और सरकारी मदद नहीं लेने वालों को आरक्षण देना होगा। सरकार के मुताबिक देश की एक बड़ी आबादी को इस आरक्षण बिल से लाभ मिलेगा। थावरचंद गहलोत ने कहा कि यह आरक्षण निजी संस्थानों में भी लागू होगा और राज्य सरकार को यह तय करना होगा कि कौन सवर्ण गरीब है।

लोकसभा में बिल पेश किए जाने के बाद इस बिल पर बहस के दौरान वित्त मंत्री अरूण जेटली ने आरक्षण के मुद्दे पर कहा कि अब तक सही रास्ते में प्रयास नहीं हुआ, आरक्षण के मुद्दे पर राज्यों के पास जाने की जरूरत नहीं है। आरक्षण की कोशिश सभी पार्टियों ने की, वहीं जुमले की शुरुआत विपक्ष ने की थी। बिल के जरिए बराबरी लाने की कोशिश की जा रही है, जिसका लाभ प्राइवेट संस्थानों में भी मिलेगा। उन्होंने कहा कि यह आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को सहायता देने की कोशिश है। जेटली ने कहा कि हमें हर नागरिक को सामान्य अवसर देने की कोशिश करना चाहिए।

इसके बाद कांग्रेस नेता केवी थोमस ने कहा कि हम इस कोटा बिल का समर्थन करते हैं, हम इसके खिलाफ नहीं हैं। लेकिन जिस तरीके से यह बिल लाया जा रहा है, वह सवाल खड़े करता है। मेरा निवेदन है कि इस बिल को पहल जेपीसी के समक्ष भेजा जाए। वहीं AIADMK नेता एम थंबीदुरई ने लोकसभा में सवाल किया कि क्या सभी सरकारी योजनाएं विफल हो गई हैं? बहुत सारी योजनाएं हैं। साथ ही उन्होंने बीजेपी को चुनौती देते हुए कहा कि आपके इस बिल को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जाएगी। AIADMK ने आरक्षण की सीमा को बढ़ाकर 70 प्रतिशत करने की मांग की है। थंबीदुरई ने कहा कि संविधान संशोधन लाएं। 9वीं अनुसूची की बचाव एक स्थाई उपाय नहीं है।

इसी प्रकार से तृणमूल कांग्रेस के सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय ने लोकसभा में सरकार की मंशा पर सवाल खड़ा करते हुए कहा कि सरकार इस कोटा बिल की तरह ही महिला आरक्षण बिल को प्राथमिकता के साथ क्यों नहीं लेती है? यह बिल केवल नौकरियों के बारे में ही नहीं है, बल्कि झूठी आशाओं और नकली सपनों के साथ युवाओं को गुमराह करने के बारे में भी है।

केंद्र सरकार के इस फैसले को मास्टरस्ट्रोक इसलिए भी माना जा रहा है कि कई पार्टियां इसकी मांग पहले से करती आई हैं। यही कारण रहा कि सोमवार को जब कैबिनेट का फैसला आया, तो किसी भी राजनीतिक दल ने इसका पुरजोर विरोध नहीं किया। बस, चुनाव से पहले ऐलान करने के लिए सरकार की मंशा पर सवाल उठा दिए। कांग्रेस ने सोमवार को ही साफ कर दिया था कि पार्टी इस फैसले का समर्थन करेगी, लेकिन नरेंद्र मोदी युवाओं को रोजगार कब देंगे। हालांकि, कांग्रेस ने भी केंद्र सरकार की टाइमिंग पर सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस के अलावा कई अन्य पार्टियों ने भी सरकार के फैसले का सीधे तौर पर विरोध नहीं किया है।

बसपा-सपा ने किया संशोधन बिल का समर्थन :
मंगलवार को बसपा सुप्रीमो मायावती ने भी इस बिल के समर्थन का ऐलान किया। हालांकि उन्होंने कहा कि SC/ST, OBC को मिलने वाले आरक्षण का दायरा बढ़ाने की अपील की. वहीं समाजवादी पार्टी के नेता रामगोपाल यादव ने भी कहा कि हम सरकार के इस बिल का समर्थन करते हैं, लेकिन ओबीसी वर्ग को भी उनकी बढ़ती आबादी के अनुसार 54 फीसदी आरक्षण दिया जाना चाहिए।

क्या है मोदी कैबिनेट का फैसला :
दरअसल, सोमवार को सभी को चौंकाते हुए केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने बड़ा फैसला लिया। इस फैसले के तहत आर्थिक रूप से कमजोर सवर्ण समाज के लोगों को सरकारी नौकरी और शिक्षा के क्षेत्र में 10 फीसदी आरक्षण दिया जाएगा। इसके लिए सरकार की ओर से कुछ शर्तें भी रखी गई थीं।

किसको मिलेगा सवर्ण आरक्षण का लाभ :
— आरक्षण आर्थिक रूप से पिछड़े ऐसे गरीब लोगों को दिया जाएगा, जिन्हें अभी आरक्षण का फायदा नहीं मिल रहा है।
— ब्राह्मण, राजपूत और अन्य सवर्ण जातियों को मिलेगा लाभ।
— जिनकी सालाना आमदनी 8 लाख रुपए या इससे कम है।
— जिनके पास 5 एकड़ या उससे कम जमीन है।
— जिनके पास 1000 वर्ग फुट से कम जमीन पर मकान है।
— जिनके पास अधिसूचित नगर पालिका में 109 गज से नीचे आवासीय भूखंड हो।
— जिनके पास गैर अधिसूचित नगर पालिका क्षेत्र में 209 गज से नीचे आवासीय भूखंड हो।
— राजपूत, भूमिहार, बनिया, जाट, गुर्जर को इस श्रेणी में मिलेगा आरक्षण।
— इस आरक्षण का लाभ शिक्षा (सरकारी अथवा निजी) और सार्वजनिक रोजगार में मिलेगा।

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