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खाटू में उमड़ेगा आस्‍था और श्रद्धा का सैलाब, मेला 27 फरवरी से 

खाटू में उमड़ेगा आस्‍था और श्रद्धा का सैलाब, मेला 27 फरवरी से 

जयपुर: हारे का सहारा, शीश का दानी, लखदातार, बाबा श्‍याम हमारा जैसे अनेकों नाम से पुकारे जाने वाले खाटू श्‍याम बाबा के फाल्गुन वार्षिक लक्‍खी मेले की तैयारियां जोरों पर चल रही हैं. यह मेला 27 फरवरी से 7 मार्च तक खाटू में भरेगा. इस दस दिवसीय लक्‍खी मेले में पैंतीस से चालीस लाख से ज्यादा श्याम प्रेमियों के आने की संभावना जताई जा रही है. इसके चलते सीकर जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन और श्‍याम मंदिर कमेटी ने श्‍याम प्रेमियों के लिए तमाम व्‍यवस्‍थाओं की तैयारियां शुरू कर दी है.

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उमड़ेगा आस्‍था और श्रद्धा का सैलाब: 
10 दिनों तक खाटूनगरी में आस्‍था और श्रद्धा का सैलाब उमड़ेगा. इस मेले के लिए प्रशासनिक तैयारियां शुरू हो गई है. इस बार मेले में सम्पूर्ण व्यवस्था एक समान रहेगी. नई व्यवस्था के तहत 9 सेक्टर बनाए जाएंगे, जिसमें तीन हजार पुलिसकर्मी सुरक्षा व्यवस्था के लिए तैनात किए जाएंगे. मेले के दौरान रींगस मार्ग को वाहनविहीन क्षेत्र घोषित किया जाएगा और रींगस से दांता जाने वाले वाहन रानोली, कोछोर होते हुए दांता जाएंगे.

करीब तीन हजार स्वयंसेवक देंगे सेवा:
मेले के आयोजन से जुड़े सूत्रों के मुताबिक मेले में धर्मशाला में आने वाले वाहनों के पास पुलिस से पुष्टि के बाद बनेंगे और एक धर्मशाला में एक ही वाहन का पास मिलेगा. ग्रामीण एवं दुकानदार पहचानपत्र दिखाकर अपने गंतव्य स्थल पर जा सकेंगे. श्याम बाबा के लक्खी मेले में सेवा देने वाले करीब तीन हजार स्वयंसेवकों के पास इस बार पुलिस बनाएगी. ये स्वयंसेवक पुलिस मित्र के नाम से पहचाने जाएंगे. मेले में 27 फरवरी से ही मंदिर से श्याम कुंड मार्ग बंद कर दिया जाएगा.

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आपको बता दें कि करोड़ों लोगों की आस्‍था का केंद्र बाबा श्‍याम का आलौकिक मंदिर राजस्‍थान के शेखावाटी अंचल के सीकर के खाटूश्‍यामजी कस्‍बे में स्थित है. राजस्‍थान की राजधानी जयपुर से 80 किलोमीटर दूर और सीकर से 44 किलोमीटर में राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त खाटू श्याम जी का वार्षिक फाल्गुन मेला 27 फरवरी से सात मार्च तक खाटू में भरेगा.

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आबूरोड: गुजरात के गृहमंत्री प्रदीपसिंह जड़ेजा आबूरोड से सटे गुजरात के शक्तिपीठ अम्बाजी पहुंचे. मां अम्बा के दर्शन किए. गृह मंत्री ने मां अम्बे से प्रदेश को कोरोना मुक्त बनाने की कामना की. परिवार के साथ पहुंचे गृहमंत्री जड़ेजा का मंदिर के प्रशासनिक अधिकारी ने स्वागत किया. मंदिर में मां अम्बा की पूजा अर्चना व कपूर आरती के बाद माताजी की गादी पर दर्शन किए.

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मां अम्बा के दर्शन करने का मिला मौका: 
गृहमंत्री ने कहा कि कोरोना के चलते काफी लम्बे समय बाद मां अम्बा के दर्शन करने का मौका मिला है. हर वर्ष अम्बाजी में भरने वाले भादरवी पूनम के मेले में 30 लाख से अधिक श्रद्धालु आते है. इसी के चलते  मेले को लेकर मुख्यमंत्री ने 3 मंत्रियों की समिति गठित की है.

धार्मिक उत्सवों पर विचार विमर्श:
समिति द्वारा गुजरात में होने वाले धार्मिक उत्सवों पर विचार विमर्श कर निर्णय किया जाएगा. मेले में तीस लाख से अधिक लोगों के पहुंचने से इन लोगों की कोरोना संक्रमण से रक्षा के लिए सुरक्षा प्रबंध करना सरकार की प्राथमिकता है. 

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नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को केदारनाथ धाम में हो रहे विकास कार्यों की समीक्षा की. उन्होंने कहा कि बाबा केदारनाथ के दर्शन मात्र से करोड़ों श्रद्धालुओं को अपूर्व ऊर्जा मिलती है. पीएम मोदी ने कहा कि केदारनाथ धाम में तकनीक के द्वारा इस तीर्थ के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को दिखाया जाए.

पीएम मोदी ने किया ट्वीट:
विकास कार्यों की समीक्षा के बाद पीएम मोदी ने ट्वीट किया, पवित्र सावन मास में आज केदारनाथ धाम में हो रहे विकास कार्यों और धाम की दिव्यता को और बढ़ाने के लिए चल रहे प्रयासों की समीक्षा करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ.

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तीर्थ के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्त्व को दिखाया जाए:
पीएम मोदी ने सुझाव दिए कि यात्रियों को गौरीकुंड-केदारनाथ मार्ग पर सभी प्रकार की सुविधाएं मिलें और तकनीक के इस्तेमाल से तीर्थ के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्त्व को दिखाया जाए. उन्होंने कहा कि ऐसी व्यवस्थाएं विकसित हों, इनको लेकर भी विस्तृत समीक्षा की गई.

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से विकास कार्यों का जायजा
केदारनाथ में आई प्राकृतिक आपदा के बाद यहां पर बड़े पैमाने पर विकास कार्य और पौराणिक धरोहरों को सहेजने का कार्य हो रहा है. पीएम मोदी इन कार्यों की खुद निगरानी कर रहे हैं. इससे पहले 10 जून को पीएम मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए यहां हो रहे विकास कार्यों का जायजा लिया था.

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काठमांडू: नेपाल (Nepal) के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली (KP Sharma Oli) ने दावा किया कि भारत ने सांस्कृतिक अतिक्रमण के लिए नकली अयोध्या का निर्माण किया है. जबकि, असली अयोध्या नेपाल में है. ओली ने सवाल किया कि उस समय आधुनिक परिवहन के साधन और मोबाइल फोन (संचार) नहीं था तो राम जनकपुर तक कैसे आए? उन्होंने दावा किया कि लेकिन, हमने भारत में स्थित अयोध्या के राजकुमार को सीता नहीं दी. बल्कि नेपाल के अयोध्या के राजकुमार को दी थी. अयोध्या एक गांव हैं जो बीरगंज के थोड़ा पश्चिम में स्थित है. भारत में बनाया गया अयोध्या वास्तविक नहीं है. 

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वहीं ओपी की इस बेतुकी टिप्पणी पर वे अब घर में घिरते नजर आ रहे हैं. सोशल मीडिया पर ओली के इस बयान का मजाक किया जा रहा है, इसके साथ नेपाल के कई बड़े नेता भी इस टिप्पणी को लेकर आपत्ति जाहिर कर रहे हैं. इससे पहले भी नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी (NCP) पहले ही ओली को भारत विरोधी बयानों के लिए चेतावनी दे चुकी है. 

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वहीं नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री बाबू राम भट्टाराई ने ओली के बयान पर व्यंग्य करते हुए लिखा है कि आदि-कवि ओली द्वारा रचित कल युग की नई रामायण सुनिए, सीधे बैकुंठ धाम का यात्रा करिए.

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इस तरह के निराधार, अप्रमाणित बयानों से बचना चाहिए:
राष्ट्रीय प्रजातांत्री पार्टी के सह-अध्यक्ष कमल थापा ने ट्वीट कर कहा कि प्रधानमंत्री के लिए इस तरह के निराधार, अप्रमाणित बयानों से बचना चाहिए. थापा ने ट्वीट किया कि  ऐसा लग रहा है कि पीएम तनावों को हल करने के बजाय नेपाल-भारत संबंधों को और खराब करना चाहते हैं. सिर्फ कमल ही नहीं नेपाल राष्ट्रीय योजना आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष स्वर्णिम वागले ने चेतावनी दी कि भारतीय मीडिया पीएम के ऐसे बयान से विवादास्पद सुर्खियां बटोर सकता है और बना सकता है. 

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जोधपुर: आज सावन का दूसरा सोमवार है और शहर के मंदिरों में भगवान शिव की पूजा अर्चना का सिलसिला चल रहा है. हालांकि कोरोना के संक्रमण के चलते राज्य सरकार और केंद्र सरकार की ओर से मंदिर खोलने की अनुमति नहीं दी गई है, लेकिन कुछ मंदिरों में गिने चुने भक्त पहुंच रहे हैं. 

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शिव आराधना का सिलसिला जारी:
भक्तों ने बाबा भोले नाथ का दूध, दही, शहद, शक्कर और घी के पंचामृत से अभिषेक कर रहे हैं. वहीं कई मंदिरों में महिलाएं ओर युवतियां भी पहुंची और उन्होंने भगवान शिव की पूजा अर्चना कर मन्नत मांगी. मंदिर के पुजारियों ने बताया कि राज्य सरकार के निर्देश की पालना करते हुए शिव आराधना का सिलसिला जारी है.

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कोरोना खत्म करने की प्रार्थना की: 
उन्होंने कहा कि भगवान शिव का अभिषेक कर हमने देश से जल्द कोरोना की बीमारी समाप्त होने की प्रार्थना की है, साथ ही यहां आने वाले भक्तों को भी कोरोना के संक्रमण से बचाव के लिए दिए गए निर्देशों की पालना करवाते हुए पूजा-अर्चना करवाई जा रही है.

कोरोना संकट के बीच शुरू होगी बाबा बर्फानी की यात्रा, हर रोज 500 श्रद्धालु कर सकते है दर्शन

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नई दिल्ली: कोरोना संकट के बीच बाबा बर्फानी की जल्द यात्रा शुरू होने जा रही है, लेकिन इस बार 500 से ज्यादा श्रद्धालुओं को पवित्र गुफा में दर्शन करने की अनुमति नहीं ​दी जाएगी. प्रशासन ने बुधवार को यह जानकारी दी. बाबा बर्फानी की यात्रा 21 जुलाई से शुरू हो सकती है.जम्मू-कश्मीर में स्थित अमरनाथ गुफा मंदिर और वैष्णोदेवी मंदिर में श्रद्धालुओं को दर्शन देने की अनुमति के संबंध में एक उच्चस्तरीय बैठक में चर्चा की गई. 

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अमरनाथ यात्रा को लेकर चर्चा:
बैठक में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी, प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह और गृह मंत्रालय तथा जम्मू-कश्मीर प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया. एक अधिकारी ने बताया कि पहलगाम मार्ग हिमाच्छादित होने के कारण से अभी तक साफ नहीं है और इस वर्ष केवल बालटाल मार्ग से यात्रा हो सकती है. 

अगले सप्ताह हो सकता है निर्णय:
अधिकारी ने कहा कि अमरनाथ यात्रा को लेकर अंतिम निर्णय अगले सप्ताह लिया जा सकता है. उन्होंने कहा कि वैष्णोदेवी मंदिर के मामले में मंदिर तक तीर्थयात्रियों के जाने पर 31 जुलाई तक रोक लगा दी गई है. 

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सावन का पहला सोमवार आज, शिवालयों में गूंज रहे हर-हर महादेव के जयकारे

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जैसलमेर: आज से भगवान भोलेनाथ की भक्ति का पर्व सावन मास आज से शुरू हो गया है, लेकिन इस वर्ष कोरोना संकट के बीच भक्त अपने भगवान के दर्शन करने में काफी परेशान हो रहे हैं. इस बार कोरोना संक्रमण की वजह से प्रमुख मंदिर बंद है. कुछ मंदिरों में पुजारी और सीमित संख्या में भक्त भगवान शिव का अभिषेक कर रहे हैं. शहर के मोहल्लों में कुछ मंदिर खुले है जिसमे थोड़ी थोड़ी मात्रा  लोग पहुंच रहे हैं. बारी-बारी से श्रद्धालु दर्शन कर रहे हैं.

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ऊं नम: शिवाय के मंत्रोच्चार से शिवालय गूंज रहे: 
जैसलमेर शिव मार्ग स्थित देवचंद्रेश्वर मंदिर में हर सावन भव्य मेला भरता है लेकिन मंदिर इस बार सूना दिखाई दे रहा है. आस-पास के लोग भगवान शिव के दर्शन करने पहुंच रहे हैं. बील पत्र से पूजन करने व शिवलिंग को दुग्ध से नहलाने के लिए मंदिर पहुंच रहे हैं. साथ ही बोल बम ऊं नम: शिवाय के मंत्रोच्चार से शिवालय गूंज रहे हैं. जैसलमेर सहित आसपास के सभी शिवालयों में शिव पूजन चल रहा है. लेकिन कई आमजन जागरूक होकर दर्शन कर रहे हैं. मंदिरो में थोड़ी भीड़ है वहीं कई मंदिर के बंद होने से भक्त मायूस होकर लोट रहे हैं. 

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जयपुर: आज से भगवान शिव का प्रिय सावन मास शुरू हो गया है. हिंदू धर्म में सावन के महीने का खास महत्व माना जाता है. इस पूरे महीने में भगवान शिव की पूजा होती है. इस दौरान भगवान शिव की पूजा करके मनचाहा फल प्राप्त किया जा सकता है. इस मास भगवान शिव और पार्वती जी का मांगलिक मिलन हुआ. भोले नाथ का विवाह भी लोकमंगलकारी है. इसलिये सामाजिक सरोकार से भी विवाह को यही दर्ज़ा मिला है. परिवार चलता रहे. वंश परंपरा आगे बढ़ती रहे. भगवान का विवाह भी संकटकाल में हुआ. 

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सावन माह के पहले और आखिरी दिन सोमवार: 
इस बार सावन माह के पहले और आखिरी दिन सोमवार है. इसके साथ ही पांच सोमवार के साथ जबरदस्त संयोग भी बना है. लेकिन कोरोना काल के चलते इस बार शिवभक्त मंदिरों में जाकर भोले बाबा की पूजा नहीं कर पाएंगे. ऐसे में हम आपको घर पर रहकर ही शिव आराधना करने के बारे में बता रहे हैं....

- इस महीने सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहने. 

- पूजा स्थल पर अच्छी तरह से साफ-सफाई करके गंगाजल का छिड़काव करें.

- शिव पुराण पढ़े. संधिकाल अवश्य पढ़ें.

- शिव गायत्री की एक माला करें अन्यथा 3, 5, 7, 11, 13, 21 या 33 बार पढ़ें.

- संभव हो तो तीन बार रुद्राष्टक पढ़ ले. अथवा ॐ नमः शिवाय के मन्त्र से अंगन्यास करें. 

- भगवान शिव को 11 लोटे जल अर्पण करें. प्रयास करें कि यह पूरे सावन मास हो जाये. काले तिल,और दूध के साथ.

- यदि विल्व पत्र नहीं मिले तो एक जनेऊ अथवा तीन या पांच कमलगट्टे अर्पित कर दें.

- आसपास के शिवमंदिर में जल व दूध का अभिषेक कर चंदन का तिलक करें.

- शिव कथा व शिव चालीसा का पाठ कर, महादेव की आरती करें. 

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भरतपुर: कोरोना के खौफ ने परंपरागत पर्व गुरु पूर्णिमा का रंग पूरी तरह से फीका कर दिया है और हालात यह हो गए है कि आज जहां विभिन्न मंदिरों में धार्मिक आयोजन होने थे वहां सन्नाटा पसरा हुआ नजर आ रहा है. भरतपुर के पड़ोसी उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के गोवर्धन में आयोजित होने वाला मुड़िया पूनो मेला भी रद्द कर दिया गया है और आज तक के इतिहास मैं ऐसा पहली बार हो रहा है कि गुरु पूर्णिमा पर लगाई जाने वाली 7 कोस परिक्रमा मार्ग आज वीरान नजर आ रहा है.

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पूंछरी के लौठा गांव में छाई वीरानी:
गुरु पूर्णिमा के मौके पर गोवर्धन की परिक्रमा देने के लिए देश के दूरदराज इलाकों से करोड़ों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते थे, लेकिन कोरोना के खौफ के चलते परिक्रमा को स्थगित करना पड़ा है. गोवर्धन महाराज की परिक्रमा का लगभग डेढ़ किलोमीटर का हिस्सा राजस्थान में भी आता है और डीग तहसील के पूंछरी का लौठा गांव में भी आज वीरानी छाई हुई है.

विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम हुए रद्द:
श्रद्धालु गोवर्धन परिक्रमा देने तक नहीं पहुंचे इसके लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं और जगह-जगह पुलिस बैरिकेड लगाकर श्रद्धालुओं को वापस भेज रही है. गुरु पूर्णिमा के मौके पर पूरा ब्रज मंडल गिर्राज महाराज की जयकरों से गुंजायमान रहता था लेकिन कोरोना ने अन्य त्योहारों की तरह गुरु पूर्णिमा पर्व का भी मजा किरकिरा कर दिया है. भरतपुर शहर में गुरु पूर्णिमा के मौके पर नगर परिक्रमा का हर साल आयोजन होता था लेकिन आज नगर परिक्रमा भी रद्द कर दी गई है. भरतपुर शहर की सर्कुलर रोड पर जहां हजारों लोगों की भीड़ और सैकड़ों की संख्या में भंडारे आयोजित होते थे वह भी कही नजर नहीं आ रहे हैं.

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