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राजस्थान में 2 दिन में ही 152 करोड़ रुपए की शराब की बिक्री हुई, 45 करोड़ का मिला राजस्व

राजस्थान में 2 दिन में ही 152 करोड़ रुपए की शराब की बिक्री हुई, 45 करोड़ का मिला राजस्व

जयपुर: 42 दिन लॉक डाउन में फंसे सुरा प्रेमियों ने नैतिकता की सभी हदें तोड़ दी हैं. प्रदेश में शराब दुकान खुलने के पहले 2 दिन में ही 152 करोड़ रुपए की शराब की बिक्री हुई है. इससे सरकार को भी करीब 45 करोड़ रुपए का राजस्व मिला है, लेकिन जिस तरह शराब दुकान पर लोगों की भीड़ जुट रही है उससे कोरोना संक्रमण का खतरा भी उतना ही बढ़ गया है. 

प्रवासियों की मदद के लिये सचिन पायलट की अध्यक्षता में 16 सदस्यीय समन्वय समिति गठन 

सरकार अपने मंसूबों में सफल रही:
लॉक डाउन में 42 दिन तक हलक तर करने को तड़प रहे सुरा प्रेमियों ने अनैतिकता की सारी नजीर तोड़ दी हैं. हालांकि सरकार अपने मंसूबों में सफल रही है. सरकार ने जिस उद्देश्य से शराब दुकानों को खोलने की मंजूरी दी थी वह पहले 2 दिन में ही पूरा होता दिखाई दिया. शराब दुकान खोलने के पहले दिन यानी 4 मई को प्रदेश में 59 करोड़ रुपए की शराब महज 2 घंटे में बेच दी गई वहीं आज यह आंकड़ा 93 करोड़ रुपए तक जा पहुंचा. लोग दुकान फिर से बंद करने के अनजाने डर के चलते शराब का भारी स्टॉक खरीदते दिखाई दिए. आबकारी विभाग और स्थानीय प्रशासन की तमाम कवायद के बीच काफी जगह सोशल डिस्टेंसिंग की पालना नहीं हो पाई. सरकार ने शराब दुकान पर एक बार में 5 से अधिक ग्राहक ने होने के आदेश दिए थे लेकिन इसके विपरीत शराब दुकानों पर लंबी लंबी कतारें देखने को मिली. मोबाइल नंबर नोट करने सैनिटाइजर की व्यवस्था में भी भीड़ के आगे व्यवस्था चौपट दिखाई दी.

जवानों को भीड़ को काबू करने में काफी पसीना बहाना पड़ा:
भीड़ में ऐसे भी लोग थे जो एक बार में 10 हजार से 30 हजार तक की शराब खरीद कर ले गए. यही नहीं कई दुकानों पर तो हालात इस कदर थे कि दुकान मालिक को रसूखदरों से फोन करवा कर जल्द शराब देने का दबाव डलवाते भी दिखाई दिए. पुलिस और आबकारी निरोधक दल के जवानों को भीड़ को काबू करने में काफी पसीना बहाना पड़ा. अचरज की बात यह है कि जो पुलिस कोरोना संक्रमण के चलते कर्फ्यू ग्रस्त और कंटेनमेंट क्षेत्रों में 'मास मैनेजमेंट' में लगी हुई थी उसे शराब के शौकीनों के मैनेजमेंट में झोंक दिया गया. जो जवान अभी तक कोरोना वॉरियर के तौर पर खुद पर गर्व महसूस कर रहे थे वह आज 'लिकर वॉरियर' की तरह काम करते नजर आए. दूसरी ओर देखें तो नैतिकता पर शराबियों की लालसा भारी पड़ती दिखाई दी. हालांकि सरकार जरूर अपने मंसूबों में सफल रही 2 दिन में ही सरकार को आबकारी राजस्व के तौर पर करीब 45 करोड़ रुपए राजस्व प्राप्त हुआ है.

VIDEO: माटी की ओर लौट रहे अपने प्रवासी ! दूसरे राज्यों के बुरे व्यवहार की यादें भी है साथ 

सुरा प्रेमी सारे लोक लिहाज को भूलते हुए शराब की दुकानों पर कतारबद्ध नजर आए:
पहले दिन शराब दुकानों पर भारी भीड़ को देखते हुए राजधानी जयपुर में 2 घंटे में ही दुकानों को बंद कर दिया गया था. इसके बाद आज शराब दुकानों पर बैरिकेडिंग लगाई गई. कई दुकानों पर जहां भारी भीड़ थी वहां टोकन सिस्टम भी लागू किया गया. बावजूद इसके सुरा प्रेमी सारे लोक लिहाज को भूलते हुए शराब की दुकानों पर कतारबद्ध नजर आए. जो लोग लॉक डाउन के पहले दो चरण में अति आवश्यक काम के लिए भी घर से बाहर नहीं निकल रहे थे वह भी कड़ी धूप में कोरोना संक्रमण से बेखौफ हलक तर करने की लालसा में घंटों कतारों में खड़े रहे. कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि जिस राजस्व की उम्मीद में सरकार ने कोरोना संकट के बीच शराब दुकान खोलने का जो जोखिम भरा कदम उठाया है उसमें सरकार तो सफल रही है लेकिन लोग खुद पर काबू नहीं कर पाए. आशंका इस बात की है कि शराब दुकान खोलने के गंभीर परिणाम सप्ताह 2 सप्ताह बाद कोरोना रोगियों की संख्या बढ़ने के रूप में दिखाई दे सकते हैं. 

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मुख्य सचिव प्रकरण में लेटेस्ट अपडेट! गहलोत सरकार ने केन्द्र को भेजा था प्रस्ताव

जयपुर: राजस्थान के मुख्य सचिव प्रकरण में लेटेस्ट अपडेट सामने आई है. गहलोत सरकार ने केंद्र को राजीव स्वरूप के 6 माह के एक्सटेंशन का प्रस्ताव भेजा था लेकिन संभवत: कल दिल्ली से 6 माह के बजाय 3 माह का एक्सटेंशन प्रस्ताव भेजने का फोन आया है. ऐसे में इस 'डवलपमेंट' से एक बार फिर आस जगी है. अपनी लड़ाई लगभग हार चुके राजीव के लिए यह एक नई आस है. 

अभी भी ऊषा शर्मा-वीनू गुप्ता-निरंजन आर्य के नामों की चर्चा:  
दूसरी ओर अभी भी ऊषा शर्मा, वीनू गुप्ता और निरंजन आर्य के नामों की चर्चा चल रही है. ऐसे में यदि ऊषा शर्मा को मौका मिलता है तो ये वरिष्ठता का सम्मान होगा और वरिष्ठता के साथ-साथ "सीपी फैक्टर" भी खुश होगा. यदि डीबी गुप्ता के बाद वीनू को ये पद मिला तो ये उनकी "लॉ प्रोफाइल एंड साइलेंट परफॉर्मेंस" की "विक्ट्री" होगी. वहीं यदि निरंजन आर्य सीएस बने तो वे राज्य के पहले "नरेगा" सीएस होंगे. इसके साथ ही पिछड़ी जाति का कोई अफसर पहली बार सीएस बनेगा. 

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नीलकमल दरबारी की भी आई थी सिफारिश: 
ऐसे में अब हर किसी की निगाहें PMO और सीएम गहलोत के फैसले पर टिकी हुई है. इसी बीच नीलकमल दरबारी की भी गांधी परिवार से निकट रिश्तों के कारण सिफारिश आई थी. लेकिन अंतत: गहलोत सरकार में बात नहीं बनी. क्योंकि नीलकमल के पति एक मामले में सुरेश कलमाड़ी के साथ जेल जा चुके हैं. वैसे नीलकमल की शादी में खुद राजीव गांधी भी शामिल हुए थे.  

निरंजन बने सीएस तो इसका जाएगा जबरदस्त राजनीतिक मैसेज:
वहीं यदि सचमुच निरंजन सीएस बने तो इसका जबरदस्त राजनीतिक मैसेज जाएगा. इसके साथ ही SC-ST, पिछड़ा वर्ग को गहलोत द्वारा आगे लाने का मैसेज भी जाएगा. इसके साथ ही DGP के पद पर पहले ही एक जाट अफसर की नियुक्ति हो रही है. इस प्रकार जाट और पिछड़े वर्ग की सोशल इंजीनियरिंग बनेगी. 
 

पूर्व सांसद अनु टंडन ने दिया कांग्रेस से इस्तीफा, ट्विट कर दी जानकारी

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नई दिल्ली: कांग्रेस पार्टी की पूर्व सासंद अनु टंडन ने हाल ही में पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है.अनु ने ट्विटर पर जारी एक बयान में अपना त्यागपत्र कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को भेजने की जानकारी दी है. उन्नाव से पूर्व लोकसभा सदस्य ने यह दावा भी किया कि प्रदेश कांग्रेस के नेतृत्व से उन्हें कोई सहयोग नहीं मिल रहा था और कुछ लोगों द्वारा झूठा प्रचार चलाया जा रहा था तथा केंद्रीय नेतृत्व ने इस पर अंकुश लगाने के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया है.

उन्होंने कहा कि इन बिंदुओं पर मेरी बात कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा से भी हुई था, लेकिन ऐसा कोई विकल्प या रास्ता नहीं निकल पाया, जो सबके हित में हो.  पिछले कुछ महीनों में कांग्रेस के उत्तर प्रदेश के कुछ वरिष्ठ नेताओं से भी मेरी बातचीत हुई है, लेकिन वो भी इन हालात में असहाय एवं विकल्पहीन लगे है, जिसके चलते उन्होनें ये बड़ा फैसला ले लिया है. 

अनु ने अपने अगले राजनीतिक कदम का खुलासा नहीं करते हुए कहा कि वह अपने समर्थकों और कार्यकर्ताओं से परामर्श के बाद कोई कदम उठाएंगी. उल्लेखनीय है कि अनु 2009 में उन्नाव से कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा चुनाव जीती थीं, हालांकि, 2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था. फिलहाल कोई घोषणा नहीं की गई है कि वे भविष्य में कौनसी पार्टी ज्वाइन करेंगी. (सोर्स-भाषा)

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अबुधाबी:  हाल ही में आईपीएल मैच के दौरान रॉयल चैलेंजर्स बेंगलोर के हरफनमौला क्रिस मौरिस और मुंबई इंडियंस के हार्दिक पंड्या भीड़ गए जिसके बाद दोनों को ही जोरदार फटकार पड़ी है. आपको बता दे की मामला आईपीएल मैच के दौरान तीखी बहस के लिये फटकार का है. जिसमें हार्दिक छक्का लगाकर मौरिस की ओर इशारा कर रहे थे तो, कुछ ही देर में हार्दिक की विकेट लेकर मौरिस उनकी ओर इशारा करते नजर आए जिसके बाद मामला बढ़ गया और दोनों को ही इस सिलसिले में डांट खानी पड़ी. 

यह घटना मुंबई की पारी के 19वें ओवर की है जब पंड्या ने मौरिस की गेंद पर छक्का लगाकर उनकी ओर इशारा किया तो मौरिस ने पांचवीं गेंद पर उन्हें आउट करके इशारा वापिस इशारा किया जिसके बाद मुंबई ने वह मैच पांच विकेट से जीता लिया था. आईपीएल की रिलीज के अनुसार दोनों ने आचार संहिता के उल्लंघन की बात स्वीकार की है और आचार संहिता के उल्लंघन के लेवल एक के अपराध में मैच रैफरी का फैसला अंतिम और सर्वमान्य है. (सोर्स-भाषा)

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गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री केशुभाई पटेल का निधन, 92 साल की उम्र में ली अंतिम सांस

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अहमदाबाद: गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री और राज्य के दिग्गज नेता केशुभाई पटेल का आज निधन हो गया है. गुरुवार सुबह सांस लेने में तकलीफ होने के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली. केशुभाई पटेल की उम्र 92 साल थी. केशुभाई पटेल ने साल 2014 में राजनीति से सन्यास की घोषणा की थी. बीते महीने केशुभाई कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे. केशुभाई हाल ही में सोमनाथ मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष बनाए गए थे.

दो बार गुजरात का सीएम पद संभाला था: 
केशु भाई पटेल ने दो बार गुजरात का सीएम पद संभाला था. उन्होंने पहली बार साल 1995 में गुजरात का सीएम पद संभाला था. इसके बाद वह 1998 से साल 2001 तक दूसरी बार मुख्यमंत्री पद पर काबिज हुए. वह छह बार राज्य में विधानसभा चुनाव जीते. केशु भाई पटेल ने साल 2012 में बीजेपी छोड़ दी थी और अपनी नई पार्टी 'गुजरात परिवर्तन पार्टी' बनाई थी.

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जनसंघ के संस्थापक सदस्यों में से एक थे:
1960 के करीब अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत जनसंघ से करने वाले पटेल इसके संस्थापक सदस्यों में से एक थे. साल 1975 में जनसंघ-कांग्रेस ओ की गठबंधन वाली सरकार चुनी गई थी. इमरजेंसी के बाद लोकसभा पहुंचे पटेल ने इस्तीफा देकर साल 1978 से 1980 तक बाबूभाई पटेल की सरकार में कृषि मंत्री थे.

सांस लेने में तकलीफ के बाद जब उन्हें अस्पताल ले जाया गया:
केशुभाई पटेल के बेटे के मुताबिक, कोरोना को मात देने के बाद भी उनकी तबीयत लगातार बिगड़ती जा रही थी. लेकिन गुरुवार सुबह सांस लेने में तकलीफ के बाद जब उन्हें अस्पताल ले जाया गया, तब इलाज में उन्होंने कोई रिस्पॉन्ड नहीं किया था.

खाने बनाते वक्त सिलेंडर फटा, एक की मौत 7 गंभीर रूप से झुलसे

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शाहजहांपुर: उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले में गैस सिलेंडर में आग लगने से एक महिला की मौत हो गई है जबकि सात अन्य लोग झुलस गए है. पुलिस अधीक्षक (नगर) संजय कुमार ने बताया कि निगोही थाना अंतर्गत गुर्गवा गांव में रामवीर की पत्नी विमला (32) बुधवार शाम खाना बना रही थी, तभी गैस सिलेंडर में लगे पाइप से गैस लीक होने लगी और फिर सिलेंडर में आग लग गई, जिससे विमला आग की लपटों में घिर गई जिससे उसकी मौत हो गई है.

उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि परिजन उसे बचाने के लिए रसोई में घुसे और वे भी आग की चपेट में आए गए है. उन्होंने बताया कि घटना में मेवाराम ,पुत्तू लाल ,राम वीर , वीरावती, सरस्वती गंभीर रूप से झुलस गए जिन्हें उपचार हेतु लखनऊ रेफर किया गया है. कुमार ने बताया कि सत्येंद्र तथा राजरानी का इलाज मेडिकल कॉलेज में चल रहा है जबकि विमला के शव को पुलिस ने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा जा चुका है और मामले की सिरे से जांच की जा रही है. (सोर्स-भाषा)

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Nagar Nigam Polls : सुबह 10 बजे तक जोधपुर में सर्वाधिक 20.43 फीसदी तो सबसे कम जयपुर में 16.91 प्रतिशत हुआ मतदान

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जयपुर: राजस्थान में जयपुर हेरिटेज, जोधपुर उत्तर और कोटा उत्तर नगर निगमों में आज प्रथम चरण के चुनाव के लिए मतदान हो रहा है. इसके लिए सुबह 7:30 बजे मतदान प्रक्रिया शुरू हुई. वोट देने के लिए लोग सुबह से ही बूथ पर अपना आईडी कार्ड लेकर पहुंच रहे हैं. प्रदेश की 3 नगर निगमों में हो रहे चुनाव में सुबह 10 बजे तक 18.30% मतदान हुआ. इसमें जोधपुर में सर्वाधिक 20.43% और सबसे कम 16.91 प्रतिशत मतदान जयपुर में हुआ. 

16 लाख 54 हजार 547 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकेंगे:
बता दें कि पहले चरण में 250 वार्डों के 2761 मतदान केंद्रों पर 16 लाख 54 हजार 547 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकेंगे. इसमें जयपुर हैरिटेज के 100 वार्डों के 9 लाख 32 हजार 908 मतदाताओं में 4 लाख 91 हजार 633 पुरुष, 4 लाख 41 हजार 260 महिला व 15 अन्य, जोधपुर उत्तर के 80 वार्डों के 3 लाख 88 हजार 847 मतदाताओं में से 1 लाख 99 हजार 505 पुरुष, 1 लाख 89 हजार 339 महिला व 3 अन्य और कोटा उत्तर के 70 वार्डों के 3 लाख 32 हजार 792 मतदाताओं में से 1 लाख 70 हजार 959 पुरुष, 1 लाख 61 हजार 831 महिला व 2 अन्य मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर सकेंगे.

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3393 ईवीएम से होगा मतदान:
पहले चरण में 3 हजार 393 ईवीएम मशीनों के द्वारा चुनाव करवाए जाएंगे. सभी निकायों में लगभग 30 प्रतिशत मशीनें रिजर्व में रखी गई हैं. चुनाव कार्य से जुड़ी सूचनाओं और लोगों की शिकायतों पर कार्यवाही के लिए आयोग ने मुख्यालय और जिलास्तर पर चुनाव नियंत्रण कक्ष स्थापित किये हैं.
 

Gujjar Reservation: गुर्जर आरक्षण के मसले को लेकर कैबिनेट सब कमेटी की बैठक आज, गुर्जर नेताओं ने कहा- वे नहीं होंगे शामिल

जयपुर: प्रदेश में एक बार फिर गुर्जर आरक्षण आंदोलन की चिंगारी भड़क सकती है. अपनी मांगों को न माने जाने पर गुर्जर समाज ने 2 दिन बाद सड़क पर उतरने का ऐलान किया है. गुर्जर समाज ने भरतपुर जिले के बयाना में स्थित पीलूपुरा से आंदोलन शुरू करने का निर्णय लिया है. इसके लिये 1 नवंबर को सुबह 10 बजे शहीद स्थल पर महापंचायत होगी. इसके बाद राजस्थान को जाम करने की चेतावनी दी है. 

आज शाम 4 बजे होगी कैबिनेट सब कमेटी की बैठक: 
वहीं इससे पहले आज शाम 4 बजे गुर्जर आरक्षण के मसले को लेकर कैबिनेट सब कमेटी की बैठक होगी. यह बैठक मंत्री बीडी कल्ला की अध्यक्षता में होगी. इसमें मंत्री रघु शर्मा और अशोक चांदना भी शामिल होंगे. इनके अलावा सीएस राजीव स्वरूप, DOP व अन्य विभागों के अधिकारी भी बैठक में शामिल होंगे. 

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बैठक में शामिल नहीं होंगे गुर्जर नेता:
उधर गुर्जर नेताओं ने कहा कि वे बैठक में शामिल नहीं होंगे. पिछली 2 बैठकों में भी गुर्जर प्रतिनिधियों को नहीं बुलाया गया था. ऐसे में इस बार भी वे शामिल नहीं होंगे. अभी भर्तियों में बैकलॉग प्रक्रिया के मसले का हल निकालना मुद्दा है. इससे पहले सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार संघर्ष समिति को वार्ता के लिए आमंत्रित किया गया है. 

1 नवंबर को पूरे राजस्थान को जाम करने की चेतावनी:
इससे पहले आंदोलन को लेकर बुधवार को बयाना के मारौली गांव में 36 गांवों के गुर्जर समाज की बैठक आयोजित की गई. बैठक में गुर्जर नेता विजय बैंसला सहित समाज के पंच पटेल भी मौजूद रहे. इस महापंचायत में समाज की मांगें आगामी 2 दिन में पूरी नहीं होने पर 1 नवंबर को पूरे राजस्थान को जाम करने की चेतावनी दी गई. वहीं राज्य सरकार ने कहा है कि सभी मांगों का निस्तारण बातचीत से ही संभव होगा. सरकार ने गुर्जर नेताओं को वार्ता के लिये जयपुर आने का न्यौता दिया है, लेकिन वे इससे सहमत नहीं हैं.