VIDEO: राजस्थान में बाघों के संरक्षण के लिए 3 अहम कदम उठाने की जरूरत, सरकार को दिखानी होगी जल्दबाजी

VIDEO: राजस्थान में बाघों के संरक्षण के लिए 3 अहम कदम उठाने की जरूरत, सरकार को दिखानी होगी जल्दबाजी

जयपुर: प्रदेश में बाघ संरक्षण को लेकर काफी समय से हो हल्ला हो रहा है. तीनों टाइगर रिजर्व बाघों की मौत से अछूते नहीं रहे हैं. मुकुंदरा की हालिया घटना ने तो बाघ संरक्षण पर सवालिया निशान ही लगा दिए हैं. ऐसे में जरूरत है तो नए टाइगर रिजर्व, लोकल एडवाइजरी कमिटीओं और मानद वन्यजीव प्रतिपालकों की नियुक्ति की. इस दिशा में सरकार को अब जल्दबाजी दिखानी होगी.  

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बाघों की मौत अब सियासी हलकों में सुलग रही:  
मुकुन्दरा में एक के बाद एक बाघों के मौत अब सियासी हलकों में सुलग रही है. उधर जांच जारी है, लेकिन वन्यजीव मामलों के एक्सपर्टस का मानना है कि सरकार यदि केवल तीन बातों को फोकस करके अपना एक्शन प्लान तैयार करती है तो राजस्थान में बाघों की किस्मत बदल सकती है. समस्याओं को हल करने का तरीका बड़ा सिंपल है पहले बड़ी समस्याओं का हल करो फिर छोटी-छोटी समस्याएं अपने आप हल होती चली जाएंगी. तो क्या केवल कुछ बातों को ठीक करके हम यदि राजस्थान में बाघों को अच्छा भविष्य दे सकते हैं तो इससे बड़ी कोई और बात नहीं हो सकती, क्योंकि अब बाघों की मौत पर केवल और केवल ट्वीट करने से काम नहीं चलेगा सरकार को बाघों की सेफ्टी एवं पुनर्वास के लिए एक मज़बूत एक्शन प्लान बनाना होगा. एक्सपर्ट्स का मानना है कि शुरुआत में तीन बातों पर फोकस कर हम एक्शन प्लान की शुरुआत कर सकते हैं.  तो आइए बताते हैं क्यों ज़रूरी है और क्या हैं वो तीन महत्वपूर्ण बातें...

*पहला* राजस्थान में जल्द से जल्द नए टाइगर रिज़र्वस की घोषणा हो. जिसमें कुंभलगढ़ रामगढ़ विषधारी और धौलपुर के जंगल सम्मलित हैं.  

*दूसरा* राजस्थान के सभी टाइगर रिज़र्व की लोकल एडवाइजरी कमेटियों को तुरंत प्रभाव से भंग कर पुनर्गठित किया जाए. इसमें ज़मीन से जुड़े एवं वन्यजीव मामलों के अनुभवी लोगों को सम्मिलित किया जाए. 

*तीसरा* राजस्थान के प्रत्येक जिले में जल्द से जल्द मानद वन्यजीव प्रतिपालकों की नियुक्तियां की जाएं. राजस्थान में फिलहाल 6 वर्षों से एक भी जिले में मानद वन्यजीव प्रतिपालक नहीं है. 

इन तीनों बातों को यदि ध्यान में रखकर एक्शन प्लान तैयार किया जाए तो राजस्थान में बाघों का भविष्य तय करने में कारगर सिद्ध होगा. बाघों की मौत से बेपटरी हुआ मुकुन्दरा भी फिर नई साँसें लेने लगेगा तो कुंभलगढ़ के टाइगर रिज़र्व घोषित होने से मेवाड़-मारवाड़ में पुनः बाघों को बसाने का सपना पूरा हो पायेगा. बाघों की नर्सरी कहे जाने वाले रामगढ़ विषधारी को पूर्ण टाइगर रिज़र्व का दर्जा मिलने पर यहाँ की कई समस्याओं का समाधान हो सकेगा, रणथंभौर से लेकर चित्तौड़ तक एक मज़बूत टाइगर कॉरिडोर डेवलप होगा, वहीं कुम्भलगढ़ के टाइगर रिज़र्व बनने से फुलवारी की नाल तक एक टाइगर कॉरिडोर डेवलप हो सकता है. 

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कई योग्य व्यक्तियों की भागीदारी भी इसमें सुनिश्चित की जाए: 
सभी टाइगर रिज़र्व की लोकल एडवाइजरी कमेटीयों का पुनर्गठन होना इसलिए भी ज़रूरी है कि कई योग्य व्यक्तियों की भागीदारी भी इसमें सुनिश्चित की जाए. साथ ही साथ प्रत्येक जिले में मानद वन्यजीव प्रतिपालकों की नियुक्तियों के साथ साथ जिला कलक्टर के अधीन पर्यावरण समितियों में एक एक वन्यजीव एक्सपर्ट की नियुक्ति की जाए.  जिससे वन्यजीव एवं पर्यावरण मामलों में और गंभीरता के साथ काम किया जा सके, क्योंकि अब ट्वीट करने से काम नहीं चलेगा यदि एक्शन प्लान बनाना है तो सबसे पहले एक्शन लेना होगा. 

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