VIDEO: जयपुर बम ब्लास्ट केस में 11 साल बाद अब फैसले की बढ़ी उम्मीदें 

Nizam Kantaliya Published Date 2019/05/13 10:30

जयपुर। जयपुर में सिलसिलेवार बम विस्फोट की घटना को आज 11 साल पूरे हो चुके हैं। बम ब्लास्ट के पीड़ितो के साथ साथ प्रदेश के हर नागरिक के दिल में बस एक ही सवाल उठता है कि आखिर आतंक के गुनहगारों को सजा कब मिलेगी। राज्य सरकार ने मामले की सुनवाई के लिए नवंबर 2012 में विशेष अदालत का गठन तो कर दिया, लेकिन अदालत में कभी विशेष अदालत की तरह काम नहीं हुआ। हालांकि दिसंबर 2018 के बाद इस अदालत में जज अजय कुमार शर्मा के आने बाद परिस्थितियां बदली है। 5—6 माह से हो रही डे टू डे हियरिंग के चलते अब फैसले की उम्मीद बनी है। पेश है एक रिपोर्ट:

जयपुर शहर में 13 मई 2008 की शाम करीब 7:30 बजे को रोजाना की तरह परकोटे के बाजारों में काफी रौनक और भीड़ थी। इसी बीच शहर के प्रमुख आठ अलग अलग जगहों पर तेज धमाकों की आवाज हुई। शुरुआत में इन धमाकों को सिलेंडर फटने की आवाज माना गया, लेकिन थोड़ी देर में सभी को ये समझ आ चुका था कि ये यह सिलेंडर नहीं, बल्कि शक्तिशाली बम थे। जिन्होंने कई जानें छीन ली और सैंकड़ों लोगों को घायल कर दिया।

आठ ब्लास्ट, 71 की मौत और 164 हुए घायल:

पहला बम ब्लास्ट: 
खंदा माणकचौक, हवामहल के सामने शाम करीब 7:20 बजे हुआ। इसमें 1 महिला की मौत हो गई, जबकि 18 लोग घायल हो गए थे। 
दूसरा बम ब्लास्ट:
त्रिपोलिया बाजार स्थित बड़ी चौपड़ के समीप मनिहारों के खंदे में ताला चाबी वालों की दुकानों के पास शाम करीब 7:25 बजे हुआ। यह ब्लास्ट इतना शक्तिशाली था कि इसमें 6 लोगों की मौत हो गई, जबकि 27 लोग घायल हो गए। 
तीसरा बम ब्लास्ट:
शाम करीब 7:30 बजे छोटी चौपड़ पर कोतवाली थाने के बाहर पार्किंग में हुआ। इनमें 2 पुलिसकर्मियों सहित 7 जनों की मौत हो गई, जबकि 17 लोग घायल हो गए थे।
चौथा बम ब्लास्ट:
शाम दुकान नंबर 346 के सामने, त्रिपोलिया बाजार में शाम 7:30 बजे हुआ। इसमें 5 जनों की मौत हो गई, जबकि 4 लोग घायल हो गए।
पांचवा बम ब्लास्ट:
चांदपोल बाजार स्थित हनुमान मंदिर के बाहर पार्किंग स्टैंड पर शाम 7:30 बजे हुआ। इनमें सबसे ज्यादा 25 लोगों की मौत हो गई, जबकि 49 लोग घायल हो गए। इनमें कार में सवार दो मासूम बहनों समेत कई दर्शनार्थी, दुकानदार, ग्राहक, भिखारी और राहगीर शामिल थे। 
छठा बम ब्लास्ट:
जौहरी बाजार में पीतलियों के रास्ते की कार्नर पर नेशनल हैंडलूम के सामने शाम करीब 7:30 बजे हुआ। इनमें 8 जनों की मौत हो गई, जबकि 19 घायल हो गए। 
सांतवा बम ब्लास्ट:
शाम ठीक 7:35 बजे छोटी चौपड़ पर फूलों के खंदे में देवप्रकाश ज्वैलर्स शॉप के सामने हुआ। इसमें 2 जनों की मौत हो गई, जबकि 15 लोग घायल हो गए थे।
आठवां बम ब्लास्ट:
जौहरी बाजार में सांगानेरी गेट हनुमान मंदिर के बाहर शाम 7:36 बजे हुआ। इसमें 17 लोगों की मौत हो गई, जबकि 36 लोग घायल हो गए थे।
नौवें ब्लास्ट की कोशिश:
दुकान नंबर 17 के सामने चांदपोल बाजार में एक गेस्ट हाउस के बाहर। जिसमें रात 9 बजे का टाइमर सेट था, लेकिन 15 मिनट पहले बम स्कॉड टीम ने इसे डिफ्यूज कर दिया।

इन आपराधिक धाराओं में दर्ज हुआ था मुकदमा:
जयपुर बम ब्लास्ट के बाद आईपीसी की धारा 302, 307, 427, 120 बी, 121ए, 124ए, 153ए में मामले दर्ज हुए। विस्फोटक पदार्थ अधिनियम 1908 की धारा 3,4,5,6, विधि विरुद्ध क्रियाकलाप (निवारण) की धारा 3,10,12, 16(1), 18,20,38 और पीडीपीपी की धारा 3 के तहत मुकदमे दर्ज हुए। चार मुकदमें जयपुर के कोतवाली थाने में दर्ज हुए। वहीं चार मुकदमे माणकचौक थाने में दर्ज किये गये। राजस्थान एटीएस की स्थापना जयपुर बम ब्लास्ट के बाद हुई। एटीएस की स्थापना के बाद ये सभी मामले रैफर किये गये। गिरफ्तार आतंकियों के खिलाफ चालान पेश किया जा चुका है। 

एटीएस ने 11 आतंकियों को किया नामजद:
जयपुर बम ब्लास्ट की घटना को लेकर अलग-अलग थानों में कुल आठ एफआईआर दर्ज हुई। जो बाद में एटीएस को ट्रांसफर कर दिये गये। सर्वप्रथम ये केस जयपुर की एडीजे संख्या 2 में सुनवाई शुरू की गई। जांच के दौरान एटीएस ने 11 आतंकियों को नामजद किया था। इनमें 5 आतंकियों को एटीएस राजस्थान ने गिरफ्तार किया। जबकि 2 आतंकियों को हैदराबाद पुलिस ने गिरफ्तार किया। वे हैदराबाद में हुए ब्लास्ट केसों में वहीं स्थानीय जेल में बंद है। इसके अलावा 1 आतंकी को पिछले साल दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने गिरफ्तार किया था। वहीं, 3 गुनाहगार अभी भी फरार है। जिनका 10 साल बाद भी एटीएस राजस्थान सुराग नहीं लगा सकी है। एटीएस ने इस मामले में अलग-अलग आरोप पत्र पेश किया। घटना के तुरंत बाद ही  दी जयपुर बार एसोसिएशन सहित अन्य बार ने आरोपियों के पक्ष में किसी भी वकिल की पैरवी से इंकार कर दिया गया, जिसका असर कई पेशियों पर हुआ। बाद में एडीजे क्रम संख्या 2 ने मामले में न्यायमित्र नियुक्त करने की अनुंशसा की। जिस पर एडवोकेट पैकर फारूक और सुरेश व्यास को न्यायमित्र नियुक्त किया गया। 

12 नवंबर 2012 को किया गया विशेष अदालत का गठन:
12 नवंबर 2012 को जयपुर बम ब्लास्ट स्पेशल कोर्ट का गठन किया गया। इस स्पेशल कोर्ट में अब तक 7 जज बदले जा चुके हैं। अदालत हर शुक्रवार और शनिवार को मामले की सुनवाई करती थी। नवंबर 2018 में जज अजयकुमार शर्मा के बाद माहौल बदला और अब प्रतिदिन डे-टू-डे के आधार पर सुनवाई हो रही है। 8 मामलों में 1548 से अधिक गवाहों की गवाही हो चुकी है। अदालत में 11 साल में करीब 4233 पेशी हो चुकी है। पुलिस, प्रशासन और तकनीकी विशेषज्ञ भी गवाह में शामिल हुए। विशेष लोक अभियोजक श्रीचंद मथुरिया सरकार की पैरवी कर रहे हैं। मथुरिया के आने के बाद भी अभियोजन मजबूत पैरवी कर रहा है। अब तक मामले में अभियोजन पक्ष की संपूर्ण गवाही हो चुकी है। अदालत में अब  मुलजिमानों के बयान की कार्यवाही चल रही है। अब इस मामले में फैसला दो से तीन माह में आ सकता है। 

11 साल में बदल गये 8 जज:
राज्य सरकार ने मामले की सुनवाई के लिए नवंबर 2012 में विशेष अदालत का गठन तो कर दिया, लेकिन अदालत में कभी विशेष अदालत की तरह काम नहीं हुआ। हालांकि यह अभियोजन पक्ष की सफलता कही जाएगी कि प्रकरण में अभी तक एक भी गवाह पक्षद्रोही नहीं हुआ है। जयपुर शहर को सबसे बड़ा दर्द देने वाले इस मुकदमे की सुनवाई नवंबर 2018 बहुत ही धीमी रही। इसका मुख्य कारण जहां 1500 गवाहों की गवाही होना था। वहीं इस दौरान 11 साल में 8 जज बदल गये तो वहीं 6 अभियोजन अधिकारी बदल दिये गये। इस मामले में सरकार की ओर से सबसे पहले पैरवी करने वाले एक अभियोजक अशोक शर्मा का निधन तक हो चुका है। 

प्रकरण को लेकर आठ मुकदमों में चल रही है सुनवाई:
अदालत में प्रकरण को लेकर आठ मुकदमों में सुनवाई चल रही है। वहीं दो आरोपियों सैफ और सैफर्रहमान के गुजरात जेल से नहीं आने के चलते पूर् में एफआईआर संख्या 118 के मुकदमे को दो भागों में बांट दिया गया। सभी मुकदमों में अभियोजन पक्ष के गवाह चल रहे हैं। एफआईआर संख्या 118 के पहले भाग में अभियोजन पक्ष का एक गवाह बाकी है। घटना को लेकर अलग-अलग थानों में कुल आठ एफआईआर दर्ज हुई। पुलिस ने जहां इनका अलग-अलग आरोप पत्र पेश किया। वहीं अदालत में भी इनकी अलग-अलग ही ट्रायल शुरू हुई। आठों मामलों में एक साथ ट्रायल को लेकर न्यायमित्र पैकर फारूक ने प्रार्थना पत्र पेश किया था, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया था, लेकिन आज 11 साल बाद अदालत उसी पैटर्न पर सुनवाई कर रही है। जिसके तहत सभी मामलों में एक साथ गवाही हो रही है। 

एक तरफ 2007 में हुए अजमेर दरगाह बम ब्लास्ट में 10 साल के अंदर ही अदालत ने फैसला सुना दिया। वहीं दूसरी तरफ जयपुर बम ब्लास्ट केस में 11 साल अब फैसले की उम्मीदे तो बंधी है, लेकिन देर से मिलने वाला न्याय अन्याय की तरह है। इस केस का सबसे मुश्किल पार्ट 1500 लोगों की गवाही का है। 
 
नामजद तीन आतंकी अभी तक पुलिस की गिरफ्त से दूर:
बम ब्लास्ट केस में नामजद तीन आतंकी ऐसे भी है, जो कि 10 साल बाद भी पुलिस की गिरफ्त से दूर है। ये जयपुर के अलावा देश के अन्य शहरों में हुए ब्लास्ट केस में भी नामजद बताए जा रहे है। इनमें मिर्जा शादाब बेग उर्फ मलिक, साजिद बट और तीसरा आतंकी मोहम्मद खालिद है। ये तीनों आजमगढ़, उत्तरप्रदेश के रहने वाले है। इनकी तलाश एटीएस राजस्थान के अलावा अन्य शहरों की स्पेशल सेल भी कर रही है। गवाहों की बड़ी तादाद, केसों की अलग-अगल ट्रायल और सरकारी गवाहों की सुस्त चाल से भले ही इस केस में 11 साल लगे है, लेकिन आज भी जयपुर बम ब्लास्ट के पीड़ितो को उम्मीद है कि उन्हें न्याय जरूर मिलेगा। 11 साल बाद अभियोजन के साथ-साथ बचाव पक्ष भी मानता है कि अगले दो माह में इस केस का फैसला हो सकता है। 

... संवाददाता निजाम कण्टालिया की रिपोर्ट 


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