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पाकिस्तान से विस्थापित 21 लोगों को मिली भारतीय नागरिकता, सर्टिफिकेट मिलने पर लगे भारत माता के नारे
पाकिस्तान से विस्थापित 21 लोगों को मिली भारतीय नागरिकता, सर्टिफिकेट मिलने पर लगे भारत माता के नारे

जयपुर: पाकिस्तान से विस्थापित 21 लोगों ने जयपुर में बुधवार को भारतीय नागरिकता मिलने की खुशी भारत माता की जय और वंदेमातरम के उद्घोष के साथ मनाई. जिला कलक्टर जगरूप सिंह यादव ने इन पाक विस्थापित लोगों को भारतीय गणतंत्र की नागरिकता के प्रमाण पत्र प्रदान किए. इनमें से कुछ इस दिन का 20 साल से इंतजार कर रहे थे. आखिर बुधवार को अधिकारिक रूप से भारत का नागरिक बनते ही उनकी खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा. 

21 लोगों के लिए बुधवार की रोज उगा सूरज नई रोशनी लेकर आया: 
बरसो पहले सरहद की कंटीली तार से उस पार से हिंदुस्तान की सरजमी को अपना सब कुछ मानकर यहां बसने वाले 21 लोगों के लिए बुधवार की रोज उगा सूरज नई रोशनी लेकर आया. जिला प्रशासन ने इनकी पेशानी पर शरणार्थी का तमगा हटाकर इन्हें भारतीय होने का गौरव प्रदान किया. भारतीय बनने वाले इन 21 लोगो की आंखे खुशी के अश्कों से भर आईं. 11 साल की प्रियांशी माहेश्वरी को जब भारतीय नागरिकता का प्रमाण पत्र मिला तो उसकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा. उसका कहना था की आगे चलकर बहुत अडचनों का सामना करना पड़ता था. अभी भी स्कूल एडमिशन में काफी परेशानी हुई. माता-पिता को पहले ही  भारतीय नागरिकता मिल चुकी है. कलक्टर जगरूप सिंह यादव के कार्यकाल में दो बार में 35 पाक विस्थापितों को भारतीय नागरिकता दी जा चुकी है. भारत की नागरिकता पाने वाले नागरिकों ने कहा कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर जुल्म ढाया जाता है. आखिरकार हमें अत्याचार से मुक्ति मिल गई और अब हम भारत माता की गोद में आजादी से सांस ले सकेंगे. भारत की नागरिकता मिलने के बाद अब हमारी जिंदगी में किसी तरह का कोई डर और भय नहीं है.

भारतीय नागरिकता का प्रमाण पत्र मिलने के साथ लोग झूमने लगे: 
21 पाक विस्थापितों को भारतीय नागरिकता का प्रमाण पत्र मिलने के साथ लोग झूमने लगे....नाचने लगे...ऐसा लगा जैसे पिंजरे से निकलकर आजाद पंछी उड़ रहा हो. सालों पहले पाकिस्थान से माता-पिता के साथ जयपुर आई दो बहनों का भी आज खुशी का ठिकाना नहीं रहा. हालांकि माता-पिता दोबारा पाकिस्तान चले गए. लेकिन दोनों बहनों ने यहीं सात फेरे ले लिए. एक बहन चंदाबाई को 14 अक्टूबर को भारतीय नागरिकता मिल चुकी है लेकिन आज जब दूसरी बहन निर्मलाबाई को भारतीय नागरिकता मिली तो दोनों बहनों ने गले लगकर इस खुशी का इजहार किया. निर्मलाबाई ने बताया की यहां बरसों तक रहने के बावजूद भी माथे पर शरणार्थी का तमगा रहा. सिंध से हिन्द में रहने के लिए पक्की छत तो मिल गई लेकिन एक हिंदुस्तानी को मिलने वाली तमाम सुविधाएं इनसे दूर ही थी. लेकिन आज हम एक आजाद पंछी की जिंदगी जी सकेंगे. सरकारों से नागरिकता के लिए लंबी लड़ाई लड़ने के बाद आज इंदूराम, रमेश, मुकेश, सिमित्री, अमिताभ, राजेश कुमार, नंदलाल, कविता, किशोर कुमार, मूली बाई, दिवानाजी, सुखी, निर्मलाबाई, प्रियांशी, विजय,नरेश,भागचंद,सोनिया, सांवलदास, मोना,नेमी को भारतीय नागरिकता मिली है. 

पाकिस्तान के सिंध से अपने परिवार के साथ भारत आए:
बहरहाल, पाकिस्तान के सिंध से वो अपने परिवार के साथ भारत आए. उनमें से ज्यादातर ने पाकिस्तान छोड़ते वक्त भारत में अपनी नई शुरुआत करने के लिए वहां अपना घर और बिजनेस बेच दिया. वो भारत में आम लोगों की जिंदगी से प्रभावित थे और यहां आकर नागरिकता के लिए आवेदन कर दिया. भारत में शरण लेने की प्रमुख वजह पाकिस्तान में अपराध की उच्च दर है. केवल इतना ही नहीं लगातार बढ़ते आतंकवाद के चलते पाकिस्तान के उनके मुस्लिम दोस्तों ने भी उन्हें भारत आने के लिए प्रेरित किया.

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