10वीं पास साइकिल की दुकान वाले ने बना डाला ब्लड डॉनर ग्रुप, 10 महीने में ही जुड़ गए 12000 हजार रक्तवीर

10वीं पास साइकिल की दुकान वाले ने बना डाला ब्लड डॉनर ग्रुप, 10 महीने में ही जुड़ गए 12000 हजार रक्तवीर

10वीं पास साइकिल की दुकान वाले ने बना डाला ब्लड डॉनर ग्रुप, 10 महीने में ही जुड़ गए 12000 हजार रक्तवीर

चूरू: मैं अकेला ही चला था जानिब-ए-मंज़िल मगर 
   लोग साथ आते गए और कारवाँ बनता गया...............

इन शब्दों को चरितार्थ करते हुए मात्र दसवीं पास चूरू के साइकिल की दुकान वाले अमजद तुगलक शहर में रक्तदान की एक मिसाल पेश कर रहे हैं. रक्त की कमी से जहां देश में लाखों लोग असमय मृत्यु को प्राप्त हो जाते हैं. ऐसे दौर में ऐसे रक्त वीरों की खास जरूरत है, क्योंकि ये खून का रिश्ता सगे खून के रिश्तों से भी अहम है. 

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ग्रुप में पोस्ट से शुरुआत का नतीजा देख मिला जबरदस्त रिस्पॉन्स: 
स्वयं बामुश्किल मिलने वाले A पॉजिटिव ग्रुप के अमजद ने अनजान व्यक्ति को अपना 1 यूनिट ब्लड देने व 2 यूनिट और की जरूरत के लिए एक ग्रुप में पोस्ट से शुरुआत की जिसका नतीजा 2 घण्टे में ही 257 लोगों ने रक्त देने की पेशकश कर डाली, जबरदस्त रिस्पॉन्स देख उन्होंने निशुल्क रक्तदान के लिए अपना चूरू हेल्पलाइन नाम से वाट्सएपग्रुप बना डाला लेकिन वॉट्सऐप ग्रुप में मेम्बर ज्यादा होने और ग्रुप और चूरू हेल्पलाइन पेज के माध्यम से महज 10 महीने में 12 हजार युवा जुड़ने से ये सब ऑनलाइन शुरू कर दिया और अब रक्तदान के लिए हर वक्त बगैर कोई विचार किए एक फोन पर अनजानों को ब्लड देने दौड़ पड़ते हैं. जरूरत किसी को भी हो, इन्हें तो बस जिंदगी बचाना है.  

रक्त के अभाव में किसी की जान नहीं जानी चाहिए: 
ग्रुप मेम्बरों की माने तो इनका बस एक ही लक्ष्य है रक्त के अभाव में किसी की जान नहीं जानी चाहिए और रक्त के लिए कोई ब्लड बैंक से खाली ना जा सके. 18 से 45 साल के युवाओं द्वारा बनाई गई ये ऑनलाइन ग्रुप नि:स्वार्थ भाव से इस सेवा अभियान में जुटी है. बस जहां से कहीं सूचना मिली और मरीज जरूरतमंद लगा ये ब्लड डोनेट कराने में देर नहीं लगाते. 

अब 12 हजार सक्रिय रक्तदाता संस्था के पास मौजूद: 
ग्रुप को शुरू करने वाले अमजद का एक जरूरतमन्द से ब्लड देने के बाद इस काम में तन्मयता से जुटने का मन हुआ. बस तब से चूरू हेल्पलाइन ने ठाना कि किसी घर का चिराग या किसी की जिंदगी इस कारण न जा पाये. तब से ही युवाओं को जोड़ा और अब 12 हजार सक्रिय रक्तदाता संस्था के पास मौजूद हैं. वहीं 2000 से अधिक लोग सूचीबद्ध हैं. जो जरूरत लगने पर डोनेट को तैयार रहते हैं. 

सूचना मिलते ही वाट्सएप ग्रुप में किया जाता शेयर:
चूरू हेल्पलाइन के सक्रिय रक्तदाताओं की लिस्ट में स्टूडेंट, व्यापारी, अभिभाषक, किसान, पुलिसवाले और लड़कियां तक शामिल हैं. जिसको भी जहां से सूचना लगती है वे वाट्सएप ग्रुप में शेयर करते हैं और संबंधित रक्त ग्रुप वाले से संपर्क कर डोनेशन कराया जाता है. कई बार जब ब्लड बैंकों में उपलब्धता होती है तो अन्य ग्रुप का ब्लड भी वहां डोनेट कर दिया जाता है. 

संस्था के युवाओं का जुनून काबिले तारीफ: 
संस्था के युवाओं का जुनून काबिले तारीफ है. चूरू के अलावा कहीं से भी बीकानेर, सीकर या जयपुर के अस्पताल में ब्लड की जरूरत का संदेश मिलता है तो उस शहर में ग्रुप से जुड़ा युवा वहां खुद के ही खर्च से वहां चले जाते हैं. अब तक काफी बार ऐसा हुआ है. जब युवाओं ने अपने खर्चे पर जरूरत की जगह जाकर वहां किसी अनजाने को ब्लड दिया. बारिश में भी इस काम को पूरा करने से ये नहीं चूके. 

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सोशल मीडिया बना मजबूत सहारा: 
चूरू हेल्पलाइन रक्तदाताओं के अनुसार सोशल मीडिया भी इस क्षेत्र में काम करने के लिए मजबूत सहारा बना है. कई बार यदि कोई ब्लड ग्रुप मिलने में दिक्कत होती है तो संस्था के फेसबुक पेज, वाट्सएप ग्रुप व अन्य माध्यमों से संदेश प्रचारित किया जाता है. जिसमें मरीज के अटेंडर का नंबर भी रहता है. इसके जरीए भी कई लोगों की जरूरत पूरी हो जाती है. हालांकि, इस तरह के संदेश कई अन्य संस्थाओं व सामाजिक लोगों द्वारा भी मदद ली जाती और दी भी जाती हैं. 

...चूरू से फर्स्ट इंडिया के लिए संजय प्रजापत की रिपोर्ट
 

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